“PITTA DOSHA ” EVALUATION ; AN AYURVEDIC BASIC FUNDAMENTALS WITH MODERN SCIENTIFIC VIEW ; आयुर्वेद आधारभूत सिध्धान्त ; “पित्त दोष” का आधुनिक वैग्यानिक दृष्टिकोणिक विवेचन


आयुर्वेद का दूसरा मूल सिधध्धान्त “पित्त ” से जुड़ा हुआ मानते है / पन्च महा भूतों मे जैसा कि वात के विवेचन मे पहले ही कहा जा चुका है , पित्त को ताप और सूर्य के गुणों से जोड़ा गया है / ताप कम हो या अधिक उष्मा का स्तर भौतिक और मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष स्वरूप में इसीलिये “पित्त” को भाषित किया गया है और इसी वजह से इसे जोड़ा गया है /

पित्त मानव शरीर मे किस स्थान पर निरधारित किये गये है , ऐसा वात स्थान के विवेचन मे प्रस्तुत किये गये चित्रों को देखकर स्पष्टतया देख सकते हैं / आयुर्वेद के महर्षियो ने पित्त का स्थान मानव शरीर में EPIGASTRIUM से लेकर NAVAL तक निर्धारित किया है / जैसा कि चित्रो के माध्यम से वात विवेचना मे बताया जा चुका है /

मोटे तौर पर यह माना जायेगा कि पित्त का स्थान महर्षियो ने बहुत सोच समझ कर स्थापित किया है / यह स्थान शरीर को उर्जा देने के लिये और शरीर के पाचन से पैदा हुये शरीर को पुष्टि प्रदान करने वाले तत्वो के reservoir के लिये जाना जाता है / इस स्थान पर शरीर के ऐसे VISCERAS स्तिथि है जिनके विकृति होने से हमेशा बहुत fatal anomalies पैदा होती हैं /

इस स्थान पर LIVER और GALL BLADDER और PANCREAS और SPLEEN और LEFT AND RIGHT KIDNEY और LOWER PART OF STOMACH और DIAPHRAMऔर DEUDENUMJEऔर JUNUM और UPPER SMALL INTESTINES और PART OF LUMBER REGION और PART OF LOWER RIBS आदि शरीर की बनावटे स्तिथि है /

PITTA
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PITTA 001
आधुनिक चिकित्सा विग्यान के साइन्सदानों ने भी abdominal cavity को चार हिस्सो मे बान्टा है जैसा कि ऊपर के चित्र मे बताया गया है / इसका मतलब यही है कि आयुर्वेद के आचार्यो ने जिस तरह का division शरीर का किया था वह बहुत से सन्दर्भ मे सही है /

यहां हमारा “पित्त” दोष के स्थापत्य के लिये विवेचन करना है / आयुर्वेद ने यह स्थापित किया है कि शरीर को गर्मी और भोज्य पदार्थो का पाचन और मानव की मानसिक और शारीरिक स्तिथि को मुख्य्तया maintain करने के लिये abdominal cavity के यही अन्ग महत्वपूर्ण है बल्कि अति महत्व पूर्ण है /

PITTA 002
पित्त के कार्य प्रधान रूप में निम्न प्रकार के हैं ; Pitta Functions are mainly classified as under mentioned ;
**facilitates metabolism
**hormonal functioning
**regulates body heat
**regulates body temperature
**helps digestion
**understanding
**intelligent
**hunger
**thirst
**perception
**color
**comlexion
**anger
**hate
**jealous
**Courage
**Mental abilities
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5
PITTA 004
6
PITTA 005
PITTA 006PITTA 007
PITTA 008PITTA 009PITTA 010PITTA 011PITTA 012

Pitta dosha is therefore considered AYURVEDA CONSTITUTIONS, AYURVEDA AETIOLOGY and in AYURVEDA PRABHEDA pathophysiology and TRIDOSHA pathological conditions related to SAPTA DHATU inclusion.

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