महीना: नवम्बर 2013

AYURVEDA BLOOD TEST ; DIAGNOSIS OF DISEASE AND AYURVEDA FUNDAMENTALS THROUGH RECENTLY INTRODUCED AYURVEDA HI-TECHNOLOGY BLOOD TEST ; आयुर्वेद रक्त परिक्षण की आधुनिक हाई टेक्नोलाजी द्वारा रोग निदान और आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तों का निदान


भगवान धन्वन्तरि देव के आशिर्वाद और हमारे रिसर्च केन्द्र मे हो रहे अधुनातम प्रयोग और प्रयास द्वारा वह सम्भव हो गया है , जिसे अभी तक असम्भव माना जाता था /

पिछले कुछ सालों से रक्त परीक्षण द्वारा आयुर्वेद के fundamentals तथा इसके साथ साथ रोग निदान की विधि को विकसित करने के लिये हमारे रिसर्च केन्द्र में रोगियों पर परीक्षण किये जा रहे थे / जिसके बारे मे समय समय पर इस ब्लाग द्वारा सुधी पाठकों तक जानकारी उपलब्ध करायी जाती रही है / अब यह सम्भव हो गया है कि रक्त परीक्षण के द्वारा वात , पित्त और कफ की intensity level का ग्यान तथा त्रिदोषों के पान पान्च भेद और सप्त धातुओं का अन्कलन रोगी के रक्त परीक्षण द्वारा ग्यात कर सकते हैं /

नीचे दिये गये एक रोगी के रक्त परीक्षण की रिपोर्ट दी गयी है, इसका सुधी जन अवलोकन करें /

यह रोगी जिसकी उम्र ४५ साल की है , लगभग बीस साल से पहले non-bleeding और फिर बाद में bleeding piles से पीडित रहा है / आयुर्वेदि और होम्योपैथिक इलाज से इसको बहुत आराम मिली और साल में एक आध बार हल्की फुल्की तकलीफ होती रहती थी , जो आयुर्वेदिक अथवा होम्योपैथिक दवा लेने से ठीक हो जाती थी / पिछले एक माह से इसको फिर तकलीफ हुयी और इसने बहुत इलाज कराया लेकिन इसे इसकी bleeding piles मे कोई आराम नही मिली / इसने इस एक माह के अन्दर allopathy and ayurveda and homoeopathy आदि सबका इलाज कराया , लेकि इसे कोई भी आराम नही मिली /

एक पहले के मरीज जो अपनी पत्नी का “मानसिक बीमारी” का इलाज करा रहे है और उनकी पत्नी अब ठीक है, वे इस मरीज को अपने साथ दवा कराने के लिये आये / मरीज की आर्थिक स्तिथि अच्छी नही है , इसलिये मैने उसको सलाह दी कि रक्त के परीक्षण से उसको क्या अन्दरूनी तकलीफ हो रही है, यह पता चल जायेगा /

मरीज का परीक्षण किया गया , जिसकी रिपोर्ट नीचे दी गयी है /

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ऊपर की आयुर्वेद रक्त परीक्षण रिपोर्ट देखने से पता चलता है कि इस मरीज का पित्त दोष सामान्य से अधिक है , पित्त दोष सामन्यत: ४६ से ७५ /ahmv निर्धारित किया जा चुका है , इस पैरामीटर को establish करने में कई सौ मरीजों का रक्त परीक्षण करने के उपरान्त normal range निर्धारण किया गया है , जो हमारे द्वारा की गयी रिसर्च के हिसाब से सही और उचित प्रतीत होती है / सभी मानकों की प्रक्रिया जिस तरीके से नोर्मल लेवेल को establish करने के लिये की गयी है , वही अपनाया गया है /

इस मरीज का कफ दोष अधिक की ओर है / इस तरह त्रिदोष के दो दोष पित्त और कफ इस मरीज के बढे हुये हैं / ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के पएईक्षण अनुभव में यह बात सामने आयी है कि जब पित्त और कफ के सम्मिलित combination एक निश्चित अनुपात मे बनते है तो यह डायबिटीज की बीमारी की ओर इशारा करते हैं / अधिकतर ९६ प्रतिशत रोगियों मे यह combination देखकर अनुभव मे आया है कि मरीज को high blood sugar level की बीमारी होती है / इस रोगी की blood sugar जान्च की गयी तो यह fasting में 156 mg/dl निकली / मरीज को पता ही नही चला कि उसको high level blood sugar की तकलीफ भी है /

आयुर्वेद के रक्त परीक्षण में रस धातु सामान्य से कम और मान्स धातु सामान्य से कम और मज्जा धातु सामान्य से कम निकले , लेकिन शुक्र धातु सामान्य से अधिक निकली / जिन रोगियो के शुक्र धातु अधिक intensity level measure होकर आती है उनमें यह देखा गया है कि ऐसे मरीजों को गुदा से सम्बन्धित बीमारियां होती है / रस , मान्स और मज्जा के कम आन्कलन होने से रोग अधिक बलशाली होते है / अध्ध्यन करने के बाद यह बात स्पष्ट होकर सामने आयी है कि जब प्राप्त measured data डाटा सामान्य से कम होते हैं तो यह dull reaction अथवा hardness को show करते हैं, लेकिन अधिक की ओर आने वाला डाटा inflammatory condition को show करता है / शुक्र धातु के अधिक होने से यह तो स्पष्ट हो गया कि इस रोगी को गुदा के विकार हैं /

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आयुर्वेद की इस खोज की गयी रक्त परीक्षण तकनीक के जरिये CONSTITUENTS OF BLOOD के बारे मे जानकारी प्राप्त हो जाती है / रक्त में उपस्तिथि सल्फेट्स, टोटल फास्फेट्स, क्लोराइड, पोटैशियम, सोडियम, कैल्सियम, आयोडीन, आयरन, क्यूप्रम, मैग्नेशियम, अमोनिया,यूरिक असिड, क्तियेटीन, और यूरिआ का भी पता चल जाता है / हलान्कि अभि इस तरह के टेस्ट को confirmatory टेस्ट नही कहा जा सकता, लेकिन रोग निदान में यह टेस्ट अपनी भूमिका सहायक के रूप में निभाते हैं / इस तरह पता चल जाता हि कि gross level पर रोगी की क्या बीमारी हो सकती है ? इस तरह के data से मरीज के diet management मे भी सहायता मिल जाती है / आयुर्वेद के इस Test को अधिक accurate करने के लिये लगातार परीक्षण किये जा रहे हैं /

Constituents of blood मे सल्फेट अधिक निकला है, क्लोराइड अधिक निकला है और क्यूप्रम [ताम्बा] अधिक निकला है / टोटल फास्फेट और सोडियम और कैसियम और आयरन और मैग्नेशियम और अमोनिया और यूरिक एसिड और क्रियेटीन सामन्य से कम है / लेकिन इन सबमे बहुत ज्यादा normal level के अनुपात में बहुत अधिक अन्तर नही निकला है , इसलिये इनमे से बहुत से पैरा मीटर को सामान्य समझा गया है जैसे क्रियेटीन, यूरिक एसिड, अमोनिया, मैग्नेशियम, सल्फेट जैसे तत्वों को सामान्य ही समझा जाना चाहिये /

विशेष तौर पर टोटल फास्फेट, क्लोराइड, सोडियम, क्यूप्रम ये तत्व सामान्य से बहुत कम या बहुत अधिक पहचाने गये है और इसीलिये इन तत्वों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि मरीज को लीवर की सूजन है और Liver Pathology उपस्तिथी है / अध्ध्य्यन मे पता चला कि क्यूप्रम के अधिक लेवल हो जाने के कारण LIVER की बीमारी होती है / मरीज का लीवर जान्चने पर पता चला कि उसका लीवर बढा हुआ है / अध्ध्य्यन मे यह पाया गया है कि जब chloride level बढता है तब शरीर मे सूजन अवश्य होती है चाहे वह किसी भी हिस्से मे हो / आन्तों की चाहे वह बड़ी आन्त हो या छोटी आन्त , इसकी सूजन अथवा inflammatory condition जब होती है तब सोडियम लेवल कम होता है, ऐसा अध्ध्य्यन मे पाया गया है /

मरीज की Ayurveda Blood Test की इस findings को लेकर इलाज किया जा रहा है , मरीज को आयुर्वेद की औषधियां दी जा रही है और close watch observation मे रख कर further studies की जा रही है /

04/12/2013

इस रोगी को हमारे द्वारा अपने यहां से आयुर्वेदिक दवाये dispense की गयी थी / कुच विशेष अवस्थाओं और परिस्तिथियों में यथा रात में जब दवायें न उपलब्ध हों और छुट्टी के दिन जब मार्केट बद हो तब इन परिस्तिथियों मे अपनी dispensary से दवा देना आवश्यक होता है अथवा जब मरीज की हालत ऐसी होती जहां बार बार दवाओं को बदलने की आवश्यक्ता मरीज की हालत के अनुसार बदलने की हो जाती है तब दवाये अपनी डिस्पेन्सरी से देना ज्यादा सहायक होता है / इस मरीज को अपनी dispensari से दवाये दी गयी थी /

तीन दिन की दवा से इस मरीज का रक्त आना बन्द हो गया और उसकी स्तिथि सामान्य है / उसकी हालत बेहतर है और ठीक है /

CONCLUSION:

निष्कर्ष के तौर पर अब यह कहा जा सकता है कि आयुर्वेद के इस नये आविष्कार के द्वारा मरीज की तकलीफो का pathological basis को आधार बनाकर और तदनुसार आन्कलन विवेचन करके सटीक, अचूक और प्रभाव शाली आयुर्वेदिक आयुष इलाज की व्यवस्था की जा सकती है जो त्वरित और टिकाऊ और स्थायी आरोग्य देने में सक्षम साबित हो /

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ACUTE KIDNEY FAILURE PROBLEMS ASSOCIATED WITH RESPIRATORY TRACT AND DIGESTIVE TRACT AND BLOOD ANOMALIES ; खराब अथवा फेल हो रहे गुर्दे के साथ साथ होने वाली श्वसन सन्स्थान तथा पाचन सन्सथान तथा रक्त दूषण की समस्यायें


गुर्दा यानी KIDENEY की बीमारियों के शुरु होने से पहले अथवा यह कहा जाय कि जब गुर्दा के फेल होने की बीमारी की शुरुआत होती है या शुरु होने का क्रम होता है तब शरीर के अन्दर कुछ लक्षण पैदा होने लगते हैं / इन्हे बहुत शुरुआती लक्षण कह सकते है जो समय बीतने के साथ साथ बढते चले जाते है और अन्त में जब गुर्दा काफी हद तक फेल होने लगते है और तब जान्च की जाती है तब पता चलता है कि kidney कितनी फेल हो चुकी है /

गुर्दा फेल होने वाले मरीजों के रोग-इतिहास के सन्कलन में यह बात सामने आयी है कि जिन मरीजों के गुर्दा फेल हुये है उनको पता ही नही चला कि कब उनको गुर्दे की बीमारी हुयी और उनको गुर्दा अकस्मात या अचानक फेल हो गया /

जब कि यह भी सत्य है कि अगर इन मरीजों का इलाज करने वाले चिकित्सक थोड़ी सी भी सावधानी का ख्याल करते तो फेल होने वाले गुर्दे के मरीजों को अकाल मौत से बचाया जा सकता था /

जिन मरीजों के गुर्दे फेल हुये है उन मरीजों ने अपने शुरुआत के लक्षण और बीमारियां इस प्रकार से बतायी है ;

१- कुछ मरीजों ने बताया कि उनको शाम को बुखार आने लगा, जिसका इलाज किया गया और इलाज करने से बुखार ठीक हो गया / बुखार ठीक होने के बाद उनको पाचन या digestion की समस्या होने लगी, उनको खाने के बाद गैस बनने लगी / गैस की बीमारी की दवा लेने के बाद उनको पेशाब की तकलीफ पैदा हो गयी / ऐसा क्रम बढता हुआ चला गया / यानी बुखार आने का क्रम जल्दी जल्दी होने लगा, यही बुखार बाद मे मलेरिया
बुखार जैसे लक्षण देने लगा / टेस्ट मलेरिया का कराने पर मलेरिया निल निकला, डेन्गू के टेस्ट और दूसरे टेस्ट कराये गये सब normal निकले / डाक्टर ने कहा बता नही सकते कि न्या बीमारी है ? महीनों बुखार आता रहा , अन्ग्रेजी दवा खाने से बुखार ठीक होता था लेकिन फिर जल्दी जल्दी आने लगा / बाद मे उलटिया यानी Vomitting शुरु होने लगी . दवा खाने पर आराम मिलती रही , एक दिन पेट मे बहुत दर्द हुआ / डाकटर द्वारा अल्ट्रा साउन्ड Ultrasound और खून की जान्च कराने पर पता चला कि गुर्दा खराब है , blood test से पता चला कि गुर्दा 70% प्रतिशत damage हो गया है /

2-कुछ रोगियों ने बताया कि उनको उल्टी होने की शिकायत हुयी / भोजन करने के बाद उनको उल्टी यानी vomitting होने लगी / उल्टी की दवा लेने के बाद कुछ राहत मिली , लेकिन बाद मे अधिक उल्टियां होने लगी और इसके साथ साथ पेट मे दर्द भी रहने लगा / पेशाब कम होने लगी / जितना पानी पीते थे उससे अनुपात में पेशाब कम होने लगी, इसके साथ पानी जैसे पतले दस्त भी होने लगे / डाक्टर से सलाह ली तो उसने कहा colitis के कारण पेट मे दर्द है और इसी कारण से पतले दस्त आ रहे है / दवाये खाने से जब आराम नही मिला तथा तकलीफ और ज्यादा बढ़ गयी तो फिर अल्ट्रासाउन्ड और blood test करये गये , जिससे पता चला कि kidney खराब होने की शुरूआत हो गयी है /

३- कुछ रोगियों ने बताया कि उनको सिर मे दर्द होता था इस कारण वे किसी मेडिकल स्टोर से सिर दर्द की दवा लेकर खा लेते थे / दिन में कई कई बार सिर दर्द होने लगा तो उसी अनुपात मे दर्द की दवा लेते रहे / जब भयानक सिर दर्द होने लगा तब डाक्टर को दिखाया गया / डाक्टर ने टेस्त कराये तब जाकर पता चला कि गुर्दा खराब हो गये है/

४- कुछ रोगियों ने बताया कि वे लगातार शारीरिक श्रम करते रहे, मेहनत का काम करते रहे, भूखे प्यासे रहकर भी काम करते रहे / पानी नही मिला , प्यासे ही रहकर काम करते रहे / ऐसा चिल्चिलाती गर्मी के दिनो का हाल था और भीषण गर्मी के दिनों की बात है / बुखार आया , बुखार का इलाज किया, लेकिन पैरों मे सूजन आन्खों में सूजन आने लगी / इसके साथ जाड़ा देकर बुखार आने ल्गा / मलेरिया की दवा खाते रहे और सूजन उतारने की दवा खाते रहे / बाद मे Diarrhoea शुरू हो गया और पेचिस जैसा होने लगा / भोजन की भूख खतम हो गयी और २४ घन्टे मे पेशाब भी कम आने लगा / जान्च कराने पर पता चला कि गुर्दा फेल हो गया है /

दो ऐसे वाकयात है , जिनमें मैने मरीज के तीमार दारों को बताया कि उनके रोगी की kidney fail हो रही है / यद्यपि दोनों ही रोगी मेरे मरीज नही थे, किसी दूसरे डाकटर का इलाज चल रहा था , यह तो अचानक मै उनके यहां जा पहुन्चा और sign और syndromes दोनों देखकर मैने कहा कि इनकी Kidney fail हो चुकी है /
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पहला वाकया लगभग २५ साल पहले का है , जो कानपुर के एक स्थानीय सरकारी अस्पताल में का्र्य-रत मेडिकल आफीसर की माता जी का है / मेडिकल आफीसर मेरे मित्र की बुआ सास थी / मेरे मित्र की पत्नी और मेरे मित्र , वही अस्पताल कम्पाउन्ड में बने कैम्पस के बन्गले में रहते थे / एक दिन मै यूं ही अस्पताल के सामने से निकला और मैने सोचा कि अपने मित्र से मिल लूं /

जब मै बन्ग्ले के सामने पहुन्चा और अपना स्कूटर स्तैन्ड में खड़ा किया तभी मेरी निगाह वहां उपस्तिथि मेडिकल स्टाफ और डाक्टरों पर पड़ी / अवाजाही का माहौल था/ मेरे मित्र अन्दर से मुझे देखकर बाहर आये और बताया कि दादी सास यानी बुआ सास की माता जी बीमार है और डाक्टर नही समझ पा रहे है कि इनको क्या बीमारी है/ वहां सभी मुझसे senior DOCTORS उपस्तिथि थे / अस्पताल के जितने भी expert DOCOTRS थे सब बुला लिये गये थे / माहौल बड़ा Tense था / मै वापस जाने लगा तो मेरे मित्र ने कहा कि आप भी देखिये और समझिये कि दादी सास को क्या बीमारी है / उनके साथ में कमरे मे गया , वहां सभी डाक्टर चारपायी को घेरे खड़े थे, उनका para-medical staff भी मौजूद थी / मै सबसे पीछे खड़ा हो गया / आपस में डाकटर अपना पना कयास लगा रहे थे कि आखिर इतनी अच्छी से अच्छी दवा देने के बाद भी मरीज के पतले दस्त क्यों नही रुक रहे हैं ? १० – १५ मिनट तक मै मरीज को देखता रहा, सबकी बातें सुनता रहा , मेरे मित्र ने मुझसे पूछा कि आप्की समझ में क्या आया ? मैने कहा कि इनका गुर्दा फेल हो गया है और खून में creatinine बढने के कारण यह स्तिथि है ? हलान्कि यह opinion मैने बहुत धीमे स्वर से अपने मित्र को बताया , लेकिन आगे खड़े एक senior Doctor ने सुन लिया / उन्होने पीचे मुड़कर मेरी तरफ देखा और कुछ क्रोधित होकर बोले, “यह आप कैसे कह सकते है कि इनकी KIDNEY FAIL हो रही है ? आप है क्या ? ” वे कुछ ज्यादा जोर से बोले, मै घबरा गया / सबकी निगाहें मेरी तरफ थी / मेरे मित्र ने सबको बताया कि ये डा० बाजपेयी है और इन्होने Germany मे जाकर भी चिकित्सा विग्यान की पढायी की है / मैने बहुत विनम्रता के साथ बताना शुरू किया कि रोगी को पतले दस्त गुर्दा खराब होने के कारण हो रहे है और इसी कारण सारा इलाज बेकार साबित हो रहा है / आपके पास इतना बड़ा अस्पताल है , अभी इनका क्रियेटिनीन चेक करा ले सब पता चल जायेगा / तुरन्त pathologist बुलाया गया, blood sample लिया गया / इसके बाद मै अपने काम के लिये चला गया / शाम को जब मै अपने घर वापस हो रहा था तो मै फिर अपने मित्र के पास पहुन्चा, क्यों कि मुझको भी बहुत उत्सुकता थी कि मेरी डायग्नोसिस सही निकली अथवा गलत / मेरे मित्र बाहर बैठे थे, उन्होने देखते ही कहा , डाक्टर आपकी डायग्नोसिस सही निकली / दादी सास का गुर्दा फेल हो रहा है /

दूसरा केस मेरे एक परिचित की माता जी का है / परिचित की माता जी को इसी तरह की शिकायत थी / किसी सीनियर डाक्टर का इलाज कर रहे थे / मुझे सारी बात बतायी / मैने कहा कि उनके रक्त के अमुक अमुक टेस्ट करा ले / इन टेस्टों में लीवर और गुर्दा के भी TESTS थे / रक्त परीक्षण की जान्च मेरे मित्र ने दिखाई तो सभी test सामान्य नही निकले / Creatinine, SGPT, Blood Urea. Bilirubin सभी असामान्य थे / मित्र ने यह रिपोर्ट जब treating physician को दिखाया तो उन्होने इसके लिये मुझे appreciate किया और वे इस तरह की चूक के लिये बहुत सम्वेदना जाहिर कर रहे थे /

हलान्कि ऐसी चूक कोई भी डाक्टर जान बूझकर नही करता है / मुझसे यदि कोई मरीज अपनी स्वेच्छा से कहता है कि मै सभी तरह के टेस्ट कराने के लिये तैयार हू तो मै अवश्य वह सभी TEST करा देता हू जो उसके लिये जरूरी होते है / बाद में भी अगर जरूरत पड़्ती है तो वो सभी टेस्ट और scans करा देता हू , और इसमे किसी तरह की कोई चूक नही करता हू / मरीज के लिये जरूरी सभी SCANS और सभी pathological examination कराने से रोग निदान और रोग क्या और कैसा है , यह सब जानने और समझने मे सटीक मदद मिलती है /

जैसे जैसे kidney अधिक फ़ेल होने की तरफ बढती है तब बुखार आना , उल्टी होना, पतले दस्त , शरीर का सूखते जाना, भयानक कमजोरी आने लगना, चलने फिरने से मोहताज , भूख न लगना, मुह से बदबू आने लगना, मुख का स्वाद समाप्त होना, मिचली का बार बार आना, बहुत सेमरीजों को स्वांस और asthamaa जैसे RESPIRATORY TRACT की तकलीफ के लक्षण समूह आदि लक्षण पैदा हो जाते हैं / जिनसे यह भ्रम पैदा होने लगता है कि कहीं यह दमा का दौरा तो नही पड़ गया है / हृदय की धड़कन बढ जाती है और यह सभी ऊपर बताये गये लक्षण समूह बढते रहने के अनुपात में और ज्यादा दिन पर दिन severe होते जाते हैं / इस प्रकार kidney failure में digestive system / Gastro-intestinal system तथा Respiratory Tract Disorders और गुर्दे के फेल होने के कारण से Body TOXINES शरीर के अन्दर से बाहर न निकलने के कारण मरीज की हालत मरणासन्न हो जाती है /

जब kidney का इलाज करते है और kidney की तकलीफ मे improvement होने लगता है तो यही सब syndromes कम होने अथवा ठीक होने के अनुपात में कम से अधिक कम होने लगते है /

E.T.G AyurvedaScan तथा आयुवेद के अन्य परीक्षणो पर आधारित आयुर्वेद – आयुष चिकित्सा से KIDNEY FAILURE के मरीजों को आरोग्य प्राप्त होता है / अगर क्रियेटीन स्तर CREATININE LEVEL 5.5 yaa 6.0 mg/dl है तो आयुर्वेद चिकित्सा द्वारा एक सीमा तक आरोग्य प्राप्त किया जा सकता है / हमने बहुत प्रयास किया कि creatinine level मरीज का normal level को प्राप्त कर ले , लेकिन ऐसा नही हो सका , बल्कि creatinine level २ अथवा २.५ मिली ग्राम से नीचे कम नही कर पाये /

बहुत Severe condition में डायलीसिस कराने के अलावा कोई रास्ता नही बचता है / जब डायलीसिस भी नही हो पाती तब kidney transplant के अलावा कोई दूसरा रास्ता नही बचता है /

सबसे बेहतर है कि KIDNEY की बीमारी पैदा होने से पहले ही बचाव किया जाये / इसलिये खुद के स्वास्थय के बारे मे सतर्कता बरतनी चाहिये / कहा भी गया है कि PREVENTION IS BETTER THAN CURE .
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डायबिटीज ; रक्त शर्करा ; खून में व्याप्त सूगर ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज ; Diebeties ; Blood Sugar ; Glycosuria ; E.T.G. AyurvedaScan based treatment


विश्व डायबिटीज दिवस पर experts डाक्टर्स के विचार पढने और समझने के लिये मिले / बहुत कुछ अखबारों में भी छपा और इस बारे मे जागरुकता जाहिर करने के उद्देश्य से उत्साहित लोगों ने रैलियां भी निकाली और लोगों को डायबिटीज से कैसे बचा जाय , यह सम्झाने के साथ साथ कुछ ऐसे भी उपदेश देने से नही भूले जो हरेक के लिये हितकारी साबित हों /

लेकिन इसके ठीक उलट जहां विद्वान डाक्टर अपने ग्यान से देश के आम नागरिक को डायबिटीज के बारे मे ठीक ठीक और सही सही बात बताने में पीछे नही है वहीं बहुत से ऐसे चिकित्सक हैं जो डायबिटीज हो या न हो अथवा नही भी होती है तो भी रोगी को या व्यक्ति को इस तरह से मानसिक रूप से घबड़्वा देते है या डरा देते हैं जैसे उनको डायबिटीज न हो गयी हो कुछ ही सेकन्ड में प्राण लेवा बीमारी हो गयी हो /

ऐसे बहुत बड़ी सन्ख्या में मरीज मिले हैं जिनको डायबिटीज नही थी लेकिन उनको बता दिया गया कि उनको डायबिटीज है और उनको INSULIN भी लगनी शुरू कर दी गयी जिससे मरीज की हालत मरणासन्न हो जाती है / अब ऐसे चिकित्सक बन्धुओं को क्या कहा जाय , जो मरीजों के साथ इस तरह का व्यवहार करते हैं ?

कई मरीज मिले जिनको डाक्टरों द्वारा गलत जानकारी दी गयी / उनको भोजन करने के बाद PP Sugar के बारे मे बताया गया कि २०० मिलीग्राम सूगर लेवल में २० यूनिट सुबह और १५ यूनिट शाम को INSULIN लगाना चाहिये, इस तरह की सलाह दी गयी / मरीजों ने भी वही किया जो डाकटर ने बताया, जब हालत खराब हुयी तो नर्सिन्ग होम में भरती करा दिया / फिर जो हुआ वह सभी जानते हैं /

इस तरह की गलत सलाह से बहुत से रोगी गम्भीर बीमारियों के शिकार हो चुके हैं /
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दुनियां मे सबसे अधिक डाक्टरों के बीच में Practice of Medicine की दो किताबें प्रचिलित है, जिन्हें डाक्टरी की सर्वोच्च डिग्री के लिये पढना जरूरी होता है / यह दो किताबे हैं ;
१- Harrison’s INTERNAL MEDICINE और दूसरी
२- TEXT BOOK OF MEDICINE by Bee & Derm
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इन पुस्तकों की सबसे खास बात यह है कि जिस बीमारी के बारे में चर्चा की गयी है और उस बीमारी के बारे मे जानकारी दी गयी है , वह chapter या लेख उस बीमारी के बारे में जानकारी रखने वाले दुनियां के सर्वोच्च और सुपर एक्सपर्ट द्वारा लिखी गयी है / बात साफ है जब दुनिया का सबसे बेहतर डाक्टर बीमारी के बारे मे बता रहा है तो इसका मतलब है कि जितनी जानकारी दी जा रही , वह शत प्रतिशत सही होगी / अगर इसके अलावा कोई डाक्टर अपनी बनायी हुयी मनमानी theory बता रहा है तो इसे क्या कहा जायेगा ?
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TEXT BOOK OF MEDICINE के इस पेज में देखिये , जो डायबिटीज के बारे मे बताया गया एक शुरुआती विवरण है / इसे ध्यान से देखिये और पढिये / मै आपका ध्यान इस पेज के HISTORY वाले टाइटिल पर ले जाना चाहता हू /
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ऊपर के पेज मे जरा गौर से देखिये कि डायबिटीज के इतिहास HISTORY में क्या खास बात लिखी गयी है ?

यह हम सभी भारतीयों के लिये गर्व की बात है कि डायबिटीज बीमारी को दुनियां में सबसे पहले जानने और पहचानने के लिये और डायबिटीज बीमारी का सटीक इलाज और तदनुसार पथ्य परहेज , जीवन शैली आदि मैनेज करने और अन्य तरीके ढून्ढ लेने का सबसे पहला प्रयास हम भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सको का रहा है / इस HISTORY मे उल्लेख किया गया है कि चरक और सुश्रुत ने इस बीमारी की पहचान की /

भारतीय चिकित्सा विग्यान आयुर्वेद की रोग निदान ग्यान का मूल साहित्य “माधव निदान” मे ’प्रमेह’ के बारे में बहुत सी जानकरी दी गयी है , जो आजकल के प्राय: सभी चिकित्सा ग्रन्थों में जस का तस मिलती है / मूल रूप से बीमारी के cardinal symptoms या मूल लक्षण आयुर्वेद के चिकित्सा ग्रन्थो में मिल जाते है जो रोग निदान में सहायता करते हैं और खास diagnosis की तरफ इशारा करते हैं /
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प्रमेह यानी Diebetic syndromes के बारे मे भी इसी तरह से बहुत विस्तार से रोग की पहचान के लिये माधव निदान ग्रन्थ में विस्तार से बताया गया है / यह ठीक उसी तरह की वही observation की प्रक्रिया के results की तरह है जैसा कि evidence based phenomenon के बारे मे बताया जाता है / प्रमेह के बारे मे आयुर्वेद के चिन्तकों नें बहुत विश्लेषण के साथ प्रमेह के प्रकार और उनकी आयुर्वेद के दोष धातु के निदान को दृष्टि गत रखते हुये जिस प्रकार से वर्णन किया है , यह सब उनके प्रयोगात्मक ग्यान को उजागर करता है /
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प्रमेह यानी मधुमेह के रोग निदान के पश्चात जब रोग निर्धारण पक्का हो जाता है तो आयुर्वेद की चिकित्सा और तदनुसार पथ्य परहेज बताने और रोगी द्वारा पालन करने से Diabetes का रोग अवश्य ठीक होता है /
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हमारे रिसर्च केन्द्र में Diebetes के रोगियों का इलाज ETG AyurvedaScan आधारित रिपोर्ट द्वारा सफलता पूर्वक किया जाता है और लगातार किया जा रहा है / यहां Diebetes पर की गयी शोध के परिणामो को जब प्रकाशित किया गया तो चिकित्सक समाज में इस तरह की फाइन्डिन्ग्स को लेकर बहुत आलोचना की गयी और इस तरह की की गयी शोध की खिल्ली उड़ाई गयी /

KPCARC में की गयी शोध में निम्न मुख्य बातें बतायी गयी है , जो डायबिटीज के रोगियों में पायीं गयी ;
१- शोध मे बताया गया कि ” डायबिटीज” की बीमारी पैदा करने के लिये पैन्क्रियाज ही अकेले जिम्मेदार नही है /
२- शरीर के अन्य Organs, Diebetes पैदा करने के लिये भी जिम्मेदार है /
३- शोध मे बताया गया कि LIVER anomalies के कारण से भी Diebetes पैदा होती है /
४- शोध मे यह बताया गया कि बड़ी आन्त और छोटी आन्त की pathophysiology के कारण से भी डायबिटीज पैदा होती है /
५- शोध में बताया गया कि आयुर्वेद के मूल सिध्धान्त यथा त्रिदोष भेद के दो भेद पाचक पित्त और रन्जक पित्त की गड़्बड़ी से , जो दो अन्गो से मिलकर बने है यथा chole-pancreatic और Hepato -spleeno combination के रुप मे होते है और इन दोनों अन्गों की pathophysiology के कारण डायबिटीज पैदा होती है /
6- अन्य दूसरे कारणॊ का उल्लेख भी किया गया था /

डायबिटीज के बारे में केपीकार्क KPCARC KANPUR, INDIA द्वारा किये गये इस तरह के शोध कार्य पर तब सत्यता की मोहर लग गयी जब जापान के एक विश्वविद्यालय द्वारा यह रिसर्च परिणाम निकाले गये कि “डायबिटीज रोग के पैदा होने के लिये अकेले पैन्क्रियाज जिम्मेदार नही है , बल्कि काफी हद तक LIVER की प्रक्रिया भी डायबिटीज को पैदा करने के लिये जिम्मेदार होती है ” /

इसके कुछ समय बाद आस्ट्रेलिया के चिकित्सा वैग्यानिकों द्वारा किये गये शोध अध्ध्य्यन से निश्कर्ष निकाला गया कि डायबिटीज का रोग “बड़ी आन्त” की patho-physiology ्से भी पैदा होता है /

कई माह बाद ब्रिटिश चिकित्सा वैग्यानिकों ने शोध अध्ध्य्यन में बताया कि “छोटी आन्त” की patho-physiology से डायबिटीज रोग होता है /

हमे खुशी इस बात की हुयी कि हमारे द्वारा निकाले गये निष्कर्ष पर और विदेशी वैग्यानिकों द्वारा निकाले गये निष्कर्ष बिल्कुल सही निकले / अगर हम इस तरह के शोध कार्य अपने स्तर से करते तो हमें करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते, जो हमारी हैसियत के बाहर की बात थी /

आयुर्वेद के ग्रन्थों में डायबिटीज की चिकित्सा के लिये हरबल फार्मूले दिये गये है , जो हजारों साल से उपयोग किये जा रहे है / आयुर्वेद का मशहूर ग्रन्थ “भैषज्य रत्नावली ” [AYURVEDIC THERAPEUTIC GEMS] मे ऐसे हजरों योग यानी औषधि के फार्मूले दिये गये है जिनको अपनाकर Diebeties की बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है/
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डायबिटीज को आयुर्वेद में प्रमेह कहते है / आयुर्वेद ने प्रमेह की पहचान और उसके specific charecteristics को पहचान करके आयुर्वेद के सिध्धन्तों के आधार पर वर्गीकरण किया है और तदनुसार उसी वर्गीकरण के हिसाब से प्रमेह की बीमारी के लिये चिकित्सा व्यवस्था का निर्धारण किया है /
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ऐसे बहुत से आयुर्वेद के शास्त्रीय ग्रन्थ है जिनमे प्रमेह की चिकित्सा का बहुत सटीक और अचूक और कभी भी न फेल होने वाला और हमेशा उपयोग में आरोग्यकारी फल देने वाला विस्तार से वर्णन दिया ग्या है जिसे अपना कर Diebetis जैसी बीमारी पर जड़ मूल से काबू पाया जा सकता है /
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आयुर्वेद के चिकित्सा ग्रन्थों मे विस्तार से दिये गये management तथा जीवन शैली तथा आयुर्वेदिक औषधियों के उपयोग से सभी स्तर और सभी तरह की डायबिटीज के आरोग्य के बारे मे रोगियों को निर्देश दिये गये है जिन्हे अपनाकर कोई भी दायबिटिज का रोगी अपने को रोग मुक्त कर सकता है /

URINARY TRACT INFECTION ; AN AYURVEDIC & AYUSH PROBLEM SOLUTION ; मूत्र नलिका सन्क्रमण : आयुर्वेदिक – आयुष चिकित्सा समाधान


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मूत्र गत सन्स्थान की यह एक बहुत प्रचिलित बीमारी है, यह किसी भी लिन्ग को हो सकती है , चाहे वह महिला हो अथवा पुरुष अथवा किसी भी लिन्ग के बच्चे या किशोर वय के लोग /

बच्चों में भी मूत्र गत सन्स्थान का infection होता है जिसे Juvenile U.T.I. या Urinary Tract Infection बताते हैं / यह infection जनित रोग होता है , इसलिये बच्चों में ऐसा infection किस तरह से होता है, इसे बताना बहुत कठिन होता है / Infection किस प्रकार का है , इसका पता तभी चल पाता है जब पेशाब या मूत्र की जान्च की जाय या पेशाब या मूत्र का कल्चर किया जाय जो किसी pathology laboratory मे ही सम्भव होता है / इसके बाद ही बताना सम्भव होता है कि infection किस तरह का है /

लगभग सभी उम्र वालों को UTI के एक जैसे ही Clinical syndromes पाये जाते हैं / किसी किसी रोगी के resistence कम या अधिक होने पर यह हो सकता है कि उसको कुछ लक्षण कम हो और किसी को अधिक हो / किसी को तेज बुखार हो सकता है और किसी को हल्का हो , यह सब infection की Intensity पर आधारित होता है /
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पेशाब करने में जलन, बहुत तेज दर्द, हलका या तेज बुखार, कमर में दर्द, गुर्दे में दर्द, पेशाब का रन्ग लाल, गहरा पीला, कत्थई रन्ग का होना, पेशाब करते ही भयन्कर जलन, रुक रुक कर पेशाब होना, बच्चे पेशाब करते समय बहुत चिल्लाते हैं और रोते हैं / पेशाब करने की जगह सुर्ख लाल हो जाती है और पकने लगती है तथा पस पड़ने लगता है /ब्लड सूगर और डायबिटीज के रोगियों को और हृदय रोगियों को तथा कुछ अलग किस्म की बीमारियो से जुझ रहे बीमारों में यूटीआई बहुत जल्दी जल्दी होने लगता है / कुच ऐसी भी दवायें होती हैं जिनके खाने से as a side reaction मूत्र सन्क्रमण की तकलीफ हो जाती है /
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बीमारी का पता लगाने के लिये डाक्टर की सलाह लेकर pathological test करा लेना चाहिये / अगर जरूरत पड़े तो फिर दूसरे scans भी कराना चाहिये तकि बीमारी की जड़ बुनियाद का पता लग जाये /

अधिकतर जन समुदाय Allopathy / अन्ग्रेजी दवा के बारे में ज्यादा जानकारी रखते है और उनको दूसरे अन्य प्रचिलित चिकित्सा विग्यान जैसे कि आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, प्राकृतिक चिकित्सा = आयुष चिकित्सा पध्ध्यतियों के बारे मे जानकारी अथवा पता नही होता है , इसलिये लोग बाग एलोपैथी का ही इलाज करते हैं /

बहुत से ऐसे मरीज होते है जिनको बार बार UTI की तकलीफ होती है और इससे परेशान रहते है / ऐसे बीमारों को बताना चाहून्गा कि इस रोग की दवा और इलाज आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा में बहुत सटीक है / जिन्हे बार बार UTI की तकलीफ होती हो और इलाज करने से नही ठीक हो रही हो , उनको आयुर्वेद और आयुष का इलाज कराना चाहिये /

होम्योपैथी में भी इस बीमारी का बहुत अच्छा इलाज है तथा यूनानी चिकित्सा में भी / इलाज के लिये अपनी पसन्द का चिकित्सक चुनना चाहिये / आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा में यह जड़ मूल से ठीक होने वाली बीमारी है और इलाज करने से स्थायी लाभ होता है/

यह लाइलाज बीमारी नही है / इसका इलाज सम्भव है / आयुर्वेद की आधुनिक वैग्यानिक तकनीक ETG AyurvedaScan, Ayurveda Blood Test, Ayurveda Urine Test , Ayurveda Thermal Scanning के परीक्षण आधारित रिपोर्ट द्वारा URINARY TRACT INFECTION का इलाज करने से अवश्य बीमारी ठीक होती है /

UTI से पीड़ित रोगी अपने नज्दीक के आयुर्वेद -आयुष चिकित्सक से मिलकर और सलाह लेकर इलाज करायेन्गे तो अवश्य लाभ होगा /

LEUCODERMA ; सफेद दाग ; WHITE SPOTS ; VITILIGO ; WHO SAYS “IS NOT CURABLE ?” ; LEUCODERMA IS 100% CURABLE, IF TREATED BY AYURVEDA – AYUSH AT AN EARLY STAGE, BASING ON THE FINDINGS OF THE AYURVEDA ETG AYURVEDASCAN TECHNOLOGY & AYURVEDA BLOOD EXAMINATION & AYURVEDA URINE EXAMINATION & AYURVEDA THERMAL SCANNINGS


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LEUCODERMA is 100 % curable, if treated by AYURVEDA -AYUSH HIGH SPECIALITY DIAGNOSIS PROCEDURE , basing on the findings of the ETG AyurvedaScan technology including AYURVEDA BLOOD EXAMINATION , which is about 50 in numbers and AYURVEDA URINE EXAMINATION , which is also about 50 in numbers and AYURVEDA THERMAL SCANNING.

The COMBINED AYURVEDA Diagnosis proviudes correct diagnosis in THREE DIMENSIONS.

The First Dimension is to find and establish the ROOT PROBLEM OF THE BODY ORGANS OR PARTS, from where the problem is GENERATING.

The second Dimension is the path-way, which carries the “generating problems”

The Third Dimension is the FINAL APPEARANCE of the problem REFELECTION.

When these three dimnesions are diagnosed, AYURVEDIC TREATMENT becomes fool-proof and is result oriented.

We have treated successfully LEUCODERMA PATIENT in this way with best results, which we have already years and years experienced.

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LEUCODERMA PATIENT is being examined by ELECTRO-TRIDOSHA GRAPH : E.T.G. AyurvedaScan Scanner procedure.

Where is the Honesty of Doctors / Physician / Medical Experts ? Should Physician do this type of practice ?


An E-mail from NEW DELHI recieved on 3rd November 2013 , sent to me seeking for medical help
for her baby’s disorders

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Dear Doctor,

I need your precious time to save my baby life.

Details about her diseases :

On 24th of March, We came from market with fruit KIVI. Approx time was 9:30 PM. We crush one KIVI and given one spoon of KIVI to my baby.(Before that she was very much fine. She never had fever. She had taken all vaccination on time without any fever.). After taking KIVI, she start vomiting. Immediate I had discussed with my pediatric doctor, He suggested to give Syp Ondem. I had given but she continue with vomiting. Again discuss with pediatric doctor, On that day my pediatric doctor was out of station. Then I immediate move to one hospital in Dwarka.

In Hospital – They inject Perinorm .5ml and rentac (my baby wait was that time 6 kg) that was around 10:30. Then i move to my house. After one hrs. my baby left hand and left leg start jerking.

Then we again moved to hospital and they had admitted and was saying that this is epilepsy. They kept 5 days in ICU but condition of baby was now worst, She was now unconscious and stop reacting.

Then i had taken 2nd opinion to other hospital and rush to there. There they stop all medicine and given only two antibiotic. My baby got fit at that time.

We reached to house but we notice that vision of my baby has gone. Then we again start contacting to doctors.
I visited Max, Fortis, Apollo Artmis for said concern and all doctors was saying that she had problem in her brain.

Then I had start treatment of Ganga Ram Hospital -Neurologist Dr. R K Sabarwal and start eye therapy. She was start recovering.

Suddenly on 23rd of July 2013 at around 7:30 PM again she had start jerking on Left Leg, Left hand and Left Lip then Eye. We had discuss with doctor and was unable to control. Dr. refuse to see in night to my baby.

Then we rush to Hospital Artemis Gurgaon, Dr Praveen Gupta taken my baby and done all test and treatments.
He had used thiopentine to stop that movement as that one injection cost was 14500/- and he used 3 doses. etc

But sorry to say that After taken one month in hospital my baby not get recovered. He had done various time EEG, MRI, Blood Test etc that i had attached for your ready ref..

I had taken opinion of Dr Veena Kalra also but she was unable to say any thing.

Current Status of My Baby:

1. She still have movement. Some time she sleep well without movement but once awake start movement.
2. She is unconscious, Not reacting, Taking her feed milk only after forcefully.
3. We notice that one day she was very much comfortable as that day movement was very less and she had taken her feed four- five time with her interest.

Dear Doctor,

Now my baby is waiting any chamatkar from GOD as per doctors last word.

I need your opinion that do you thing we have more option to safe life of my baby. If yes, My humble request you to please safe her life if possible.

Looking one ray of hope.

Thanks & Regards

xyz

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I have recieved this e-mail before two days.

Parents of the children send me over sixty scanned reports with the problem of his ward.

Medical fraternity should see and observe their Honesty to their Patient.

This is a sorry state for practitioner. If they can not well managed the case , they are treating, they should guide the parents / families with HONESTY to try the other mode of systems, where these conditions are well manged and treatable comfortively.

MY WARNING ;

I have several times written about the Children’s disorders. I again repeat the same that donot continue the ALLOPATHIC TREATMENT of your children for a long / very long / months / years period/times Allopathic treatment. In case of emergency ALLOPATHIC Treatment is essential and can be continue for a period upto the recovery and after recovery the treatment can be given for few days / weeks and after that this should be discontinued.

Parents are advised that after a complete recovery of their child health. they can take the AYUSH treatment of their wards and should use , when in need.

लाइलाज बीमारियों और शरीर की उन सभी बीमारियों का इलाज सम्भव हो गया है जिनके बारे मे कहा जाता है कि उनका इस दुनियां में कोई इलाज नही है ; INCURABLE DISEASE CONDITIONS AND HUMAN BODY’S AILMENTS DIAGNOSED AND UNDIAGNOSED CAN BE TREATED AND HERE IS TREATMENT AVAILABLE


CONTACT ; Dr D.B.B.ajpai, Ayurvedic Diagnostician and Inventor & Chief ETG AyurvedaScan Investigator, KANPUR Mobile; 09336238994

CONTACT ; Dr D.B.B.ajpai, Ayurvedic Diagnostician and Inventor & Chief ETG AyurvedaScan Investigator, KANPUR Mobile; 09336238994



Dr D.B.Bajpai is recieving award honour from TRIO M.L.A. [1] Shri K.S. Sengar, Member of Legislative Assembly, Government of Uttar Pradesh, Lucknow and [2] Shri R.Yadav, Member of Legislative Assembly, Government of Uttar Pradesh, Lucknow and [3] Shri B. Khan, Member of Legislative Assembly, Government of Uttar Pradesh, LUCKNOW, UTTAR PRADESH

कैन्सर के दो रोगियों की आयुर्वेदिक रक्त परीक्षण रिपोर्ट ; AYURVEDA BLOOD REPORT OF TWO CANCER PATIENTS


Below is given two CANCER patient’s AYURVEDA BLOOD EXAMINATION report. Compare both report and find the AYURVEDA FUNDAMENTALS DIAGNOSIS.
नीचे दी गयी रिपोर्ट एक कैन्सर बीमारी से ग्रस्त महिला की है जिसकी उम्र ५६ साल के लगभग की है / इसका दो साल पहले CANCEROUS UTERUS का आपरेशन करके निकाल दिया गया था , आपरेशन के एक माह बाद उसको योनि द्वार से दूध जैसे रन्ग का स्राव आना शुरू हो गया / महिला को बहुत जगह दिखाया गया , लेकिन उसको आराम नही मिला, उलटे उसको रक्त यानी खून जैसा योनि श्राव होने लगा / महिला ने आयुर्वेद तथा होम्योपैथी तथा एलोपैथी का भी इलाज कराया लेकिन उसको आराम के बजाय और अधिक तकलीफ हो गयी /

महिला का आयुर्वेदिक रक्त परीक्षण के साथ आयुर्वेदिक मूत्र परीक्षण और ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और आयुर्वेदा थेर्मल स्कैन्निन्ग भी की गयी / Specific Ayurvedic Formulations यानी मरीज के लिये खास तौर पर तैय्यार की गयी आयुर्वेदिक दवा जो रक्त परीक्षण पर आधारित थी, के उपयोग से रक्त स्राव मे आराम मिली और उसकी दूसरी तकलीफों मे भी आराम मिला है /

आप सभी आयुर्वेद प्रेमी आयुर्वेद के इस नये आविष्कार का मूल्यान्कन करें /
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आयुर्वेद रक्त परीक्षण की रिपोर्ट नीचे जिस रोगी का दिया गया है , उसकी उम्र १३ साल है / कुछ माह पहले बायें पैर में cancer होने के कारण उसकी पूरी बायीं टान्ग चूतड़ के सिरे से काट कर निकाल दी गयी / आपरेशन के बाद इस बच्चे मरीज को फिर दूसरी टान्ग में तकलीफ होने लगी जिसके बाद उसी डाक्टर से सम्पर्क किया गया जिसने मरीज की टान्ग का आपरेशन किया था /

मरीज केवल अपना चेक कराने के लिये आया था / इसे घबराहट इसी बात की हो रही थी कि कहीं उसको दुबारा तो फिर तकलीफ नही होने लगी थी ? इस मरीज को फिर से दूसरी टान्ग में दुबारा वैसा ही दर्द होने लगा / दर्द का कारण और दुबारा क्यों तकलीफ हो रही है इसका कारण जानने के लिये मरीज के घर वाले उसी डाक्टर सर्जन के पास गये जिसने आपरेशन किया था /

नीचे दिया गया आयुर्वेदिक रक्त परीक्षण की रि्पोर्ट का आयुर्वेद प्रेमी आन्कलन करें और आयुर्वेद के मूल सिध्धान्त का क्या निदान हुआ है ? िस पर ध्यान दें /
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