दिन: अक्टूबर 12, 2013

EMBELICA ; AYURVEDIC MEDICAMENTS EVALUATION ; आंवला ; मौलिक सिध्धान्त अध्य्यन


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Latin PHYLLANTHUS EMBALICA is known AMLA in hindi, which is an improtant herbal fruit of Ayurveda, used in plenty formulea.

We have examined the AMLA powder in our LABORATORYand the results are given here.

Amla is used according to AYURVEDA and UNANI medical system, in PITTA VIKAR or SIFARAVI madda and therefore it is used in the said related problems.

The medicinal properties features mentined about AMALA, written in the classical books of Ayurveda Materia Medica NIGHANTU, are very near to the LABORATORY findings and analysis done at our research center.

This is an evidence based pesentation of the herbal analysis in AYURVEDIC FUNDAMENTAL PRINCIPLES confirmation.

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शोथारि मन्डूर ; आयुर्वेदिक औषधि का आयुर्वेद के सिधान्तों पर आधारित नवीन आविष्कार की गयी तकनीक द्वारा रासायनिक विष्लेषण ; Shothari Mandur ; an Ayurvedic Medicaments evaluation on the ground of Ayurveda Basic Principles


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शोथारि मन्डूर आयुर्वेद की एक महत्व्पूर्ण औषधि है / यह आयुर्वेद के मनीषियों की दिव्य दृष्टि ही कही जायेगी जो उन्होने लौह यानी Iron की औषधीय निहित द्रव्य गुण को पहिचाना और उसे पूर्ण आरोग्यकारी औषधि का स्वरूप दिया /

आयुर्वेद सार सन्ग्रह पुस्तक में “शोथारि मन्डूर” के गुणों के बारे मे बताया गया है कि यह औषधि यकृत, प्लीहा , पैम्क्रियाज, गाल ब्लैडर, किडनी यानी Liver, Spleen , pancreas, gall bladder , Kidney आदि अन्गों की कार्य विकृति यानी pathophysiology अथवा विकृति यानी pathology से उतपन्न रोगों में और इन रोगों से उतपन्न extension disorders में बहुत गुणकारी और असर कारक है /

यकृत प्लीहा के रोगों के extreme level पर पैदा हो जाने वाली खराबियां यथा शरीर मे सूजन पैदा हो जाना यानी dropsical conditions, ascites, anasarca जैसी बीमारी और इन बीमारियों के कारण पैदा होने वाली associated complaints जैसे बुखार बना रहना, खान्सी का आना, श्वांस का फूलना अथवा asthama like syndromes पैदा होने की अवस्थाओं में शोथारि मडूर का देने का निर्देश है /

इस औषधि का उपयोग उपरोक्त रोगों में बहुतायत से किया गया है और सफलता मिली है /

KPCRAC, Kanpur, India द्वारा आयुर्वेद की आविष्कार की गयी नवीन परीक्षण तकनीक ayurveda-ayush multi-parameter test meter और विशेष रूप से तैयार किये गये chemical reagents द्वारा laboratory में test किये गये शोथारि लौह के परिणामों को ऊपर लोड किये गये पेज में दर्शाया गया है /

विवेचना करने पर त्रिदोश के दोषों मे पित्त सर्वाधिक है और उसके बाद वात तथा सबसे अन्त में कफ है / शोथारि मन्डुर पित्त शामक गुण वाला है और इसका असर भी पित्त स्थानों पर है /

सप्त धातुओ के विश्लेषण में शोथारि लौह सर्वाधिक अस्थि धातु, उसके बाद रक्त धातु, तत्पश्चात, मज्जा, शुक्र, मान्स, मेद और अन्त में रस धातु को cover करती है /

यहां आयुर्वेद सार सन्ग्रह में शोथारि लौह के बारे में बताये गये गुण-कर्म तथा Ayurveda Medicaments Evaluation द्वारा प्राप्त किये गये आन्कड़े लगभग बराबर साम्यता के आभासित होते हैं /

अभी यह सभी आन्कड़े और अध्द्ध्य्यन प्रारम्भिक अवस्था के ही हैं / लेकिन जैसे भी परिणाम मिल रहे हैं, यह सभी परिणाम उत्साह वर्धक हैं /

आर्थराइटिस का पूर्ण आरोग्य आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा द्वारा सम्भव ; ARTHRITIS IS A CURABLE DISEASE IN AYURVEDA AND AYUSH SYSTEM OF MEDICINE


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जोड़ों अथवा Bone-joints से जुड़ी हुयी तकलीफों को Arthritis या गठिया रोग या गठीया-वात आम बोल चाल की भाषा मे कहते हैं / आम तौर पर लोग यही कहते है /

चिकित्सकीय दॄष्टि कोण से arthritis की बीमारी मॊटे तौर पर चार हिस्सों में बान्टते हैं /

पहला ; Muscular Arthritis या जोड़ॊं के आसपास या जोड़ों मे ही स्तिथि मान्सपेशी का दर्द

दूसरा ; जोड़ो के दर्द की ऐसी स्तिथि जिसमें मान्सपेशियों के साथ साथ हड्डियॊ के सन्धि स्थल को जोड़ने और दो हड्डियॊ को जोड़ने वाले ligaments and tendons and periosteum आदि आदि की कार्य-विकृति अथवा विकृति से होने वाले inflammation की वजह से पैदा होने वाले दर्द / इस स्तिथ् को musculo-skeletal arthritis सामन्य भाषा में कहते है /

तीसरा; ऊपर बतायी गयी pathophysiological और pathological तकलीफ में यदि Neurological अथवा Nervous system मी जुड़ जाता है और इस तरह से neurological disorders भी साथ साथ पैदा हो जाते है, तो इसे Neuro=musculo-oteo arthritis भी कहते है /

चौथा; एक स्तिथि ऐसी भी होती है जिसमें जोड़ॊ का रक्त सन्चार बाधित होता है / Oxygenated रक्त जोड़ॊं मे न पहुचने के कारण जोड़ॊं मे विकृतियां होने लगती है और necrosis जैसी स्तिथि पैदा होती है उदाहरण के लिये AVASCULAR NECROSIS / यह भी arthritis की चरम स्तिथि का एक भेद कहा जाता है /
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Cervical spondylitis अथवा Lumber spondylitis अथवा Ankylosing spondylitis यह सब arthritis की श्रेणी मे ही आते है /

आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा विग्यान में आर्थ्राइटिस का इलाज सफलता पूर्वक होता है /

प्रारम्भिक बीमारी अथवा पहले या दूसरे स्टेज की बीमारी पर पूर्ण नियन्त्रण अथवा complete cure हो जाता है / तीसरे स्तर की arthritis अवश्य ठीक होती है लेकिन कुछ नियन्त्रण करने से यह ठीक रहती है / चौथे स्तर की बीमारी में दवा करने और जीवन शैली मे और खानपान में पथ्य परहेज करने से सामन्य स्तर की बनी रहती है और किसी किस्म की तकलीफ नही देती है /

ARTHRITIS से दुखी और पीड़ित सभी मरीजों को चाहिये कि वे आयुर्वेद अथवा AYUSH चिकित्सा पध्ध्यतियों का सहारा ले और स्वास्थय लाभ प्राप्त करें /

आयुर्वेद और आयुष की सभी चिकित्सा पद्ध्यतियों में joints arthritis का बहुत बढिया इलाज है, आयुर्वेद के इलाज से जोड़ो के दर्द शान्त होते है और उन्की बनावट मे जितने भी सुधार होते है , वे सब कुदरती तौर पर improove होते है /

ई०टी०जी० आयुर्वेदा स्कैन और आयुर्वेदा रक्त परीक्षण और आयुर्वेदा मूत्र परीक्षण और आयुर्वेदा थेर्मल स्कैनिन्ग तथा अन्य परीक्षण करने के उपरान्त शरीर की सभी तरह की ARTHRITIS और arthritis जैसी मिलती जुलती सभी तरह के जोड़ो joints की बीमारी का इलाज सफलता पूर्वक किया जा चुका है /

बहुत से लोग घुटना का प्रतयारोपण करा लेते है / इस विषय पर कुछ कहने या लिखने का यह अवसर नही है / लेकिन एक उदाहरण देता हू ; हमारे पूर्व प्रधान मन्त्री अटल बिहारी बाजपेयी ने अपने दोनों घूटनों की प्रत्यारोपण कई साल पहले करा लिया था / अटल जी पिछले कई सालो से दिल्ली की सड़्कों पर पैदल चलते हुये नही देखे गये / जरा विचार करिये अगर घुटना का प्रत्यारोपण बहुत कारगर होता, बहुत सटीक होता और सबसे अच्छा होता तो आज अटल जी दिल्ली और नई दिल्ली की सड़्कों पर हिरन की तरह से कुलाचें भर रहे होते और दौड़ रहे होते /