Determination of constituents of Blood ; रक्त के अन्दर पाये जाने वाले कुछ द्रव्यों का आयुर्वेद की तकनीक द्वारा ग्यात करने का प्रयास


मानव रक्त के अन्दर पाये जाने वाले कुछ ्द्रव्यों का यानी Organic और Inorganic substances को ग्यात करने की विधि का प्रयास KPCARC, KANPUR द्वारा किया गया है / इस कोशिश के नतीजे यद्यपि क्या होन्गे ? यह प्रश्न तो भविष्य के गर्त में ही छुपा होगा /

लेकिन हमारा प्रयास लगातार जारी है / यह ठीक ठीक नही कहा जा सकता है कि results किस तरह के मिल सकते हैं / Research करने के दर्मियान रिसर्च के परिणाम क्या होन्गे, यह सब कुछ दावे के साथ कहा नही जा सकता है /

फिर भी जितने भी रिजल्ट मरीजों के खून की जान्च करने के बाद मिले हैं, वे सभी बहुत उत्साह वर्धक हैं / आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान मे एक तो ऐसे ही कोई खून की जान्च का विधान नही है और न इसका कोई अभी तक आविष्कार ही किया गया है/ यह आयुर्वेद के लिये ऐतिहासिक काल ही कहा जायेगा जब इस तरह की खून की जान्च की आयुर्वेद आधारित जान्च को विकसित करने का प्रयास किया गया है /

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उपरोक्त रक्त परीक्षण की रिपोर्ट एक महिला की है जिसे मान्सपेशियों और घुटनों मे दर्द तथा शरीर के जोड़ॊ मे दर्द की तकलीफ है /

इस महिला का सल्फेट और क्लोराइड और कैल्सियम और मैन्गनीज और यूरिक एसिड सामान्य लेवेल से कम है / वहीं दूसरी तरफ फास्फेट्स और पोटेशियम लेवेल अधिक की ओर हैं / इस तरह की blood picture ARTHRITIS की ओर इशारा करती है /

महिला आयुर्वेद के सिध्धान्तो के अनुसार वातज – पित्तज दोष से ग्रसित है /

यहां यह देखने वाली बात होगी कि किस constituents of BLOOD के combination के बनने से क्या निष्कर्ष आयुर्वेद के त्रिदोष सिध्धान्त को मिलाकर और matching करके कैसे निकाला जा सकता है और क्या ऐसे combination के सम्बन्ध हो सकते है ????

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दूसरी रिपोर्ट एक २३ साल के नवयुवक की है जिसे कई तरह की तकलीफे हैं जिन्हे यहां बताना उचित नही होगा / मरीज की प्रायवेसी को देखते हुये बहुत कुछ नही बताया जा रहा है, लेकिन इशारे के लिये इतना कहना काफी है कि इसे बाजीकरण और रसायन और ध्वज भन्ग ्से सम्बन्धित विकार है /

इस मरीज के सल्फेट्स और क्लोराइड और सोडियम और कैल्सियम और मैग्नेशियम कम की ओर आये हैं तथा फास्फेट और पोटेशियम अधिक की ओर आये हैं /

इस मरीज के electrolytic imbalances पित्तज और कफज विकार की ओर इशारा करते हैं /

इन मरीजो को दोषानुसार औषधियां बता दी गयी है / 90 दिन दवा सेवन करने के बाद इन मरीजों को पुन: review करने के लिये बुलाया है , दुबारा रक्त परीक्षण के बाद ही पता चल पायेगा कि रक्त की जान्च की कया स्तिथि है ?

अभी रक्त परीक्षण की जान्च केवल निदान ग्यान के लिये ही किया जा रहा है, मरीज के स्वास्थय की monitoring भी इसके माध्यम से की जा रही है / जैसा कि research procedure होते हैं , उनमें काम करना आसान नही होता है, जबकि इस तरह के रिसर्च कार्य सन्सथागत स्तर पर न किये जा रहे हों /

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एक टिप्पणी

  1. धनतेरस पर यह समाचार ईटीजी की एक सार्थक पहल की ओर इशारा दे रहा हैं. इस प्रकार के अनुसंधानों की बहुत बड़े पैमाने पर पूरी दुनिया मे हों .खोजों का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे तभी उनकी सार्थकता है

    ………..उत्तर………..ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के साथ साथ आयुर्वेद का रक्त परीक्षण और आयुर्वेद का मूत्र परीक्शण तथा आयुर्वेद का थेर्मल परीक्षण आधुनिक काल की आयुर्वेद की तकनीके है जिनके माध्य्यम से आयुर्वेद को वर्तमान तथा भविष्य काल में ्वैग्यानिक तकनीक के जरिये वही स्थान प्राप्त हो सकता है जो आधुनिक चिकित्सा विग्यान को हासिल है /

    खोजों का लाभ तभी हो सकता है जब खोजी लोग हो और खोज करने के काबिल हों / इतिहास बताता है कि आइन्सटाइन दुनिया को गति का सिध्धान्त देने वाले पहले वैग्यानिक थे जिन्होने सेव के बगीचे मे गिरते सेव को देखकर गति का सिध्धान्त स्थापित किया जिसे अपनाकर मान्व समाज पृथ्वी से बाहर निकल कर अन्तरिक्ष तक जा पहुचा है /

    आयुर्वेद मे जब तक ऐसे लोग नही आयेन्गे तब तक कुछ नही हो सकता है / यह कब तक चलेगा कि आयुर्वेद के लोग वही घीसी पीटी बाते करे और गाल बजाते रहे और आलोचना करते रहे और काम के नाम पर शून्य रहे और यह अपेक्षा करें कि कोई आकर उनकी स्तिथि सुधार दे /

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