दिन: मई 30, 2013

मोटा आदमी ; मोटापा और आयुर्वेदिक निदान चिकित्सा ; Fatty person ; Obesity ; Obese personality ; Ayurvedic Treatment


CONTACT ; Dr D.B.B.ajpai, Ayurvedic Diagnostician and Inventor & Chief ETG AyurvedaScan Investigator, KANPUR Mobile; 09336238994

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आयुर्वेद के अनुसार शरीर का मोटापन और दुबलापन “रस” के कारण से होता है / जो लोग कफ कारक और क्षार रहित पदार्थ सेवन करते है ; एक भोजन के बिना पचे दूसरा भोजन कर लेते है, दिन रात सो कर या बैठ कर गुजारते हैं ; मेहनत नही करते और दिन में सोया करते हैं – ऐसे लोग मोटे हो जाते हैं /

लेकिन मोटापा होने के यही कारण नही गिनाये जा सकते, इसके अलावा भी और दूसरे कारण है,. जिनसे मॊटापा बढता है /

भारी भोजन, शीतल पदार्थ के खाने, तले भुने तेलीय या चर्बी युक्त भोजन के करने, मेहनत का काम न करने , स्त्री के साथ सम्भोग न करने , चिन्ता फिक्र न करने , पैत्रक स्वभाव के कारण , कुछ केमिकल युक्त दवाओं के खाने के विपरीत परिणामॊं तथा अन्य कारणों से मोटापा बढता है /

आयुर्वेद के मत से बहुत मोटा होना और बहुत दुबला पतला होना दोनों ही स्थितियों को अच्छा नही समझा जाता है / अभुत मोटे आदमी का जीवन जैसा कि कहा जाता है कि सम्पूर्ण नही होता है और उसे असमय मे ही बुढापे जैसी स्तिथि का समना करना होता है अथवा बुढापा घेर लेता है / आयुर्वेद कहता है कि मोटे आदमी के शारीरिक श्रोत रुक्ने लगते है / स्त्री के साथ सम्भोग करने मे तकलीफ होती है तथा कमजोरी, बदबू, पसीना, बहुत भूख और प्यास जैसे लक्षण हो जाते है /

शरीर की चर्बी बराबर बढती रहती है और इस प्रकार वात , पित्त तथा कफ के अनेक रोग पैदा करके असाध्य रोगों की नीव पडने का खतरा बन जाता है / मेद और मान्स के बढने से पेट, hips और mammery glands लटकने लग जाते है और चलते समय हिलते दुलते रहते हैं /

मॊटे आदमी या मेदस्वी व्यक्ति की केवल शारीरिक चर्बी ही बढती है / इस चर्बी के बढने के साथ साथ ही मान्स भी बढता है / लेकिन शरीर की दूसरी धातुयें नही बढती है / इसीलिये मोटे आदमी की आयु अधिकतर सम्पूर्ण १०० साल के लक्ष्य को नही प्राप्त होती है / शरीर की शिथिलिता, सुकुमारता, भारीपन आदि से मोटे व्यक्ति को बुढापा जल्दी घेरता है ऐसा देखा गया है /

शरीर के श्रोत अधिक वायु और चर्बी के कारण से रुकते हैं / उसे अधिक चर्बी होने के कारण स्त्री या पुरूष के साथ सम्भोग करने में तकलीफ होती है / कमजोरी , शरीर से निकलने वाली बदबू, पसीना , अधिक भूख और अधिक प्यास – ऐसे लक्षण होते हैओं / चर्बी अधिक बढ जाती है जिसके कारण त्रिदोष यानी वात पित्त कफ जैसे दोषॊं की तकलीफे हो जाती है और असाध्य रोगों को जन्म देती हैं /

मोटे आदमी को क्षुद्र श्वास, प्यास, क्षुधा, निद्रा, शरीर में बदबू, कन्ठ में घर घर शब्द निकलना , अन्गों में थकान आना जैसी व्याधियां घेर लेती हैं / मेद की अधिकता के कारण मोटा आदम,ई सभी कामों मे अशक्त रहता है / शुक्र मार्ग रुकने या कमजोर होने से बहुत थोड़ा सा ही मैथुन कर पाता है / कफ और मेद से शरीर के दूसरे स्रोत भी रुकते है जिससे अस्थि , मज्जा और शुक्र धातुओ का क्षरण होता है और यह धातुये बढ़ नही पाती हैं /

लिखने का यह तात्पर्य है कि बहुत मोटा आदमी रोग के मामले में बहुत sensitive होते हैं और उनको असमय ही ऐसे रोग घेर लेते हैं जिन्हे असाध्य रोग कहते है /

इसलिये प्रत्येक मनुष्य को ऐसे उपाय करते रहना चाहिये कि शरीर का गठन बीच की अवस्था का बना रहे अर्थात न तो अधिक मोटा हो और न अधिक दुबला पतला / चिकित्सक को चाहिये कि रोगी को “कर्षण” चिकित्सा द्वारा दुर्बल करने का उपाय करे / चरक का निर्देश है कि लन्घन और ब्रन्हण विधि को अपना कर मोटे रोगी का मोटापा दूर करने के लिये चिकित्सा करे /

आयुर्वेद शास्त्रों में मोटापा कम करने के लिये भुत से निर्देश दिये गये हैं / जिन्हे किसी योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के सलाह के साथ उपयोग करना चाहिये / चरक सम्हिता मे बताया गया है कि मोटापा दूर करने के लिये वात नाशक, कफ मेद हारक अन्न पान , रूखे उबटन, गिलोय और भद्र मोथा का काढा, त्रिफले का काढा, छाछ, वाय विडन्ग, सोन्ठ, जवाखार, मधु, जौ, आमलों का चूर्ण, ऐसे सभी द्रव्य , मॊटापा का नाश करने के लिये हितकारी है /

जिन्हे मॊटापा नष्ट करना हो वह, जागरण, मैथुन, चिन्ता और परिश्रम करना शुरू करे और इसे धीरे धीरे बढायें /

आधुनिक चिकित्सा शास्त्र के अध्ध्यन के साथ आयुर्वेद के समन्वयन और ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक की फाइन्डिन्ग्स ्की मदद से पता चला है कि कई लोगों को मोटापा शरीर की मान्सपेशियों में जल के अधिक retention के कारण होता है / इसे आयुर्वेद की नयी तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के निदान द्वारा आविष्कृत किया गया है जिसे हाईड्रोमस्कुलोसिस Hydro-musculosis अथवा सजल पेशी जन्य विकार का नाम दिया गया है /

Hydro-musculosis के सभी रोगी आयुर्वेद की चिकित्सा करने से शत प्रतिशत ठीक हो जाते है और उनके बढा हुआ वजन कई कई किलो कम हो जाते हैं /

मेद रोगी यदि ETG AyurvedaScan विधि का सहारा लेकर इलाज करते है तो त्रिआयामी निदान Three dimensional Diagnosis करके जब आयुर्वेद की चिकित्सा की जाती है तो अवश्य वजन घटता है /

पन्चकर्म से भी मेद रोग की चिकित्सा की जाती है / केवआयुर्वेद मे ही मेद रोग की चिकित्सा का सही और सटीक इलाज है /

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