ACUTE KIDNEY FAILURE PROBLEMS ASSOCIATED WITH RESPIRATORY TRACT AND DIGESTIVE TRACT AND BLOOD ANOMALIES ; खराब अथवा फेल हो रहे गुर्दे के साथ साथ होने वाली श्वसन सन्स्थान तथा पाचन सन्सथान तथा रक्त दूषण की समस्यायें


गुर्दा यानी KIDENEY की बीमारियों के शुरु होने से पहले अथवा यह कहा जाय कि जब गुर्दा के फेल होने की बीमारी की शुरुआत होती है या शुरु होने का क्रम होता है तब शरीर के अन्दर कुछ लक्षण पैदा होने लगते हैं / इन्हे बहुत शुरुआती लक्षण कह सकते है जो समय बीतने के साथ साथ बढते चले जाते है और अन्त में जब गुर्दा काफी हद तक फेल होने लगते है और तब जान्च की जाती है तब पता चलता है कि kidney कितनी फेल हो चुकी है /

गुर्दा फेल होने वाले मरीजों के रोग-इतिहास के सन्कलन में यह बात सामने आयी है कि जिन मरीजों के गुर्दा फेल हुये है उनको पता ही नही चला कि कब उनको गुर्दे की बीमारी हुयी और उनको गुर्दा अकस्मात या अचानक फेल हो गया /

जब कि यह भी सत्य है कि अगर इन मरीजों का इलाज करने वाले चिकित्सक थोड़ी सी भी सावधानी का ख्याल करते तो फेल होने वाले गुर्दे के मरीजों को अकाल मौत से बचाया जा सकता था /

जिन मरीजों के गुर्दे फेल हुये है उन मरीजों ने अपने शुरुआत के लक्षण और बीमारियां इस प्रकार से बतायी है ;

१- कुछ मरीजों ने बताया कि उनको शाम को बुखार आने लगा, जिसका इलाज किया गया और इलाज करने से बुखार ठीक हो गया / बुखार ठीक होने के बाद उनको पाचन या digestion की समस्या होने लगी, उनको खाने के बाद गैस बनने लगी / गैस की बीमारी की दवा लेने के बाद उनको पेशाब की तकलीफ पैदा हो गयी / ऐसा क्रम बढता हुआ चला गया / यानी बुखार आने का क्रम जल्दी जल्दी होने लगा, यही बुखार बाद मे मलेरिया
बुखार जैसे लक्षण देने लगा / टेस्ट मलेरिया का कराने पर मलेरिया निल निकला, डेन्गू के टेस्ट और दूसरे टेस्ट कराये गये सब normal निकले / डाक्टर ने कहा बता नही सकते कि न्या बीमारी है ? महीनों बुखार आता रहा , अन्ग्रेजी दवा खाने से बुखार ठीक होता था लेकिन फिर जल्दी जल्दी आने लगा / बाद मे उलटिया यानी Vomitting शुरु होने लगी . दवा खाने पर आराम मिलती रही , एक दिन पेट मे बहुत दर्द हुआ / डाकटर द्वारा अल्ट्रा साउन्ड Ultrasound और खून की जान्च कराने पर पता चला कि गुर्दा खराब है , blood test से पता चला कि गुर्दा 70% प्रतिशत damage हो गया है /

2-कुछ रोगियों ने बताया कि उनको उल्टी होने की शिकायत हुयी / भोजन करने के बाद उनको उल्टी यानी vomitting होने लगी / उल्टी की दवा लेने के बाद कुछ राहत मिली , लेकिन बाद मे अधिक उल्टियां होने लगी और इसके साथ साथ पेट मे दर्द भी रहने लगा / पेशाब कम होने लगी / जितना पानी पीते थे उससे अनुपात में पेशाब कम होने लगी, इसके साथ पानी जैसे पतले दस्त भी होने लगे / डाक्टर से सलाह ली तो उसने कहा colitis के कारण पेट मे दर्द है और इसी कारण से पतले दस्त आ रहे है / दवाये खाने से जब आराम नही मिला तथा तकलीफ और ज्यादा बढ़ गयी तो फिर अल्ट्रासाउन्ड और blood test करये गये , जिससे पता चला कि kidney खराब होने की शुरूआत हो गयी है /

३- कुछ रोगियों ने बताया कि उनको सिर मे दर्द होता था इस कारण वे किसी मेडिकल स्टोर से सिर दर्द की दवा लेकर खा लेते थे / दिन में कई कई बार सिर दर्द होने लगा तो उसी अनुपात मे दर्द की दवा लेते रहे / जब भयानक सिर दर्द होने लगा तब डाक्टर को दिखाया गया / डाक्टर ने टेस्त कराये तब जाकर पता चला कि गुर्दा खराब हो गये है/

४- कुछ रोगियों ने बताया कि वे लगातार शारीरिक श्रम करते रहे, मेहनत का काम करते रहे, भूखे प्यासे रहकर भी काम करते रहे / पानी नही मिला , प्यासे ही रहकर काम करते रहे / ऐसा चिल्चिलाती गर्मी के दिनो का हाल था और भीषण गर्मी के दिनों की बात है / बुखार आया , बुखार का इलाज किया, लेकिन पैरों मे सूजन आन्खों में सूजन आने लगी / इसके साथ जाड़ा देकर बुखार आने ल्गा / मलेरिया की दवा खाते रहे और सूजन उतारने की दवा खाते रहे / बाद मे Diarrhoea शुरू हो गया और पेचिस जैसा होने लगा / भोजन की भूख खतम हो गयी और २४ घन्टे मे पेशाब भी कम आने लगा / जान्च कराने पर पता चला कि गुर्दा फेल हो गया है /

दो ऐसे वाकयात है , जिनमें मैने मरीज के तीमार दारों को बताया कि उनके रोगी की kidney fail हो रही है / यद्यपि दोनों ही रोगी मेरे मरीज नही थे, किसी दूसरे डाकटर का इलाज चल रहा था , यह तो अचानक मै उनके यहां जा पहुन्चा और sign और syndromes दोनों देखकर मैने कहा कि इनकी Kidney fail हो चुकी है /
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पहला वाकया लगभग २५ साल पहले का है , जो कानपुर के एक स्थानीय सरकारी अस्पताल में का्र्य-रत मेडिकल आफीसर की माता जी का है / मेडिकल आफीसर मेरे मित्र की बुआ सास थी / मेरे मित्र की पत्नी और मेरे मित्र , वही अस्पताल कम्पाउन्ड में बने कैम्पस के बन्गले में रहते थे / एक दिन मै यूं ही अस्पताल के सामने से निकला और मैने सोचा कि अपने मित्र से मिल लूं /

जब मै बन्ग्ले के सामने पहुन्चा और अपना स्कूटर स्तैन्ड में खड़ा किया तभी मेरी निगाह वहां उपस्तिथि मेडिकल स्टाफ और डाक्टरों पर पड़ी / अवाजाही का माहौल था/ मेरे मित्र अन्दर से मुझे देखकर बाहर आये और बताया कि दादी सास यानी बुआ सास की माता जी बीमार है और डाक्टर नही समझ पा रहे है कि इनको क्या बीमारी है/ वहां सभी मुझसे senior DOCTORS उपस्तिथि थे / अस्पताल के जितने भी expert DOCOTRS थे सब बुला लिये गये थे / माहौल बड़ा Tense था / मै वापस जाने लगा तो मेरे मित्र ने कहा कि आप भी देखिये और समझिये कि दादी सास को क्या बीमारी है / उनके साथ में कमरे मे गया , वहां सभी डाक्टर चारपायी को घेरे खड़े थे, उनका para-medical staff भी मौजूद थी / मै सबसे पीछे खड़ा हो गया / आपस में डाकटर अपना पना कयास लगा रहे थे कि आखिर इतनी अच्छी से अच्छी दवा देने के बाद भी मरीज के पतले दस्त क्यों नही रुक रहे हैं ? १० – १५ मिनट तक मै मरीज को देखता रहा, सबकी बातें सुनता रहा , मेरे मित्र ने मुझसे पूछा कि आप्की समझ में क्या आया ? मैने कहा कि इनका गुर्दा फेल हो गया है और खून में creatinine बढने के कारण यह स्तिथि है ? हलान्कि यह opinion मैने बहुत धीमे स्वर से अपने मित्र को बताया , लेकिन आगे खड़े एक senior Doctor ने सुन लिया / उन्होने पीचे मुड़कर मेरी तरफ देखा और कुछ क्रोधित होकर बोले, “यह आप कैसे कह सकते है कि इनकी KIDNEY FAIL हो रही है ? आप है क्या ? ” वे कुछ ज्यादा जोर से बोले, मै घबरा गया / सबकी निगाहें मेरी तरफ थी / मेरे मित्र ने सबको बताया कि ये डा० बाजपेयी है और इन्होने Germany मे जाकर भी चिकित्सा विग्यान की पढायी की है / मैने बहुत विनम्रता के साथ बताना शुरू किया कि रोगी को पतले दस्त गुर्दा खराब होने के कारण हो रहे है और इसी कारण सारा इलाज बेकार साबित हो रहा है / आपके पास इतना बड़ा अस्पताल है , अभी इनका क्रियेटिनीन चेक करा ले सब पता चल जायेगा / तुरन्त pathologist बुलाया गया, blood sample लिया गया / इसके बाद मै अपने काम के लिये चला गया / शाम को जब मै अपने घर वापस हो रहा था तो मै फिर अपने मित्र के पास पहुन्चा, क्यों कि मुझको भी बहुत उत्सुकता थी कि मेरी डायग्नोसिस सही निकली अथवा गलत / मेरे मित्र बाहर बैठे थे, उन्होने देखते ही कहा , डाक्टर आपकी डायग्नोसिस सही निकली / दादी सास का गुर्दा फेल हो रहा है /

दूसरा केस मेरे एक परिचित की माता जी का है / परिचित की माता जी को इसी तरह की शिकायत थी / किसी सीनियर डाक्टर का इलाज कर रहे थे / मुझे सारी बात बतायी / मैने कहा कि उनके रक्त के अमुक अमुक टेस्ट करा ले / इन टेस्टों में लीवर और गुर्दा के भी TESTS थे / रक्त परीक्षण की जान्च मेरे मित्र ने दिखाई तो सभी test सामान्य नही निकले / Creatinine, SGPT, Blood Urea. Bilirubin सभी असामान्य थे / मित्र ने यह रिपोर्ट जब treating physician को दिखाया तो उन्होने इसके लिये मुझे appreciate किया और वे इस तरह की चूक के लिये बहुत सम्वेदना जाहिर कर रहे थे /

हलान्कि ऐसी चूक कोई भी डाक्टर जान बूझकर नही करता है / मुझसे यदि कोई मरीज अपनी स्वेच्छा से कहता है कि मै सभी तरह के टेस्ट कराने के लिये तैयार हू तो मै अवश्य वह सभी TEST करा देता हू जो उसके लिये जरूरी होते है / बाद में भी अगर जरूरत पड़्ती है तो वो सभी टेस्ट और scans करा देता हू , और इसमे किसी तरह की कोई चूक नही करता हू / मरीज के लिये जरूरी सभी SCANS और सभी pathological examination कराने से रोग निदान और रोग क्या और कैसा है , यह सब जानने और समझने मे सटीक मदद मिलती है /

जैसे जैसे kidney अधिक फ़ेल होने की तरफ बढती है तब बुखार आना , उल्टी होना, पतले दस्त , शरीर का सूखते जाना, भयानक कमजोरी आने लगना, चलने फिरने से मोहताज , भूख न लगना, मुह से बदबू आने लगना, मुख का स्वाद समाप्त होना, मिचली का बार बार आना, बहुत सेमरीजों को स्वांस और asthamaa जैसे RESPIRATORY TRACT की तकलीफ के लक्षण समूह आदि लक्षण पैदा हो जाते हैं / जिनसे यह भ्रम पैदा होने लगता है कि कहीं यह दमा का दौरा तो नही पड़ गया है / हृदय की धड़कन बढ जाती है और यह सभी ऊपर बताये गये लक्षण समूह बढते रहने के अनुपात में और ज्यादा दिन पर दिन severe होते जाते हैं / इस प्रकार kidney failure में digestive system / Gastro-intestinal system तथा Respiratory Tract Disorders और गुर्दे के फेल होने के कारण से Body TOXINES शरीर के अन्दर से बाहर न निकलने के कारण मरीज की हालत मरणासन्न हो जाती है /

जब kidney का इलाज करते है और kidney की तकलीफ मे improvement होने लगता है तो यही सब syndromes कम होने अथवा ठीक होने के अनुपात में कम से अधिक कम होने लगते है /

E.T.G AyurvedaScan तथा आयुवेद के अन्य परीक्षणो पर आधारित आयुर्वेद – आयुष चिकित्सा से KIDNEY FAILURE के मरीजों को आरोग्य प्राप्त होता है / अगर क्रियेटीन स्तर CREATININE LEVEL 5.5 yaa 6.0 mg/dl है तो आयुर्वेद चिकित्सा द्वारा एक सीमा तक आरोग्य प्राप्त किया जा सकता है / हमने बहुत प्रयास किया कि creatinine level मरीज का normal level को प्राप्त कर ले , लेकिन ऐसा नही हो सका , बल्कि creatinine level २ अथवा २.५ मिली ग्राम से नीचे कम नही कर पाये /

बहुत Severe condition में डायलीसिस कराने के अलावा कोई रास्ता नही बचता है / जब डायलीसिस भी नही हो पाती तब kidney transplant के अलावा कोई दूसरा रास्ता नही बचता है /

सबसे बेहतर है कि KIDNEY की बीमारी पैदा होने से पहले ही बचाव किया जाये / इसलिये खुद के स्वास्थय के बारे मे सतर्कता बरतनी चाहिये / कहा भी गया है कि PREVENTION IS BETTER THAN CURE .
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एक टिप्पणी

  1. न जाने क्यों अभी तक डॉक्टरों में अभी तक इतना दुराग्रह भरा हुआ हैं कि वे दूसरों को सुनना पसन्द नहीं करते/विज्ञान की पहली सीढी जिज्ञासा है न कि संशय/

    ………..उत्तर………..यह सन्कीर्ण सोच की मानसिकता है / दुराग्रह किस बात का है और यह दुराग्रह किस लिये होना चाहिये और किसके लिये होना चाहिये ? इसी तरह से दुराग्रह की भावना होगी तो देश विग्यान के क्षेत्र में तरक्की कर चुका ??? एक तो research के क्षेत्र में हमारा देश ऐसे ही पिछड़ा है और हम दम भर रहे है कि २०२० तक विश्व में ग्यान और विग्यान के क्षेत्र में विश्व के सिर मौर होन्गे / अगर दुराग्रह और पूर्वाग्रह का यही हाल रहा , तो इसे केवल और केवल superiority complex से ही जोड़ा जा सकता है , जो सीधे सीधे दूकान्दारी की ओर ले जाती है और “मानव सेवा भावना” कहीं खो जाती है /

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