कैन्सर के दो रोगियों की आयुर्वेदिक रक्त परीक्षण रिपोर्ट ; AYURVEDA BLOOD REPORT OF TWO CANCER PATIENTS


Below is given two CANCER patient’s AYURVEDA BLOOD EXAMINATION report. Compare both report and find the AYURVEDA FUNDAMENTALS DIAGNOSIS.
नीचे दी गयी रिपोर्ट एक कैन्सर बीमारी से ग्रस्त महिला की है जिसकी उम्र ५६ साल के लगभग की है / इसका दो साल पहले CANCEROUS UTERUS का आपरेशन करके निकाल दिया गया था , आपरेशन के एक माह बाद उसको योनि द्वार से दूध जैसे रन्ग का स्राव आना शुरू हो गया / महिला को बहुत जगह दिखाया गया , लेकिन उसको आराम नही मिला, उलटे उसको रक्त यानी खून जैसा योनि श्राव होने लगा / महिला ने आयुर्वेद तथा होम्योपैथी तथा एलोपैथी का भी इलाज कराया लेकिन उसको आराम के बजाय और अधिक तकलीफ हो गयी /

महिला का आयुर्वेदिक रक्त परीक्षण के साथ आयुर्वेदिक मूत्र परीक्षण और ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और आयुर्वेदा थेर्मल स्कैन्निन्ग भी की गयी / Specific Ayurvedic Formulations यानी मरीज के लिये खास तौर पर तैय्यार की गयी आयुर्वेदिक दवा जो रक्त परीक्षण पर आधारित थी, के उपयोग से रक्त स्राव मे आराम मिली और उसकी दूसरी तकलीफों मे भी आराम मिला है /

आप सभी आयुर्वेद प्रेमी आयुर्वेद के इस नये आविष्कार का मूल्यान्कन करें /
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आयुर्वेद रक्त परीक्षण की रिपोर्ट नीचे जिस रोगी का दिया गया है , उसकी उम्र १३ साल है / कुछ माह पहले बायें पैर में cancer होने के कारण उसकी पूरी बायीं टान्ग चूतड़ के सिरे से काट कर निकाल दी गयी / आपरेशन के बाद इस बच्चे मरीज को फिर दूसरी टान्ग में तकलीफ होने लगी जिसके बाद उसी डाक्टर से सम्पर्क किया गया जिसने मरीज की टान्ग का आपरेशन किया था /

मरीज केवल अपना चेक कराने के लिये आया था / इसे घबराहट इसी बात की हो रही थी कि कहीं उसको दुबारा तो फिर तकलीफ नही होने लगी थी ? इस मरीज को फिर से दूसरी टान्ग में दुबारा वैसा ही दर्द होने लगा / दर्द का कारण और दुबारा क्यों तकलीफ हो रही है इसका कारण जानने के लिये मरीज के घर वाले उसी डाक्टर सर्जन के पास गये जिसने आपरेशन किया था /

नीचे दिया गया आयुर्वेदिक रक्त परीक्षण की रि्पोर्ट का आयुर्वेद प्रेमी आन्कलन करें और आयुर्वेद के मूल सिध्धान्त का क्या निदान हुआ है ? िस पर ध्यान दें /
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एक टिप्पणी

  1. कितना अच्छा होता कि अमेरिका जैसे देशो की तरह पूरे विश्व में ईटीजी परीक्षण प्रतिवर्ष कराये जाते

    ………….उत्तर…………….आप ठीक कह रहे हैं अरुण आर्या जी / दुनिया के बहुत से देशों से प्रति वर्ष कानपुर, उत्तर प्रदेश, भारत में हमारे रिसर्च केन्द्र में आकर ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन का परीक्षण कराने के लिये लोग आ रहे है, जिनसे यह तो पता चलता है कि आधुनिक चिकित्सा विग्यान यानी एलोपैथी में भी अमेरिका, इन्ग्लैन्ड, यूरोप, एशिया और आस्ट्रलिया , अफ्रीका जैसे कान्टीनेन्ट्स के रहने वाले लोग भी कही न कही एलोपैथी की चिकित्सा से असन्तुष्ट हैं और यहां के लोगों को आधुनिक चिकित्सा विग्यान में कोई न कोई कमी जरूर महसूस होती है /

    विदेशों से आने वाले लोगों से जब बात करता हू तो मुझे लगता है कि दुनियां में आयुर्वेद के बारे मे लोग जानने और समझने लगे हैं /

    दक्शिण अफ्रीका से आने वाले कुछ मरीजों ने बताया कि वहां आयुर्वेद चिकित्सा के बारे मे लोग कुछ भी नही जानते है / हां, वहां रहने वाले भारतीय आयुर्वेद की दवाओं का उपयोग करते है /

    कमों वेशी यही हाल दुनिया के सभी देशों का है /

    लेकिन एक बात इन सभी विदेशी मरीजों ने एक स्वर से कहा है कि ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन जैसी रोग निदान और निदान ग्यान तकनीक का प्रचार और प्रसार और इसकी उपलब्धता दुनिया के सारे देशों में होना चाहिये , क्योंकि ऐसी तकनीक की उनके देशों मे जरूरत है /

    अरुण आर्या जी, आपका कहना सही है कि इस तकनीक की सुविधा दुनिया के सभी लोगों को मिलना चाहिये /

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