दिन: जुलाई 1, 2014

Doctor’ day ; 1st July 2014 ; डाक्टर्स दिवस ०१ जुलायी २०१४ ; What is opinion of FIVE CONTINENTS VISITING PATIENTS ?


हमारे रिसर्च सन्स्थान “कनक पालीथेरपी क्लीनिक एवम रिसर्च सेन्टर , कानपुर भारत” मे प्रति वर्ष विदेशी मूल के भारतीय इलाज के लिये आते है / इन विदेशी मरीजो के साथ साथ उनके कुछ विदेशी मित्र जो उसी देश के मूल नागरिक है , वे भी रोग के इलाज और परामर्श के लिये आते है /

मै अक्सर उनसे कई सवाल पूछता रहता हू और यह जानने की कोशिश करता हू कि उन लोगो को आयुर्वेद या होम्योपैथिक या यूनानी या प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा इलाज करने की क्या जरूरत पड़ गयी ? जिससे उनको यहां भारत आना पड़ा ???

इन विदेशी रोगियो के उत्तर सुनकर मुझे इस बात का गर्व का अनुभव हुआ कि भारत देश चिकित्सा सुविधा के मामले मे अभी भी विश्व मे सबसे आगे है , जहां affordable तथा economically durable इलाज की सुविधाये उपलब्ध है /

अमेरिका से आये एक मरीज ने बताया कि सफेद दाग VITILIGO या LEUCODERMA का इलाज वहां के डाक्टर यह कहकर नही करते है कि यह कोई बीमारी ही नही है और जब बीमारी ही नही है तो इलाज किस बात का ?

अफ्रीका से आये कई मरीजो ने बताया कि वहां बहुत बड़ी सन्ख्या मे डायबिटीज के मरीज है, दवाये खाने के बाद भी डायबिटीज कन्ट्रोल नही होती है /

आस्ट्रलिया से आये मरीजो ने बताया कि पेट और आन्तो से सम्बन्धित बीमारियो का कोई माकूल और effective इलाज नही है /

यूरोप से आये मरीजो ने बताया कि लीवर अथवा यकृत से सम्बन्धित बीमारियो का इलाज उनके यहां कोई बहुत अच्छे किस्म का नही है /

एशिया के देशो से आये मरीजो ने बताया कि एलोपैथी के अलावा वहां के डाक्टर दूसरा और कोई इलाज करने की विधि जानते तक नही है /

कुछ अन्य बाते भी सामने आयी , जिनमे निम्न बाते प्रमुखता से उभर कर सामने आयी है ;

[1] मरीजो ने बताया कि इन देशो के डाक्टरों को एलोपैथी की चिकित्सा व्यवस्था के अलावा विश्व के कई देशो मे प्रैक्टिस किये जा रहे चिकित्सा विधियों के बारे मे कोई भी जानकारी नही होती है /

[२] बीमारी मे क्या खाना चाहिये और क्या नही इसके बारे मे चिकित्सको को कुछ पता ही नही होता कि वे खाने के लिये मरीज को क्या बतायें ? इसमे भ्रम बना रहता है /

[३] बहुत सी ऐसी बीमारियां होती है जो दवाओ से ठीक  हो जाती है लेकिन चिकित्सक ऐसी बीमारियो के इलाज के लिये आपरेशन कर देते है / आपरेशन कराने के बाद भी  बार बार फिर से बीमारी उभर आती है और फिउर दुबारा तिबारा और अधिक बार आपरेशन कराने की नौबत आ जाती है जो कभी कभी जान लेवा साबित हो जाती है /

[४] मरीजो के भारत मे रहने वाले रिश्तेदार विदेशो मे रहने वाले अपने  रिश्तेदारो को बताते है कि आयुर्वेद या होम्योपैथी या यूनानी या प्राकृतिक चिकित्सा करने से जिन बीमारियो को लाइलाज बता दिया जाता है उनका इलाज भारत मे आयुष चिकित्सा विधियो मे सम्भव है /

चिकित्सको का प्रमुख उद्देश्य यह होना चाहिये कि उनके पास जितने भी मरीज चिकित्सा कराने के लिये आते है , ये सभी मरीज डाक्टर के पास इस लिये आते है कि मरीज यह विश्वास करते है कि उनका रोग उनकी बीमारी  को डाकटर साहब जरूर ठीक करेन्गे / यह trust मरीज को एक उम्मीद दिलाता है कि वह एक सुरक्षित हाथो मे है जो बिना नुकसान पहुचाये उसकी तकलीफ का इलाज करेगा /

यह भरोसा मरीज बहुत उम्मीद लेकर डाक्टर के पास आता है / चिकित्सको को भी यह नही भूलना चाहिये कि मरीज का भरोसा ही उनकी प्रक्टिस का आधार है /

doctors-day-editorial

डा० विधान चन्द्र राय – Dr, B,C, Roy -जो पश्चिम बन्गाल राज्य की सरकार के मुख्य मन्त्री थे, का जन्म १ जुलायी को हुआ था / अन्ग्रेजो के जमाने मे और जब  ब्रिटीश इन्डिया मे राजाओ का शासन था , तब डा० विधान चन्द्र राय  उस जमाने के एक जाने माने और प्रसिध्ध एलोपैथी के चिकित्सक थे / बहुत कम लोगो को मालूम है कि डा० बी०सी० राय को  एलोपैथी की चिकित्सा के साथ साथ आयुर्वद और होम्योपैथी चिकित्सा का भी अच्छा ग्यान था / पन्डित मोती लाल नेहरू से उनके बहुत अच्छे सम्बन्ध थे / डा० बी०सी० राय बहुत ही साधारण व्यक्तित्व वाले थे और मुख्यतया कलकत्ता मे गरीबो और मज्लूमो की सेवा मे सन्लग्न रहते थे / उनका कहना था कि अच्छा डाक्टर वह नही होता जो महन्गी से महन्गी दवाये देकर मरीज को ठीक करता है, अच्छा डाक्टर वही होता है जो सस्ती से सस्ती दवाओ को देकर कठिन से कठिन रोगो को दूर करता है /

सारे भारत देश मे इसी कारण से १ जुलाई को डाक्टर्स डे मनाते है ताकि सभी चिकित्सक बन्धुओ को याद रहे कि उनका काम पीडित मानवता की सेवा करना है  और पैसा कमाना ही ध्येय नही है /

Advertisements