महीना: जून 2014

E.T.G. AYURVEDASCAN ; NOW IN FOUR SEPARATE LINES ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन अब चार अलग अलग हिस्सों में रोग निदान विशेष्ग्यता के साथ


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आयुर्वेद की पहली और अकेली आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्तो को मानव शरीर के अन्दर ग्यात करने के लिये तथा शरीर के अन्दर के रोगो को पहचानने के लिये लगभग ३३ साल पहले आविष्कृत किया गया था /

जिस समय आयुर्वेद की इस तकनीक का आरम्भ हुआ और आविष्कार हुआ उस समय से लेकर आज तक यह निदान ग्यान की तकनीक चार तरह के परीक्षणो मे बदल चुकी है /

आवश्यकता के अनुसार और जरूरत के अनुसार रोग निदान और शारीरिक परीक्षणो की जरूरत के अनुसार इन सब तकनीओ का विकास और आविष्कार किया गया ताकि बेहतर से बेहतर आयुर्वेदिक  इलाज की सुविधा मुहैया मरीजो को उपलब्ध करायी जा सके /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक चार हिस्सॊ मे बान्ट दी गयी है , यह किसलिये जरूरी हुआ इसका सन्क्षि[प्त विवेचन निम्नानुसार है /

१- E.T.G. AyurvedaScan ; 33 साल पहले इसका अविष्कार किया गया था , जो अब तक इसी माडल पर चल रहा है /

यह तरीका मैनुअल है और इसके बहुत से मेरिट है / आज कल इस तरह की मशीनो का उत्पादन बन्द हो चुका है और लगभग २० साल से मनुअल मशीनो का मिलना ठप है / दरअसल यह stylus टाइप की मशीने हैं / आज कल इस तरह की मशीन बाज़ार मे नही मिलती है /

मैनुअल और स्टाइलस टाइप की मशीनो की उपयोगिता आयुर्वेद के ई०टी०जी० परीक्शन के लिये बहुत उपयोगी है / इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जब आयुर्वेद के हिसाब से शरीर की मैपिन्ग करते है और इस मैपिन के हिसाब से ट्रेस रिकार्ड किये जाते है , वह रिकार्ड किये गये traces   बहुत ही original किस्म के होते है / क्योकि इसमे किसी तरह की editing  नही होती है /

मनुअल मशीन से इच्छानुसार और मरीज की आवश्यकता के अनुसार ट्रेस रोकार्ड करके उस हिस्से की जान्च करके और ट्रेस रिकार्ड का अध्ध्य्यन करके पता किया जा स्कता है कि मरीज की क्या दिक्कते है और किस तरह की दिक्कते है / इस तरह से सटीक और अचूक इलाज की व्यवस्था की जा सकती है /

इसमे unlimited trace record की facility होने के कारन यह बहु उपयोगी मशीन हो जाती है /

आज भी मै इस मशीन से ट्रेस रिकार्ड करके मरीज के रोग निदान की भूमिका के लिये इसका उसी तरह उपयोग करता हू जैसा कि मै पिछले ३३ साल से करता चला आ रहा हू /

Dr DBBajpai is working with the ETG AyurvedaScan machine

Dr DBBajpai is working with the ETG AyurvedaScan machine

इसकी अलग से एक रिपोर्ट Trace records का अध्ध्यन करके मरीज को बनाकर दी जाती है / यह ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन का पहला Test का हिस्सा है /

[२] FULLY AUTOMATIC E.T.G. AYURVEDASCAN  RECORDER ;

आमतौर पर इस मशीन द्वारा horizontal posture मे मरीज को लिटाकर परीक्षण करते है /

मशीन और इसका software  रिकार्ड किये गये traces  को computer  मे पहुचा देता है जो बाद मे रिपोर्ट बनाने के काम आता है /

ETG AyurvedaScan Machine

ETG AyurvedaScan Machine

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[३] TREAD MACHINE E.T.G. AYURVEDASCAN

TREAD MACHINE  आयुर्वेदास्कैन की जरूरत तब पड़्ती है जब मरीज के horizontal position मे किये गये परीक्षण से ज्यादा जानकारी को मालूम करने की आवश्यकता होती है / बहुत सी बाते horizontal posture   मे स्पष्ट नही हो पाती है इसलिये शरीर की अधिक जान्च के लिये  इस टेस्ट की आव्श्यकता होती  है /

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यह परीक्षण TREAD MACHINE  पर मरीज को दौडाकर किया जाता है / दौड़ाने पर शरीर vertical position  पर आ जाता है और शरीर के सारे अन्ग फैल करके दौडाने से उतपन्न गरमी और रक्त सन्चार के अधिक होने और इससे पैदा electrical diffusion जब शरीर के VISCERA   और मान्स पेशियों मे पहुन्चता है तब इन अन्गो की वास्तविक कार्य क्षमता का पता चलता है जो diagnosis  मे बहुत सहायता देती है /

[४] E.T.G. AYURVEDASCAN CONTINUOUS TRACE RECORDING ;

बहुत से मरीजो मे जैसे मिर्गी और दिमागी बीमारियो के रोगी / हृदय और फेफड़ो के रोगी / ग्रभाशय से सम्बन्धित बीमारियां / psychological  बीमारियो , रीध की हद्दियों , हद्दियो के जोड़ो और शरीर की उन सभी तकलीफो के लिये लगातार मानीटरिन्ग के लिये जिनके बारे मे पता नही होता कि वे कब और किस समय पैदा हो जाये या उन painless  प्राब्लम्स के लिये आवश्यक हो जाता है जिसमे अन्दर ही अन्दर शरीर के बीमारी पनपती जाती है और ऊपर से पता ही नही चलता कि शरीर के न्दर क्या परिवर्तन हो रहे है , इस तरह की  तकलीफो मे मरीज को पता ही नही चलता और  पता नही होता कि वे कब पैदा हो  जाये, इसके लिये यह टेस्ट किया जाता है /

मरीज की कन्टीन्यु मानीटरिन्ग के लिये रोगी को लिटा दिया जाता है और उसकी तकलीफ के अनुसार उन सभी स्थानो पर इलेक्ट्रोड लगा दिये जाते है , जहा और जिस शरीर के हिस्से की monitoring  करनी होती है / मरीज जहां बताता है कि उसे कहां कहा और किस जगह तकलीफ है उस सभी हिस्सो का इस विधि से परीक्षण किया जाता है /

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ऊपर दिते गये चित्र मे मरीज को लिटाकर और उसके शरीर के जिस हिस्से की मानीटरिन्ग लम्बे कई घन्टे तक करनी होती है , उन हिस्सो मे इलेक्ट्रोड्स लगाकर लगातार मानीटर करते है /  जो मरीज लेटकर इस परीक्षण को करने मे सक्षम नही होते है उनको कुर्सी मे  comfortable position  मे बैठाकर जान्च करते है / सही बीमारी का  निदान और  उसके सही उपचार के लिये इस तरह की मानीटरिन्ग करना मरीज के हित मे बहुत आवश्यक होता है /

परीक्षण की यह विधि  मानसिक रोगियों और उन्माद के रोगियो और depression के रोगियों तथा सभी तरह के भय और चिन्ता और दिमाग की बीमारियो के लिये बहुत उपयोगी सिध्ध हुआ है / Emotional  मरीजो मे क्यो इस तरह के उद्वेग पैदा होते है इसका कारण जानने मे यह परीक्षण मदद करता है /

जब बीमारी के मूल कारण का पता चल जाता है तो इस स्तिथि के इलाज के लिये आयुर्वेद मे बड़ी सन्खया मे औषधिया चिकित्सा कार्य के लिये उपलब्ध है जिनके उपयोग से मान्सिक बीमारी चाहे जैसी हो अवश्य ठीक होती हैं /

यह मानीटरिन्ग कम से कम एक घन्टे से लेकर चार घन्टे तक अवश्य  की जाती है / इसके बाद अगर जरूरत पड़ती है तो २४ घन्टे या अधिक तक भी परीक्षण करने का प्रयास किया जाता है /

Huge Data  बाद मे analyze  किया जाता है और फिर निष्कर्ष conclusion निकाले जाते है /

इस प्रकार से ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक अब चार भागो मे आवश्यकताबुसार मरीजो की सेवार्थ उपयोग की जा रही है /

यह सारी आयुर्वेदिक रोग निदान की सुविधायें  अभी हमारे रिसर्च केन्द्र मे मरीजो के लिये उपलब्ध है /

 

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होम्योपैथिक दवा ; मूलेन आयल ; कान के सभी रोगों की अचूक और सटीक दवा ; MULLEIN OIL ; THE HOMOEOPATHIC REMEDIY FOR ALL “EAR” DISORDERS ; THE MOST SAFEST NATURAL REMEDY


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होम्योपैथिक चिकित्सा विग्यान मे ऐसी बहुत सी दवाओ की भरमार और बहुतायत है जो कठिन से कठिन और लाइलाज बीमारी के इलाज के लिये परम उपयोगी है /

लेकिन समस्या यह है कि इतनी प्रभावकारी चिकित्सा विग्यान के होते हुये भी लोग और देश के जन मानस को जानकारी के अभाव मे पता ही नही है कि जिन बीमारियो को जिसे वे समझते है कि कोई इलाज नही है, ऐसी इन सभी बीमारियों का इलाज मौजूद है और सटीक और अचूक इलाज अपने ही देश मे उपलब्ध है /

होम्योपैथी की MULLEIN OIL एक ऐसी दवा है जिसे “कान” या “INTERNAL EAR ” से सम्बन्धित बीमारियो मे उपयोग करते है /

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मूलेन आयल MULLEIN OIL कान के रोगो मे उपयोग करने वाली एक होम्योपैथी चिकित्सा की दवा का नाम है और इसी नाम से बज़ार मे होम्योपैथिक स्टोरर्स मे मिलती है /

यह होम्योपैथिक दवा VERBASCUM नाम के यूरोप महाद्वीप मे पैदा होने वाले एक पेड़ से पैदा होने वाले फूलों से बनाते है / Verbascum के flowers को जैतून के तेल के साथ पर्त दर पर्त मे रखते है और एक निश्चित ताप मान मे कई हफ्तों तक रखते है / जब फूलो का सारा अर्क जैतून के तेल मे उतर आता है तब इसे seeve करके सिरक्शित रख लेते है /

इस दवा के बनाने की विधि GERMAN HOMOEOPATHIC PHARAMACOPEA तथा AMERICAN HOMOEOPATHIC PHARMACOPEA तथा HOMOEOPATHIC PHARMACOPEA OF INDIA [H.P.I. published by Manager of Publication, Government of India, New Delhi] विश्व के कई देशों की सरकारो द्वारा प्रकाशित pharamacopeas के निर्देशानुसार बनाया जाता है /

भारत मे सभी होम्योपैथिक दवायें HPI के निर्देशानुसार बनायी जाती है /

The following is the page-copy of the  AMERICAN HOMOEOPATHIC PHARMACOPEA  published by Boerick and Taffel Homoepathic Pharmacy, U.S.A. for the preparation of MULLEIN OIL.

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MULLEIN OIL ESSENTIA is very powerful than comparatively MULLEIN OIL prepared with Olive Oil. Unfortunately Mullein Oil essentia is not available and almost no phramacy prepare it due to heavy cost in production. Prepared Olive Oil Mullein in  condence for should be used and this preparation is also very effective in all nature of the EAR disorders, whatever they may be.

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My Father Late Doctor Shitala Sahai Bajpai, Vaidya Bhshan , M.D.H. [died 1977] was using this remedy in plenty in almost every Ear disorders and disease conditions like, pain, discharges, swelling, glands, neuragic pain , Ulcers, abscess , suppuration, Infection of all kinds i.e. Infection, Viral . Parasitic and Fungal etc etc  cases with great success and wonderful results.

I am using this oil in plenty in every Ear Problem patient with great success. In some cases of TEETH NEURALGIA , in which the tooth-ache was shifted to Internal Ear cured by this remedy.

The remedy is safe for all ages.

One drop is sufficient for Infants and children. More younger may use two to six drops accordingly. More drops are not harmful in any way and is a very safe remedy.

Mullein oil should be used as fresh as it is available and should be kept with tight cap and save from airation.

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मूलेन आयल को कान के सभी तरह के रोगो मे बहुत विश्वास के साथ उपयोग किया जा सकता है / यह हर उम्र के लिये उपयोगी अहि और पूर्ण तया सुरक्षित कुदरती होम्योपैथिक दवा है /

 

बन्ध्यत्व यानी महिलाओं मे बच्चे न पैदा होने की बीमारी ; एक बन्ध्यत्व दोष से ग्रसित महिला का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके सम्बन्धित परीक्षणो से निष्कर्ष ; AN INFERTILITY CASE, EXAMINED AND CONCLUDED BY E.T.G.AYURVEDASCAN AND ITS SUPPLEMENTARY EXAMINATIONS AND TESTS


बन्ध्यत्व यानी महिलाओं मे बच्चे पैदा करने की क्षमता का निष्क्रिय हो जाना आदिकाल से चली आ रही रोग विकृति है / प्रजनन करना सभी महिला का पहला उद्देश्य है , जिसके लिये कुदरत ने उन्हे रचित किया है / यह सन्सार ही महिलाओ की प्रजनन क्षमता के कारण ही आगे बढ रहा है / युगो युगो तक इसी प्रजनन क्षमता के ्कारण यह धरती आबाद रहेगी /

लेकिन जब महिलाओ की इस प्रजनन करने की क्षमता पर विराम लग जाय तब यह एक चिन्ता का विषय होता है /

आयुर्वेद के महर्षियों ने इस phenomenon को समझा और तदनुसार इस विषय को अष्टान्ग आयुर्वेद मे शामिल किया ताकि महिलाओ के स्वास्थय की सुरक्षा और उनकी प्रजनन क्षमता को सक्रिय बनाये रखा जा सके और प्रजनन सन्सथान से जुडे सभी तरह के रोगों से मुक्ति मिले ऐसे उपचार और management का उल्लेख किया गया है / “प्रसूति तन्त्र और कौमार भृत्य” के भाग मे इसी से सम्बन्धित चिकित्सा दिशा निर्देश दिये गये है /

आयुर्वेद ने आधुनिक विग्यान की तरह यानी Midwifery  तथा Gyneacology तथा Peadiatric की तरह सभी विषयों को अलग अलग न करके इन सभी विषयों को एक मे ही समाहित कर दिया है / मेरा मानना है कि प्रजनन के पूर्व और प्रजनन के पश्चात तथा प्रजनित बच्चे की डॆखभाल और रख रखाव  यह सब एक दूसरे से जुडे हुये है और comprehensive तथा एक दूसरे से चेन की तरह जुडे़ होने के कारण इन सभी  विषयो  को एक मे ही समाहित कर दिया गया है /

नीचे एक ३२ साल की महिला का विवरण दिया गया है जिसका E.T.G. AYURVEDASCAN  तथा अन्य सप्लीमेन्टरी परीक्शण किये गये और इसके रोग के conclusion  मे जितना भी ग्यात हुआ उससे पता चलता है कि INFERTILITY  अकेले अथवा स्थानिक अथवा केबल मात्र  UTERUS and REPRODUCTIVE SYSTEM  से जुडी pathophysiology  या pathology  से सम्बन्धित बीमारी अकेले नही है बल्कि यह बीमारी शरीर के अन्य systems  सभी एक दूसरे से जुड़ी हुयी होती है जिनके सम्यक या सम्पूर्ण इलाज के बिना infertility ; sterility ठीक नही हो सकती है /

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बनध्यत्व के रोगियों का इलाज करने मे यही अनुभव मे आया है कि जब तक मूल या जड़ या ROOT CAUSE  नही ठिक होन्गे बन्ध्यत्व जैसी बीमारी का इलाज this or that”  के विचार पर चलती रहती है /

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कुछ बाते और भी शामिल है जिनसे बन्ध्यत्व INFERTILITY रोग कभी भी नही ठीक होता है जैसे कि प्रजनन अन्गो मे कोई छोटा या बड़ा आप्रेशन होना / प्रजनन अन्गों की किसी भी तरह की बाहरी छेड़्छाड़ यानी Minor or major Surgical Interventions होने से अन्गों की विकृतिया और अधिक बढ जाती है ऐसा देखने मे आया है /

मेरे Observation  मे यह बात सामने आयी है कि जिन महिलाओं ने किसी भी प्रकार का छोटा या बड़ा आपरेशन नही कराया उनके आयुर्वेद -आयुश का इलाज करने से बच्चे अव्श्य पैदा हुये  जब्कि इन महिलाओं की शादी को हुये कई कई साल बीत चुके थे / 

CONTRASTINGLY  उन महिलाओं के कोई भी बच्चा नही हुआ जिन्होने किसी भी प्रकार का कोई भी छोटा या बड़ा आप्रेशन करा लिया था अथवा इन महिलाओ के प्रजनन अन्गों मे किसी तरह की minor or major surgical interventions  किये गये थे अथवा किये जा चुके थे/

यह एक शोध का विषय चिकित्सा वैग्यानिको के लिये होना चाहिये और इस पर मुझे विश्वास है कि मेडिकल साइन्टिस्ट अवश्य अपना ध्यान देने का प्रयास करेन्गे /

जिस महिला का इस पोस्ट मे जिक्र किया गया है उसने किसी भी तरह का छोटा या बड़ा आप्रेशन नही कराया है / इसे आयुर्वेदिक इलाज लेने के लिये बताया गया है /

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DEAF AND DUMB PATIENT CAN NOT NARRATE THEIR PHYSICAL PROBLEMS ; A CASE OF DEEF AND DUMB PATIENT ; EXAMINED BY E.T.G.AYURVEDASCAN AND SUPPLEMENTARY EXAMINATIONS AND TESTS ; DIAGNOSIS AND TREATMENT MAKES EASY NEW AYURVEDIC TECHNOLOGY


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Deaf and dumb patient can not tell their actual physical problems , what ever they have ?

We have recieved many deaf and dumb patient often and we found that Deaf and dumb patient what ever they like to tell to patient, no physician can understand their problems totally.

A case of Deaf and dumb patient record is given below and the patient diagnosis.

The mother of this patient was very problomatic with the disease condition of her son aged 22 yrs, patient cries always since few years and almost physicians treated him as to their best of efforts, but nobody was able to remove his complaints.

The young boy was deteriorating his health and the efforts of the physician could not solve the problem of this deaf and dumb person.

His family members were in trouble and was  thinking , what to do in this situation ? The problem of this deaf and dumb boy was aggravating every day and non of the examination done was finally able to diagnose the problem.

The mother of this young boy was asking every near and dear person about the solution of the boys health asking the better doctor for the solution, one day one of my earlier patient met her and told her  about my way of diagnosis and treatment Ayurveda-ayush.

She came immediately and ask for the treatment. I narrated that my procedure is examination and tests based , which will diagnose the internal problem patient have.

The deaf and dumb patient could not tell any way except the showing the area and facial expressions.

I examined him and prepared a 230 page reports including all data wahtever possible,

The conclusion of this probelm is given below in the parts of the report sections in nut shell.

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Above report shows the main problems , which are to be treated accordingly by the Ayurveda-ayush remedies.

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The above data shows the body sectors , which are ailed and to be examined. On physical examination the parts of the body confirms the problem existence.

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The Brain parts data gave a clue of his old illness history. Preital Brain is in higher state and frontal btain is in the lowest level. I analysed  the data an thought that Parietal Brain controls the THERMAL  sensitivity of the body. Patient are very sensitive with thermal changes , if parietal brain data is higher or low. This boy data was very high , I analyzed that it is might possible that the boy in childhooh suffered from high fever and that impacted to frontal brain and the power of listening and speech could be seized,  This came after analysis conclusion.

To confirm this I asked the mother of Young boy , whether in childhood patient got an attack of High Fever ?  She confirmed it and narrated that at the age of 10 months, he got an attack of high fever, which persisted about a month. After many efforts of the doctors , the Fever could not be come down. Lastly one physician controlled the fever.

The young boy is sensitive to external natural temparatute.

deefanddumb001 003The data of throat shows the presence of anomalies in internal parts.

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Below given data is a shorting of Higher subject’s data of the essential problems , which are to be considered.

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Below is the AYURVEDIC FUNDAMENTALS MEASUREMENT  of the patient status.

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Below is the SAPATA DHATU EVALUATION  of the patient.

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The trace records are the key of the ETG AyurvedaScan examination. Below traces are taken from the selected areas of the body for diagnosis and internal problem’s persisting anomalies.

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We have always conveyed that ETG AyurvedaScan examination is a tool for examining those anomalies which are or can not narrated by the patient in the state of COMA / UNCONSCIOUSNESS / and for DEAF and  DUMB persons / or for those who are not able to tell their problems , what they have.

By virtue of ETG AyurvedaScan system, we can somehow know or understand or recognize the trouble of the persons, who are not in a position to convey their problem to the physician.

पित्त भेद ; लोचक पित्त ; आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्त का विवेचन


आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्त बहुत ही अनूठे किस्म के आयुर्वेद के मनीषियों ने अपने विशाल ग्यान और तर्क के दृष्टीकोण को ध्यान मे रखते हुये प्रतिपादित किये है /

जिस तरह के तार्किक ग्यान का विष्लेषण आयुर्वेद के मनीषियों ने किया है वह बहुत ही अद्भुत किस्म का है /

समस्त आयुर्वेद वात [वायु और आकाश ] पित्त [अग्नि और प्रकाश] और कफ [जल और पृथ्वी] के मूल भूत सिध्धान्तों पर आधारित है / ये सभी प्रकृति मे पाये जाने वाले सभी पदार्थों का सूच्छ्म स्वरूप कहा जा सकता है /

जब विग्यान जितना आज विकसित है , उस समय नही था , तब प्राण दायनी वायु अथवा हवा के बारे मे आयुर्वेद के मनीषियों ने बहुत अनतरन्ग अध्ध्य्यन करके जितना भी बताया है वही आज भी उसी तरह उपयोगी है जितना उस समय था/

आयुर्वेद ने पित्त को और अधिक विवेचना करने के उद्देश्य से इसे पान्च भेदों मे बान्ट दिया है , इसमे से एक भेद “लोचक” कहा गया है /

दर असल लोचक भेद के पीछे का उद्देश्य आन्तरिक व्यवहार को देखते हुये मन और मष्तिष्क की ग्यानेन्द्रियों से जुड्डना और बाहरी तौर पर नेत्र से समबन्धित विकारो का निदान करना , ऐसा समाहित करके भाषित करना उद्देश्य है /

“लोचन” सन्स्कृत भाषा का शब्द है जिसके माने “नेत्र” अथवा “आन्ख” से होता है / “लोचक” पित्त भेद नाम  सुविधा के लिये कहा जाने लगा है / मेरा मानना है कि आयुर्वेद के मनीषियो ने स्वास्थय के अथवा शरीर के परीक्षण मे नेत्रों के चरित्रगत परिचय का उपयोग रोग के निदान ग्यान के लिये अव्श्य किया करते होन्गे /

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आन्ख के सफेद हिस्से मे रक्त की लाल रन्ग की नसों का होना और दिखना अच्छे स्वास्थय की निशानी मना जाता है / आज भी रोग निदान के लिये बहुत से चिकित्सक इस विधान का उपयोग करते है /

अधिक लाल आन्ख का होना “BLOOD PRESSURE”  की उपस्तिथि को दर्शाता है / अधिक लाल आन्ख कई रोगों के निदान को भी बताता है / सबल बाई, सिर दर्द, जुखाम, साइनुसाइटिस, मष्तिष्के रोग, आदि बीमारियोम को इन्गित करता है /

आन्खो के सफेद भाग का और अधिक सफेद होना और लाल नसो के अभाव का होना यह इन्गित करता है कि वयक्ति के “रक्त की कमी” है या anemia hai / पेट मे कीडे होने मे भी आन्ख का सफेद भाग अधिक सफेद होता है /

आन्ख का सफेद हिस्से का पीला होना JAUNDICE   या HEPATITIS  य़ा LIVER य़ा GALL BLADDER   से सम्बन्धित तकलीफों को इन्गित करता है / जितना ही अधिक आन्ख का पीलापन बढता है , उतना हॊ अधिक INTENSITY LEVEL खून में पित्त-रस BILE -JUICE  की उपस्तिथि का समझना चाहिये/

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आयुर्वेद मे लोचक पित्त के बारे मे बहुत अधिक विस्तार से विवरण नही मिलता है / इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि  जिस समय लिपि का अविष्कार नही हुआ था तब तक श्रुति और स्मृति पर ही सारा ग्यान और सूत्र सनकलित किया जाता रहा / सन्स्कृत भाषा मे सूच्छ्म सूत्रों को इसीलिये सन्क्षिप्त स्वरूप में रचित किया गया ताकि इन सूत्रो को अधिक से अधिक याद किया जा  सके और जब जरूरत हो तब इन सूत्रों को याद करके दुबारा उपयोग किया जा सके /  सुत्रो की व्याख्या बहुत विस्तार से करने की परम्परा रही है / इस सूत्रो की व्याख्या करना सूत्रों  मे स्थापित मुख्य शब्दों के ऊपर निर्भर करता रहा है /

“लोचक” शब्द का विवेचन भी इसी श्रेणी मे आता है /

आज हमारा वैग्यानिक ग्यान बहुत अधिक बढ गया है / उस जमाने मे जितने साधन अधिक से अधिक प्राप्य थे आयुर्वेद के मनीशियों ने उनका उपयोग करके अच्छा से अच्छा और सच्चा से सच्चा देने का प्रयास इस सन्सार के लिये किया / महर्षियो का सूत्र ही था “वसुधैव कुटुम्बकम” यानी यह धरती और इस धरती पर रहने वाले सभी जन और अशु पक्षी और वनस्पतियां सब के सब उनका परिवार है और परिवार से हैं /

इस तरह की विशद कल्पना भारतीय  आयुर्वेद के मनीशियों की रही है /

लोचक पित्त बाहरी तौर पर आन्ख से सम्बन्धित रोगों और शरीर के अन्य अन्ग अथवा अन्गॊ की विकृति का दर्शन करा देती है जिसका सन्क्षिप्त  जैसा विवरण ऊपर किया जा चुका है /

आन्तरिक तौर पर लोचक पित्त का कार्य मष्तिष्क और AUTONOMIC NERVOUS SYSTEM  से भी जुडा हुआ है जिससे शरीर के अन्य सिस्टम जैसे HORMONAL SYSTEM   भी प्रभावित होते है जो परोक्ष थवा अप्रोक्ष रूप मे शरीर पर प्रभाव डालते है /

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ददिमाग के अन्दरूनी हिस्से “आक्सीपीटल लोब” क जुड़ाव दिमाग के डुसरे हिस्से “टेम्पोरल लोब” और “पेराइटल लोब” से भी होता है और इन्से प्राप्त न्य़ूरो सूचनाये एक दूसरे हिस्से को  transfer  हुआ करती है /

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आन्ख के देखने की प्रक्रिया के रियक्शन मष्तिष्क द्वारा idea concieve  करने के ऊपर निर्भर करता है जिससे पूरे शरीर के असर पड़्ता है /

यह असर किस प्रकार का होता है इसे सन्क्ष्प्त मे नीचे के schematic structure  मे बताय गया है /

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आयुर्वेद मे वर्णित पित्त भेद का सन्क्षिप्त विवेचन करने के पश्चात यह कहा जा सकता है कि पित्त दोष के पित्त भेद का एक भाग “लोचक पित्त” रोग निदान और रोग चिकित्सा के लिये कितना महत्व पूर्ण है /

 

AYURVEDA NEW INVENTION ; DIGITAL HEAMATOLOGICAL TEST METER ; PROTO-TYPE METER DESIGNED AND DEVELOPED AND FABRICATED BY K.P.C.A.R.C. KANPUR, INDIA ACCORDING TO THE NEED OF AYURVEDA


AYURVEDA have now approached to a new heights , saying “SKY have no limits” .

At our research center K.P.C,A.R.C., KANPUR, INDIA have designed and developed and fabricated a new heamometer according to the need of AYURVEDA.

The process of examination is based on the fresh BLOOD drops taken from any where from body , but proffered from finger tips of hand and foot , impregnated to chemical paper stripes .

Readings are transferred to computer software, where after analysis report is prepared for diagnosis and treatment and management purposes.

The following parameters can be obtained by examining FRESH BLOOD of the sick individual.

With the help of this meter followingAYURVEDA FUNDAMENTAL PRINCIPALS INCLUDING DIAGNOSIS OF DISORDERS  parameters can be obtained examinning blood directly.

Parameters examined ;

1- VATA

2- PITTA

3- KAPHA

4- RAS

5- RAKTA

6- MANS

7- MED

8- ASTHI

9- MAJJA

10- SHUKRA

including these parameters FIVE KINDS OF VATA AND FIVE KINDS OF PITTA AND FIVE KINDS OF KAPHA are also quantified.

by this meter BLOOD CHEMISTRY IS ALSO TESTED.

The following parameters of the BLOOD CHEMICAL  CHEMISTRY   can be evaluated.

1- Sulphate

2- Phosphates [total]

3- Sodium

4- Pottasium

5- Chloride

6- Iodine

7- Copper

8- Ammonia

9- Uric Acid

10- Iron

11- Urea

12- few other parameters

Over 70 page Blood test report provides the details of the Disease diagnosis and Fundamentals diagnosis and this helps in treatment and management of the case.

Now we are using this machine at our research center and BLOOD EXAMINATION are doing continuously and helping patients.

 

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आयुर्वेद यूरीनो मीटर ; आयुर्वेद के सिध्धान्तो पर आधारित रोगी के मूत्र परीक्षण के लिए K.P.C.A.R.C. KANPUR नवीन आविष्कार किया गया परीक्षण यन्त्र; वर्तमान मे प्रोटो-टाइप यन्त्र पर परीक्षण जारी


आयुर्वेद के लिये रोगी के मूत्र परीक्षण द्वारा आयुर्वेद के सिध्धान्तो का ग्यान कराने के लिये हमारे रिसर्च सन्स्थान कनक पालीथेरापी क्लीनिक एवम रिसर्च सेन्टर , कानपुर, भारत द्वारा एक प्रोटो-टाइप स्वदेशी यन्त्र तैयार किया गया है जिससे आयुर्वेद के निम्न सिधान्तों का INTENSITY LEVEL   रोगी के शरीर के अन्दर किस स्तर का है , यह पता चल जाता है /

हमारे सन्स्थान द्वारा इस नवीन आविष्कार की गयी मशीन पर लगातार परीक्षण का कार्य किया जा रहा है / अभी  यह प्रोटो-टाइप मशीन  है जिस पर मूत्र की  जान्च का कार्य और रिसर्च का कार्य लगातार प्रगति पर है /

निम्न आयुर्वेद के सिध्धान्तों का evaluation  प्रत्येक रोगी का ्किया जा रहा है ;

१- वात

२- पित्त

३- कफ

४- रस

५-रक्त

६- मान्स

७- मेद

८- अस्थि

९= मज्जा

१०- शुक्र

यह दस आयुर्वेद के status अभी तक quantify किये जा चुके है /

इनके अलावा निम्न वात भेद और पित्त भेद और कफ भेद का status quantify  किये जा चुके है /

वात भेद मे ;

१- अपान

२- समान

३- व्यान

४- उदान

५- प्राण

पित्त भेद मे ;

१- साधक

२- पाचक

३- रन्जक

४- लोचक

५- भ्राजक

कफ भेद मे;

१- श्लेश्मन

२- अवलम्बन

३- रसन

४- क्लेदन

५-  स्नेहन

उपरोक्त सभी भेदों का status quantify  लगातार किया जा रहा है /

इस नवीन आविश्कार किये गये यन्त्र से आयुर्वेद के सिध्धन्तो के अध्ध्य्यन मे आयुर्वेद के सिध्धन्तो का EVIDENCE LEVEL    पर आन्कलन करना हमारा मुख्य उद्देश्य है , इसके साथ रोग निदान तथा मूत्र के अन्दर पाये जाने वाले chemicals  का भी evaluation किया जा रहा है , जिससे रोग निदान और आयुर्वेद के सिध्धन्तो को URINE CHEMICAL COMPONENTS के स्तर पर भी अन्कलन किया जा सके ऐसा हमारे सन्स्थान द्वारा किया जा रहा है /

प्रोटॊ – टाइप मशीन का चित्र नीचे दिया जा रहा है /

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होम्योपैथी की कुछ दवाओं के काम्बीनेशन “कैन्सर” तथा “कैन्सर जनित सिन्ड्रोम्स” मे बहुत लाभ दायक साबित हुये हैं


कैन्सर तथा कैन्सर जनित सिन्ड्रोम्स के लिये होम्योपैथी की कुछ दवाओ के काम्बीनेशन रोगियों में उपयोग किये गये है , जिनसे कैन्सर जनित सिन्ड्रोम्स मे बहुत फायदा मिला है /

जिस तरह का फायदा रोगियो को उनकी तकलीफ के review आब्जर्वेशन मे मिला , वह रोगियॊ के दर्द का कम होने और सूजन को कम होने मे अधिक देखने मे आया है /

होम्योपैथी मे एसिड से तैयार की जाने वाली दवाये जिनमे चार एसिड का उपयोग मरीज की स्तिथि के अनुकूल और ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके तत्सम्बन्धित परीक्षणो के आधार पर चुनाव करके किया गया है / ये चार होम्योपैथी के एसिड है ;
१- ACID MURIATIC Q
2- ACID NITRIC Q
3- ACID SULPHURIC Q
4- ACID PHOSPHORIC Q

उक्त चारो एसिड मरीज की totality और ETG AyurvedaScan and its supplementary examination and test के आधार पर ही किया गया है /
लेकिन इन एसिड के साथ साथ कुछ अन्य दवाये है जिनका उपयोग भी किया गया है / ये निम्न है /

1- PHYTOLACCA Q
2- HYDRASTIS Q
3- ECHINESIA Q
4- KALMEGH Q
5- CHIRAYATAA Q
6- IODIUM Q

के अलावा अन्य बहुत सी दवाये है जो आवश्यकतानुसार उपयोग की जाती है /

यह देखा गया है कि होम्योपैथी के एसिड अन्य दवाओ के साथ मिला देने से दूसरे मदर टिन्क्चर बहुत एक्टिव हो जाते है और उनके hidden ingredients शरीर मे जज्ब होकर बहुत तेजी से असर करते है /

उदाहरण के लिये गले के स्वर यन्त्र के कैन्सर VOCAL CORD CANCER के लिये ACID PHOS Q के साथ होम्योपैथी के अन्य मदर टिन्क्चर ्यथा ASPIDOSPERMA Q AND JUSTICIA ADHAATODA Q AND HYDRASTIS Q के अलावा दूसरे अन्य उपयुक्त मदर टिन्क्चर के मिक्सचर का उपयोग curative सिध्ध हुआ है /

मेरा मानना है कि phosphoric acid के कारण अन्य सभी मदर टिन्क्चर के औषधीय गुण फास्फेट्स के गुणों मे तब्दील हो जाते है, इसलिये औषधीय गुणो का असर कैन्सर सेल और कैन्सर टीशूज पर पड़ता है जिससे उनके degeneration की प्रक्रिया मे सुधार होता है /

हलाकि यह होम्योपैथिक औषधियो का प्रयोग कैन्सर की पहली और दूसरी अवस्था तक ही काम करता है लेकिन बहुत अधिक बढी हुयी अवस्था मे यह सीमित ही कार्य करता है /

यहा दी गयी findings को fool-proof नही समझना चाहिये क्योकि अभी इसे कुछ ही मरीजो पर आजमाया गया है / अभी इस दिशा मे होम्योपैथिक दवाओ के प्रयोग के और अधिक उपयोग और गम्भीर प्रकृति के अध्ध्यन कैन्सर और कैन्सर  सिन्ड्रोम्स के बारे में हमारे रिसर्च केन्द्र में किये जा रहे है /

ayurvedakrantikari

E.T.G. AyurvedaScan CONTINUOUS TRACE RECORD TEST RESULTS ; FEW ILLUSTRATION OF CASES


NEW INVENTION of ETG AyurvedaScan system have now introduced “continuous test” of the organs or viscera affected for their minute patho-physiological and pathological studies for diagnosis and other purposes.

Below is given three patient’s traces , which was recorded at least 04 hours continuously for best diagnosis and pin-point problem solutions.

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prescription 002

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prescription 003

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prescription 004

E.T.G. AyurvedaScan CONTINUOUS TRACE RECORDING SYSTEM  provides regular monitoring of the affected area or patient problems diagnosis and to know , what is happening with the  patient within 24 hours or within 48 hours oe more , may be  monitorised by this system. 

Many patient complaints that they feel problems at any hours of the day or night , for them this process is beneficial to trace the problems they have.

Few hours like 3 to 4 hours continuous monitoring is also beneficial for short term observations. These observations are beneficial for treatment and management of the problems of patient in view of Ayurveda.

AYURVEDA divides a day in 4 hours duration . Ayurveda says that from 6 o clock of Morning up to 10 o’clock KAPHA DOSHA  is peominent, after 10 AM to 2 PM  PITTA dosha is  prominent and after 2 PM to 6 PM VATA dosha is prominent, so is of the night, repeated the same sequence.

Observations of these timings by E.T.G. AyurvedaScan system , patients are observed in limit of the doshas for proper selection of AYURVEDIC  treatment and Ayurvedic management.

The NEW Invented system is totally mechanical and the software provides DATA for analysis and synthesis accordingly.

This is another innovation of the ETGAS system, developped by our research center with the commitment to improve the quality of the AYURVEDA Treatment and management in view of evidence based medicine.

HEAT STROKE ; HOMOEOPATHIC SOLUTIONS OF THIS DREADED DISEASE CONDITIONS ; “GLONINE 30 ” HOMOEOPATHIC REMEDY IS SPECIFIC FOR HEAT STROKES SYNDROMES


Heat stroke is a dreaded disease condition is tropical countries and Tropical regions.

Heat stroke is very dangerous and its syndromes are sometimes confused any physician, if it is not properly diagnosed.

When heat trokes or exposure of heat attacks to any person, he feelsa very Hot and sensation is like feeling of warmth and burning in skin, which aggravates from heat or sun light or heat radiation of any kind.

Causing high perspiration and extreme thirst, which is unquenchable, including some times nasal watery discharge and cough , feeling of fever are some times presents.

This confused the actual diagnosis and person understand that he is suffering from fever. Diarrhoea or excess perspiration imbalances ELECTROLYTES of body, which causes cardiac problems, giddiness and circulation etc.

To treat this condition smoothly Homoeopathic remedy ‘GLONINE 30 ‘ is a specific remedy for this condition.

30 Potency of this remedy should be repeated 2 hourly in extreme exposure of Hewat or in Heat strokes along with the lemon sugar and salt mixture of sharbat or cold drinks and pana of unriped mango, have a beneficial effects and heals condition almost one or two days.

Person should avoid extreme heat during treatment. More than 50 yrs of medical practice, I am using this remedy with great faith and never failed in the treatment of heat strokes or exposure of heat.

Heat stroke is a dreaeded disease condition is tropical countries and Tropical regions.

Heat stroke is very dangerous and its syndromes are sometimes confused any physician, if it is not properly diagnosed.

When heat trokes or exposure of heat attacks to any person, he feelsa very Hot and sensation is like feeling of warmth and burning in skin, which aggravates from heat or sun light or heat radiation of any kind.

Causing high perspiration and extreme thirst, which is unquenchable, including some times nasal watery discharge and cough , feeling of fever are some times presents.

This confused the actual diagnosis and person understand that he is suffering from fever. Diarrhoea or excess perspiration imbalances ELECTROLYTES of body, which causes cardiac problems, giddiness and circulation etc.

To treat this condition smoothly Homoeopathic remedy ‘GLONINE 30 ‘ is a specific remedy for this condition.

30 Potency of this remedy should be repeated 2 hourly in extreme exposure of Hewat or in Heat strokes along with the lemon sugar and salt mixture of sharbat or cold drinks and pana of unriped mango, have a beneficial effects and heals condition almost one or two days.

person should avoid extreme heat during treatment. More than 50 yrs of medical practice, i am using this remedy with great faith and never failed in the treatment of heat srokes or exposure of heat.