EPILEPSY AND HYSTERIA is total curable by AYURVEDA TREATMENT ; मिर्गी / हिस्टीरिया की बीमारी आयुर्वेद इलाज से पूर्ण-मुक्त सम्भव


Epilepsy या अपस्मार के रोगियों की बीमारी हो जाने की कोई उम्र की सीमा नही होती / यह किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है / इस बीमारी के होने की वजह या कारण बहुत से होते हैं जिन्हे किसी सीमा मे नही बान्धा जा सकता है / ज्यादा उम्र के लोगों को अगर यह तकलीफ है तो उन्हे आटो नर्वस सिस्टम या दिमाग या रीढ की हड्डी से सम्बन्धित बीमारियों की वजह से बेहोशी के  दौरे पड़ सकते हैं / बीच की उमर वालों को भी कमी वेशी मानसिक तनाव, अत्यधिक मानसिक श्रम, शराब का अधिक उपयोग, नशे का आदी होना और नशा न मिलने के कारण प्रतिक्रिया स्वरूप दौरा पड़ जाना , दिमाग की पुरानी चोट, रीढ या गरदन की हड्डी के विकार आदि बहुत से कारण होते हैं /
उम्र के हिसाब से देखा गया है कि जिन छोटी आयु वाले बच्चों को यह बीमारी होती है , उनमे अधिकान्शत: कई तरह की गले य फेफडे से सम्बन्धित  बीमारी पायी जाती है / कभी कभी गलत इलाज से भी बच्चो मे मिर्गी पैद हो जाती है / ऐसा तभी होता है जब बच्चो के तेज बुखर की अवस्था मे कोई बहुत heavy medications  दिये जांय /

बड़ी उम्र के किशोरॊं में यह बीमारी उनको होती है जो या तो हस्त मैथुन करते हैं या जो अपने वीर्य को ब्रम्हचर्य द्वारा सुरक्षित नही रख पाते / यह उन किशोरों को भी होती है जिन्हे तम्बाकू खाने या कोई नशा करने की आदत पड़ जाती है / बहुत से किशोरों को कम्प्य़ूटर पर लम्बे समय तक काम करने अथवा अत्यधिक मानसिक श्रम के कारण यह दिक्कत आ जाती है / रक्त की कमी से भी दौरा पड़्ने की सम्भवना बनी रहती है / सोडियम या पोटेशियम का blood में imbalance होने से भी यह बीमारी हो जाती है /


अत्यधिक मानसिक परिश्रम करने से भी दौरा पड़ जाता है /
कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं , जिनके प्रभाव से या असर से मिर्गी का दौरा पड़ जाता है /

एक बार मिर्गी या हिस्टीरिया का  दौरा पड़ जाने पर शरीर के अन्दर मिर्गी के दौरा पड़्ने का झुकाव  या tendency बन जाती है / यह tendency जब एक बार स्थापित हो जाती है तो शरीर इसे बार बार repeat करता है / यही कारण है कि similar circumstances और similar intensities का जैसे ही तालमेल बनता है , वैसे ही मिर्गी का दौरा पड़ जाता है /
मिर्गी कोई लाइलाज बीमारी नही है / यह ठीक हो जाती है / लेकिन इलाज गम्भीरता से  करने की जरूरत अवश्य होती है / मिर्गी का जैसे ही पहला दौरा पड़े , इसका इलाज शुरू कर देना चाहिये / इलाज करना अथवा कराना व्यक्ति और मरीज के परिजनों के ऊपर निर्भर करता है /
मिर्गी का कोई मुकम्मल इलाज आधुनिक चिकित्सा विग्यान मे नही है / हां, एलोपैथी की दवा खाने से दौरा रुक जाता है अथवा कम हो जाता है और कभी कभी ठीक भी हो जाता है / दवायें लगातार खानी पड़ती है और एक दिन दवा न खाने से मिर्गी का दौरा फिर से दुबारा पड़ जाता है / बहुत से रोगी ऐसे इलाज क्राकर ठीक हुये है जो पहले एलोपैथी की दवा खा रहे थे और उनको दौरे आते रहते थे यानी दवा खाने के बाद भी मिर्गी का दौरा पड़ता रहता था / लेकिन हमारे यहां इलाज कराने के बाद ऐसे सभी मरीज ठीक हो गये है /
आयुर्वेद की आधुनिक जान्च इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित डाटा द्वारा किये जाने वाले इलाज से मिर्गी रोग को जड़ मूल से ठीक किया जा सकता है /

मिर्गी की बीमारी के इलाज के लिये हमारे यहां का तौर तरीका निम्न प्रकार का है ;

१- हमारे यहां सभी तरह के परीक्षण मशीनो द्वारा अथवा मशीनो की सहायता और कम्प्यूटर द्वारा किये जाते है

२- सबसे पहले आयुर्वेद थरमल स्कैनिन्ग करते है

३- ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आटोमेटिक मशीन द्वारा पूरे शरीर का परीक्षण करते है

४- आवश्यकता के अनुसार ई०टी०जी० ट्रेस रिकार्डिन्ग मनुअल मशीन द्वारा ट्रेस रिकार्ड किये जाते है

५- आयुर्वेद के रक्त परीक्षण किये जाते है

६- आयुर्वेद के मूत्र परीक्षण किये जाते है

७- आवश्यकता होने पर ई०टी०जी० आयुर्वेदस्कैन ट्रीड मशीन परीक्षण करते है

८- बार बार मिर्गी का दौरा पड़ने के कारणों की जान्च के लिये Continuous Brain Scanning / Autonomic Nervous system / Spinal scanning रोग निदान मे सहायता के लिये करते है

९- इसके अलावा अन्य दूसरे परीक्षण आवश्यकता के अनुसार किये जाते है जिनकी मरीज की आवश्यकता के अनुसार करते है

१०- रोग निदान मे जरूरत पड़ने पर अन्य उपलब्ध परीक्षण करते है

सभी परीक्षणो को करने मे और रिपोर्ट तैयार करने मे 8 से 12 घन्टे तक लग जाते है

परीक्षण पूरे हो जाने के बाद २०० से २७५ पेज [रिपोर्ट के पेजों का आकार मरीज के किये गये परीक्षणो पर आधारित होता है ] की रिपोर्ट कम्प्यूटर द्वारा छाप करके प्राप्त होती है /

रिपोर्ट फाइनल तैयार होने के बाद , मरीज की तकलीफ का Three Dimensional Diagnosis निकाली जाती है और यह establish किया जाता है कि [ पहला] मिर्गी का दौरा पैदा करने की वजह वाले कौन कौन से अन्ग है जो मिर्गी को पैदा करने के बीज या जड़ बुनियाद पैदा कर रहे है , दूसरा [२] यह जड़-बुनियाद किस रास्ते से होकर और किन किन अन्गो की विकृति के साथ होकर दिमाग तक या आटो नर्वस सिस्टम तक पहुन्च रही है और तीसरा [३] दिमाग या शरीर के कौन कौन से हिस्से मिर्गी की वजह से या कारण से कहां कहां प्रभावित हो रही है और उसकी intensity level किस स्तर की है / इसके अलावा थरमल स्कैन और रक्त परीक्षण और मूत्र परीक्षण तथा अन्य परीक्षणो का सहारा निदानात्म्क दृष्टिकोण के मद्दे नज्रर लिया जाता है /

मिर्गी की जड़ बुनियाद का पता चलने पर आयुर्वेदिक / होम्योपैथिक / यूनानी दवाये लिख कर सेवन करने के लिये मरीज को दे दी जाती है / द्वाये मरीज को बाज़ार से लेकर सेवन करना होता है /

हमारे यहां से मरीज को कोई भी दवा नही दी जाती है, मरीज को पर्चे मे लिखी दवाये बाज़ार से market से लेकर खाना होता है /
आयुष की अन्य चिकित्सा विधियों यथा होम्योपैथी चिकित्सा, यूनानी चिकित्सा आदि में मिर्गी का इलाज करने की क्षमता है / यह मिर्गी के रोगी के ऊपर निर्भर है या उसके परिजनों पर कि वे कौन सी चिकित्सा विधि से इलाज कराना चाहते हैं /
हमने अनुभव किया है कि ETG AyurvedaScan परीक्शण करा कर जिन मिर्गी के रोगियों का इलाज आयुर्वेदिक औषधियों द्वारा और साथ में बताये गये “परहेज” और जीवन शैली मे बदलाव के साथ किया गया है, ऐसे मिर्गी के रोगियों को आरोग्य अवश्य मिला है /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और आयुर्वेद की अन्य आविष्कृत की गयी आधुनिक वैग्यानिक तकनीको के प्रीक्षण रिजल्ट पर आधारित इलाज करने से मिर्गी और हिस्टीरिया  अवश्य ठीक होते है और आयुर्वेदिक इलाज करने से हमारे केन्द्र द्वारा १००% प्रतिशत मरीज ठीक हुये है और वत्रमान मे  मिर्गी के रोगियो का इलाज चल रहा वे भी ठीक हो रहे है और नये आने वाले मरीज भी ठीक हो रहे है और यह उम्मीद करते है कि भविष्य मे जितने भी मिर्गी के रोगी आयेन्गे वे भी अवश्य ठीक होन्गे /

एक टिप्पणी

  1. हिस्टीरिया के लिए आयुर्वेद में कौन सा दवाई चलाना चाहिए!
    लडकी का उम्र 17 साल है

    ………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………..………reply ………………………………………………………………..YOUR MENTIONED DISEASE CONDITION IS 100% CURABLE BY OUR LATEST INVENTED METHODS OF AYURVEDA AND AYUSH TREATMENT AND MANAGEMENT PROCEDURES

    Dr DBBajpai MD Ph.D
    Ayurvedic – Ayush Diagnostician and
    Chief ETG AyurvedaScan Investigator,
    KANPUR UTTAR PRADESH
    INDIA

    Listen computer recorded announcement by Dr DBBajpai
    09336238994 General Informations / Lailaj Bimariyon ke liye
    05122367773 Leucodrma / *1 for etg fees and expences/ *2 for appointment informations/*3 for duration of treatment
    08090327728 Mirgi / Epilepsy / general announcements/ ………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………..ETG AYURVEDASCAN PARIKSHAN KARAKAR AYURVEDIC / AYUSH KA MILAJULA ILAJ ILAJ KARANE SE SABHI TARAH KE ROG AVASHY THIK HOTE HAI

    Hamari website http://www.ayurvedaintro.wordpress.com par jakar ayurved se sambandhit tamam prakar ki janakari le sakate hai

    You can send your e-mail; drdbbajpai@gmail.com

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