दुबलापन यानी दुबला शरीर या शरीर ऐसा जो हड्डियों का ढान्चा जैसा हो ; single chasis body ; very slim body ; skeleton body


दुबले आदमियों या दुबले लडकों या दुबली लड़्कियों या दुबली महिलाओं को आपने देखा होगा, कैसे लगते हैं देखने में ?

दुबले शरीर का होना अछ्छी बात है , एकहरा बदन हो तो यह बहुत अच्छा लगता है , फिल्मों के हीरो हीरोइनों को देखिये कोई भी आपको बहुत मोटा नही दिखाई देगा , सब इसीलिये अपने को maintain किये रहते हैं, किसलिये ?

आखिर छरहरा बदन भी कोई चीज होती है ? यही छरहरा बदन सब्को देखने मे अच्छा लगता है /

लेकिन अगर शरीर जरूरत से ज्यादा दुबला हो, skeleton जैसा दिखाई दे, तो फिर यह देखने वालों को अच्छा नही लगता /

आयुर्वेद में दुबले पतले लोगों के लिये महर्षि चरक ने लिखा है कि ” रूखा सूखा अन्न खाने वाले, अत्यधिक लन्घन यानी खाना या भोजन न खाने वाले, कम भोजन करने वाले, अधिक मेहनत करने वाले और कम खाना खाने वाले, ज्यादा जुलाब या enema का उपयोग करने वाले, पखाना या पेशाब की हाजत को रोकने वाले, रात मे बहुत जागने वाले, स्नान को न करने वाले, बुढापा की उम्र, बहुत गुस्साइल या क्रोध करने वाले और सदैव रोगी बने रहने वाले दुबले शरीर के द्योतक हैं /

अत्यधिक मेहनत या शारीरिक कार्य करना, बहुत भर पेत भोजन करना, भूख, प्यास, ज्यादा दवा का सेवन करना, अत्यन्त सर्दी और गर्मी , अत्यन्त मैथुन इन सबको दुबला आदमी बर्दास्त नही कर सकता है / दुबले आदमी को तिल्ली, शवास, खान्सी, क्षय, गोला और उदर रोग घेर लेते हैं / दुबले आदमी को सन्ग्रहणी का रोग भी हो जाता है / ”

महर्षि चरक के observation मे जो भी कहा गया हो इससे यह तो स्पष्ट होता है कि यह रोग भोजन कम खाने, पेट भर न खाने अथवा भोजन का रस सार न बनने और शरीर में खाया पिया न लगने यानी improper assimilation या digestive system के physiological disturbances के कारण होती है /

ऐसा ही आयुर्वेद के महान आचार्य सुश्रुत का भी विचार है / महर्शि सुश्रुत का कहना है कि जो मनुष्य वात अथवा बादी बढाने वाले आहारों का अति सेवन करता है , बहुत ज्यादा मेहनत या कसरत करता है , अत्यधि मैथुन करता है , पढने लिखने मे ज्यादा परिष्रम करता है , बहुत डरता या सोच फ़िक्र करता है , बहुत ही ध्यान करता या रात को जागता है , भूखा रहता है या थोडा खाता है अथवा कसैले पदार्थ अधिक खाता है तो इससे कम रस बनता है और कम रस कम होने से धातुओं को तृप्त नही करता है यानी धातुओ को बढाने मे सहायता नही करता है , इसलिये शरीर अत्यन्त कृश या दुबला होता है /

बहुत दुबला मनुष्य, भूख, प्यास, सर्दी, गर्मी, हवा और बरसात आदि बातों को बर्दाश्त नही कर सकता है तथा अधिक वजन भी नही उठा सकता है / ऐसा आदमी सभी काम नही कर पाता है, ज्यादा मेहनत का काम नही कर पाता है और आयुर्वेद मे बतायी गयी वात व्याधियों से पीडित रहता है / दुबला प[अतला मनुष्य श्वास, खान्सी, राज यक्षमा. प्लीहा, उदर रोग, जथराग्नि की निर्बलता, विषमाग्नि, मन्दान्ग्नि, गुल्म और रक्त पित्त आदि किसी न किसी रोग से व्याधित होकर कष्ट भोगता रहता है / दुर्बलता के कारण दुर्बल मनुष्य के सभी रोग भी अस्धिक बलवान होकर अधिक कष्ट देने लगते हैं /

नीण्द खूब लेना, बढिया सोने का पलन्ग, सन्तोष, शान्ति, बे-फिक्र होना, सम्भोग से अलग रहना यानी स्त्री के साथ मैथुन नही करना, अधिक मेहनत न करन्मा, नया अन्न, नयी शराब, दही, दूध, घी, ईख, शालि चावल, उड़द, गेहूं, गुड़ के पदार्थ, सदैव तेल लगाना, चिकने उबटन, स्नान, चन्दन लगाना, फूल माला पहनना, सफेद कपडे पहनना, यथा समय देह का शोधन, रसायन और बृख्य योगों का सेवन – ये सब दुबले को
भी परम पुष्ट करते हैं / सबसे बड़ी बात “बेफिक्री” है / बेफिक्री से मनुष्य खूब मोटा होता है /

आयुर्वेद मे कहा गया है कि;

अचिन्तनाच्च कार्याणां ध्रुवं सन्तर्पेण्न च /
स्वप्नप्रसन्गाच्च नरो बराह इव पुष्यति //

अर्थात किसी बात की फिक्र न करने, सदैव सन्तर्पण करने और सोने से आदमी बाराह की तरह यानी सुअर की तरह मोटा हो जाता है /

जो मनुष्य रस को बढाने वाले और रस को कम करने वाले दोनों पदार्थों को सेवित करता है, अथवा यो समझिये कि न मोटे करने वाले और न पतले करने वाले साधारण आहार विहार का सेवन करता है अथवा बढिया बढिया माल खाता है और मेहनत करता है, कसरत करता है ,उसका शरीर न तो मोटा होता है और न दुबला होता है, ऐसे व्यक्ति का शरीर मध्य्यम स्तिथि का होता है / मध्य्यम शरीर का व्यक्ति यानी ऐसा मनुष्य जिसका शरीर न तो अधिक मोटा हो और न अधिक दुबला हो , यह व्यक्ति भूख, प्यास, सर्दी, गर्मी, धूप हवा, वर्षा आदि मौसम तथा परिस्तिथियों को बरदास्त कर सकता है और सभी तरह के काम कर सकता है तथा शारीरिक रूप से मज्बूत बना रह सकता है /

प्रत्येक मनुष्य को हमेशा ऐसी ही कोशिश करना चाहिये , जिससे उसका शरीर न तो अधिक मोटा हो और न अधिक दुबला / बहुत मोटा होना और बहुत दुबला होना दोनों तरह के मनुष्य स्वास्थ्य के दॄष्टि कोण से अच्छे नही समझे जाते हैं / आयुर्वेद मे कहा भी गया है /

अत्यन्त गर्हितावेत्तौ सदा स्थूल्कृशॊ नरॊ /
ष्रेष्ठॊ मध्य शरीरास्तु कृष: श्लात्त्तु पूजित: //

बहौत मोटा और बहुत दुबला दोनों तरह के मनुष्य निन्दनीय है, लेकिन इनमे दुबला मनुष्य ज्यादा आयु को प्राप्त करता है /

दुबला पन दूर करने के लिये आयुर्वेद मे बहुत सी औषधियां है, जो किसी वैध या आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह करके सेवन करना चाहिये / सभी प्रकार के दुबलापन का इलाज ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण आधारित अगर किया जाता है तो दुबलापन दूर होता है और रोगी का वजन और शरीर मध्ध्य्यम आकार को प्राप्त होता है /

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