दिन: नवम्बर 30, 2013

AYURVEDA BLOOD TEST ; DIAGNOSIS OF DISEASE AND AYURVEDA FUNDAMENTALS THROUGH RECENTLY INTRODUCED AYURVEDA HI-TECHNOLOGY BLOOD TEST ; आयुर्वेद रक्त परिक्षण की आधुनिक हाई टेक्नोलाजी द्वारा रोग निदान और आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तों का निदान


भगवान धन्वन्तरि देव के आशिर्वाद और हमारे रिसर्च केन्द्र मे हो रहे अधुनातम प्रयोग और प्रयास द्वारा वह सम्भव हो गया है , जिसे अभी तक असम्भव माना जाता था /

पिछले कुछ सालों से रक्त परीक्षण द्वारा आयुर्वेद के fundamentals तथा इसके साथ साथ रोग निदान की विधि को विकसित करने के लिये हमारे रिसर्च केन्द्र में रोगियों पर परीक्षण किये जा रहे थे / जिसके बारे मे समय समय पर इस ब्लाग द्वारा सुधी पाठकों तक जानकारी उपलब्ध करायी जाती रही है / अब यह सम्भव हो गया है कि रक्त परीक्षण के द्वारा वात , पित्त और कफ की intensity level का ग्यान तथा त्रिदोषों के पान पान्च भेद और सप्त धातुओं का अन्कलन रोगी के रक्त परीक्षण द्वारा ग्यात कर सकते हैं /

नीचे दिये गये एक रोगी के रक्त परीक्षण की रिपोर्ट दी गयी है, इसका सुधी जन अवलोकन करें /

यह रोगी जिसकी उम्र ४५ साल की है , लगभग बीस साल से पहले non-bleeding और फिर बाद में bleeding piles से पीडित रहा है / आयुर्वेदि और होम्योपैथिक इलाज से इसको बहुत आराम मिली और साल में एक आध बार हल्की फुल्की तकलीफ होती रहती थी , जो आयुर्वेदिक अथवा होम्योपैथिक दवा लेने से ठीक हो जाती थी / पिछले एक माह से इसको फिर तकलीफ हुयी और इसने बहुत इलाज कराया लेकिन इसे इसकी bleeding piles मे कोई आराम नही मिली / इसने इस एक माह के अन्दर allopathy and ayurveda and homoeopathy आदि सबका इलाज कराया , लेकि इसे कोई भी आराम नही मिली /

एक पहले के मरीज जो अपनी पत्नी का “मानसिक बीमारी” का इलाज करा रहे है और उनकी पत्नी अब ठीक है, वे इस मरीज को अपने साथ दवा कराने के लिये आये / मरीज की आर्थिक स्तिथि अच्छी नही है , इसलिये मैने उसको सलाह दी कि रक्त के परीक्षण से उसको क्या अन्दरूनी तकलीफ हो रही है, यह पता चल जायेगा /

मरीज का परीक्षण किया गया , जिसकी रिपोर्ट नीचे दी गयी है /

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ऊपर की आयुर्वेद रक्त परीक्षण रिपोर्ट देखने से पता चलता है कि इस मरीज का पित्त दोष सामान्य से अधिक है , पित्त दोष सामन्यत: ४६ से ७५ /ahmv निर्धारित किया जा चुका है , इस पैरामीटर को establish करने में कई सौ मरीजों का रक्त परीक्षण करने के उपरान्त normal range निर्धारण किया गया है , जो हमारे द्वारा की गयी रिसर्च के हिसाब से सही और उचित प्रतीत होती है / सभी मानकों की प्रक्रिया जिस तरीके से नोर्मल लेवेल को establish करने के लिये की गयी है , वही अपनाया गया है /

इस मरीज का कफ दोष अधिक की ओर है / इस तरह त्रिदोष के दो दोष पित्त और कफ इस मरीज के बढे हुये हैं / ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के पएईक्षण अनुभव में यह बात सामने आयी है कि जब पित्त और कफ के सम्मिलित combination एक निश्चित अनुपात मे बनते है तो यह डायबिटीज की बीमारी की ओर इशारा करते हैं / अधिकतर ९६ प्रतिशत रोगियों मे यह combination देखकर अनुभव मे आया है कि मरीज को high blood sugar level की बीमारी होती है / इस रोगी की blood sugar जान्च की गयी तो यह fasting में 156 mg/dl निकली / मरीज को पता ही नही चला कि उसको high level blood sugar की तकलीफ भी है /

आयुर्वेद के रक्त परीक्षण में रस धातु सामान्य से कम और मान्स धातु सामान्य से कम और मज्जा धातु सामान्य से कम निकले , लेकिन शुक्र धातु सामान्य से अधिक निकली / जिन रोगियो के शुक्र धातु अधिक intensity level measure होकर आती है उनमें यह देखा गया है कि ऐसे मरीजों को गुदा से सम्बन्धित बीमारियां होती है / रस , मान्स और मज्जा के कम आन्कलन होने से रोग अधिक बलशाली होते है / अध्ध्यन करने के बाद यह बात स्पष्ट होकर सामने आयी है कि जब प्राप्त measured data डाटा सामान्य से कम होते हैं तो यह dull reaction अथवा hardness को show करते हैं, लेकिन अधिक की ओर आने वाला डाटा inflammatory condition को show करता है / शुक्र धातु के अधिक होने से यह तो स्पष्ट हो गया कि इस रोगी को गुदा के विकार हैं /

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आयुर्वेद की इस खोज की गयी रक्त परीक्षण तकनीक के जरिये CONSTITUENTS OF BLOOD के बारे मे जानकारी प्राप्त हो जाती है / रक्त में उपस्तिथि सल्फेट्स, टोटल फास्फेट्स, क्लोराइड, पोटैशियम, सोडियम, कैल्सियम, आयोडीन, आयरन, क्यूप्रम, मैग्नेशियम, अमोनिया,यूरिक असिड, क्तियेटीन, और यूरिआ का भी पता चल जाता है / हलान्कि अभि इस तरह के टेस्ट को confirmatory टेस्ट नही कहा जा सकता, लेकिन रोग निदान में यह टेस्ट अपनी भूमिका सहायक के रूप में निभाते हैं / इस तरह पता चल जाता हि कि gross level पर रोगी की क्या बीमारी हो सकती है ? इस तरह के data से मरीज के diet management मे भी सहायता मिल जाती है / आयुर्वेद के इस Test को अधिक accurate करने के लिये लगातार परीक्षण किये जा रहे हैं /

Constituents of blood मे सल्फेट अधिक निकला है, क्लोराइड अधिक निकला है और क्यूप्रम [ताम्बा] अधिक निकला है / टोटल फास्फेट और सोडियम और कैसियम और आयरन और मैग्नेशियम और अमोनिया और यूरिक एसिड और क्रियेटीन सामन्य से कम है / लेकिन इन सबमे बहुत ज्यादा normal level के अनुपात में बहुत अधिक अन्तर नही निकला है , इसलिये इनमे से बहुत से पैरा मीटर को सामान्य समझा गया है जैसे क्रियेटीन, यूरिक एसिड, अमोनिया, मैग्नेशियम, सल्फेट जैसे तत्वों को सामान्य ही समझा जाना चाहिये /

विशेष तौर पर टोटल फास्फेट, क्लोराइड, सोडियम, क्यूप्रम ये तत्व सामान्य से बहुत कम या बहुत अधिक पहचाने गये है और इसीलिये इन तत्वों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि मरीज को लीवर की सूजन है और Liver Pathology उपस्तिथी है / अध्ध्य्यन मे पता चला कि क्यूप्रम के अधिक लेवल हो जाने के कारण LIVER की बीमारी होती है / मरीज का लीवर जान्चने पर पता चला कि उसका लीवर बढा हुआ है / अध्ध्य्यन मे यह पाया गया है कि जब chloride level बढता है तब शरीर मे सूजन अवश्य होती है चाहे वह किसी भी हिस्से मे हो / आन्तों की चाहे वह बड़ी आन्त हो या छोटी आन्त , इसकी सूजन अथवा inflammatory condition जब होती है तब सोडियम लेवल कम होता है, ऐसा अध्ध्य्यन मे पाया गया है /

मरीज की Ayurveda Blood Test की इस findings को लेकर इलाज किया जा रहा है , मरीज को आयुर्वेद की औषधियां दी जा रही है और close watch observation मे रख कर further studies की जा रही है /

04/12/2013

इस रोगी को हमारे द्वारा अपने यहां से आयुर्वेदिक दवाये dispense की गयी थी / कुच विशेष अवस्थाओं और परिस्तिथियों में यथा रात में जब दवायें न उपलब्ध हों और छुट्टी के दिन जब मार्केट बद हो तब इन परिस्तिथियों मे अपनी dispensary से दवा देना आवश्यक होता है अथवा जब मरीज की हालत ऐसी होती जहां बार बार दवाओं को बदलने की आवश्यक्ता मरीज की हालत के अनुसार बदलने की हो जाती है तब दवाये अपनी डिस्पेन्सरी से देना ज्यादा सहायक होता है / इस मरीज को अपनी dispensari से दवाये दी गयी थी /

तीन दिन की दवा से इस मरीज का रक्त आना बन्द हो गया और उसकी स्तिथि सामान्य है / उसकी हालत बेहतर है और ठीक है /

CONCLUSION:

निष्कर्ष के तौर पर अब यह कहा जा सकता है कि आयुर्वेद के इस नये आविष्कार के द्वारा मरीज की तकलीफो का pathological basis को आधार बनाकर और तदनुसार आन्कलन विवेचन करके सटीक, अचूक और प्रभाव शाली आयुर्वेदिक आयुष इलाज की व्यवस्था की जा सकती है जो त्वरित और टिकाऊ और स्थायी आरोग्य देने में सक्षम साबित हो /

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