त्रिक स्थान का वर्णन ; आयुर्वेद आबन्टित शरीर के हिस्से का विवेचन ; Trik sthan ; Ayurveda evaluation


आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान मे शरीर के विभिन्न अन्गो और प्रत्यन्गों का वर्णन और उनका कार्य और उनकी विकृति का वर्णन आज से हजारों साल पहले आयुर्वेद के मनीषियों ने किया था / आयुर्वेद के ग्रन्थों का अध्ध्य्यन करने के बाद यह विचार अधिक पुख्ता हो जाता है कि उस समय जब आयुर्वेद के पास साधन नही थे तब उस साधन विहीन स्तिथि मे आयुर्वेद के महान चिकित्सकों और चिकित्सकों के समूह ने किस प्रकार Anatomy और Physiology का अध्ध्य्यन अपने सीमित साधनों द्वारा किया हुआ होगा / यह विचार करके बहुत ताज्जुब होता है और यह है भी आश्चर्य की बात कि किस तरह से मानव मृत शरीर का विच्छेदन और उसके अन्गों प्रतयन्गों का अध्ध्य्यन जिस तरह से किया जाता रहा है , वह आज के समय के सन्दर्भ में बहुत अनूठा और चमत्कारिक लगता है /

सुश्रुत सन्हिता में मानव शरीर की बनावट के अध्ध्य्यन के लिये मृत शरीर को किस प्रकार से छेदन करके उसका अध्धय्न करना चाहिये , यह विधि बहुत सधी हुयी और compact भाषा मे बतायी गयी है / एक पूरा अध्ध्याय शरीर की बनावट के बारे मे ही है, जिसे समझने और जानने के लिये मूल ग्रन्थ का अवलोकन करना अधिक श्रेयस्कर होगा /

“त्रिक स्थान” यानी तीन अन्गों से मिलकर बना शरीर का स्थान , आयुर्वेद ने मानव शरीर मे दो त्रिक स्थान निर्धारित किये हैं /
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पहला स्थान ; सिर और गरदन और दोनों हाथ के इन तीन हिस्से को मिलाकर निर्धारित किया गया है

और दूसरा स्थान : दाहिना और बायां पैर और कमर और पेड़ू के लगभग नीचे का हिस्सा , इन तीनों को मिलाकर माना गया है /

देखने मे यह दोनों त्रिक स्थान बहुत मामूली से लगेन्गे और यही समझेन्गे कि इसमे खास क्या है और इसका शरीर के साथ इतना महतव्पूर्ण समबन्ध क्या हो सकता है ? इस तरह के सवाल उठना स्वाभाविक है ?

विवेचन के लिये पहला त्रिक स्थान लेते है / आयुर्वेद में इस त्रिक स्थान मे हुये रोगों को “उर्ध्व जत्रु रोग” कहते है / पहले त्रिक स्थान मे क्या क्या शरीर के अन्ग होते है, इन्हे भी समझना चाहिये / सिर के अन्दर शरीर का चेतना बिन्दु मष्तिष्क है , जो हमारे शरीर को चलाता है / सारी प्रक्रियायें इसी की देन है / आन्ख, नाक , कान, दान्त, जबड़ा, गला, सिर के बाल, Cervical region के सात vertebra, Larynx, Pharynx, part of Trachea, Vocal Cord , Tongue, Mucular skeletal formation, Thyroid Gland इत्यादि इत्यादि महत्व्पूर्ण अन्ग आ जाते है / इन अन्गों की होने वाली विकृति से सभी परिचित है / यहा पहले त्रिक स्थान के बारे मे बहुत सन्क्षेप मे ही बताया गया है /

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दूसरे त्रिक स्थान के अन्ग हैं बायां और दाहिना पैर और इन्के छोटे और बड़े जोड़ जैसे उन्गलियों और अन्गूठे और गिट्टे के जोड़, घुटने के जोड़, कमर की हड्डी और उसके जोड़, excretion के अन्ग यथा Rectum, Urinary Organs, Male and Female Reproductive Organs, Uterus, Ovaries, Lower parts of Intestines, Part of abdominal arota , Lower part of Spine , Hip bones इत्यादि महत्व पूर्ण अन्ग आते है /

आयुर्वेद के मनीषियों ने बहुत बुध्धिमत्ता पूर्वक शरीर के इन स्थानों का चयन स्वास्थय को उत्तम बनाये रखने के लिये और चिकित्सकीय दृष्टि कोण के महत्व को समझते हुये निर्धारित किये हुये होन्गे , ऐसा अनुमान कर सकते है /

वास्तविकता मे भी यही देखने मे आया है कि शरीर की लगभग 90 प्रतिशत बीमारी इन्ही अन्गो और प्रतयन्गों की विकरति के कारण होती है /

बताते चलें कि पहला त्रिक स्थान आयुर्वेद के सिध्धान्त “त्रिदोष” के एक दोष “कफ” को represent करता है और दूसरा त्रिक स्थान “वात” दोष को represent करता है / आयुर्वेद की चिकित्सा करते समय चिकित्सकों को त्रिक स्थान पर भी ध्यान देना चाहिये /

AYUSH Heamometer और Thermal Scanning और ETG AyurvedaScan द्वारा प्राप्त Data से पता चल जाता है कि दोनो त्रिक स्थान की क्या स्तिथि है और क्या चिकित्सा होनी चाहिये ? त्रिक स्थान से सम्बन्धित रोगों की सन्खया सैकड़ॊ और हजारों मे हो सकती है / ऐसा रोग निदान के दृष्टि कोण को ध्यान मे रकहकर कहा जा सकता है /

आयुष और आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान में त्रिक स्थान के रोगों की चिकित्सा को सफलता पूर्वक किया जा सकता है /

कनक पालीथेरापी क्ळीनिकेवम रिसर्च सेन्टर, कानपुर, भारत मे त्रिक स्थान के measurement के लिये कई प्रकार की विधियों का विस्तार किया गया है , इन विधियों से प्राप्त आनकड़ों से पता चल जाता है कि आयुर्वेद में बताये गये दोनों त्रिक स्थानों की Four Dimentional क्या स्तिथि है ? चिकित्सा कार्य मे यह ग्यात करना बहुत आवश्यक है और आयुर्वेद की चिकित्सा के लिये इन अन्गों के सटीक इलाज के लिये और बाद में इन अन्गो की monitoring करने के लिये इस तरह के डाटा बहुत काम आते है और चिकित्सा कर्य को सुगम बनाते है / हमारे रिसर्च केन्द्र ने दोनों त्रिक स्थानों की माप करने के लिये कई विधियों को विकसित किया है, जिनके निदान ग्यान परिणाम शतश: सही प्राप्त हुये हैं /

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