महीना: मई 2013

मोटा आदमी ; मोटापा और आयुर्वेदिक निदान चिकित्सा ; Fatty person ; Obesity ; Obese personality ; Ayurvedic Treatment


CONTACT ; Dr D.B.B.ajpai, Ayurvedic Diagnostician and Inventor & Chief ETG AyurvedaScan Investigator, KANPUR Mobile; 09336238994

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आयुर्वेद के अनुसार शरीर का मोटापन और दुबलापन “रस” के कारण से होता है / जो लोग कफ कारक और क्षार रहित पदार्थ सेवन करते है ; एक भोजन के बिना पचे दूसरा भोजन कर लेते है, दिन रात सो कर या बैठ कर गुजारते हैं ; मेहनत नही करते और दिन में सोया करते हैं – ऐसे लोग मोटे हो जाते हैं /

लेकिन मोटापा होने के यही कारण नही गिनाये जा सकते, इसके अलावा भी और दूसरे कारण है,. जिनसे मॊटापा बढता है /

भारी भोजन, शीतल पदार्थ के खाने, तले भुने तेलीय या चर्बी युक्त भोजन के करने, मेहनत का काम न करने , स्त्री के साथ सम्भोग न करने , चिन्ता फिक्र न करने , पैत्रक स्वभाव के कारण , कुछ केमिकल युक्त दवाओं के खाने के विपरीत परिणामॊं तथा अन्य कारणों से मोटापा बढता है /

आयुर्वेद के मत से बहुत मोटा होना और बहुत दुबला पतला होना दोनों ही स्थितियों को अच्छा नही समझा जाता है / अभुत मोटे आदमी का जीवन जैसा कि कहा जाता है कि सम्पूर्ण नही होता है और उसे असमय मे ही बुढापे जैसी स्तिथि का समना करना होता है अथवा बुढापा घेर लेता है / आयुर्वेद कहता है कि मोटे आदमी के शारीरिक श्रोत रुक्ने लगते है / स्त्री के साथ सम्भोग करने मे तकलीफ होती है तथा कमजोरी, बदबू, पसीना, बहुत भूख और प्यास जैसे लक्षण हो जाते है /

शरीर की चर्बी बराबर बढती रहती है और इस प्रकार वात , पित्त तथा कफ के अनेक रोग पैदा करके असाध्य रोगों की नीव पडने का खतरा बन जाता है / मेद और मान्स के बढने से पेट, hips और mammery glands लटकने लग जाते है और चलते समय हिलते दुलते रहते हैं /

मॊटे आदमी या मेदस्वी व्यक्ति की केवल शारीरिक चर्बी ही बढती है / इस चर्बी के बढने के साथ साथ ही मान्स भी बढता है / लेकिन शरीर की दूसरी धातुयें नही बढती है / इसीलिये मोटे आदमी की आयु अधिकतर सम्पूर्ण १०० साल के लक्ष्य को नही प्राप्त होती है / शरीर की शिथिलिता, सुकुमारता, भारीपन आदि से मोटे व्यक्ति को बुढापा जल्दी घेरता है ऐसा देखा गया है /

शरीर के श्रोत अधिक वायु और चर्बी के कारण से रुकते हैं / उसे अधिक चर्बी होने के कारण स्त्री या पुरूष के साथ सम्भोग करने में तकलीफ होती है / कमजोरी , शरीर से निकलने वाली बदबू, पसीना , अधिक भूख और अधिक प्यास – ऐसे लक्षण होते हैओं / चर्बी अधिक बढ जाती है जिसके कारण त्रिदोष यानी वात पित्त कफ जैसे दोषॊं की तकलीफे हो जाती है और असाध्य रोगों को जन्म देती हैं /

मोटे आदमी को क्षुद्र श्वास, प्यास, क्षुधा, निद्रा, शरीर में बदबू, कन्ठ में घर घर शब्द निकलना , अन्गों में थकान आना जैसी व्याधियां घेर लेती हैं / मेद की अधिकता के कारण मोटा आदम,ई सभी कामों मे अशक्त रहता है / शुक्र मार्ग रुकने या कमजोर होने से बहुत थोड़ा सा ही मैथुन कर पाता है / कफ और मेद से शरीर के दूसरे स्रोत भी रुकते है जिससे अस्थि , मज्जा और शुक्र धातुओ का क्षरण होता है और यह धातुये बढ़ नही पाती हैं /

लिखने का यह तात्पर्य है कि बहुत मोटा आदमी रोग के मामले में बहुत sensitive होते हैं और उनको असमय ही ऐसे रोग घेर लेते हैं जिन्हे असाध्य रोग कहते है /

इसलिये प्रत्येक मनुष्य को ऐसे उपाय करते रहना चाहिये कि शरीर का गठन बीच की अवस्था का बना रहे अर्थात न तो अधिक मोटा हो और न अधिक दुबला पतला / चिकित्सक को चाहिये कि रोगी को “कर्षण” चिकित्सा द्वारा दुर्बल करने का उपाय करे / चरक का निर्देश है कि लन्घन और ब्रन्हण विधि को अपना कर मोटे रोगी का मोटापा दूर करने के लिये चिकित्सा करे /

आयुर्वेद शास्त्रों में मोटापा कम करने के लिये भुत से निर्देश दिये गये हैं / जिन्हे किसी योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के सलाह के साथ उपयोग करना चाहिये / चरक सम्हिता मे बताया गया है कि मोटापा दूर करने के लिये वात नाशक, कफ मेद हारक अन्न पान , रूखे उबटन, गिलोय और भद्र मोथा का काढा, त्रिफले का काढा, छाछ, वाय विडन्ग, सोन्ठ, जवाखार, मधु, जौ, आमलों का चूर्ण, ऐसे सभी द्रव्य , मॊटापा का नाश करने के लिये हितकारी है /

जिन्हे मॊटापा नष्ट करना हो वह, जागरण, मैथुन, चिन्ता और परिश्रम करना शुरू करे और इसे धीरे धीरे बढायें /

आधुनिक चिकित्सा शास्त्र के अध्ध्यन के साथ आयुर्वेद के समन्वयन और ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक की फाइन्डिन्ग्स ्की मदद से पता चला है कि कई लोगों को मोटापा शरीर की मान्सपेशियों में जल के अधिक retention के कारण होता है / इसे आयुर्वेद की नयी तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के निदान द्वारा आविष्कृत किया गया है जिसे हाईड्रोमस्कुलोसिस Hydro-musculosis अथवा सजल पेशी जन्य विकार का नाम दिया गया है /

Hydro-musculosis के सभी रोगी आयुर्वेद की चिकित्सा करने से शत प्रतिशत ठीक हो जाते है और उनके बढा हुआ वजन कई कई किलो कम हो जाते हैं /

मेद रोगी यदि ETG AyurvedaScan विधि का सहारा लेकर इलाज करते है तो त्रिआयामी निदान Three dimensional Diagnosis करके जब आयुर्वेद की चिकित्सा की जाती है तो अवश्य वजन घटता है /

पन्चकर्म से भी मेद रोग की चिकित्सा की जाती है / केवआयुर्वेद मे ही मेद रोग की चिकित्सा का सही और सटीक इलाज है /

Homoeopathy Whole body scanning now available at our research center ; E.H.G. HomoeopathyScan in report forms, with Human body systemwise evaluation and Do and don’ts and Repertorial analysis etc


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Last Page of the EHG HomoeopathyScan Report

Electro Homoeo Graphy ; EHG HomoeopathyScan examination is now available commercially at our research center.

The report is consists of 12 pages , which includes the diagnosis and intesity of the presence of Homoeopathic principles and disease presence.

A repertorial analysis is also provided with the suggestive medicine and potency of the remedy.

A systemwise human body evaluation is provided to help the homoeopathic physician, which part is affected and in how much intensity.

Besides this patient’s condition measurement are provided like Blood pressure, Spo2, Pulse, temperature and many more physical, Blood and Urine etc. examinations including Ayush Heamo Meter and Ayush Universal Analyser meter results to confirm and establish the correct diagnosis of disorders and disease conditions for confirmation of correct choice of remedy in most and hi-tek scientific way.

EHG Homoeopathy Scan is prooved itself a new tool for the Homoeopathic evidence based practice, which is a mechanical system and a foolproof device for Homoeopaths to practice Homoeopathy in most scientific way.

Apis mel 30 potency , a Homoeopathic remedy , cured the puffyness and swelling of face


incurable disease condition
A female child, aged 6 and half years came for treatment of her severe puffiness and swelling of face, in which her eyes were closed and swelling covered almost her complete face. Her mother could not describe . what happened with her and could not tell the exact reason of the problem.

I prescribed homoeopathic remedy for her because I thought that Homoeopathy in this case help her lot and she will not take Ayurvedic pills orally and will cause problem to her parents.

I selected APIS MEL in 30 potency and advise her parent to repeat the medication 4 hourly.

I have taken pictures of the child time to time for record purposes.
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The above photo is taken after one day of treatment passed using APIS MEL in 30 potency.
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The above photo is taken on second day of the use of APIS MEL 30 potency.

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The above photo is taken on the third day of APIS MEL treatment.
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The above photo is taken on the fourth day of the homoeopathic treatment.

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The above photo is taken on fifth day of the homoeopathic treatment.

In fact, the Homoeopathic remedy APIS MEL is prepared using Honey Bee as raw material and alcoholic mother tincture is prepared according to the Homoeopathic Pharmacopea directions. Every body knows that when Honey Bee bites, which type of swelling appeared in the bite area and the feelings amd sensations during the bite and symptoms appeared in the whole body after some time. Homoeopathy science is based on these sympatomatology which appeares in whole body, like Honey Bee bites syndromes.

Hense the Apis mel is used in the similar physical and mental conditions which are found in Kidney failure, nephritis, cardiac disorders,Brain inflamation, encephalitis, Ascites, Psychological disorders, madness, prostatitis, burning sensations in any part of the body and numbers od disorders so on.

The drug picture of APIS MEL is very interesting and can be seen in Homoeopathic materia medica.

AYUSH HEAMATOLOGICAL METER ; First ever Ayurvedic Medical science pathological condition examination machine for status quantification of AYURVEDIC and Homoeopathic Principals with dietary directives ;आयुष हीमैटोलाजिकल मीटर ; आयुर्वेद की एक नई खोज ; रक्त के एक बून्द नमूने से वात पित्त कफ त्रिदोष की intensity level का ग्यान


पिछले ४५ वर्षों से आयुर्वेद की रिसर्च फील्ड में काम कर रहे ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के जन्म दाता , the Father of ETG AyurvedaScan Dr. D.B.Bajpai डा० डी०बी०बाजपेयी ने एक इलेक्ट्रानिक मीटर रीडर तैयार करके मरीज की किसी भी उन्गली या शरीर के किसी भी हिस्से से रक्त की एक बून्द लेकर आयुर्वेद के त्रिदोष वात पित्त कफ की intensity level presence का पता करने का तरीका खोज लिया है जो बहुत ही सरल परीक्षण है और क्लीनिक में बहुत सरलता के साथ किया जा सकता है /

इस मीटर के द्वारा
१- आयुर्वेद के त्रिदोष की शरीर में कितनी उपस्तिथि है , यह पता चल जाता है
२- इन्टेन्सिटी लेवल के अनुसार मरीज को पथ्य परहेज कराने में बहत सटीक और सही सलाह दी जा सकती है
३- मरीज को किस किस्म का भोजन अनुकूल रहेगा यह बताया जा सकता है

अभी यह तकनीक हमारे रिसर्च सेन्टर मे ETG AyurvedaScan के परीक्षण के साथ ही सभी आने वाले मरीजों को उपलब्ध करा दी गयी है और अब यह सार्वजनिक उपयोग के लिये है /

इसी इलेक्टरानिक मीटर द्वारा Homoeopathic Principles यथा Psora, Sycosis और Syphilis का intensity level का पता करने का तौर तरीका भी develop हो गया है, इसलिये होम्योपैथी के डाक्टर भी इस विधि का उपयोग भविष्य में चिकित्सा कार्य के लिये कर सकेन्गे /

Since 45 years working in the field of research in Ayurvedic medical science, the father of Electro tridosha graphy ; E.T.G. AyurvedaScan Dr D.B.Bajpai have invented another technique for finding the status quntification of a sick person patient’s Tridosha, an Ayurvedic principle by one drop of Blood taken from any part of the body. The machine is named AYUSH HEAMATOLOGICAL ANALYSER.

To test the blood Ayurvedically , it takes a few miutes for the results.The parameters are set up by the long examination experience of the patient with their history. Infact the machine is developed specially by Dr Bajpai to counter check the findings of the ETG Ayurvedic scan relevent data.

With the machine results, patient can be directed well , what he should include in his/ her diet, which can help to eradicate the disease condition.
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Hand made chemically impregnated strips are used for testing purposes, most of the chemicals are mentioned in the Ayurveda classic book RAS TARANGINI. Changes have been done for ease of the use and adoption. The test are helpful to recognise the TRIDOSHA intensity and estimation by blood sample. The diet can be adjusted for patient time to time and the type of ayurvedic drugs can be suggested well accordingly.

The new invention will certainly boost the Ayurveda on Pathological examination lines.

A specimen of the BLOOD EXAMINATION report is given below.
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