महीना: जनवरी 2014

“PITTA DOSHA ” EVALUATION ; AN AYURVEDIC BASIC FUNDAMENTALS WITH MODERN SCIENTIFIC VIEW ; आयुर्वेद आधारभूत सिध्धान्त ; “पित्त दोष” का आधुनिक वैग्यानिक दृष्टिकोणिक विवेचन


आयुर्वेद का दूसरा मूल सिधध्धान्त “पित्त ” से जुड़ा हुआ मानते है / पन्च महा भूतों मे जैसा कि वात के विवेचन मे पहले ही कहा जा चुका है , पित्त को ताप और सूर्य के गुणों से जोड़ा गया है / ताप कम हो या अधिक उष्मा का स्तर भौतिक और मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष स्वरूप में इसीलिये “पित्त” को भाषित किया गया है और इसी वजह से इसे जोड़ा गया है /

पित्त मानव शरीर मे किस स्थान पर निरधारित किये गये है , ऐसा वात स्थान के विवेचन मे प्रस्तुत किये गये चित्रों को देखकर स्पष्टतया देख सकते हैं / आयुर्वेद के महर्षियो ने पित्त का स्थान मानव शरीर में EPIGASTRIUM से लेकर NAVAL तक निर्धारित किया है / जैसा कि चित्रो के माध्यम से वात विवेचना मे बताया जा चुका है /

मोटे तौर पर यह माना जायेगा कि पित्त का स्थान महर्षियो ने बहुत सोच समझ कर स्थापित किया है / यह स्थान शरीर को उर्जा देने के लिये और शरीर के पाचन से पैदा हुये शरीर को पुष्टि प्रदान करने वाले तत्वो के reservoir के लिये जाना जाता है / इस स्थान पर शरीर के ऐसे VISCERAS स्तिथि है जिनके विकृति होने से हमेशा बहुत fatal anomalies पैदा होती हैं /

इस स्थान पर LIVER और GALL BLADDER और PANCREAS और SPLEEN और LEFT AND RIGHT KIDNEY और LOWER PART OF STOMACH और DIAPHRAMऔर DEUDENUMJEऔर JUNUM और UPPER SMALL INTESTINES और PART OF LUMBER REGION और PART OF LOWER RIBS आदि शरीर की बनावटे स्तिथि है /

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आधुनिक चिकित्सा विग्यान के साइन्सदानों ने भी abdominal cavity को चार हिस्सो मे बान्टा है जैसा कि ऊपर के चित्र मे बताया गया है / इसका मतलब यही है कि आयुर्वेद के आचार्यो ने जिस तरह का division शरीर का किया था वह बहुत से सन्दर्भ मे सही है /

यहां हमारा “पित्त” दोष के स्थापत्य के लिये विवेचन करना है / आयुर्वेद ने यह स्थापित किया है कि शरीर को गर्मी और भोज्य पदार्थो का पाचन और मानव की मानसिक और शारीरिक स्तिथि को मुख्य्तया maintain करने के लिये abdominal cavity के यही अन्ग महत्वपूर्ण है बल्कि अति महत्व पूर्ण है /

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पित्त के कार्य प्रधान रूप में निम्न प्रकार के हैं ; Pitta Functions are mainly classified as under mentioned ;
**facilitates metabolism
**hormonal functioning
**regulates body heat
**regulates body temperature
**helps digestion
**understanding
**intelligent
**hunger
**thirst
**perception
**color
**comlexion
**anger
**hate
**jealous
**Courage
**Mental abilities
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Pitta dosha is therefore considered AYURVEDA CONSTITUTIONS, AYURVEDA AETIOLOGY and in AYURVEDA PRABHEDA pathophysiology and TRIDOSHA pathological conditions related to SAPTA DHATU inclusion.

आयुर्वेद की चिकित्सा के लिये : विश्व का पहला और अकेला आधुनिक वैग्यानिक परीक्षण और निदान ग्यान तकनीक से सुसज्जित OUT-DOOR HOSPITAL : यहां आधुनिक तकनीकों [१] ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण [२] आयुर्वेद रक्त परीक्षण [३] आयुर्वेद रक्त केमिकल केमेस्ट्री परीक्षण [४] आयुर्वेद मूत्र परीक्षण [५] आयुर्वेद मूत्र केमिकल केमेस्ट्री परीक्षण [६] ई०ऎच०जी० होम्योपैथीस्कैन [७] होम्योपैथी रक्त परीक्षण आदि की सुविधा युक्त उपलब्धता और आयुर्वेद का बेहतर इलाज की व्यवस्था उपलब्ध है


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“VATA” DOSHA EVALUATION ; AN AYURVEDIC BASIC FUNDAMENTAL WITH MODERN SCIENTIFIC VIEWS ; “वात दोष” आयुर्वेद के बेसिक फन्डामेन्टल का आधुनिक चिकित्सा विग्यान आधारित विवेचन


वात दोष को आयुर्वेद का मूल स्वरूप में स्थापित उस तत्व का समन्वित रूप है जिसे प्राकृतिक शक्तियों से जोड़्कर देखा जाता है /

आयुर्वेद का मानना है कि मानव शरीर इस धरा के अन्दर व्याप्त पान्च मूल तत्वों से पोषित होकर बना है / यह पान्च तत्व वे है जिनके आधार के बिना इस धरा पर जीवन जी पाना बहुत मुश्किल और असम्भव है / ये पान्च तत्व है जो पहला है वह जल यानी पानी, जो दूसरा है वह हवा यानी वायु ,जो तीसरा है वह सूर्य यानी अग्नि , जो चौथा है वह आकाश यानी व्योम और जो पान्चवां है वह है पृथ्वी यानी जमीन, जिस पर सभी प्राणी रहते हैं /

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आयुर्वेद मे महर्षियों ने वात का स्थान शरीर में बहुत सोच विचार कर निर्धारित किया होगा ऐसा मेरा मनना है /

वायु के गुणो को आधार बनाते हुये इसके गुण किस तरह से मानव शरीर में प्राप्त हो सकते हैं इसके बारे मे उन्का तुलनात्मक विवेचन बहुत सटीक समझ मे आता है / वायु चलायमान है , एक स्थान से दूसरे एथान तक झोन्के के साथ बहती है , धीरे धीरे भी बहती है और तूफानी चाल से भी बहती है , जिसे अन्धड़ कह सकते है / वायु का मिजाज वैसे तो मौसम के हिसाब से और गर्मी और सर्दी और बरसात के प्रभाव के पड़ने से पैदा हुये कारण से बदलता रहता है और इसकी intensity level मे घटोतरी और बढोतरी होती रहती है / वायु को घूमने के लिये आकाश और पृथ्वी के बीच का खाली स्थान मौजूद है, जहां वायु का सन्चार कही अधिक कही कम होता रहता है /

यही वायु के गुण मनुष्य जाति क्या सभी पृथ्वी के प्राणियों मे पाये जाते हैं / कैसे? मनुष्य की टान्गे यानी दोनों पैर मनुष्य शरीर को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते है / एक स्थान से दूसरे स्थान तक चलायमान होना वायु का गुण है / मनुष्य एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिये अपने पैरों का उपयोग करता है और अपने धड़ यानी torso को ्यानी अपने शरीर के सभी अन्गों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने मे सफल होता है / वायु का सन्चरण का तरीका और concept यही है /

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यानी तात्पर्य यह है कि वायु और आकाश का जितना भी कार्य और चरित्र है और उनके जितने न्य़ूनाधिक अवस्था के गुण और दोष है वे सबके सब मानव शरीर मे पाये जाते है, ऐसा आयुर्वेद के मनीषियो का मानना है /

इसीलिये आयुर्वेद के मनीषियों ने मानव शरीर में वात का स्थान मूल रूप से Umblical से नीचे के हिस्से जिसे त्रिक स्थान का नाम सन्ग्या दी गयी है और जिसमें दोनों पैर , कूल्हा यानी कमर, Lumber Spine के साथ साथ बड़ी आन्त के तीनो हिस्से , पुरुष के जननान्ग अथवा महिला के जननान्ग, प्रोस्टेट और महिलाओं के जननान्ग यथा गर्भाशय आदि का एकल सन्कलन शामिल है, इनकी anatomy और physiology को शामिल करके वात का मुख्य स्थान माना है /

मनीषियों के इस तरह के Observation से पहले का उनका ग्यान और अनुभव से यह जानने को मिलता है कि उन्होने इससे पहले मानव की तीन प्रकृतियो का Observation कर लिया था / इसके लिये मनीषियों ने मानव की कद और काठी यानी बनावट, बोलने और बात चीत करने का तरीका , चाल ढाल, गुण और अवगुण आदि के बारे में ग्यान प्राप्त कर लिया था / इस आधार पर उन्होने मनुष्यो को सात तरह की विविधताओं के बारे मे आन्कलन कर लिया था अथवा यह कहे कि सात तरह की प्रकृतियो मे मानव की प्रकृतियों को बान्ट दिया गया था /

मूल रूप से तीन प्रकृतिया पहले observe की गयी थी जिनमें वात और पित्त और कफ प्रमुख थीं /

यहां विवेचन “वात” प्रकृति अथवा वात दोष अथवा वात शरीर के किस स्थान मे निर्धारित किया गया है , इसका discussion कर रहे है /

शरीर को इस तरह से “वात स्थान” के लिये निर्धारित करने से अथवा बान्टने से यह समझना बहुत जरूरी है कि जिन अन्गो को वात स्थान के लिये आबन्टित किया गया है , उनका क्या स्वरूप है और वे क्या क्या कार्य करते है तथा उनका शरीर में कितना महत्व है ?

त्रिक स्थान , जहां वात स्थान का निर्धारण किया गया है , उन स्थानॊ पर शरीर के कौन कौन से अन्ग प्रत्यन्ग पाये जाते है, पहले इन सबको जान लेते है /
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जैसा कि ऊपर के चित्र मे इन्गित किया गया है कि नाभी के नीचे से लेकर पैरों के तलवों तक का स्थान आयुर्वेद के मनीषियों ने तय किया है / जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है कि इस बताये गये स्थान में शरीर के पेट का निचला हिस्सा सामने की ओर से माना गया है जो पीछे तक सीध मे रीढ की हड्डी तक जाता है /

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ऊपर दिये गये चित्र मे यह बताने का प्रयास किया गया है कि मनुष्य जो भी खाता पीता है या वह जो भी ठोस या तरल पदार्थ मुख द्वारा निगलता है यह एक प्रकार का वायु का गुण धर्म है और आयुर्वेद के अनुसार वायु का एक कार्य है /

यह पाचन तन्त्र का माडल है जिसमे यह बताया गया है कि मनुष्य जो भी खाता पीता है वह कैसे और कहां से pass होकर बाहर निकल जाता है /

यहां सन्क्षेप मे वायु के गुण-धर्म बताये जा रहे है जिन्हे समझना जरूरी है /

वायु के बारे मे शास्त्रों मे कहा गया है कि वायु अन्य दूसरे दोषॊ तथा सप्त धातुओ को पहुचाने वाली रज गुण युक्त, जल्दी चलने वाली, सूक्ष्म, हल्की, रूखी और चन्चल है / श्वांस का लेना और छोड़ना इसी से होता है / हृदय और इन्द्रियों को और चित्त [मन] को धारण करती है / यह जिसके साथ मिलती है उसी के अनुसार कार्य करने [catalystic functions] लगती है / यहां केवल introduction के तौर पर वायु का उल्लेख किया गया है /

नीचे के चित्र मे यह बताने का प्रयास किया गया है कि आयुर्वेद के हिसाब से शरीर के किस हिस्से को तीनों दोषो को दृष्टिगत रखते हुये निर्धारण किया गया है / SKELETAL SYSTEM को देखने से यह पता चलता है कि कमर के हिस्से यानी LUMBER REGION से लेकर नीचे तलवो की हड्डियो तक को इसमे include किया गया है / इसमे Lumber spine के vertebras और Pelvis Girdle के अलावा Femur Bone आदि सभी हड्डियां शामिल हैं /

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मान्सपेशियों और उनके साथ के articulations यथा tendons और Ligaments तथा दूसरी बनावटें जो हड्डियों से चिपकते हुये मिलकर एक मज्बूत आधार बनाती हैं , जैसा कि यहां नीचे दिये गये चित्र मे बताया गया है / यहां बताया गया है कि “वात” स्थान में किस तरह की मान्स पेशियों की बनावट है और उनके क्या काम हैं ? उनका स्ट्रक्चर किस तरह का है / यह वात स्थान का MUSCULAR SYSTEM की उन मान्सपेशियों को इन्गित करता है जो वात के गुणों को कार्य रूप में परिणित करता है /
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नीचे के चित्र मे यह बताने का प्रयास किया गया है कि पाचन सन्सथान जो मनुष्य के शरीर का एक महत्वपूर्ण कार्य समपादन करने वाला हिस्सा है जिससे सारे शरीर को पोषण मिलता है और जिसके बगैर कोई भी प्राणी अपना जीवन जी नही सकता है, उसके लिये यहां इस चित्र के माध्यम से बताने का प्रयास है कि किस तरह वात प्रदेश का हिस्सा बड़ी आन्त के तीनो हिस्सों को जिन्हे कोष्ठ भी कहा जाता है / आयुर्वेद मे इस हिस्से को बहुत प्रधानता दी गयी है , क्योंकि आयुर्वेद का यह मानना है कि वायु का स्थान कोष्ठ मे ही है /

एक दूसरे नीचे दिये गये पाचन सनस्थान के चित्र मे यही बात बहुत स्प्ष्टता के साथ बता दी गयी है, जिसे देखकर समझा जा सकता है कि आयुर्वेद के मनीषियों का बड़ी आन्त यानी कोष्ठ का “वायु स्थान” निर्धारित करने का क्या कारण रहा होगा ? इसमे कोई complicacy नही है, यह समझने मे कि क्यों वात का स्थान आयुर्वेद के मनीषियों ने यही पर निर्धारित किया ? विचार करने पर यही मानना होता है कि वायु के जितने भी Charecteristics जो भी है और जितने भी है वे सबके सब इसी एथान पर चरितार्थ होते हैं / जैसे कि नीचे दिये गये वाय के गुण धर्म एक बार फिर से दोहराये जाते है /
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Characteristics of VATA DOSHA as it is perceived ;

[1] Manifesters of Energy
[2] Kinetic Energy
[3] Regulates Movements
[4] Nervous system represents
[5] Dry
[6] Light
[7] Cold
[8] Mobile
[9] Active
[10] Clear
[11] Astringent
[12] Dispersing in Nature
…………….

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……………

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………….

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ऊपर के चित्र मे जहां जहां के स्थान SKELETAL मे लाल रन्ग RED COLORS से दर्शाये गये है , यह सभी स्थान लाल रक्त कण RED BLOOD CELLS पैदा करने के स्थान है / यानी जहां जहां लाल स्थान इन्गित है वहां वहां खून का निर्मान यानी खून बनता है / ध्यान से देखिये कि आयुर्वेद मे बताये गये “वात स्थान” मे कितनी महत्व्पूर्ण हड्डिय़ा है जहा रक्त बनता है / इन सभी स्थानो को देखने से पता चलता है कि शरीर के लिये रक्त यानी खून बनाने वाले स्थान सबसे अधिक यानी 45 % प्रतिशत के लगभग वात स्थान मे ही है /
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इसी तरह से ऊपर के चित्र मे बताया गया है कि WHITE BLOOD CELLS शरीर मे किस स्थान मे बनते है यानी W.B.C. शरीर मे किन किन स्थानों मे बनते है / इसमे भी यही बताया गया है कि आयुर्वेद के हिसाब से वात स्थान ही वह स्थान है जहां सफेद रक्त कण अधिक सन्ख्या मे इन्ही इन्गित स्थानो मे ही बनते है /
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यहां ध्यान देने की बात है कि शरीर के सभी EXCRETIONS मल और मूत्र और आर्तव और गर्भ और वीर्य आदि का निकास “वात स्थान” मे ही निश्चित किया गया है / जिनके बहुत specific कार्य है /

आयुर्वेद शास्त्रों मे वात दोष से उत्पन्न रोगों की सन्ख्या 80 बतायी गयी है / ऐसा माना जाना चाहिये कि देश और काल और परिस्तिथियों के अनुसार आयुर्वेद के महर्षियों का जितना भी अच्छा से अच्छा और अधिक से अधिक subjects के साथ किये गये conception और perception और observation की depth थी , उन्होने मानव समाज को देने का प्रयास किया है /

Our Studies regarding VATA have shown the following results. हमारे रिसर्च केन्द्र मे वात प्रकृति और वात विषय पर किये गये अध्ध्य्यन से निम्न निष्कर्ष निकाले गये हैं ;

E.T.G. AyurvedaScan के अलावा अन्य दूसरे आयुर्वेद के परीक्षण सन्साधनों [ यथा Machines and equipments के द्वारा ] की सहायता लेकर और इन साधनो का उपयोग करके “वात” विषय से सम्बन्धित विभिन्न आयामो के अध्ध्यन बड़े स्तर कर किये जा चुके हैं और यह कार्य निरन्तर जारी है /

इन अध्ध्यनों मे कुछ विशेष बाते स्पष्ट हुयी है जिनके सम्भव कारण क्या हो सकते है , यह जानने का प्रयास किया गया है ;

[१] ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तथा अन्य आयुर्वेद की विकसित की गयी मशीनो और साधनो द्वारा अन्कित किये गये मनुष्य के दोनों पैरों के बीच के trace records और THERMAL SCANNING मे यह बात उभर कर सामने आयी है कि दोनो पैर के बीच का electrical behavior शून्य 00.00 से लेकर 00.05 pixel के करीब का होता है / इतना कम pixel measurement शरीर के किसी भी हिस्से मे नही पाया जाता है /

[२] इसका कारण यह समझ मे आया है कि इस हिस्से मे यानी दोनों पैरों के हिस्से मे शरीर की electrical activities बहुत कमजोर यानी weak होती हैं / इसका कारण यह है कि हृदय जब अपने द्वारा स्वत: उत्पन्न की गयी Self generated electrical pulses को diffuse करता है तो यह diffuse की गयी electric सूच्छ्म अवस्था मे आ जाती है और IONS मे convert होती है और इसके बाद नसों और नाड़ियो द्वारा शरीर के visceras मे फैल जाती हैं और शरीर के अन्ग तथा अन्गो के cells तथा Tissues को electrify करते हुये rejunevate करती है /

[३] इस प्रकार से electric pulses > converted IONS > का फैलने का कारण यह समझ मे आया है कि इसके IONS से प्रभावित होकर शरीर के visceras काम करने के लिये न्यूनाधिक उत्तेजित होते है और अपनी rejunevate capacity के अनुसार काम करते है /

[४] इन visceras के cells और tissues जितना ही अधिक हृदय द्वारा diffuse किये गये elctrical pulses को recieve करके प्रभावित होन्गे , visceras उतना ही अधिक या सामन्य या कम काम करने के लिये सक्रिय अथवा निष्क्रिय होन्गे /

[५] ETG AyurvedaScan परीक्षण रिपोर्ट के प्राप्त आन्कड़ो से इस बात का पता चल जाता है कि शरीर का कौन viscera कितना कार्य शील है उसकी PHYSIOLOGICAL य़ा PATHOILOGICAL स्तिथि कैसी है ? आयुर्वेद रक्त परीक्षण और आयुर्वेद रक्त केमिकल केमिस्ट्री परीक्षण तथा अन्य दूसरे परिक्षणो से प्राप्त डाटा इस बात को प्रमाणित करता है /

[६] दोनो पैरों में electrical bahaviour का न होना अथवा कमजोर होना यह इन्गित करता है कि Autonomic Nervous system और Musculo-skeletal system की कार्य-क्षमता और Physiology समन्वि्त combined तरीके से कार्य करती है , जो Brain Faculties से जुड़ा हुआ है , ऐसा निष्कर्ष निकाला जा सकता है /

LEUCODERMA CASE ; PROGRESSING FOR CURE ; सफेद दाग , लियूकोडर्मा का एक केस जिसे ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक आधारित आयुर्वेदिक इलाज से फायदा


दिनान्क २८ अगस्त २०१३ को एक २७ साल के लड़्के ने सफेद दाग के इलाज के लिये मेरे OUT DOOR HOSPITAL मे consultation के लिये समपर्क किया था / इस लड़्के के सारे शरीर पर छोटे बड़े सैकड़ों की सन्ख्या मे LUECODERMA यानी सफेद दाग के चकत्ते पड़े हुये थे, जो उसको पिछले १५ साल पहले हुये थे / इसके पिता एक होम्योपैथी के डाक्टर है जो प्रैक्टिस करते है / वे ही इसे लेकर इलाज के लिये मेरे OUT-DOOR HOSPITAL मे लेकर आये थे /

मैने उनको बताया कि बिना ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और आयुर्वेद के रकत और पेशाब के परीक्शन के इलाज कराना बेकार है / LEUCODERMA के ईलाज के लिये परीक्षण कराना सबसे पहली आवश्यकता है /

दिनाक २८ अगस्त २०१३ को इस लड़्के का शरीर के दो हिस्सो का PHOTOGRAPH लिया गया था / नीचे दिया गया photograph इसी दिन का है /
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यह PHOTOGRAPH मरीज के scapular region यानी पीठ के हिस्से से लिया गया है / हलान्कि मरीज का सारा शरीर सफेद दाग के चकत्तों से भरा हुआ था लेकिन इलाज की progress देखने के लिये आवश्यक होता है कि PHOTOGRAPHs लेकर मानीटरिन्ग की जाय, क्योन्कि किसी को भी याद नही रहता कि किस समय सफेद दाग की क्या स्तिथि पहले क्या थी और कैसी थी ? अमूनन दो या तीन स्थानो से photographs लिये जाते है / इसी दिन एक दूसरा नीचे दिया गया photographsलिया गया जो बाये सीने की बायी तरफ की आठवी पसली के ऊपर का है/
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दिनान्क २१ जनवरी २०१४ को इस मरीज को फालो-अप के लिये बुलाया गया था , फालो अप की जान्च मे और उसी समय comparison के लिये दुबारा PHOTOGRAPHS उन्ही शरीर के सफेद दाग के स्थानों के लिये गये है, जहा पहली बार सफेद दागों के चित्र उतारे गये थे/ पिछली तारीख दिनान्क २८ अगस्त २०१३ के चित्र को देखकर और दिनान्क २१ जनवरी २०१४ के चित्र का तुलनात्मक मूल्यान्कन करके आप सभी आयुर्वेद प्रेमी और चिकित्सक बन्धु स्वयम ही निर्णय करें कि लगभग १५० से अधिक दिनों के आयुर्वेद के इलाज के बाद सफेद दागो मे कितना परिवरतन हुआ है / यह चित्र पीठ के scapular region का है, जो दिनान्क २१ जनवरी २०१४ को अनकित किया गया है /
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यह दूसरे स्थान का चित्र है जो बायी तरफ की पसली के ऊपर का है और यह भी दिनान्क २१ जनवरी २०१४ को अन्कित किया गया है / तुलनात्मक परिवर्तन साफ साफ दृष्टि गत है कि कितना सफेद दाग ठीक हुआ है /
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इस रोगी के सारे शरीर मे हो गये सफेद दाग LEUCODERMA PATCHES ; white spots मे परिवरतन हुये है और त्वचा का सामान्य रन्ग प्राकृतिक तौर पर होता जा रहा है /

हमारे रिसर्च केन्द्र मे बड़ी सन्ख्या में सफेद दाग के रोगियों का इलाज किया जा रहा है और सभी ठीक हो रहे है / हमने हमेशा कहा है कि अब LEUCODERMA असाध्य या लाइलाज बीमारी नही रह गयी है और अब इसका इलाज आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान मे उपलब्ध है / हम यहां उन्ही सफेद दाग के रोगियों के चित्र सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराते है , जो हमे इसकी प्रकाशन के लिये अनुमति देते है / सभी मरीज अपने रोग के बारे मे कुछ भी बताने से इनकार करते है, इसलिये मरीजों की निजता का ख्याल करके हम उतना ही बताने का प्रयास करते है , जितना कि सम्भव होता है /

LEUCODERMA के इलाज के लिये जिस तकनीक और इलाज के तरीके का उपयोग किया जाता है , वह निम्न प्र्कार से है ;

१- Step 1 – Ayurveda Thermal Mapping and scanning करते है
२- Step 2 – E.T.G. AyurvedaScan मशीन से सारे शरीर का परीक्षण करते है
३- Step 3 – E.T.G. mapping and trace scanning record करते है
4- Step 4 – Ayurveda Blood Examination और
५- Step 5 – Ayurveda Blood Chemical Chemistry examination करते है
६- Step 6 – Ayurveda Urine examination करते हैं
७- Step 7 – Ayurveda Urine Chemical Chemistry examination करते है
८ – Step 8 – Physical examination
९ – आवश्यक होने पर Ayush SONO Examination करते है
१० – आवश्यक होने पर TREAD MACHINE E.T.G. AyurvedaScan Examination करते है
११ – और इन सबके अलावा अन्य बहुत से परीक्षण हैं जो मरीज की रोग-निदान की आवश्यकता के अनुसार तय करके किये जाते है /

इस तरह की प्रक्रिया करने मे दो घन्टे से लेकर चार पान्च घन्टे जान्च करने मे लग जाते है /

सारा डाटा कम्प्यूटर मे फीड करके कम से कम २०० पेज की रिपोर्ट तैयार की जाती है, २०० पेज से अधिक पेज की रिपोर्ट इस बात पर निर्भर करती है कि मरीज की तकलीफ के हिसाब से क्या क्या और कौन कौन से परीक्षण किये गये हैं /

इसमे लगभग कम से कम ६ घन्टे से लेकर १२ घन्टे तक लग जाते है , कभी कभी series of examination के लिये अधिक समय परीक्षण के लिये जरूरी होता हैं/ ऐसे परीक्षण के लिये डाटा जुटाने के लिये दो या तीन दिन की जरूरत होती है /

साधारण तौर पर परीक्षण सुबह ९ बजे के आस पास किये जाते हैं / शाम ६ बजे तक रिपोर्ट तैयार कर दी जाती है और मरीज उसी दिन अपने destination के लिये वापस जा सकते हैं / 99 % प्रतिशत मरीज उसी दिन वापस कर दिये जाते है / बहुत जरूरी मरीजो को ही परीक्षण पूरा करने के लिये रूकने की सलाह दी जाती है / अन्यथा एक दिन मे ही परीक्षण पूरा करके उसी दिन मरीज को शाम तक रिपोर्ट देकर वापस कर दिये जाते है /

मरीज के २०० पेज में प्राप्त सारे डाटा के observation के बाद 3 dimensional DIAGNOSIS करके जो भी माकूल आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक अथवा इस दोनॊ के combination की दवाये होती है , वे मरीज को उपयोग के लिये suggest कर दी जाती हैं और एक निश्चित अवधि के लिये दवाओं के उपयोग की सलाह दी जाती है / सारी की सारी आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक दवाये मरीज को बाज़ार से लेकर उपयोग करना होता है / हमारे यहां से कोई भी आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक दवा नही दी जाती है . मरीज को सब दवाये आयुर्वेदिक स्टोर से खरीद कर उपयोग करना होता है / हमारे द्वारा suggest की गयी सभी दवाये भारत और विदेशों मे सभी जगह मिल जाती है / मरीज कही से भी दवा खरीद कर प्रयोग कर सकता है /

मरीज को खान-पान के लिये क्या खाना पीना है और दिन चर्या में उसे क्या क्या करना है और क्या क्या नही करना है यह एक पूरी फाइल मे अन्कित करके बता दिया जाता है /

दवाओं के निर्धारित समय तक उपयोग करने के बाद मरीज को सलाह दी जाती है कि दुबारा आकर अपनी दवा समय और मौसम और परिस्तिथियों के अनुसार अनुकूल सेट अप करा लें /

इस तरह की प्रक्रिया को अपनाते हुये हमारे रिसर्च केन्द्र मे आने वाले सफेद दाग के मरीज अवश्य ठीक होते हैं / इसी तरह की प्रक्रिया अपनाकर शरीर के अन्दर होने वाली सभी बीमारियो का इलाज किया जाता है चाहे उनका कोई भी नाम हो और वे बीमारियां कैसी भी हों /
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A case of MIRGI : EPILEPSY ; Diagnosis through Ayurveda Latest technologies ; मिर्गी के एक रोगी का आयुर्वेदिक निदान परीक्षण


नीचे दिया गया विवरण एक मिर्गी के रोगी का है जिसकी उमर १७ साल की है / इसको मिर्गी का दौरा पिछले सात साल से आ रहा है / इसके पिता एक एलोपैथी के चिकित्सक हैं / एलोपैथी का बेहतर और अच्छे से अच्छा इलाज कराने के बाद भी इस लड़्के को मिर्गी का दौरा लगातार आता रहा / शुरु शुरु मे मिर्गी का दौरा कुछ माह के अन्तराल मे कुछ समय एक मिनट से अधिक का आता था परन्तु बाद मे जैसे जैसे समय बीतता गया मिर्गी का दौरा जल्दी जल्दी और दिन मे कई कई बार आने लगा तथा दौरे से आने वाली बेहोशी का समय भी बढ गया / कई शहरों और देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा सनस्थानों मे एलोपैथी दवाओं का इलाज कराने के बाद भी इस लड़्के को मिर्गी का दौरा लगातार आता रहा और ठीक नही हुआ / सबसे चिन्ताजनक बात parents के लिये यह् थी कि एक तरफ मरीज की तकलीफ नही ठीक हो रही थी और मिर्गी का दौरा रुक नही रहे थे तो दूसरी तरफ उसकी मिर्गी का दौरा रोकने के लिये दी जाने वाली दवाओं की मात्रा पहले से दुगनी और फिर तीन गुनी और फिर चार गुनी तक हो गयी , इसके साथ साथ रोगी का दिमाग कमजोर होने लगा , उसको पढने लिखने से अरुचि हो गयी और उसको पढने लिखने से एक तरह से hate होने लगी /

इस लड़्के के रिश्ते मे इसकी इसकी एक बहन है, जो इटावा के पास की रहने वाली है और जिसको मिर्गी का दौरा कई साल से पड़ रहा था और जिसका इलाज एलोपैथी दवाओं से किया जा रहा था, लेकिन दवाये खाते रहने के बाद भी इस लड़्की को मिर्गी का दौरा महीने मे कई कई बार पड़ता रहता था / घर के लोगो ने इस लड़की की शादी तय कर दी थी , जो पिछले साल नवम्बर मे हो चुकी है / इस लड़्की का इलाज करने के लिये इस लड़्की के एक रिश्तेदार ने हमारे यहां कराने के लिये कहा था / इस लड़्की का इलाज हमारे द्वारा किया जा रहा है और वह मिर्गी के दौरे से पूरी तरह से ठीक हो चुकी है /

इस लड़्की के मिर्गी के दौरे को ठीक होते हुये देखकर फतेह्पुर के इस लड़्के के parents , जो खुद एक एलोपैथी के डाक्टर है , इसे हमारे रिसर्च केन्द्र मे इलाज के लिये लेकर आये /

इस लड़के का ETG AyurvedaScan तथा दूसरे परीक्षण किये गये जो आप सबके लिये यहां दिये जा रहे हैं ताकि चिकित्सा प्रेमी लोग लाभान्वित हो सके /
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ऊपर की रिपोर्ट शीट मे रिकार्ड किये गये ट्रेसेस मे Irregular Electrical Behaviour शरीर का रिकार्ड हुआ है / इस तरह की trace रिकार्डिन्ग होने के बहुत से कारण होते हैं / जब ऐसे ट्रेस रिकार्ड किसी भी रोगी के होते है तो आयुर्वेद का निदान बहुत सटीक होता है / इस कारण से Treatment भी बहुत सटीक और अचूक हो जाता है और आयुर्वेदिक दवाये चमत्कारिक रूप से फायदा पहुचाती है जो रोगी को रोग मुक्त करने के साथ साथ स्थायी फायदा देती है /
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यहां दिये गये ट्रेस रिकार्ड जो आयुर्वेद की mapping के हिसाब से रेकार्ड किये गये हैं / मिर्गी के रोगी में लगभग एक बात अवश्य observe की गयी है कि Brain अथवा दिमाग से समबन्धित करीब करीब सभी बीमारियों मे Blood Circulation सिर की तरफ होता है / यह ETG AyurvedaScan के हिसाब से एक तरह की असामान्य अवस्था शरीर की होती है / ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन का अध्ध्यन मानता है कि सामान्य अवस्था और सामान्य स्वास्थय को बनाये रखने मे circulation का पैरों की ओर होना आवश्यक होता है /
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E.T.G. AyurvedaScan की रिपोर्ट सारे शरीर की आयुर्वेद के हिसाब से mapping और तदनुसार Scanning करके पूरी तरह से data की processing करके तब रिपोर्ट जितने भी तरीके से डाटा acquire करने की विधियां हैं , उन सब्कॊ मिलाकर क्या तस्वीर आती है , उसी पर निर्धारित करके three dimentional diagnosis की जाती है / मरीज की जितनी भी मुख्य तकलीफे होती है उन्हे ही फाइनल रिपोर्ट में शामिल कर लेते हैं /

ईस रोगी की क्या क्या anomalies आयी है, उन्हे ही यहां बताया गया है /
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आयुर्वेद के हिसाब से इस मरीज की प्रकृति त्रिगुणात्मकता “रजस” है लेकिन इसके साथ “सात्विक” भाव अधिक है / इसकी जन्म के समय की प्रकृति का combination जो जन्म के समय के त्रिदोष को उपस्तिथि को दर्शाता है, इसमे वात दोष सर्वाधिक और कफ दोष सबसे कम निकला / हलान्कि ये दोनों ही सामान्य से अधिक लेवेल के मिले /

जिस समय मरीज का ई०टी०जी० और अन्य टेस्ट किये गये , उस समय का त्रिदोष उपस्तिथि में पित्त दोष सबसे अधिक यानी सामान्य से अधिक और कफ दोष कम यानी सामान्य से कम लेवल का निकला है /

त्रिदोश भेद यानी Ayurvedic Patho-physiology मे बात दोष के पान्चो भेद , पित्त दोष के पान्च भेद तथा कफ दोष के चार भेद असामान्य निकले है /

अग्निबल “विषमाग्नि” निकली है /

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सम्पूर्ण सप्त धातु जिसे Ayurvedic Pathology कहते है, भी असामान्य है और वात प्रभावित और पित्त प्रभावित और कफ प्रभावित सप्त धातुयें भी असामान्य स्तिथि की हैं /
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2013 in review


The WordPress.com stats helper monkeys prepared a 2013 annual report for this blog.

Here’s an excerpt:

The Louvre Museum has 8.5 million visitors per year. This blog was viewed about 890,000 times in 2013. If it were an exhibit at the Louvre Museum, it would take about 38 days for that many people to see it.

Click here to see the complete report.

COMMENTS;

THANKS TO ALL VISITORS, OFTEN VISITING THIS WEB-BLOG, NOT FROM INDIA BUT FROM ALL OVER THE GLOBE. I WANT TO ASSURE EVERY ONE THAT I SHALL TRY TO PROVIDE MY BEST SERVICES TO ALL AND EVERY SICK HUMANITY, WHERE EVER THEY ARE EXISTING ON THIS EARTH.

THANKS TO ALL AGAIN.

Dr. D.B.Bajpai
Ayurvedic Diagnostician and Chief E.T.G.AyurvedaScan Investigator
KANPUR, UP, INDIA

A Case of Neuro-musculo-skeletal Arthritis ; नसों-मान्सपेशियों-अस्थियों की सम्मिलित गठिया वात रोग का एक रोगी का विवरण


यहां एक महिला रोगी , जिसकी उम्र ५० + साल के लगभग की है , जिसे नसो-मान्शपेशियों-अस्थियों का सम्मिलित गठिया रोग पैदा हुआ और जिसका यह महिला लगभग १४ साल से एलोपैथी का इलाज बिना किसी शारीरिक आराम और फायदे के लगातार कराती चली आ रही है /

इस महिला को ALLOPATHY एलोपैथी यानी अन्ग्रेजी दवाओं से 14 साल इलाज करने पर कोई भी आराम नही मिली , उलटे उसकी तकलीफ बढती चली गयी/

यह महिला पहले नई दिल्ली मे रहती थी, इसे वहां लगभग १४ साल पहले बहुत मामूली सी पैरों में दर्द की शिकायत हुआ करती थी / एलोपैथी की दवायें खाने के बाद दर्द और दूसरी तकलीफे आराम हो जाती थीं, लेकिन तकलीफ कभी ठीक नही होती थी / धीरे धीरे इस महिला को कमर का दर्द होने लगा, फिर पैरों मे झन्झनाहट और सुबह उठने के बाद पैरों में खिचावट, RIGIDITY, STIFFNESS, चलने और उठने और बैठने मे दर्द और अन्य शारीरिक तकलीफ होने लगी / समय बीतने के साथ साथ एलोपैथी के बेहतर से बेहतर इलाज होते हुये भी और लगातार करते हुये धीरे धीरे दिन और महीने और साल बीत गये, लेकिन इस महिला की हालत ठीक होने के बजाय और ज्यादा खराब होती चली गयी / ज्यादा हालत बिगड़ने पर इस महिला ने नई दिल्ली को छोड़्कर कानपुर अपने मायके मे आकर रहने लगी / पैरों की उन्गलियों मे जब टेढापन आने लगा तो यह अपने परिवार के सदस्यों पर आश्रित रहने लगी / पहले पैर तकलीफ देने लगे थे , बाद मे दोनों हाथों मे उन्गलियों का टेढा पन आने लगा / एलोपैथी के डाकटरों का इलाज चल रहा था, पैदा हो रही और ज्यादा बढ रही तकलीफों के बारे मे शिकायत करने पर डाक्टर यही आश्वासन देते थे कि “बीमारी ठीक हो जायेगी ” /

यह सिलसिला कई साल तक चलता रहा / अन्त में महिला ने बिस्तरा पकड़ लिया और चलने फिरने के लिये मोहताज हो गयी /

इस महिला के एक पुरुष रिश्तेदार अपनी इसी तरह की तकलीफ musculo-skeletal rheumotoid arthritis का इलाज पिछले तीन महीने से [अक्टूबर २०१३] मेरे सन्सथान से करा रहे है, उनको अपनी बीमारी मे बहुत आराम मिला / उन्होने ही इस महिला को हमारे यहां इलाज कराने के लिये बताया / यही रोगी-सज्जन अपने साथ ही इस रोगी को लेकर इलाज और जान्च कराने के लिये आये थे /

इस महिला को डाकटरों ने बताया कि उसकी पैरों की टेढी हो गयी उनगलियों को सीधा करने के लिये आपरेशन किया जायेगा / लेकिन इस बात कॊ कोई गारन्टी नही है कि उन्गलिया सीधी हमे्शा के लिये हो जायेन्गी /
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रोगी ने क्या इलाज कराया, उसके दवाओं के पर्चे, जो स्थानीय मेडिकल कालेज के आर्थोपीडिक विभाग के प्रोफेसर-डाक्टर ने लिखे है, साथ मे लेकर आयी /

दवाओं में STEROID आधारित दवाओं की मात्रा देखकर मै तो दन्ग रह गया / इतनी heavy doses का उपयोग करना प्रक्टिस के हिसाब से क्या यह उचित लगता है ? यह विचार करने का एक बिन्दु हो सकता है /
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मैने रोगी को विस्तार से बताया कि आयुर्वेद क गर इलाज करान्मा चाहती है तो आको ETG AyurvedaScan तथा दूसरे परीक्शण करना होगा तभी पता चलेगा कि आपके शरीर मे कहां कहा उर क्या क्या परेशानियां हो रही जिनके कारण आपको यह तकलीफे हो रही हैं /

मरीजा का परीक्षण करने के बाद उसकी findings नीचे दी गयीं हैं /
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ऊपर दिये गये सभी कोणों से देखने से यह पता चला कि मुख्य रूप से इस महिला को निम्न प्रकार की तकलीफे हैं

१- इस महिला को हमेशा बुखार बना रहता है यानी शारीरिक ताप मान इस महिला का कभी सामान्य से कम यानी 96.6 F से कम और कभी सामान्य से अधिक यानी 98.6 F से अधिक होता है / यह इसलिये होता है क्योंकि Basic Metabolic Rate [BMR] अगर बाधित हो तो ऐसी नौबत आती है /
२- इस महिला का रक्त का OXIDATION प्रोसेस ठीक नही है, जिससे इसको Oxyheamoglobin की समस्या है / आक्सीजन मान्सपेशियों मे कम पहुचने से मान्सपेशियों की physiology बाधित होती है /
३- इस महिला को बड़ी आन्त और छोटी आन्तो की परेशानी है और इनमे सूजन है जिस कारण इसको पाखाना कभी होता है और कभी नही होता है / कई कई दिन तक पाखाना न होने की तकलीफ और शिकायत रहती है /
४- आयुर्वेद रक्त परीक्षण की रिपोर्ट बताती है कि महिला को “वात दोष” सामान्य से कम है और “पित्त दोष” सामान्य से कम है / इस प्रकार रोगी की तकलीफ प्रमुखतया द्वि-दोषज है / सप्त धातुओ में रक्त धातु और मान्स धातु और अस्थि धातु सामान्य से कम है और शुक्र धातु सामान्य से अधिक है / इससे यह निष्कर्ष एकदम साफ और स्पष्ट हैं कि महिला को जो भी तकलीफ हो रही है उसके लिये शुक्र धातु triggering factor है यानी महिला के जननान्गों reproductive system की pathophysiology के कारण तकलीफ का generation हो रहा है /
५- आयुर्वेद के एक दूसरे रक्त परीक्षण से cumulatively यह पता चला कि टोटल फास्फेट और क्लोराइड और पोटैसियम और आयरन और मग्नेशियम और अमोनिया और यूरिक एसिड और क्रियेटीन और यूरिया सामन्य से कम निकले हैं / आयुर्वेद की इस रिपोर्ट से प्राप्त सभी डाटा का एक साथ विवेचन किया जाता है और अलग अलग विवेचना नही करते हैं / इस डाटा का मिलान अन्य दूसरे श्रोतों से प्राप्त डाटा से करते है ताकि सही और pin-point diagnosis हो / प्राप्त सभी डाटा मान्स पेशियों और renal system और metabolic disorders तथा electrolytic imbalances को बता रहे है /
६- ETG AyurvedaScan के डाटा से भी य़ूटे्रस २२४ और आन्त्र विकृति १९७ और छोटी आन्त १८८ और पैर और पैर के जोड़ १८५ ई०वी० माप मिली है / लीवर १६८ और तिल्ली १६८ ई०वी० माप है / पन्क्रियाज ७३ ई०वी माप कर आया है / यह सभी डाटा ९१ से लेकर १०५ ई०वी० के बीच मे होने चाहिये / रोगी की शारीरिक जान्च करने पर उपरोक्त सभी अन्ग सूजन ग्रस्त पाये गये /
७- आयुर्वेद मूत्र परीक्शण में भी यही सब विकृतियां निकल कर आयी हैं /

प्राप्त डाटा की पूर्ण विवेचना करने के उपरान्त मरीजा को आयुर्वेदिक औषधियों का PRESCRIPTION और उसको क्या खाना है और क्या नही खाना है और जीवन शैली मे परिवर्तन के साथ विशेष हिदायते दी गयी, जो उसको लाभ पहुन्चा सके /

ARTHRITIS कैसी भी हो और किसी भी स्तर की हो , हमारे रिसर्च केन्द्र मे आयुर्वेद की जान्च पर आधारित सभी रोगी रोग मुक्त हो रहे है , उनको आराम मिल रही है, उनकी तकलीफे दूर हो रही है / हम उम्मीद करते है कि भविष्य मे आने वाले सभी ARTHRITIS के रोगी चाहे उनका रोग का स्तर कैसा भी हो, हमारे केन्द्र द्वारा खोजी गयी आयुर्वेद की नवीनतम तकनीको के उपयोग से अवश्य लाभान्वित होन्गे, जैसा कि अनुभव हमने उपवार करके अभी तक पाया है /

K.P.C.A.R.C. and Dr D.B.Bajpai ties with BRIDGES HEALTHCARE FEDERATION, INDIA ; AGREES TO PROVIDE 30 % DISCOUNTS ON ALL AYURVEDA AND HOMOEOPATHIC AND OTHERS EXAMINATION AND CHECK-UPS


2014 , this year we have ties with BRIDGES HEALTH-CARE FEDERATION , INDIA FOR PROVIDING 30 % DISCOUNTS ON ALL EXAMINATION DONE AT our Research Center in AYUREVEDA & HOMOEOPATHIC MEDICAL SYSTEMS to their CARD HOLDERS AND MEMBERS.

ANY PERSON , who is desirous for our service, should have a CARD HOLDER of Bridges Health-care Federation.

The following services will be given 30 % discounts for the BHF Card Holders.

1- ETG AyurvedaScan examination
2- EHG HomoeopathyScan examination
3- Ayurveda Thermal Scanning
4- Ayurveda Blood examination
5- Ayurveda Urine Examination
6- Homoeopathy Blood examination
7- Ayurveda Consultation
8- Speciality AYURVEDA Remedies
9- Speciality Homoeopathic Remedies
10- General check-ups
11- Homoeopathic Consultation

Free Ayurvedic and / or Homoeopathic remedies Prescription will be given to the BHF Card Holder patient, who will opt total package.

Benefit holders should approach to BRIDGES HEALTHCARE FEDERATION, INDIA.