ANKYLOSING SPONDYLITIS ; E.T.G. AYURVEDASCAN AND AYURVEDA-AYUSH PATHOLOGICAL TESTS ; एन्काइलोसिन्ग स्पान्डिलाइटिस ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और आयुर्वेदा-आयुष पैथोलाजिकल परीक्षण


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कुछ दिन पूर्व एक 24 साल के नवयुवक ने अपनी ई०टी०जी० और तत्सम्बन्धित आयुर्वेद pathology की जान्च अपनी तकलीफ को जानने और समझने के लिये करायी है / यह नवयुवक अपनी तकलीफ के इलाज के लिये देश के बड़े अस्पतालों मे जाकर अपनी जान्च और इलाज करा चुका था / लेकिन इसे कोई भी तकलीफ मे आराम नही मिली, उलटे उसकी तकलीफ और ज्यादा बढ गयी /

मै एक दिन अपना printer ठीक कराने के लिये repaire वाले की दूकान में printer बनवा रहा था / रोजाना बड़ी सन्ख्या सैकड़ों मे मोबाइल पर देश अथवा विदेशों से आयुर्वेद प्रेमी और आयुर्वेदिक चिकित्सा कराने के लिये आतुर लोग और तमाम बीमारियों से ग्रसित मरीज सलाह लेने के लिये फोन किया करते है / printer रिपेयरिन्ग करने वाले की दूकान पर लोगों के फोन बड़ी सन्ख्या मे आ रहे थे, जिनको मै जानकारी दे रहा था / वहीं उपस्तिथि लोगों को पता चला कि मै एक चिकित्सा वैग्यानिक हूं और आयुर्वेद के क्षेत्र में आयुर्वेद के लिये चार आविष्कार कर चुका हू तो लोगों को स्वाभाविक आश्चर्य मिश्रित उत्कन्ठा हुयी , लोग मुझे अपने बीच में देखकर प्रसन्न हुये/ वहीं इस लड़्के से मुलाकात हुयी थी /
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दूकान्दार मेरा परिचित था और मेरे पास के इलाके का रहने वाला था / उसने इस देश राज नाम के लड़्के से परिचय कराया और बताया कि इसे अमुक तकलीफ है क्या करना चाहिये ? मैने कहा कि क्या तकलीफ है , इसे तफसील से बताइये / उसने सारी जानकारी दी और बताया कि कहां कहां, किस किस डाकटर, कौन से शहर मे स्तिथि देश के प्रसिध्ध और शीर्ष चिकित्सा सन्सथानों में इलाज करा चुका है / महन्गी से महन्गी दवायें खा चुका है, लेकिन उसको रत्ती भर भी फायदा नही हुआ / उसके सारे लक्षनॊ को सुनकर मैने बताया कि जैसी बीमारी है और जो भी collective syndromes वह बता रहा है , उसका कोई इलाज ALLOPATHY चिकित्सा मे नही है , सबसे अच्छा है आयुर्वेद का इलाज करे / इससे तकलीफ ठीक होने की शत प्रतिशत सम्भावना होती है /

मरीज इटावा का रहने वाला है / मैने उससे कहा कि सबसे अच्छा है, वह अपने शहर मे ही किसी आयुर्वेदिक डाकटर से अपनी जान्च कराकर इलाज करे / यह सबसे अच्छा तरीका होगा / मरीज जिस शहर का और जिस स्थान का रहने वाला है वह स्थान कानपुर शहर से लगभग २०० किलो मीटर दूर है /

कुछ दिन पहले वह मेरे दवाखाने मे आ गया , उसने कहा कि वह जिस डाक्टर से इलाज करा रहा है , उससे वह सन्तुष्ट नही है / वह मेरा इलाज चाहता है /

मैने उसको बताया कि मेरा इलाज करने का तौर तरीका आयुर्वेद का ही है लेकिन मै बिना जान्च किये कोई इलाज नही करता / उसको पूरा इलाज का तौर तरीका बता दिया / मरीज जान्च कराने के लिये तैयार हुआ/ ETG AyurvedaScan के साथ साथ Ayurveda Blood Test , Ayurveda Urine test , Ayurveda Thermal Scanning के साथ साथ अन्य परीक्षण किये गये / परीक्षण में three dimensional रिजल्ट प्राप्त होने के बाद मुख्य तकलीफे दर्ज की गयी/

Chief complaints and Impressions मे जो भी anomalies मिली वह नीचे दी गयी है /

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ETG AyurvedaScan के trace record को देखकर पता चला कि इस मरीज के irregular cardiac rhythum की Problem है यानी इसकी हृदय की गति जो एक निश्चित समय के अन्तराल में अनुशासात्मक रूप में होना चाहिये वह नही है और जो हृदय की धड़कन है वह अनियमित है , कभी अन्तराल बढ जाता है और कभी घट जाता है /

दूसरा Observation में यह अनियमितता मिली कि इस मरीज का रक्त का प्रवाह सिर की ओर अधिक है / सिर की ओर रक्त प्रवाह होना ETG AyurvedaScan के परीक्षण के हिसाब से एक तरह की बीमार अवस्था है / सामान्य अवस्था में रक्त का प्रवाह LOWER EXTREMETIES की ओर होना चाहिये / इस तरह की प्राप्त recorded traces से रोग निदान मे सुविधा बहुत होती है / ETG AyurvedaScan के record किये गये इस तरह के traces के अध्ध्य्यन में यह बात पुख्ता तौर पर पता चली कि जिन मरीजों का रक्त का प्रवाह सिर की ओर होता है , उन मरीजों मे दो बाते अवश्य पायी जाती हैं, पहला- इस तरह के मरीजों मे अपने आप मानसिक तनाव बना रहता है , यद्यपि मरीज मान्सिक तनाव नही करना चाहता है लेकिन यह कुदरती तौर पर न चाहते हुये भी मानसिक तनाव बना रहता है , दूसरा; ऐसे मरीज मे यह बात अव्श्य होती है कि उनके दिमाग की सोच मे जब एक बात यानी single idea घुस जाता है या पैबस्त हो जाता है तो वह दिमाग से कई कई दिनो तक निकलता नही और यही idea बार बार जल्दी जल्दी सेकन्ड सेकन्ड में repeat यानी दुहराता रहता है /

यह ETG AyurvedaScan की बहुत बड़ी खोज है /

तीसरे Observation में रिकार्ड की गयी ट्रेसेज में पता चला कि इस मरीज को Bradycardia है यानी इसकी नाड़ी की चाल सामान्य से कम है / नाड़ी की चाल कम होने का मतलब यह है कि शरीर में electrolytic imbalances है अथवा minerals imabalances हैं / General Health condition के deteriorate होने की वजह से अथवा कई तरह की एलोपैथी चिकित्सा की दवाओं के लगातार खाते रहने के कारण इस तरह की स्तिथि बनती है / नब्ज के धीमे चलने के कुछ दूसरे कारण और भी होते हैं, जिनका निराकरण करना जरूरी होता है / आयुर्वेद चिकित्सा के लिये ETG AyurvedScan आधारित इलाज करते हैं तो cpmprehensive treatment की आवश्यकता होती है और तभी जड़ मूल से बीमारी दूर करने का रस्ता बनता है /
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आयुर्वेद के Fundamentals की स्तिथि रक्त के परीक्षण से उक्त रिपोर्ट में किस intensity level की है , इसे भी समझना चाहिये / त्रिदोष की स्तिथि में वात दोष सामान्य से बहुत कम है / यह ११ /ahmv नपकर आया है / इससे यह पता चला कि इसे वात रोग बहुत पुराना और बहुत तकलीफ देह स्वरूप का है / पित्त दोष की स्तिथि सामान्य से थोड़ा नीचे है / दोष निर्धारण के हिसाब से इस रोगी को वातज-पित्तज व्याधि है / Ayurvedic Pathophysiology के हिसाब से इस रोगी को शरीर में दर्द युक्त तकलीफ होना आवश्यक है, यह मूल बात है /

सप्त धातुयें , जो Ayurvedic Pathology है, इसमें रस धातु तो सामान्य है लेकिन रक्त से लेकर मज्जा धातु सामान्य से कम है लेकिन शुक्र धातु सामान्य से अधिक है / इसका मतलब यह हुआ कि रोगी के शरीर की रस धातु यानी Anabolism की प्रक्रिया के पश्चात रक्त की धातु का परिवर्तन अथवा conversion होने की प्रक्रिया शरीर द्वारा पुर्ण रूप से परिवर्तित नही की जा पा रही है / जब रक्त धातु की conversion pathology की कार्य प्रक्रिया सामान्य नही है तो आगे परिवर्तित होने वाली धातुये असामान्य हो गयीं हैं /

इसका अर्थ यही है कि पाचन सन्थान यथा Liver, Pancreas, small Intestines, Gall bladder, Large Intestines आदि रक्त और पोषक तत्व बनने और बनाने की क्रिया-प्रतिक्रिया असामान्य है /

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Constituents of Blood की इस रिपोर्ट में 14 प्रकार के parameters नाप करके दिये गये हैं, जो मानव रक्त के constituents है / इसमें सामान्य constituents मे सल्फेट्स, सोडियम, आयोडीन, क्यूप्रम लेवल के हैं /

सामन्य से कम constituents मे टोटल फा्स्फेट्स, फोटैसियम, कैल्सियम, आयरन, मैग्नेशियम, अमोनिया, यूरिक एसिड, क्रियेटिन और यूरिया शामिल है /

सामान्य से अधिक केवल क्लोराइड आया है /

पूरी आयुर्वेदिक रक्त परीक्षण की blood picture देखने के बाद मरीज की बीमारी के बारे मे स्पष्ट हो जाता है कि प्राप्त किये गये अन्य परी्क्षणो के परिणामों से यथा ETG AyurvedaScan, Ayurveda Thermal Scan, Ayurveda Blood examination, Ayurveda Urine examination और आयुर्वेद SONO-Scan आदि जान्चों से tally करने के बाद किस तरह THREE DIMENSIONAL AYURVEDA DIAGNOSIS को स्थापित किया जा सकता है /
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