महीना: जून 2013

Doctor’s Day ; Ist July 2013 ; Why not all recognised medical system’s medicaments could be used for benefiting to patient ?


Every year on !st July in India , Doctors welcome and celebrate DOCTOR’S DAY in memory of Dr. B.C. Roy of West Bengal, an eminent Physician and Surgeon and ex Chief Minister of West Bengal State, a legendry one, who served the people by his soul and heart.

Now I have almost completed 50 years in medical practice and when I see an imaginery back look to past, I find many many changes in medical system, which have never been imagined before 50 years.

I started my practice with Allopathic medicines. Being a graduate of Ayurveda and Homoeopathy, seeing the lure and glamour of ALLOPATHY, I choose Allopathy for practice. The Uttar Pradesh Government had passed a G.O. for using Allopathic medicines by Ayurvedicians in limited manner. Therefore I was having opportunity to use Allopathic remedies. My Father was practicing AYURVEDA and HOMOEOPATHY simultaneously, which I see and observe in compare to Allopathic medications , which I give to my patient.

I have many Allopathic practitioner’s friends, I discuss about the cure of disorders. I practiced Allopathy about 4 years, but was unsatisfied with the practice, as comparatively I see in Ayurveda and Homoeopathy. In 1973, I went to Munich, Germany for study of Homoeopathy.

I was studying Homoeopathy in Munich , Germany in Krankenhaus fuer Naturheilwiessen, Harlaching. Dr Med Walther Zimmermann was Chefartz [ Chief Medical Officer] In this Hospital. It was a highly sofisticated facility providing Hospital and medical service to sick persons, comming from every corner of Germany [ Deutchland], where pre fix consultation was necessary.

I and Dr Abbe, Dr Schimmel, Dr Klostermein, Dr Frankestien and few others was in my batch, including me some others belongs to European countries. To my surprise, when it came to my notice that all the students of my batch are M.D. [Doctor of Medicine] in Allopathy [Modern Western Medicine and Surgery] and came to this Hospital for studying Homoeopathy as “speciality medicine”. European M.D. Degree is far differ to Indian M.D.

European M.D. holder completes his courses in 7 and half years at that time. [ If there is any changes now, I can not say] A Doctor is well experts in Medicine and Surgery both. All the students studies Homoeopathy with Allopathic pathological investigation like X-ray, ECG and pathological findings. I was heard that Siemens , Munich, Germany have launched an Ultrasound machine for diagnosis at that time. I went to see this machine some where in University Hospital.

When I came back India, I converted my parctice from Allopathy to Homoeopathy and this practice is continue. Dr Abbe , who was my collegue in Germany, studying with me Electro Cardio Graphy and Roentegen [ X-ray is called Roentegen in Germany] with other pathological examinations done at the hospital necessary for the patient indoor and outdoor both.

Dr Abbe always read cardiogramm traces with me ,using measuring devices fo recorded traces and interpreted immidiately , whether the patient is having any cardiac problem or not. X-ray examination immediately interpreted by the senier doctors of the Hospital and collaboratively shares the interpretation.

This was the first introduction of ECG machine and on work with the machine , done by me in Germany. Later when I came back I tried to bring the machine, but it was a very very difficult task at that period. Afet comming back from Germany, I tried too much for arranging an ECG machine, but I failed, because at that time , it was costilier item for doctors.

Later years I arranged an ECG machine and worked on it. The Idea of quantification of the status of Ayurvedic Fundamentals Prakrati, TRIDOSHA etc came after that, which I have naraated several post in this blog.

After invention of ETG AyurvedaScan technology, I adopted Ayurveda practice and now I practice Ayurveda, Unani, Homoeopathy and Allopathy [ a little bit for patient relief and not full fledge treatment] simultaneously, because ETG AyurvedaScan provides comprehensive data of whole body and in three dimensions.

I am treating INCURABLE DISEASE CONDITIONS / Undiagnosed disease conditions successfully with the help of ETG AyurvedaScan findings. Anybody should not be confused with the last stages or before last stages of diseases conditions, which are not treatable, with my this statement. Fourth stages and badly maltreated cases by Surgical interventions are not taken by me for treatment purposes.

Use of all system’s medicaments can be helpful to Patient. The great benefit is to physician, that he will get an every level and intensity level medicines for the selection to avoid any future anomalies to patient as it is happening with the side effects of Allopathic medicines. I have good experience of using Allopathic medicaments in case of severe painful conditions, Higher temperature, Infection [ Some times Viral and Bacterial infection is not controlled by Ayurvedic and Homoeopathic medicines. Fungal and parasytic infection can be controlled by Ayurveda and Homoeopathy medicaments], in Emergent conditions [ some condtitons can well responded by Homoeopathic and Ayurvedic medicines ] and much more.

Infact, the use of medicine is depending upon the caliber of Physician, who is tackling the patient and how physician percieves the ailing condition.

लाइलाज बीमारियों के इलाज के लिये आयुष चिकित्सा अपनाना सबसे बेहतर विकल्प ; ayush alternative treatment for incurable disease conditions

incurable disease condition
आयुष AYUSH से मतलब उन पान्च चिकित्सा पध्ध्तियों से जिनको निम्न नाम से जाना जाता है ;

1- A for Ayurveda
2- Y for Yoga and Nature-cure
3- U for Unani system of medicine
4- S for Sidhdha , Sidhdha is practising in South India and similar to Ayurveda
5- H for Homoeopathy system of medicine

जब आयुष शब्द का उपयोग लेख मे किया जाता है तो इसका मतलब यह समझना चाहिये कि जिस बीमारी के इलाज के लिये उल्लेख किया जा रहा है और उसके बारे मे आयुष चिकित्सा कराने के लिये कहा जा रहा है तो इसका यही अर्थ है कि बतायी गयी बीमारी का इलाज “आयुष चिकित्सा विधियों द्वारा समभव” है / यदि आयुष चिकित्सा की जायेगी तो फायदा अवश्य होगा और बीमारी अवश्य ठीक होगी /

आधुनिक चिकित्साव विग्यान में यानी एलोपैथी मे ऐसी बहुत सी बीमारियआं है जिनका कोई इलाज नही है / एलोपैथी के चिकित्सक एलोपैथी चिकित्साव िग्यान से प्राप्त गयान के आधार पर और अपने अनुभव के आधार पर जो समझते है वही कहते है / उनको दूसरे चिकित्सा विग्यान के बारे मे अधिकान्श्त: जानकारी नही होती है / मुझे काफी सन्ख्या मे
ऐसे एलोपैथ डाक्टर मिले है जिनको Ayurveda, Homoeopathy, Unani और Nature-cure के बारेमे बहुत गहरा अध्ध्यन और जानकारी रही है /मेरे एलोपैथिक चिकित्सा करने वाले बहुत से मित्र है, जिनके परिवार मे आयुर्वेद तथा होम्योपैथी की चिकित्सा करने का खनदानी रिवाज रहा है / इन आयुष चिकित्सा के बारे मे जानकारी रखने वाले एलोपैथी डाक्टर बहुत ईमान दारी के साथ अपने मरीजों को सलाह देते थे कि इस बीमारी का इलाज होम्योपैथी अथवा आयुर्वेद अथवा यूनानी चिकित्सा मे है या इसका प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार कराइये क्योंकि जिस बीमारी के इलाज के लिये मरीज उनके पास आया है , उसका इलाज उनके पास नही है /

आज हालात बदल गये है / पहले डाक्टर फैमिली फिजीशियन समझा जाता था और जिस परिवार से वह जुडे होते थे , उस परिवार के मरीज डाक्टर कोअ अपने परिवार का अन्ग समझ्ते थे / डाक्टर भी ऐसे म्रीजों को अपना पारिवारिक जन जैसा अमझते थे / समय बदल गया, मान्यताये बदल गयी , समझ बदल गयी , सोच बदल गयी / आज मरीज को डाकटर मरीज नही समझता , उसे डाक्टर एक ग्राहक समझता है / पहले चिकित्सा व्यवसाय एक प्रकार की समाज सेवा समझी जाती थी, आज चिकित्सा कार्य एक तरह का व्यव्साय बन गया है / जहां व्यवसाय जैसी अवस्था पैदा हो जाती है वहं पैसा सबसे पहले आकर झान्कने लगता है / आज यही हो रहा है / डाक्टर का पेशा अब सबसे पहले पैसा पैदा करने का व्यापार बन चुका है /

यही कारण है कि डाक्टर सोचता है कि ग्राहक आया है तो मै इसको क्यों दूसरे पास भेज कर अपनी द्कान्दारी का नुकसान करूं / बीमारी का इलाज जितना लम्बा खिचेगा , उतनी ही उनकी जेब भरेगी और आमदनी होगी / आखिर उन्होने लाखों रुपये खर्च करके और कई साल बर्बाद करके इस मुकाम पर पहुचे हैं तो क्यों न ज्यादा से ज्यादा आमदनी की जाय / मरीज अच्छा हो तो ठीक और न अच्छा हो तो ठीक / डाक्टर से मरीज ठीक हो गया तो वाह वाह , नही ठीक हुआ तो डाक्टर लाइलाज बीमारी बताकर मरीज को बीमार बनाये रखेगा और कहेगा कि ऐसी बीमारी का कोई इलाज नही है / बहुत से डाक्टर मरीज से पीछा छुड़ाने के लिये कहते हैं कि आपका आपरेशन करना पडे़गा और दिल या गुर्दा या कमर या जोड़ बदलना पड़ेगा और इसमे इतने लाख खर्च हो जायेन्गे / यह इलाज कराकर आप बिल्कुल ठीक हो जायेन्गे /

जो आपरेशन से डर गये या आप्रेशन का खर्चा उठाने मे नाकाम्याब रहे या उनके पास इतना पैसा ही नही है कि वे आप्रेशन कर सके वे अपनी बीमारी के इलाज के लिये इधर उधर भटकते रहे / जिन्के पास पैसा है, वे आप्रेशन कराकर और अधिक बीमार हो गये / आप्रेशन से पहले चल फिर भी लेते थे, आपरेशन के बाद खटिया या बिस्तरा पकड़ लिया और फिर सारी जिन्दगी इसी तरह से जीना होता रहा /

ऐसे मरीजों को इस बात का ग्यान ही नही था कि जिन बीमारियों के इलाज के लिये वे वषों तक इलाज करते रहे , वास्तव मे उन बीमारियों का सही और सटीक इलाज आयुष चिकित्सा विधियों मे रहा है / कोई सही राह बताने वाला इन मरीजों को मिला ही नही / लिहाजा ऐसे मरीज गलत इलाज होने के कारण अपहिज हुये, या जिन्दगी भर के लिये तकलीफ भोगने को मज्बूर हुये या फिर इस दुनिया को आखिरी प्रणाम कहकर बिदा हो गये /

जिनको किसी सही आदमी ने आयुष चिकित्सा के बारे मे बताया और जिन मरीजों ने आयुष चिकित्सा की वे बहुत आराम से , सुगमता से या कुछ तकलीफ के साथ अपना पूर्ण जीवन निर्वाह करते रहे हैं / ऐसे मरीजों की जिन्दगी लम्बे समय तक चली /

इसलिये लोगों को समझना चाहिये और दूसरों को नैतिक जिम्मेदारी समझते हुये लाइलाज बीमारियों से जूझ रहे लोगों को आयुष चिकित्सा के बारे मे बताना चाहिये कि जिसे लाइलाज बीमारी कह दिया गया है , वास्तव मे ऐसी बीमारियों का बहुत सटीक और अचूक और सुगम इलाज आयुष चिकित्सा में मौजूद है , आज जरूरत इस बात की है यह सन्देश देश के हर व्यक्ति के पास पहुचना चाहिये ताकि जानकारी के अभाव में कोई अकाल काल-ग्रस्त न हो /

आज आयुर्वेद के पास रोगों के निदान ग्यान और सारे शरीर के आयुर्वेद आधारित वैग्यानिक परीक्शण करने की आधुनिक मशीनों द्वारा ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन जान्च करने की सुविधा उपलब्ध है / आयुष हीमों मीटर द्वारा रक्त की जान्च और मूत्र परीक्षा द्वारा परीक्षण की विधियां विकसित की जा चुकी है / अब आधुनिक आयुर्वेद की इन खोजों के द्वारा प्राप्त आन्कड़ॊ पर आधारित आयुर्वेद का इलाज करने से लाइलाज कही जाने वाली बीमारियों का और कठिन कठिन बीमारियों का इलाज चाहे उसका कोई भी नाम दिया गया हो, उसका इलाज सम्भव है /