महीना: मई 2014

आयुर्वेद न्यूट्रास्यूटीकल्स ; अधिक गर्मी के कारण होने वाली तकलीफो से बचने के लिये ………


आयुर्वेद की विशेषता यही है कि सभी मौसम के लिये सभी के लिये आयुर्वेद के मनीषियों ने मौसम से प्राप्त सभी वस्तुओ के सटीक उपयोग के लिये combinations  दे दिये है /

गर्मी के मौसम मे गर्म हवाओ के चलने और लू लपट high degree temperature के चलते हुये बहुत सी तकलीफे शरीर मे अचानक पैदा होने की स्तिथि बन जाती है , इन सभी अवस्थाओ से बचने के लिये नीचे लिखे nueutraceutical   को अपनाइये और फायदा उठाइये ;

साम्ग्री सब आप्के किचन मे मिल जायेगी /

१- एक छोटा प्याज , बड़ा हो तो आधा कर ले

२- एक कच्चा छोटा आम / अमिया

३-१५ -२० पुदीना की पत्ती / अधिक भी छोड़ सकते है

४- एक टुकड़ा अदरख

५- एक चम्मच जल जीरा मसाला पाउडर

५- आधा चम्मच काली मिर्च

६- स्वादानुसार काला नमक

७- एक या दो चम्मच शक्कर  / चीनी  / गुड़

८- आधा या एक नीबू का रस

२५० मिली लीटर ठन्डा पानी

मिक्सी मे डालकर अच्छी तरह से CHURN  कर लें

जब सब मिलकर पतला सा liquify  हो जाये  तब इसे चाय की छलनी से छान ले /

इसमे बर्फ मिला सकते है / अथवा थोडी देर फ्रिज मे रखकर ठन्डा कर ले /

इसे अकेले या दो लोग share  कर लें

इस पेय मे प्याज की गन्ध बिलकुल नही होती और स्वाद इसका बहुत अच्छा होता है /

अपनी रुचि के अनुसार मसाला कम या ज्यादा कर सकते है  /

इसे दिन मे दो बार सुबह शाम अथवा सुबह नाश्ते के समय या शाम को लेना चाहिये / दिन मे दो बार पीने से गर्मी के कारण होने वाले प्रभावों से बचे रहेन्गे /

इस पेय पदार्थ के सेवन करने से HEAT STROKE, और HEAT STROKES से पैदा हुये सभी तरह के syndromes  दूर हो जाते है / इसके सेवन से electrolytic imbalances  कुदरती रुप मे स्थापित होते है / यह लू लगने का पूरा उपचार भी करता है / लेकिन इसके लिये इस पेय पदार्थ को दिन मे पान्च अथवा छह बार लेना चाहिये / 

 HOMOEPATHIC REMEDY  भी  बहुत कारगर है Heat Stroke syndromes  को दूर करने के लिये / जिन लोगो को या जिस TROPICAL REGION के COUNTRIES  मे, जहां  गर्म बहुत होती है वहा गर्मी के असर से बचने के लिये होम्योपैथी की दवा GLONINE 30 शक्ति की  preventive  का कार्य करती है / जब लू या लू जैसे HEAT STRKES SYNDROMES पैदा हो तो इस दवा की एक खुराक रोजाना खाने से heat strokes  से बचा जा सकता है / यही दवा HEAT STROKES या HEAT EXPOSURE  के इलाज मे भी काम आती है / 

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महिलाओं मे काम शीतलता ; FRIDGIDITY IN WOMEN ; NO DESIRE FOR SEXUAL ACTS


पुरुषो मे जिस प्रकार से नपुन्सकता पैद हो जाती है जैसे कि स्त्री के साथ sex न करने की इच्छा होना अथवा सेक्स करने की इच्छा का समाप्त हो जाना जैसी तकलीफे होती है उसी तरह से महिलाओं मे sexual acts यानी पुरुषों के साथ सम्भोग नही करने की बीमारी पैदा हो जाती है , इसे FRIDGIDITY अथवा काम शीतलता कहा जाता है /

मुझसे इस काम शीतलता जैसी तकलीफ के बारे मे अक्सर बडी सन्खया मे पुरुष तथा महिलाये दोनो ही पूछते है कि उनकी पत्नी या उनको महिलायो को स्वयम सेक्स अथवा सम्भोग करने की कतई इच्छा नही होती है , इसके लिये क्या किया जाय आदि इसी जैसे प्रश्न अपनी समस्या के समाधान हेतु पूछते रहते है /

प्रकृति से सेक्स की इच्छा पैदा होना एक तरह से मानव  शारीर की कुदरयी और स्वाभाविक और शरीर के अन्दर होने वाले physiological reactions  और शरीर की मान्ग के अनुसार पुर्ति करने के लिये बहुत महती आवश्यकता है / अगर सेक्स नही होगा sexual acts  नही होगा तो फिर reproduction सम्भव ही नही होगा / Reproduction  नही होने से इस धरती से मानव जाति का वजूद ही खतरे मे प्ड़ जायेगा  और इसका यह असर मानव जाति पर बहुत खतरनाक होगा / इसलिये मानव जीवन मे  sex  के लिये स्थान सर्वोपरि है / हमारा इस धरती पर ्पैदा होने का मतलब ्यही  है और इसका असली मकसद यही है कि हम सभी इस धरती से  मानव जाति को समाप्त होने से बचाने के लिये अपने जैसे ही क्लोन पैदा करे / यही हमारे जीवन का एक पहला उद्देश्य है जो हमे सभी लोगो को कुदरत से मिला है /

कल्पना कीजिये कि इस दुनिया की सभी औरतो और महिलाओ की प्रजनन करने की अथवा बच्चा पैदा करने की क्षमता अचानक किसी  epidemic  या  virus या किसि अन्य वजह से समाप्त हो जाये तो क्या होगा  ??

होगा यही कि १०० साल मे ई इस दुनियां से मानव जाति का वजूद ही समाप्त हो जायेगा ?? यह कैसी भयावह स्तिथि होगी इसकी कलपना करने से ही मन सिहर उठता है /

इसीलिये मै “कन्या भृण हत्या के खिलाफ हू और सख्त खिलाफ हू और सबसे यही कहता हू कि

“कन्या है MOTHER  OF EARTH ,

इसे बचाओ, मारो मत व्यर्थ”

महिलाओ की काम शीतलता को दूर करने के लिये आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान ने बहुत सुन्दर काम किया है / काम शीतलता दूर करने के लिये आयुर्वेद ने बहुत से नियम और कायदे महिलाओ के स्वास्थय के सुधार और जीवन शैली को अपनाने के निर्देश दिये हिये है /

इसके साथ अभु सी आयुर्वेदिक औषधियो का भी उल्लेख आयुर्वेद के मनीषियो ने किया है और यह सब आयुर्वेद के ग्रन्थो मे लिपि बध्ध करके दे दिया गया है /

HOMOEOPATHIC MEDICAL SYSTEM मे भी महिलाओ की काम शीतलता को दूर क्रने के लिये बहुत सी दवाओ का उल्लेख किया गया है जिन्हे होम्योपैथी के सन्दर्भ ग्रन्थो मे देखना चाहिये/ Homoeopathy   की दवा ” CANTHARIS” एक सटीक और अचूक remedy महिलाओ मे काम शीतलता के इलाज के लिये बतायी गयी है , लेकिन इसकी potency  का निर्धारण किसी होम्योपैथी के डाक्टर की सलाह पर ही करना चाहिये, अन्यथा यह नुकसान कर सकती है /

अधिक पुराना काम शीतलता का रोग होने पर ETG AyurvedaScan with supplementary examinations and tests कराकर इलाज कराने से काम शीतलता की बीमारी से छुटकारा मिल जाता है /

 

WORLD’S FIRST AND ONLY AYURVEDA HI-TECHNOLOGY DIAGNOSTICS AND AYURVEDA AND AYUSH TREATMENT CENTER


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Our AYURVEDA AND AYUSH   Diagnosis and Treatment Center  is EQUIPPED   by the latest AYURVEDA – AYUSH  Hi-technologies invented by Dr. D.B.Bajpai, Director and Chief E.T.G. AyurvdaScan Investigator and Investigator of other projects , simultaneous running towards advancements in related AYUSH systems.

All advance level INVENTED AYURVEDIC   – AYUSH technological tests and examinations  are available at our research center, at KANPUR, U.P. State, INDIA  for entire GLOBAL PUBLIC  of any region and any country. Tests and examinations are open for all.

गले के कैन्सर के एक रोगी


हमारे रिसर्च केन्द्र मे गले के कैन्सर के एक रोगी की चिकित्सा कराने के लिये दिनान्क १० मई २०१४ को ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज के लिये आया था/

इस मरीज का इलाज कुछ माह से लखनऊ के एक सरकारी कैन्सर अस्पताल से चल रहा है /

मरीज को रेडियेशन देने क बाद भी कोई आराम नही मिला / बाद मे चिकित्सको ने इस मरीज से कहा कि इसका आपरेशन नही किया जा सकता क्योन्कि इसके शरीर मे खून की कमी है /

मरीज को इसके एक रिश्तेदार लेकर आये थे जो कई कैन्सर के मरीजो क इलाज हमारे शोध सन्सथान से करा चुके है और अभी तक आराम से जीवन गुजार रहे है /

प्रस्तुत है इस वीडियो मे मरीज के गले का वह भाग जहा रेडियेशन द्वारा चिकित्सा की गयी है /

इस मरीज के कुछ और चित्र देखिये /
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दूसर चुत्र नीचे देखिये /

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GLAND EXAMINATION BY LUMINOUS TORCH ; गान्ठो और ट्यूमर की जान्च के लिये लेजर प्रकाशीय टार्च


AT our research center , we examine TUMORS and GLANDS by a powerful LASER LUMINOUS TORCH.

The specially designed torch for examination purposes, used externally without any harm to Glands / Tumors of any place in body externally visible and palpable.

By this torch, examination  of TUMORS / Glands can be classified , whether it is malignant or benign or a simple glands collection of fat or fluid or otherwise matters.

Below is a VIDEO showing the examination of NECK GLANDS TUMOR, which seems a malignant tumor.

The absorbance of  light  intensity is read. Most of the MALIGNANT TUMOR are very bright by light reflection and  comparatively simple glands reflection of light, which is transparent and not reflected brightly.

See the VIDEO of  a patient , having LYMPHADENITIS  Large shape.

The Torch picture is given below;

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शरीर के बाहर से दिखने वाली गान्ठो के निदान के लिये हमारे केन्द्र मे लेज्र प्काशीय टार्च का उपयोग किया जाता है /

इस प्रकाशीय टार्च से शरीर की गान्ठो की ज्कान्च करके  यह पता किया जा सकता है कि यह गान्ठे साधारण त्तरह की  गान्ठ है या कैन्सर की गान्ठ / साधारण गान्ठ मे इस पावर फुल  टार्च द्वारा गान्ठ के अन्दर फेन्की  जा रही रोशनी गान्ठ को यदि पार कर जाती है तो इससे यह पता चल जाता है कि गान्ठ अन्दर से ठोस अवस्था मे नही है /

जब POWERFUL LASER RAYS  गान्ठ को सुचारु रूप से पार नही कर पाती है तो यह सन्ग्रहित होकर BRIGHT REFLECTION पैदा करती है  और किरणे reflect  होकर वापस उसी दिशा मे लौटने लगती है, जो वास्तव मे TISSUES    के चारित्र्क परिवर्तन के कारण होता है / वापस आने वाली किरणे बहुत चमक्दार होती है  और  गान्ठ के ऊपर लगाया गया couple medium  बहुत अधिक चमकने लगता है/ इससे यह पता चल जाता है कि गान्ठ साधारण नही है और यह banign  अथवा malignent हो सकती है /

जब गान्ठो का इलाज करते है तो इस तरह से परीक्षण करने से मरीज की गान्ठ की सेहत का नकलन किया जाता है /

 

 

ANTI-BIOTICS EFFECTE FAILURE ; GLOBAL WARNING BY WORLD HEALTH ORGANISATION


ANTI-BIOTICS EFFECTS ON HUMANS  ARE  NOW AT THE EDGE OF FAILURE. A warning is published in a HINDI LANGUAGE NEWS PAPER “COMPACT AMAR UJALA” TABLOIDS.

Observe and read the news, published from KANPUR, India.

नेउरोलोगिचल पैन 011

I have observed , why ANTI-BIOTICS  are not effective against the diseases. My Observations are follows;

1- The basic material of the production of ANTI-BIOTICS  are synthetic chemicals and the basic chemical is obtained by the several level of  chemical processes.

2-Use of  Chemicals for human body , unequalizes the ratio of Blood pH [ Blood Hydrogen Ion Concentration].

3- The use of chemical substances decreases the pH level of Blood towards ACIDITY , where the level of Blood should be nor more acidic nor alkaline and the pH of blood should be in lower medium level, say round about 7.00 to 7.3.

4- Anti-biotic creates HYPER-ACIDITY and therefore the Intestinal Bacterial flora , such as Lacto bacillus, Bacillus coli and others , who helps to digest food and food assimilation ingredients and keeps the function of Bowels in natural order, damaged by the Anti-biotics and thus the  normnal physiology of the organs affected.

 
5- I presume that after intake of any anti-biotic the pH level of Blood increases towards the acidity slowly and gradually with the increase of chemical substances of recommended medicine by doctors. This increase level of acidity in blood might possible that bacteria could not procure their growth rate in blood stream , which is very faster and thus inhibits.This process reduces the level of toxemia and as a result the body regain towards the normal health.

However this is my view. But I will say to researchers that they must find out the solution of this problem and the immune system.

5-

FAQ ; WHAT IS TREAD-MACHINE E.T.G.AYURVEDASCAN SYSTEM ?? HOW IT IS DONE ?? ;;बार बार पूछे जाने वाले सवलों के उत्तर ; क्या आप बतायेन्गे कि यह ट्रीड – मशीन ई०टी०जी० आयुर्वेदा स्कैन क्या है और इसे किसलिये और क्यो करते है ??


बार बार पूछा जाने वाला स्वाल / प्रश्न क्या आप बतायेन्गे कि ट्रीड-मशीन ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन क्या है और इसे किस लिये करते हैं ??

उत्तर ; साधारण्तय ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण SUPINE POSITION यानी LYING ON BACK POSITION / POSTURE यानी पीठ की तरफ लेट कर किये जाते है / ऐसा पिछले ३२ / ३३ साल से होता चला आ रहा है और आज भी ऐसी पोजीशन मे करते हैं / इसे HORIZONTAL स्तिथि मे ट्रेस रिकार्ड करना कहते है /

लेकिन पिछले चार पान्च साल से ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण मे क्रान्तिकारी विकास करने की स्तिथि तब पैदा हुयी , जब यह देखा गया कि मरीज के शरीर के अन्दर की छुपी हुयी बहुत सी विकृतिया ःऒईऒण्टाळ / शूफीणॆ स्तिथि मे रिकार्ड करने पर पता नही चलती है /

VERTICAL POSiTION मे TRACE RECORD करने और इस पर रिसर्च करने पर बहुत आश्चर्य जनक परिणाम आये जिनकी कलपना पहले कभी भी नही की गयी थी / इस्लिये इस विधि का विकास आयुर्वेद के सिध्धान्तो और रोग निदान के लिये बहुत सटीक साबित हुआ है /

नीचे दिये VIDEO को सुने और देखे /

Below is given an example specimen of a patient for comparison of AYURVEDA PHYSIOLOGY that is called SAPTA DHATU.

The data is of a LEUCODERMA PATIENT  , see and observe the intensity level of  EYURVEDA PATHOLOGY, how it is dominanting in SKIN DISORDERS .

नेउरोलोगिचल पैन 010

F.A.Q. ; WHY YOU SAY TO SOME PATIENT’S THAT ” I WILL NOT TREAT YOU”. बार बार पूछे जाने वाला सवाल ; आप यह क्यो मरीजों से कह देते है कि आप उनका इलाज नही करेन्गे या “मै आप्का इलाज नही करून्गा” ऐसा कह कर मना कर देते है , ऐसा आप क्यों करते हैं ??


F.A.Q. ; WHY YOU SAY TO SOME PATIENT’S THAT ” i WILL NOT TREAT YOU”.

बार बार पूछा जाने वाला सवाल ; आप यह क्यो मरीजों से कह देते है कि आप उनका इलाज नही करेन्गे या “मै आप्का इलाज नही करून्गा” ऐसा कह कर मना कर देते है , ऐसा आप क्यों करते हैं ??

उत्तर; मै चाहता हू कि मै अपने सभी मरीजो का इलाज करू/ ऐसा मै करता हू और मरीजो के साथ बहुत मेहनत करके उनका रोग निदान और चिकित्सा व्यवस्था करने का अपने सम्पूर्ण ग्यान और अनुभव का भरपूर और अधिक से अधिक MAXIMUM LEVEL का उपयोग करता हू / ऐसा व्यवहार सभी आगन्तुक रोगियो के साथ है , जो इलाज के लिये मेरे OUT-DOOR HOSPITAL मे आते है / लेकिन कुछ बाते इस तरह की हो जाती है जो UNAVOIDABLE होती है और जो मेरे ५० साल के PRACTICE CARRIER के दर्मियान superstitious होकर बैठ गयी हैं /

कुछ कारण है जो मुझे रोगी की चिकित्सा के लिये रोक देते है , इसमे मेरी कोई गलती नही है , यह मरीज खुद ही अपनी गलती से कर बैठता है , इसे मै दैवीय सन्देश मानता हू और यह समझता हू कि “ईश्वर मुझे शायद यह सन्देश दे रहा है कि मरीज या रोगी मेरे हाथ से नही ठीक होगा /

जो मरीज या रोगी या उनके परिजन इस तरह का सवाल नही पूछते है और इलाज के लिये सीधे सीधे विश्वास और आशा के साथ इलाज करते है , वे अव्श्य ठीक होते है, ऐसा मैने अनुभव किया है और यह सत्य भी है /

इसीलिये मै ऐसे रोगियो को मना कर देता हू कि “आप मेरे पास इलाज के लिये मत आइये ” / क्योंकि मरीज का NEGATIVE  विचार करना आयुर्वेद के मत से “अनिष्ट” की श्रेणी मे आता है और यह आयुर्वेद के चिकित्सा सिध्धन्तो और आयुर्वेद के शास्त्र  मे दी गयी हिदायतो के अनुकूल नही है बल्कि यह प्रतिकूल है /

VIDEO सेनेन्गे तो सारी बात का पता चल जाय्गा /

ayurvedakrantikari