आयुर्वेद मे नई रिसर्च की पहल ; केपीकार्क द्वारा आयुर्वेदिक औषधियों के गुणों को जानने समझने के लिये आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्तों को औषधियों से मैच कराने की तकनीक का विकास ; Development of the technology for matching of Classical Ayurvedic remedies with concordance to the Ayurveda Fundamental Principles


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This is a workable AYURVEDA-AYUSH MULTI-PURPOSE METER, which is developed by AYUSH Scientist Dr D.B.Bajpai for testing of various items, like Blood, Urine, Stool, Sputam, Saliva, Drugs, Herbs and every thing, which is related for test and test requirements, with both limited and unlimited fields as applied. The Test could be performed in liquids and in paper or paper like material stripes. At present this PROTO-TYPE meter is being used ONLY FOR AYURVEDIC and HOMOEOPATHIC and UNANI related studies and research works.auremedies002
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के०पी०कार्क KPCARC , KANPUR, भारत सन्स्थान द्वारा प्रारम्भिक investigations इस बात को जानने और समझने के लिये किया गया कि ” क्या आयुर्वेद की शास्त्रोक्त औषधियों को आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्तों की कसौटी पर उसी तरह से जाचा और परखा और समझा जा सकता है जैसा कि मानव-रोगी के परीक्षण की जान्च के बाद सिध्ध्न्तों की कार्य विकृति और विकृति का ग्यान कर लेते है ?”

इस तरह के विचारो को कार्य स्वरूप देने के लिये इससे पहले की समस्यायों को समझना जरूरी है /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के बाद जब अन्य तीन टेक्नोलाजी का विकास किया गया , उसके पश्चात कुछ समस्यायें सामने आयी, जिनका समाधान भी निकलना चाहिये, ऐसा विचार करना पड़ा / जो अन्य तीन टेक्नोलाजी विकसित की गयी, उनमे [एक] आयुर्वेदा् थरमल स्कैनिन्ग [दूसरा] आयुर्वेद मौलिक सिधान्तों आधारित रोगी का रक्त परीक्षण [तीसरा] आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्तों आधारित मरीज के मूत्र का परीक्षण, इन तीन तकनीकों के लगातार विकास होने से , यह बात समझ में आयी कि रोगी के और अधिक सटीक, और अधिक FOOL PROOF उपचार के लिये आयुर्वेद की औषधियों के गुणों को ठीक उसी तरह मैच करने की व्यवस्था होनी चाहिये, जैसा कि आधुनिक चिकित्सा विग्यान मे है, उदाहरण के लिये Eosinophillia के लिये Benocid अथवा Hetrazan, यानी Set Therapeutic की व्यवस्था अगर होती है तो इससे मरीज को सही ायुर्वेदिक दवा और सही आयुर्वेदिक उपचार दोनो ही मुहैय्या कराये जा सकते है /

इसके लिये KPCARC द्वारा विकसित “आयुर्वेद-आयुष मल्टीपरपज मीटर” का उपयोग किया गया है और कुछ आयुर्वेद की क्लासिकल दवाओं का परीक्षण किया गया है, जिनके परिणाम की रिपोर्ट ऊपर दी जा रही है /

इस तरह के परिक्षण करने का उद्देश्य आयुर्वेदिक दवाओं के बुनियादी प्रभावों को आन्कने और दवाओं के अन्दर छिपे हुये आयुर्वेद के रस, गुण, वीर्य, विपाक, प्रभाव आदि के अध्ध्यन में सहायता और अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करने के माध्ध्यम को तलाशने की चेष्टा करना भी शामिल है / इन Test की गयी आयुर्वेद की दवाऒ का शरीर में कहां कहां और किस तरह का curative प्रभाव होगा, यह जानकारी प्राप्त करना बहुत दिलचस्प कार्य हो सकता है /

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