महिला ३६ वर्ष , जिसे मानसिक डिप्रेशन की तकलीफ थी, आयुर्वेद+होम्योपैथी+एलोपैथी+जीवन शैली के बदलाव द्वारा ठीक होने का केस MENTAL DEPPRESSION ; A CASE OF 36 YEARS FEMALE SUFFERING FROM SEVERE MENTAL DEPPRESSION SINCE 8 YEARS ; MAL-TREATED CASE ; NOW BETTER BY AYURVEDIC AND HOMOEOPATHIC AND ALLOPATHY COMBINATION TREATMENT


A lady aged 36 years belongs to KANPUR , consulted me on 28.08.2013 with severe deppressive menbtal status stage.

My one of Patient, suggested her husband, a U.P. Government employee, to consult me for her MENTAL DEPPRESSIVE STAGES ailment’s TREATMENT.

She came to my clinic in depprressive condition and as I suggested her for an ETG AyurvedaScan examination, she agreed for the test.

महिला का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण किया गया और उसके दूसरे परीक्षण यथा आयुर्वेदा थेर्मल स्कैन्निन्ग और आयुर्वेदा रक्त परीक्षण और आयुर्वेदा मूत्र परीक्षण किये गये /

ETG Findings और दूसरे सभी परीक्षण बहुत चौकाने वाले मिले / होता यह है कि जब किसी मरीज या रोगी का ETG AyurvedaScan परीक्षण करते हैं तो उनसे यह नही पूछा जाता कि आपको क्या तकलीफ है या क्या बीमारी है ? हमारी तरफ से ऐसा जानने का कोई प्रयास नही किया जाता है / अगर रोगी एलोपैथी के टेस्ट या परीक्षण करा कर लाता है या दवा का प्रेस्क्रिप्शन दिखाता है तो देख लिया जाता है , लेकिन यह किसी काम के नही होते है, क्योंकि ETG AyurvedaScan की diagnosis approach भिन्न प्रकार की है और मरीज को जितनी भी या जो भी तकलीफ होती है उसका three domensional अथवा त्रि-आयामी अध्ध्य्यन करते हैं / पहला आयाम वह होता है जो सामने होता है , देखने मे प्र्त्यक्ष होता है अथवा मरीज जितना महसूस करता है और बताता है /

दूसरा आयाम वह होता है जो ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की फाइन्डिन्ग्स बताती है कि रोग किस रास्ते होकर पहले आयाम को reflex करता है और तीसरा आयाम उस जड़ बुनियाद को बताता है जहां से रोग पैदा होकर दूसरे आयाम के रास्ते से होकर पहले आयाम तक पहुन्च रहा है और फाइनल बीमारी को reflex करता है /

इस महिला के साथ बड़ी विचित्र बात यह पैदा हुयी कि इसके सब parameters करीब करीब Normal रहे और ऐसा कुछ भी नही था जो यह इशारा करे कि इसको क्या बीमारी है? निदान के लिये कुछ बीमारियों और anomalies का जिक्रा किया गया, लेकिन वे सब बहुत महत्व पूर्ण नही लगे /

तभी मेरा ध्यान Autonomic Nervous sytem की तरफ गया / यह कुछ abnormal था / इस महिला का UTERUS और मासिक धर्म का parameter abnormal मिला / ऐसे parameter के मिलने से pelvic inflammatory condition जरूर मिलती है /

बहरहाल महिला जब रिपोर्ट लेने आयी तो मैने उससे जितनी भी findings आयी थी उनके confirmation के लिये सवाल किये / उसने यह बताया कि उसके पेट में दर्द होता है लेकिन बहुत अधिक नही /

इलाज के बारे मे पूछा कि पिछले आठ – नौ साल से क्या और किस तरह का इलाज किया गया है ? उसने बताया कि एलोपैथी का इलाज काफी समय तक किया लेकिन कोई फायदा नही हुआ है ? मैने उसकी physical जान्च ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की फाइन्डिन्ग्स को लेकर किया तो पता चला कि उसको किसी तरह के दर्द की अनुभूति नही होती और किसी तरह के sensation का अनुभव नही होता है / यानी उसको तकलीफ painless थी / महिला को न तो दर्द की अनुभूति होती थी और ना उसको किसी तरह की परेशानी थी /

सिवाय इसके कि उसको chest के बीचो बीच ऐसा अनुभव होता है जैसे कोई बहुत प्रेशर से दबा रहा हो / जैसे ही यह अनुभव होते हैं, उसको “बहुत भयन्कर तौर पर घबराहट होने” की बीमारी पैदा हो जाती है / यह घबराहट कई कई दिन यहां तक की महीनों तक बनी रहती है और महिला अपना कुछ काम चाहे वह दैनिक कार्य हो अथवा खाने पीने का अथवा कोई दूसरा और, इस घबराहट से त्रस्त हो जाती है / जब वह फूट फूट कर रोती हैं और कई घन्टे तक ऐसे ही फूट फूट कर रोती रहती हैं तब जाकर उसको कुछ घबराहट से चैन मिल पाता है / यानी घबराहट मे आराम मिल जाती है /

यह बड़ी विचित्र स्तिथी बाली बात रही / यह उत्सुकता वाली बात थी कि इस महिला की बीमारी के बारे मे इसकी History को भी समझा जाय, लिहाजा बचपन से लेकर आज तक की तकलीफों के बारे मे मैने उसको बताने के लिये कहा /

सन्क्षेप में बचपन मे उसको सर्दी जुखाम बुखार आने की शिकायत बनी रहती थी / जब उसकी उम्र ८ साल की थी तब उसे रीढ की हड्डी की कोई तकलीफ हुयी / एलोपैथी का ही इलाज किया गया और किसी दूसरी चिकित्सा का इलाज नही किया गया, ना तो आयुर्वेद का और ना होम्योपैथी का / केवल मात्र एलोपैथी का इलाज किया गया / रीढ की हड्डी का जब इलाज किया गया तो उस समय इस महिला ने बिस्तर पकड़ लिया था और चलने फिरने को मोहताज हो गयी थी / बहुत एलोपैथी का इलाज चला लेकिन कोई आराम नही मिला / अन्त में किसी डाकटर ने T.B. समझ कर इलाज किया उससे कुछ फायदा हुआ / महिला का स्वास्थय नरम गरम चलता रहा और उसने सादी के पहले ही अपनी पी०एच०डी० की पढाई पूरी कर ली /

यह महिला Ph.D. डिग्री होल्डर है / इसका १३ वर्ष का एक लड़का है / नौ साल पहले इसे घबराहट की तकलीफ हुयी थी / जो अभी तक नही ठीक हुयी /

महिला ने बताया कि वह काम करती थी लेकिन उसे थकावट नही आती थी / वह घर पर जी तोड़ मेहनत करती रही लेकिन उसे कभी भी थकावट या थकावट जैसे लक्षण नही लगते थे / उसे कभी भी ज्यादा दर्द का अहसास नही होता था /

घबराहट में भी यह सो जाती है और सुबह आन्ख खुलते ही घबराहट शुरू हो जाती है / जो चौबीसो घन्टे बनी रहती है /

उसकी हालत देखकर मुझे एक पुराना इसी तरह का एक केस याद आ गया जो छह साल पहले इलाज के लिये आया था /

यह एक पुरुष मरीज का केस है जो लगभग इसी उम्र का है / इसके कुल मिलाकर समय समय पर एक दर्जन से ज्यादा ETG AyurvedaScan के परीक्षण हो चुके है / जब फली बार यह मरीज आया और उसका परीक्षण किया उस समय इसे epigastritis तथा hypercidity की शिकायत थी / आयुर्वेदिक इलाज करते करते इस पुरुष मरीज की सब तकलीफें ठीक हो गयी , लेकिन इसके pubic region मे यदा कदा दर्द उठने लगा / जब यह दर्द उठता है तो उसे बहुत जोरों से घबराहट होने लगती है और इस घबराहत के साथ साथ उसकी गर्दन में अकड़न और जकड़न पैदा हो जाती है, इस कारण उसका किसी काम में मन नही लगता है, ऐसा वह शिकायत करने लगा /

मैने इस रोगी की तकलीफ की analysis की / Analysis और सारे लक्षणों की synthesis करने के बाद मैने उसको बताया कि Sigmoid colon से उठने वाले और यहां से autonomic nervous system के रास्ते दिमाग की ओर जाने और आने वाले sympathetic and para-sympathetic signals जिस तेजी से दिमाग की तरफ और दिमाग से sigmoid colon की तरफ आने जाने वाले सिग्नल्स जितनी स्पीड से आते जाते है , वह स्पीड बाधित होती है और इसमे signaling process की गड़बड़ी है जिससे घबराहट और अकड़्न जकड़्न जैसे syndromes , as a result, पैदा हो रहे हैं /

यह निष्कर्ष निकालने के बाद मैने उसको सलाह दी कि यदि वह चाहे तो दूसरे allopathy से जुड़े परीक्शण करा सकता है, जिससे उसको मन की तसल्ली मिल जाये / उसके कहने पर Ultrasound और दूसरे एलोपैथी के परीक्षण भी करा दिये गये, लेकिन सब के सब परीक्षण normal निकले और उसके शरीर में कोई गड़बड़ी नही निकली /

Sigmoid Colon में कया और कैसे गड़बड़ी हुयी, यह पूछने पर मरीज ने बताया कि उसे कई साल पहले Colitis हुयी थी जिसका इलाज allopathy चिकित्सा द्वारा किया गया था / वह तकलीफ तो ठीक हो गयी लेकिन उसके पाचन सम्बन्धित बहुत से विकार पैदा हो गये / मरीज ने बताया कि जैसे जैसे यह विकार आप्की दवा से ठीक होते चले गये वैसे वैसे स्वास्थय मे सुधार होता चला गया /

यह एक ऐसा point था जो Homoeopathy के सिध्धान्त से मिलता जुलता है / होम्योपैथी मे इसे Hering’s Law of Cure कहते हैं / बहरहाल, इस signal obstruction की बीमारी का निदान होने के बाद आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवा से मरीज को आराम मिला है /

यही Signal Obstruction की तकलीफ इस महिला को भी है, ऐसा निदान establish किया गया / इस महिला का obstruction path कहां से चलकर कहा तक जाता है . इस्के लिये कई परीक्षण special electrical scan ETG Ayurveda Scanner द्वारा करने पड़े /
निष्कर्ष स्वरूप मे इस महिला का निदान यह हुआ कि महिला के Uterus मे Endometritis है और इसकी वजह से होने वाले primery anomalies से पैदा inflammatory conditionके सिग्नल्स दर्द की पहचान कराने के लिये autonomic nervous system की parasympathetic और sympathetic nerve path को बाधित करता है और यह सिग्नल thoracic spine तक तो आते है लेकिन उसके बाद इन सिग्नल्स का फैलाव आगे नही बढ पाता है, यह एक तरह की stress condition पैदा हो गयी, इसी कारण से इस महिला को घबराहट की तकलीफ है /

ETGAyurvedaScan  of SPINE and BACK, specially recorded for pin point diagnosis

ETGAyurvedaScan of SPINE and BACK, specially recorded for pin point diagnosis


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महिला होने वाली घबराहट से इस कदर परेशान थी कि वह एक एक दिन में कई बार क्ळीनिक में आने लगी / महिला को होम्योपैथी की दवायें आयुर्वेद की दवायें और एलोपैथी की anti-anxity medicine देनी पड़ी / तीन चार दिन बाद इस महिला को घबराहट मे कुछ आराम मिली /

जब भी महिला क्ळीनिक में आती यह observation में आया कि उसको दिन ब दिन बहुत थोड़ी थोड़ी आराम मिल रही है /

आज के दिन [ दिनान्क ; १९//१०//२०१३ ] को महिला ने बताया कि उसे घबराहट में आराम है लेकिन अब उसे COLITIS पैदा हो गयी है और उसे वही तकलीफे फिर से हो रही है जो उसको आठ साल पहले हुयी थी / और इन बीमारियों का इलाज उसने एलोपैथी की दवाओं द्वारा किया था /

यहां फिर वही Suppressive Disorders सामने आ गये /

इस महिला का इलाज करने से उसकी घबराहट और मानसिक तकलीफें इतने कम समय में कम हो गयीं /

यह महिला कानपुर के मनोवैग्यानिक चिकित्सकों , न्यूरोलाजी के experts , कानपुर मेडिकल कालेज, लखनऊ मेडिकल कालेज और SGPGI. Lucknow के चिकित्सकों का इलाज करा चुकी थी , लेकिन इसे कही से भी relief नही मिली /

यहां Homoeopathy चिकित्सा विग्यान का सिध्धान्त बिल्कुल fit बैठा है , जिसमे बताया गया है कि “Suppression” या “suppressive treatment” करने से कितनी तरह की अनगिनत नयी नयी बीमारियों के syndromes पैदा हो जाते है /

साथ ही आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान का “वात दोष” या “वात दोष और वात भेद” का विवेचन और आय्रुवेद के शास्त्रों मे वर्णित 80 प्रकार के वात रोगॊ का उल्लेख nutshell मे रोगिणी महिला के विकारों का निदान करता है और ऐसे उतपन्न रोगों की चिकित्सा को भी इन्गित करता है /

आयुर्वेद की आधुनिक टेक्नोलाजी ETG AyurvedaScan, Ayurveda Thermal Scan, Ayurveda Blood Test and Ayurveda Urine Test आयुर्वेद के सिध्धान्त निदान और रोग निदान को सटीक बताते है और तदनुसार चिकित्सा करने से अवश्य सफलता मिलती है , वह चाहे जो रोग हो और चाहे जैसा रोग हो, सभी ठीक होते हैं /

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