महीना: अक्टूबर 2013

AYURVEDA DIVAS ; DHAN TERAS ; THE DAY OF AYURVEDA ; धन तेरस ; आयुर्वेद दिवस ; आयुर्वेद का दिन


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We have committed to celebrate AYURVEDA DIVAS ; AYURVEDA DAY ; just like we celebrates the other days every years ; on the day of DHAN TERAS , one day before DEEPAWALI, every year and also comming years.

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LORD DHANAVANTRI is a HINDU GOD , who provides HEALTH and REMEDIES. Lord Dhanavantri is well known as FATHER OF AYURVEDA. It is established that he appeared on this earth on the day of DHAN TERAS before one day of DEPAWALI. GODDESS OF WEALTH Lakshami born on the day of DEEPAWALI, therefore LORD DHANAVANTRI is called the elder brother of GODDESS LAXAMI.
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Those who want to be Healthy , they should worship Lord Dhanavantri daily and chanting above said mantras.

Those who are sick and bed ridden, they should chanting these mantras daily several times to regain of normal health.

Every physician , who want to expertise in his calibers, should worship LORD DHANAVANTRI daily.

Determination of constituents of Blood ; रक्त के अन्दर पाये जाने वाले कुछ द्रव्यों का आयुर्वेद की तकनीक द्वारा ग्यात करने का प्रयास


मानव रक्त के अन्दर पाये जाने वाले कुछ ्द्रव्यों का यानी Organic और Inorganic substances को ग्यात करने की विधि का प्रयास KPCARC, KANPUR द्वारा किया गया है / इस कोशिश के नतीजे यद्यपि क्या होन्गे ? यह प्रश्न तो भविष्य के गर्त में ही छुपा होगा /

लेकिन हमारा प्रयास लगातार जारी है / यह ठीक ठीक नही कहा जा सकता है कि results किस तरह के मिल सकते हैं / Research करने के दर्मियान रिसर्च के परिणाम क्या होन्गे, यह सब कुछ दावे के साथ कहा नही जा सकता है /

फिर भी जितने भी रिजल्ट मरीजों के खून की जान्च करने के बाद मिले हैं, वे सभी बहुत उत्साह वर्धक हैं / आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान मे एक तो ऐसे ही कोई खून की जान्च का विधान नही है और न इसका कोई अभी तक आविष्कार ही किया गया है/ यह आयुर्वेद के लिये ऐतिहासिक काल ही कहा जायेगा जब इस तरह की खून की जान्च की आयुर्वेद आधारित जान्च को विकसित करने का प्रयास किया गया है /

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उपरोक्त रक्त परीक्षण की रिपोर्ट एक महिला की है जिसे मान्सपेशियों और घुटनों मे दर्द तथा शरीर के जोड़ॊ मे दर्द की तकलीफ है /

इस महिला का सल्फेट और क्लोराइड और कैल्सियम और मैन्गनीज और यूरिक एसिड सामान्य लेवेल से कम है / वहीं दूसरी तरफ फास्फेट्स और पोटेशियम लेवेल अधिक की ओर हैं / इस तरह की blood picture ARTHRITIS की ओर इशारा करती है /

महिला आयुर्वेद के सिध्धान्तो के अनुसार वातज – पित्तज दोष से ग्रसित है /

यहां यह देखने वाली बात होगी कि किस constituents of BLOOD के combination के बनने से क्या निष्कर्ष आयुर्वेद के त्रिदोष सिध्धान्त को मिलाकर और matching करके कैसे निकाला जा सकता है और क्या ऐसे combination के सम्बन्ध हो सकते है ????

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दूसरी रिपोर्ट एक २३ साल के नवयुवक की है जिसे कई तरह की तकलीफे हैं जिन्हे यहां बताना उचित नही होगा / मरीज की प्रायवेसी को देखते हुये बहुत कुछ नही बताया जा रहा है, लेकिन इशारे के लिये इतना कहना काफी है कि इसे बाजीकरण और रसायन और ध्वज भन्ग ्से सम्बन्धित विकार है /

इस मरीज के सल्फेट्स और क्लोराइड और सोडियम और कैल्सियम और मैग्नेशियम कम की ओर आये हैं तथा फास्फेट और पोटेशियम अधिक की ओर आये हैं /

इस मरीज के electrolytic imbalances पित्तज और कफज विकार की ओर इशारा करते हैं /

इन मरीजो को दोषानुसार औषधियां बता दी गयी है / 90 दिन दवा सेवन करने के बाद इन मरीजों को पुन: review करने के लिये बुलाया है , दुबारा रक्त परीक्षण के बाद ही पता चल पायेगा कि रक्त की जान्च की कया स्तिथि है ?

अभी रक्त परीक्षण की जान्च केवल निदान ग्यान के लिये ही किया जा रहा है, मरीज के स्वास्थय की monitoring भी इसके माध्यम से की जा रही है / जैसा कि research procedure होते हैं , उनमें काम करना आसान नही होता है, जबकि इस तरह के रिसर्च कार्य सन्सथागत स्तर पर न किये जा रहे हों /

Neutraceutical ; Food as well as Remedy ; खाद्योषधि ; पौष्टिक भोजन तो है ही, उच्च किस्म की आयुर्वेदिक दवा भी है


इसे भारतीय चिकित्सा विग्यान आयुर्वेद का कमाल ही कहना चाहिये कि आयुर्वेद मे बतायी गयी बहुत सी तकलीफो का इलाज खाने पीने की चीजों के साथ साथ ही किया जा सकता है /

ऐसी एक RECIPE के बारे में बता रहा हू, जिसे सैकड़ॊं बार सफलता पूर्वक आजमाया जा चुका है / यह बहुत सरल है लेकिन है बहुत काम की भोज्य-औषधि /

इसका फार्मूला नीचे दिया गया है ; नीचे लिखी गयी मात्रा दो गिलास यूष के लिये है /

१- पालक २५ ग्राम
२- बथुआ २५ ग्राम
३- अदरख १० ग्राम
४- लहसुन २ जवा
५- तुलसी छोटी २० पत्ती
६- तुलसी बड़ी २० पत्ती

उपरोक्त सभी द्रव्यों को खरल में डालकर महीन/ मोटी चटनी की तरह पीस लें /

अब इसमें नीचे लिखा आयुर्वेद का क्वाथ द्रव्य मिला दें /

७- दशमूल क्वाथ [सूखा] १० ग्राम
८- अडूसा ५ ग्राम

उक्त सभी द्रव्यों को ३०० मिली लीटर पानी में मिलाकर एक उबाल आने तक चूल्हे की आन्च पर गरम करें / बाद में इसे किसी बर्तन से ढान्क कर रख दें / जब यह गुन्गुना ताप तक आ जाये तब इसे छान लें / इसके दो हिस्से कर लें / यह दो लोगों के उपयोग के लिये है /

उक्त छाने हुये यूष के द्रव्यों को फेंके नही / इसे दुबारा पानी मिलाकर पका ले और उपयोग करें /

इस द्रव्य का दो बार प्रयोग करें / सुबह और शाम इसका सेवन कर सकते है /

इस भोज्य औषधि का उपयोग निम्न रोगों की अवस्था मे कर सकते है;

१- दुबले पतले मर गिल्ले और सीन्ख सलाई फजले इलाही वाले लोगो के लिये यह टानिक का काम करता है /
२- जिनको electrolytic imbalances हो
३- खून की कमी वाले लोगों को पीने से कुदरती तौर पर फयदा होता है
४- जिन्हे बार बार जुखाम होता हो
५- जिन्हे खान्सी और गले की खरस होती हो
५- जिन्हे थकावट बहुत जल्दी आती हो
६- जिन्हे arthritis / musculoskeletal / muscles/ joints की तकलीफे हो
७- यह एक बहुत अच्छा “दर्द दूर करनें वाला” पेय है / किसी भी तरह के दर्द में इसके सेवन से दर्द में आराम मिलती है
8- स्वस्थय अवस्था मे इसको पीने से यह टानिक काम करता है / इसे आजमाइये और पथ्य की तरह भी बीमारियों मे उपयोग करें /

CONSTITUENTS OF URINE ; Laboratory test developed at KPCARC, Kanpur ; मूत्र के अन्दर पाये जाने वाले द्रव्य का परीक्षण कनक पालीथेरापी क्ळीनिक एवम रिसर्च सेन्टर , कानपुर द्वारा विकसित किया गया


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We have tried to establish the obtained values from patient’s urine contents of the salts and minerals after LABORATORY TEST. We found it correct and true, but we can not say or ignore or over rule the obtained readings , whether these are correct or false.

However these readings are useful in the Ayurvedic and Homoeopathic treatment and remedies prscription. For example, high or lower pottassium level indicates related complaints, so as for sodium or chloride or sulphates and phosphates or urea.High or low urea readings all indicates the metabolism anomalies and role of digestive system and assimilative process.

Correlation with AYURVEDIC REMEDIES on the basis of URINE examination , ayurvedic prescription and selection of medicine becomes perfect.

So as for HOMOEOPATHY, high or low minerals and salts level indicate the group of selection of remedies based on the chlorides, sulphates, pottassium and others found in the urine.

We take Urine test in this sense and we are using successfully the readings , which se obtained.

मूत्र परीक्षण आयुर्वेद ; क्या आयुर्वेद के मूल सिध्धान्तों को मूत्र परीक्षण द्वारा जान्च करके ग्यात कर सकते हैं ?? URINE TEST AYURVEDA ; Can Patient’s URINE examination provides the STATUS QUANTIFICATION OF AYURVEDIC PRINCIPLES???? KPCARC have done it.


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ऐसा शायद पहली बार आयुर्वेद के इतिहास में हुआ है , जब रोगी के मूत्र का laboratory में परीक्षण करके आयुर्वेद के मूल सिध्धन्तों का status quantify किया गया हो / Kanak Poly-therapy Clinic And Research Center, KANPUR, India में Laboratory Test द्वारा जान्च करने की तकनीक का विकास कर लिया गया है और यह आयुर्वेद चिकित्सा को अधिक सटीक और अधिक कारगर बनाने के लिये चिकित्सा कार्य में out-door hospital में उपयोग की जा रही है /

इसके बारे में पिछले कुछ blog posts में उल्लेख किया जा चुका है और बताया जा चुका है /

रक्त के द्वारा त्रिदोष और सप्त धातुओं का status quantify करने के बारे मे पहले जान्कारी दी जा चुकी है लेकिन मूत्र परीक्शण द्वारा त्रिदोष और त्रिदोष भेद और सप्त धातुओं के विष्लेषण के साथ constituents of Urine के बारे में भी कितनी मात्रा में मरीज के मूत्र में यह उपस्तिथि है , इसे जान लेने की तकनीक विकसित कर ली गयी है /

यहां दी गयी रिपोर्ट देखिये और आधुनिक आयुर्वेद मूत्र परीक्षण के बारे मे जानकारी लें /

अब रोगी के मूत्र का परीक्षण आयुर्वेद के मूल सिध्धान्तों पर आधारित होकर निदान और रोग निदान की दिशा में evidence based हो चुका है /

महिला ३६ वर्ष , जिसे मानसिक डिप्रेशन की तकलीफ थी, आयुर्वेद+होम्योपैथी+एलोपैथी+जीवन शैली के बदलाव द्वारा ठीक होने का केस MENTAL DEPPRESSION ; A CASE OF 36 YEARS FEMALE SUFFERING FROM SEVERE MENTAL DEPPRESSION SINCE 8 YEARS ; MAL-TREATED CASE ; NOW BETTER BY AYURVEDIC AND HOMOEOPATHIC AND ALLOPATHY COMBINATION TREATMENT


A lady aged 36 years belongs to KANPUR , consulted me on 28.08.2013 with severe deppressive menbtal status stage.

My one of Patient, suggested her husband, a U.P. Government employee, to consult me for her MENTAL DEPPRESSIVE STAGES ailment’s TREATMENT.

She came to my clinic in depprressive condition and as I suggested her for an ETG AyurvedaScan examination, she agreed for the test.

महिला का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण किया गया और उसके दूसरे परीक्षण यथा आयुर्वेदा थेर्मल स्कैन्निन्ग और आयुर्वेदा रक्त परीक्षण और आयुर्वेदा मूत्र परीक्षण किये गये /

ETG Findings और दूसरे सभी परीक्षण बहुत चौकाने वाले मिले / होता यह है कि जब किसी मरीज या रोगी का ETG AyurvedaScan परीक्षण करते हैं तो उनसे यह नही पूछा जाता कि आपको क्या तकलीफ है या क्या बीमारी है ? हमारी तरफ से ऐसा जानने का कोई प्रयास नही किया जाता है / अगर रोगी एलोपैथी के टेस्ट या परीक्षण करा कर लाता है या दवा का प्रेस्क्रिप्शन दिखाता है तो देख लिया जाता है , लेकिन यह किसी काम के नही होते है, क्योंकि ETG AyurvedaScan की diagnosis approach भिन्न प्रकार की है और मरीज को जितनी भी या जो भी तकलीफ होती है उसका three domensional अथवा त्रि-आयामी अध्ध्य्यन करते हैं / पहला आयाम वह होता है जो सामने होता है , देखने मे प्र्त्यक्ष होता है अथवा मरीज जितना महसूस करता है और बताता है /

दूसरा आयाम वह होता है जो ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की फाइन्डिन्ग्स बताती है कि रोग किस रास्ते होकर पहले आयाम को reflex करता है और तीसरा आयाम उस जड़ बुनियाद को बताता है जहां से रोग पैदा होकर दूसरे आयाम के रास्ते से होकर पहले आयाम तक पहुन्च रहा है और फाइनल बीमारी को reflex करता है /

इस महिला के साथ बड़ी विचित्र बात यह पैदा हुयी कि इसके सब parameters करीब करीब Normal रहे और ऐसा कुछ भी नही था जो यह इशारा करे कि इसको क्या बीमारी है? निदान के लिये कुछ बीमारियों और anomalies का जिक्रा किया गया, लेकिन वे सब बहुत महत्व पूर्ण नही लगे /

तभी मेरा ध्यान Autonomic Nervous sytem की तरफ गया / यह कुछ abnormal था / इस महिला का UTERUS और मासिक धर्म का parameter abnormal मिला / ऐसे parameter के मिलने से pelvic inflammatory condition जरूर मिलती है /

बहरहाल महिला जब रिपोर्ट लेने आयी तो मैने उससे जितनी भी findings आयी थी उनके confirmation के लिये सवाल किये / उसने यह बताया कि उसके पेट में दर्द होता है लेकिन बहुत अधिक नही /

इलाज के बारे मे पूछा कि पिछले आठ – नौ साल से क्या और किस तरह का इलाज किया गया है ? उसने बताया कि एलोपैथी का इलाज काफी समय तक किया लेकिन कोई फायदा नही हुआ है ? मैने उसकी physical जान्च ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की फाइन्डिन्ग्स को लेकर किया तो पता चला कि उसको किसी तरह के दर्द की अनुभूति नही होती और किसी तरह के sensation का अनुभव नही होता है / यानी उसको तकलीफ painless थी / महिला को न तो दर्द की अनुभूति होती थी और ना उसको किसी तरह की परेशानी थी /

सिवाय इसके कि उसको chest के बीचो बीच ऐसा अनुभव होता है जैसे कोई बहुत प्रेशर से दबा रहा हो / जैसे ही यह अनुभव होते हैं, उसको “बहुत भयन्कर तौर पर घबराहट होने” की बीमारी पैदा हो जाती है / यह घबराहट कई कई दिन यहां तक की महीनों तक बनी रहती है और महिला अपना कुछ काम चाहे वह दैनिक कार्य हो अथवा खाने पीने का अथवा कोई दूसरा और, इस घबराहट से त्रस्त हो जाती है / जब वह फूट फूट कर रोती हैं और कई घन्टे तक ऐसे ही फूट फूट कर रोती रहती हैं तब जाकर उसको कुछ घबराहट से चैन मिल पाता है / यानी घबराहट मे आराम मिल जाती है /

यह बड़ी विचित्र स्तिथी बाली बात रही / यह उत्सुकता वाली बात थी कि इस महिला की बीमारी के बारे मे इसकी History को भी समझा जाय, लिहाजा बचपन से लेकर आज तक की तकलीफों के बारे मे मैने उसको बताने के लिये कहा /

सन्क्षेप में बचपन मे उसको सर्दी जुखाम बुखार आने की शिकायत बनी रहती थी / जब उसकी उम्र ८ साल की थी तब उसे रीढ की हड्डी की कोई तकलीफ हुयी / एलोपैथी का ही इलाज किया गया और किसी दूसरी चिकित्सा का इलाज नही किया गया, ना तो आयुर्वेद का और ना होम्योपैथी का / केवल मात्र एलोपैथी का इलाज किया गया / रीढ की हड्डी का जब इलाज किया गया तो उस समय इस महिला ने बिस्तर पकड़ लिया था और चलने फिरने को मोहताज हो गयी थी / बहुत एलोपैथी का इलाज चला लेकिन कोई आराम नही मिला / अन्त में किसी डाकटर ने T.B. समझ कर इलाज किया उससे कुछ फायदा हुआ / महिला का स्वास्थय नरम गरम चलता रहा और उसने सादी के पहले ही अपनी पी०एच०डी० की पढाई पूरी कर ली /

यह महिला Ph.D. डिग्री होल्डर है / इसका १३ वर्ष का एक लड़का है / नौ साल पहले इसे घबराहट की तकलीफ हुयी थी / जो अभी तक नही ठीक हुयी /

महिला ने बताया कि वह काम करती थी लेकिन उसे थकावट नही आती थी / वह घर पर जी तोड़ मेहनत करती रही लेकिन उसे कभी भी थकावट या थकावट जैसे लक्षण नही लगते थे / उसे कभी भी ज्यादा दर्द का अहसास नही होता था /

घबराहट में भी यह सो जाती है और सुबह आन्ख खुलते ही घबराहट शुरू हो जाती है / जो चौबीसो घन्टे बनी रहती है /

उसकी हालत देखकर मुझे एक पुराना इसी तरह का एक केस याद आ गया जो छह साल पहले इलाज के लिये आया था /

यह एक पुरुष मरीज का केस है जो लगभग इसी उम्र का है / इसके कुल मिलाकर समय समय पर एक दर्जन से ज्यादा ETG AyurvedaScan के परीक्षण हो चुके है / जब फली बार यह मरीज आया और उसका परीक्षण किया उस समय इसे epigastritis तथा hypercidity की शिकायत थी / आयुर्वेदिक इलाज करते करते इस पुरुष मरीज की सब तकलीफें ठीक हो गयी , लेकिन इसके pubic region मे यदा कदा दर्द उठने लगा / जब यह दर्द उठता है तो उसे बहुत जोरों से घबराहट होने लगती है और इस घबराहत के साथ साथ उसकी गर्दन में अकड़न और जकड़न पैदा हो जाती है, इस कारण उसका किसी काम में मन नही लगता है, ऐसा वह शिकायत करने लगा /

मैने इस रोगी की तकलीफ की analysis की / Analysis और सारे लक्षणों की synthesis करने के बाद मैने उसको बताया कि Sigmoid colon से उठने वाले और यहां से autonomic nervous system के रास्ते दिमाग की ओर जाने और आने वाले sympathetic and para-sympathetic signals जिस तेजी से दिमाग की तरफ और दिमाग से sigmoid colon की तरफ आने जाने वाले सिग्नल्स जितनी स्पीड से आते जाते है , वह स्पीड बाधित होती है और इसमे signaling process की गड़बड़ी है जिससे घबराहट और अकड़्न जकड़्न जैसे syndromes , as a result, पैदा हो रहे हैं /

यह निष्कर्ष निकालने के बाद मैने उसको सलाह दी कि यदि वह चाहे तो दूसरे allopathy से जुड़े परीक्शण करा सकता है, जिससे उसको मन की तसल्ली मिल जाये / उसके कहने पर Ultrasound और दूसरे एलोपैथी के परीक्षण भी करा दिये गये, लेकिन सब के सब परीक्षण normal निकले और उसके शरीर में कोई गड़बड़ी नही निकली /

Sigmoid Colon में कया और कैसे गड़बड़ी हुयी, यह पूछने पर मरीज ने बताया कि उसे कई साल पहले Colitis हुयी थी जिसका इलाज allopathy चिकित्सा द्वारा किया गया था / वह तकलीफ तो ठीक हो गयी लेकिन उसके पाचन सम्बन्धित बहुत से विकार पैदा हो गये / मरीज ने बताया कि जैसे जैसे यह विकार आप्की दवा से ठीक होते चले गये वैसे वैसे स्वास्थय मे सुधार होता चला गया /

यह एक ऐसा point था जो Homoeopathy के सिध्धान्त से मिलता जुलता है / होम्योपैथी मे इसे Hering’s Law of Cure कहते हैं / बहरहाल, इस signal obstruction की बीमारी का निदान होने के बाद आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवा से मरीज को आराम मिला है /

यही Signal Obstruction की तकलीफ इस महिला को भी है, ऐसा निदान establish किया गया / इस महिला का obstruction path कहां से चलकर कहा तक जाता है . इस्के लिये कई परीक्षण special electrical scan ETG Ayurveda Scanner द्वारा करने पड़े /
निष्कर्ष स्वरूप मे इस महिला का निदान यह हुआ कि महिला के Uterus मे Endometritis है और इसकी वजह से होने वाले primery anomalies से पैदा inflammatory conditionके सिग्नल्स दर्द की पहचान कराने के लिये autonomic nervous system की parasympathetic और sympathetic nerve path को बाधित करता है और यह सिग्नल thoracic spine तक तो आते है लेकिन उसके बाद इन सिग्नल्स का फैलाव आगे नही बढ पाता है, यह एक तरह की stress condition पैदा हो गयी, इसी कारण से इस महिला को घबराहट की तकलीफ है /

ETGAyurvedaScan  of SPINE and BACK, specially recorded for pin point diagnosis

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महिला होने वाली घबराहट से इस कदर परेशान थी कि वह एक एक दिन में कई बार क्ळीनिक में आने लगी / महिला को होम्योपैथी की दवायें आयुर्वेद की दवायें और एलोपैथी की anti-anxity medicine देनी पड़ी / तीन चार दिन बाद इस महिला को घबराहट मे कुछ आराम मिली /

जब भी महिला क्ळीनिक में आती यह observation में आया कि उसको दिन ब दिन बहुत थोड़ी थोड़ी आराम मिल रही है /

आज के दिन [ दिनान्क ; १९//१०//२०१३ ] को महिला ने बताया कि उसे घबराहट में आराम है लेकिन अब उसे COLITIS पैदा हो गयी है और उसे वही तकलीफे फिर से हो रही है जो उसको आठ साल पहले हुयी थी / और इन बीमारियों का इलाज उसने एलोपैथी की दवाओं द्वारा किया था /

यहां फिर वही Suppressive Disorders सामने आ गये /

इस महिला का इलाज करने से उसकी घबराहट और मानसिक तकलीफें इतने कम समय में कम हो गयीं /

यह महिला कानपुर के मनोवैग्यानिक चिकित्सकों , न्यूरोलाजी के experts , कानपुर मेडिकल कालेज, लखनऊ मेडिकल कालेज और SGPGI. Lucknow के चिकित्सकों का इलाज करा चुकी थी , लेकिन इसे कही से भी relief नही मिली /

यहां Homoeopathy चिकित्सा विग्यान का सिध्धान्त बिल्कुल fit बैठा है , जिसमे बताया गया है कि “Suppression” या “suppressive treatment” करने से कितनी तरह की अनगिनत नयी नयी बीमारियों के syndromes पैदा हो जाते है /

साथ ही आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान का “वात दोष” या “वात दोष और वात भेद” का विवेचन और आय्रुवेद के शास्त्रों मे वर्णित 80 प्रकार के वात रोगॊ का उल्लेख nutshell मे रोगिणी महिला के विकारों का निदान करता है और ऐसे उतपन्न रोगों की चिकित्सा को भी इन्गित करता है /

आयुर्वेद की आधुनिक टेक्नोलाजी ETG AyurvedaScan, Ayurveda Thermal Scan, Ayurveda Blood Test and Ayurveda Urine Test आयुर्वेद के सिध्धान्त निदान और रोग निदान को सटीक बताते है और तदनुसार चिकित्सा करने से अवश्य सफलता मिलती है , वह चाहे जो रोग हो और चाहे जैसा रोग हो, सभी ठीक होते हैं /

डेन्गू बुखार के लिये सटीक और अचूक आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक इलाज और दवायें ; DENGUE FEVER AND ASSOCIATE COMPLAINTS WELL TREATED BY HOMOEOPATHIC AND AYURVEDIC MEDICAMENTS


डेन्गू बुखार के लिये बहुत से लोगों ने फोन करके “टिप्स” और इलाज के लिये पूछा है कि एलोपैथी के इलाज के बाद भी उनकी तकली्फें नही ठीक हुयी है और जब डेन्गू बुखार अपना असर चरम सीमा पर हो तो लजिमी है कि उसके बचाव और इलाज के लिये सही और सटीक और अचूक इलाज बताया जाय /

आयुर्वेद की औषधियां और इसका इलाज डेन्गू के लिये बहुत कारगर सिध्द हुआ है ;

१- नीचे लिखी आयुर्वेदिक दवायें तथा खुराक एक पूर्ण वयस्क व्यक्ति के लिये है / छोटे बच्चों तथा बड़े बच्चो के लिये आधी या चौथायी खुराक उनकी उम्र के अनुसार दे /

एक गोली महासुदर्शन घन वटी
एक गोली सप्त पर्ण घन वटी
एक गोली महाज्वरान्कुश रस
एक गोली आनद भैरव रस

इन चार गोलियों की मिलकर एक खुराक दवा होती है / इन चारों गोलियों को सादे पानी से अथवा गुनगुने पानी से अथवा चाय अथवा दूध अथवा तुलसी पत्ती की चाय अथवा तुलसी -अदरख की चाय अथवा शहद से रोग की तेजी के अनुसार दो दो घन्टे के अन्तराल से अथवा तीन या चार घन्टे के अन्तराल से देना चाहिये / एक या दो दिन में बुखार और इसके उपद्रव ठीक हो जाते है /

2- Homoeopathic Medicaments ;

In DENGUE FEVER Homoeopathic combination of Mother tincture is very effective to control the Fever and its allied syndromes

Mother Tincture Gentiana Chiraita
Mother Tincture Kalmegha
Mother tincture Azadirachta Indica
Mother tincture Ceazelpeania Bonducella
Mother tincture Tinospora cordifolia
Mother Tincture Echinesia
Mother tincture Baptisia

Mix all mother tinctures in equal quantity in a bottle and shake well

Take one Teaspoonful of the mother tincture mixture in half cup of fresh water and give to patient, this is an adult single dose

Repeat similar medicine 2 or 3 or four hourly according to the need

Dengue and its syndromes will be covered in 2 days

Doses for children should be reduce according to the age

Medicine should be given to children start with 5 drops to 10 drops. Drops can be minimised in very little baby and should be given in sweet syrup or crud sharbat or Shahad Honey or in sweet milk

खान पान मे परहेज करे और केवल हल्के खान पान पर धयान दे

खान पान पर लापरवाही करने से पीलिया Jaundic और लीवर और दूसरी बीमारियां पैदा हो जाती है, इसलिये इसका विशेष ध्यान करें

EMBELICA ; AYURVEDIC MEDICAMENTS EVALUATION ; आंवला ; मौलिक सिध्धान्त अध्य्यन


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Latin PHYLLANTHUS EMBALICA is known AMLA in hindi, which is an improtant herbal fruit of Ayurveda, used in plenty formulea.

We have examined the AMLA powder in our LABORATORYand the results are given here.

Amla is used according to AYURVEDA and UNANI medical system, in PITTA VIKAR or SIFARAVI madda and therefore it is used in the said related problems.

The medicinal properties features mentined about AMALA, written in the classical books of Ayurveda Materia Medica NIGHANTU, are very near to the LABORATORY findings and analysis done at our research center.

This is an evidence based pesentation of the herbal analysis in AYURVEDIC FUNDAMENTAL PRINCIPLES confirmation.

शोथारि मन्डूर ; आयुर्वेदिक औषधि का आयुर्वेद के सिधान्तों पर आधारित नवीन आविष्कार की गयी तकनीक द्वारा रासायनिक विष्लेषण ; Shothari Mandur ; an Ayurvedic Medicaments evaluation on the ground of Ayurveda Basic Principles


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शोथारि मन्डूर आयुर्वेद की एक महत्व्पूर्ण औषधि है / यह आयुर्वेद के मनीषियों की दिव्य दृष्टि ही कही जायेगी जो उन्होने लौह यानी Iron की औषधीय निहित द्रव्य गुण को पहिचाना और उसे पूर्ण आरोग्यकारी औषधि का स्वरूप दिया /

आयुर्वेद सार सन्ग्रह पुस्तक में “शोथारि मन्डूर” के गुणों के बारे मे बताया गया है कि यह औषधि यकृत, प्लीहा , पैम्क्रियाज, गाल ब्लैडर, किडनी यानी Liver, Spleen , pancreas, gall bladder , Kidney आदि अन्गों की कार्य विकृति यानी pathophysiology अथवा विकृति यानी pathology से उतपन्न रोगों में और इन रोगों से उतपन्न extension disorders में बहुत गुणकारी और असर कारक है /

यकृत प्लीहा के रोगों के extreme level पर पैदा हो जाने वाली खराबियां यथा शरीर मे सूजन पैदा हो जाना यानी dropsical conditions, ascites, anasarca जैसी बीमारी और इन बीमारियों के कारण पैदा होने वाली associated complaints जैसे बुखार बना रहना, खान्सी का आना, श्वांस का फूलना अथवा asthama like syndromes पैदा होने की अवस्थाओं में शोथारि मडूर का देने का निर्देश है /

इस औषधि का उपयोग उपरोक्त रोगों में बहुतायत से किया गया है और सफलता मिली है /

KPCRAC, Kanpur, India द्वारा आयुर्वेद की आविष्कार की गयी नवीन परीक्षण तकनीक ayurveda-ayush multi-parameter test meter और विशेष रूप से तैयार किये गये chemical reagents द्वारा laboratory में test किये गये शोथारि लौह के परिणामों को ऊपर लोड किये गये पेज में दर्शाया गया है /

विवेचना करने पर त्रिदोश के दोषों मे पित्त सर्वाधिक है और उसके बाद वात तथा सबसे अन्त में कफ है / शोथारि मन्डुर पित्त शामक गुण वाला है और इसका असर भी पित्त स्थानों पर है /

सप्त धातुओ के विश्लेषण में शोथारि लौह सर्वाधिक अस्थि धातु, उसके बाद रक्त धातु, तत्पश्चात, मज्जा, शुक्र, मान्स, मेद और अन्त में रस धातु को cover करती है /

यहां आयुर्वेद सार सन्ग्रह में शोथारि लौह के बारे में बताये गये गुण-कर्म तथा Ayurveda Medicaments Evaluation द्वारा प्राप्त किये गये आन्कड़े लगभग बराबर साम्यता के आभासित होते हैं /

अभी यह सभी आन्कड़े और अध्द्ध्य्यन प्रारम्भिक अवस्था के ही हैं / लेकिन जैसे भी परिणाम मिल रहे हैं, यह सभी परिणाम उत्साह वर्धक हैं /

आर्थराइटिस का पूर्ण आरोग्य आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा द्वारा सम्भव ; ARTHRITIS IS A CURABLE DISEASE IN AYURVEDA AND AYUSH SYSTEM OF MEDICINE


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जोड़ों अथवा Bone-joints से जुड़ी हुयी तकलीफों को Arthritis या गठिया रोग या गठीया-वात आम बोल चाल की भाषा मे कहते हैं / आम तौर पर लोग यही कहते है /

चिकित्सकीय दॄष्टि कोण से arthritis की बीमारी मॊटे तौर पर चार हिस्सों में बान्टते हैं /

पहला ; Muscular Arthritis या जोड़ॊं के आसपास या जोड़ों मे ही स्तिथि मान्सपेशी का दर्द

दूसरा ; जोड़ो के दर्द की ऐसी स्तिथि जिसमें मान्सपेशियों के साथ साथ हड्डियॊ के सन्धि स्थल को जोड़ने और दो हड्डियॊ को जोड़ने वाले ligaments and tendons and periosteum आदि आदि की कार्य-विकृति अथवा विकृति से होने वाले inflammation की वजह से पैदा होने वाले दर्द / इस स्तिथ् को musculo-skeletal arthritis सामन्य भाषा में कहते है /

तीसरा; ऊपर बतायी गयी pathophysiological और pathological तकलीफ में यदि Neurological अथवा Nervous system मी जुड़ जाता है और इस तरह से neurological disorders भी साथ साथ पैदा हो जाते है, तो इसे Neuro=musculo-oteo arthritis भी कहते है /

चौथा; एक स्तिथि ऐसी भी होती है जिसमें जोड़ॊ का रक्त सन्चार बाधित होता है / Oxygenated रक्त जोड़ॊं मे न पहुचने के कारण जोड़ॊं मे विकृतियां होने लगती है और necrosis जैसी स्तिथि पैदा होती है उदाहरण के लिये AVASCULAR NECROSIS / यह भी arthritis की चरम स्तिथि का एक भेद कहा जाता है /
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Cervical spondylitis अथवा Lumber spondylitis अथवा Ankylosing spondylitis यह सब arthritis की श्रेणी मे ही आते है /

आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा विग्यान में आर्थ्राइटिस का इलाज सफलता पूर्वक होता है /

प्रारम्भिक बीमारी अथवा पहले या दूसरे स्टेज की बीमारी पर पूर्ण नियन्त्रण अथवा complete cure हो जाता है / तीसरे स्तर की arthritis अवश्य ठीक होती है लेकिन कुछ नियन्त्रण करने से यह ठीक रहती है / चौथे स्तर की बीमारी में दवा करने और जीवन शैली मे और खानपान में पथ्य परहेज करने से सामन्य स्तर की बनी रहती है और किसी किस्म की तकलीफ नही देती है /

ARTHRITIS से दुखी और पीड़ित सभी मरीजों को चाहिये कि वे आयुर्वेद अथवा AYUSH चिकित्सा पध्ध्यतियों का सहारा ले और स्वास्थय लाभ प्राप्त करें /

आयुर्वेद और आयुष की सभी चिकित्सा पद्ध्यतियों में joints arthritis का बहुत बढिया इलाज है, आयुर्वेद के इलाज से जोड़ो के दर्द शान्त होते है और उन्की बनावट मे जितने भी सुधार होते है , वे सब कुदरती तौर पर improove होते है /

ई०टी०जी० आयुर्वेदा स्कैन और आयुर्वेदा रक्त परीक्षण और आयुर्वेदा मूत्र परीक्षण और आयुर्वेदा थेर्मल स्कैनिन्ग तथा अन्य परीक्षण करने के उपरान्त शरीर की सभी तरह की ARTHRITIS और arthritis जैसी मिलती जुलती सभी तरह के जोड़ो joints की बीमारी का इलाज सफलता पूर्वक किया जा चुका है /

बहुत से लोग घुटना का प्रतयारोपण करा लेते है / इस विषय पर कुछ कहने या लिखने का यह अवसर नही है / लेकिन एक उदाहरण देता हू ; हमारे पूर्व प्रधान मन्त्री अटल बिहारी बाजपेयी ने अपने दोनों घूटनों की प्रत्यारोपण कई साल पहले करा लिया था / अटल जी पिछले कई सालो से दिल्ली की सड़्कों पर पैदल चलते हुये नही देखे गये / जरा विचार करिये अगर घुटना का प्रत्यारोपण बहुत कारगर होता, बहुत सटीक होता और सबसे अच्छा होता तो आज अटल जी दिल्ली और नई दिल्ली की सड़्कों पर हिरन की तरह से कुलाचें भर रहे होते और दौड़ रहे होते /