हिस्टीरिया और पागलपन के सम्मिलित अटैक के रोगी का प्रसन्ग ; A CASE OF FEMALE PATIENT IN COMBINATION OF MANIA AND HYTERIA DISORDERS ; TREATED SUCCESSFULLY BY AYURVEDA


साधारण तौर पर हिस्टीरिया के मरीज अथवा मिर्गी के मरीज एकल यानी एक ही  तकलीफ से पीडा भोगने वाले होते है यानी उनको मिर्गी के दौरे पड़्ते है लेकिन इसके अलावा उनको कोई दूसरी बहुत major किस्म की तकलीफ नही होती है सिवाय कुछ anomalies  के और कुछ hidden disorders के /

लेकिन कुछ ऐसे भी मरीज मिले जिनको पागल पन की बीमारी के साथ साथ मिर्गी के दौरे पड़ने लगे और उनको कुछ दूसरे किस्म की अन्य बीमारिया जो hidden  stages  मे थी उनसे भी यदा कदा परेशानी होने लगी /

जिस महिला का जिक्र यहां किया जा रहा है उसकी उम्र इस समय ३० साल है और इसे hysteria  का दौरा ८ साल की उमर से पड़ रहा था / यह महिला कान्पुर से लगभग ६० किलोमीटर की दूरी पर स्तिथि एक ग्रामीण क्षेत्र की निवासी है / इसकी शादी ६ साल पहले हो चुक्ली है और इसके एक तीन साल का male child  है / इसकी ससुराल वालो ने इसे मा बा के पास भेज दिया और कहा कि जब तक यह ठीक नही होगी तब तक इसे अपने यहां नही रखेन्गे/ इस कारण से यह महिला अपने पिता के घर मे ही रहती है और वही इसका इलाज करा रहे है / इसके पिता एक किसान है और गांव मे कृषि कार्य करते है /

इस महिला को मेरे पास इलाज कराने के लिये इसके एक रिश्तेदार जो अपने बच्चे का मिर्गी का इलाज कराचुके है और उनका बच्चा मिर्गी रोग से अब बिल्कुल मुक्त हो चुका है और उसको अब किसी किस्म की मिर्गी के झ्हटके नही आते है उनके किसी रिश्तेदार ने जब देखा कि मिर्गी ठीक हो गयी है तो उसने यह उदाहरण देखकर इस महिला के पिता से बताया कि कानपुर के डा० बाजपेयी से इलाज क्रराइये /

मेरे यहा आने से पहले इसस महिला का इलाज अन्ग्रेजी allopathic  दवाओ द्वारा किया जा रहा था , लेकि द्वाये खाने के बाद भी इसकी हालत बिगड़ती चली जारही थी और दौरे दिन मे कई कई बार  पड़्ते पड़्ते  एक या दो घन्टे तक बेहोश हो जाती थी तथा दौरे रुकने का नाम नही ले रहे थे/

इसके सथ साथ पागल पन का दौरा भी पड़्ता था जिससे गांव के पड़ोसी और आस्पास के लोग भी हालत देखकर भयभीत होने लगे /

दिनान्क २ अप्रेल २०१४ को इस महिला के सभी ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके supplementary exmination and test  परीक्षण किये गये और निष्कर्ष स्वरूप क्या कया और किस तरह की बीमारियां है उनका इलाज किया जाना चाहिये उस हिसाब से उसे आयुर्वेदिक दवा बाज़ार से लेकर  सेवन करने  के लिये बताया गया / यह निर्देश दिया गया कि १२० दिन दवा का सेवन करके दुबारा review करा ले और दवा और परहेज का परिवर्तन करा ले /

यह महिला आज दिनाक १३.०७.२०१४ को follow-up review के लिये आयी / कुछ जान्च करने के बाद यह पाया गया कि इसे लगभग ४० प्रतिशत आराम होना चाहिये /

महिला और उसके पिता से जब पूछा कि उसे कितना आराम है , जब से वह मेरा इलाज कर रही है तो उसने कहा कि मुझे ३० % प्रतिशत आराम है / मैने एलोपैथी की दवा जो मुझे रोजाना छह गोलिया दिन भर मे लेनी होती थी अब घटकर एक गोली पर आ गयी है / पागल्पन का दौरा और बेहोशी अब नही होती है / मै अब अपने को सामान्य समझती हू , लेकिन मुझे hysteria के झटके लगने का डर बना रहता है / इसके अलावा जो अन्य तकलीफे है वे अब कम हो गयी है और अब इतना परेशान नही करती है /

इस महिला की ससुराल वाले भी मुझसे मिलने मई २०१४ को आये थे / वे भी बता रहे थे कि कुछ आराम है / ससुराल के लोगो ने मुझसे पूछा कि “यह तो लाइलाज बीमारी है , यह सारी जिन्दगी नही ठीक होती है ” /मैने उनको बताया कि अगर मिर्गी या हिस्टीरिया का या पागल्पन का इलाज ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक से करते है तो यह बीमारी अवश्य ठीक होती है / बाद मे उनको भी स्कैनरऔर मशीनो और उपचार की पध्यति से परिचय कराया जिससे वे बहुत प्रभावित हुये /

मैने लड़्की के ससुराल वालो को आश्वस्त किया कि यह महिला पनी बीमारी से छुटकारा अवश्य पा लेगी /

आज दिनाक १३.०७.२०१४ को इस महिला का दिमाग के सभी हिस्सो का etgasctreaa पेइक्शन किया गया / जिसमे निम्न anomalies का observation किया गया /

सभी पाठक इसका अलोकन करे /

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महिला के दिमाग की लगातार ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की रिकार्डिन्ग ६४ मिनट करने के बाद पता चला कि इस महिला के  Brain neurons Electrical diffusion  सामान्य से अचानक कुच देर मे होते है जिससे महिला के सोचने का तारतम्य एक जैसा नही हो पाता है /  ६४ मिनट की रिकार्डिन्ग मे ऐसा कई बार  रिकार्ड हुआ है / यह स्तिथि बहुत धीमे लेवल की थी बहुत LOW INTENSITY LEVEL का मिला /

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जब यही स्तिथि बार बार होने लगती है और neurons  की  pathophysiology  का intensity level  अह्दिक से अधिकतम की ओर बढता है तो extreme level  पर आते ही दिमाग का दौरा या मिर्गी का दौरा या हिस्टीरिया का दौरा पड़ जाता है /

ऐसा हमारा अध्य्यन  मिर्गी रोग और इसी तरह की दिमाग की बीमारियो के बारे मे अभी तक establish हुआ है / यह स्तिथि तभी बनेगी जब वात के साथ कफ की स्तिथि  व्यक्ति की प्रकृति के साथ उसी लेवल पर मेल खाती है जिस लेवल पर व्यक्ति की प्रकृति  जन्म के समय निर्धारित हो चुकी है /

हमारे सन्स्थान KPCARC KANPUR द्वारा इस  प्रकार की दिमागी बीमारियो पर शोध कार्य का विकास लगातार जारी है /

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