A CURED CASE OF “OSTEO-ARTHRITIS” BY AYURVEDA TREATMENT ; PATIENT WAS ADVISED FOR KNEE JOINT REPLACEMENT ; “घुटना प्रत्यारोपड़” के लिये एडवाइस किये गये ओस्टियो-आर्थ्राइटिस रोगी का आयुर्वेदिक उपचार से पूर्ण आरोग्य ;


आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान मे आर्थ्राराइटिस के रोग का बहुत सटीक और उत्तम किस्म का इलाज सम्भव पहले भी था आदि काल से था और अब आयुर्वेद के परीक्षण पर आधारित तकनीको के अमल मे लाने से यह अधिक सटीक और fool proof  हो गया है /

एक महिला ४७ साल उम्र , जिसको ओस्टियो आर्थ्राइटिस की तकलीफ थी , उसको घूटना प्रत्यारोपड़ KNEE JOINT REPLACEMENT के लिये कहा गया / लेकिन इस महिला के पास पैसा होते हुये भी उसने घुटना प्रत्यारोपड़ नही करवाया , इसका कारण जो भी रहा हो / क्योन्कि उसने जब देखा कि घुटना का प्रत्यारोपड़ किये गये लोगो को किस तरह की हालत होती है उसे देखकर रोगिनी ने knee joint replacement  का इरादा बदल दिया /

यह बीमारी हड्डियो के जोड़ो से सम्बन्धित होती है और इसमे हड्डी के joints  मे बदलाव पैदा होते है /

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ऊपर जिस माडल को दिखाया गया है , यह माडल सारे शरीर की हड्डियो के जोड़ों को दर्शाता है / इस माडल के जरिये साधारण मनुष्य भी समझ सकता है कि मानव शरीर की बनावट मे joints का क्या महत्व है /

किसी ने इस महिला को आयुर्वेद की चिकित्सा कराने के लिये कहा / इस महिला ने यह ढून्ढना शुरू किया कि कौन सा आयुर्वेद का चिकित्सक उसकी सहायता कर सकता है / किसी जानकार ने इस महिला को बताया कि आप कानपुर के डा० बाजपेयी से समपर्क करे और उनके पास इलाज के लिये जाये/ उसने अपने कानपुर के एक रिश्तेदार को मेरे पास भेजा और मेरे बारे मे पता किया / मैने उसको अपनी सारी तकनीक और इसकी विधि तथा उपचार के बारे मे जानकारी दी /

दिनान्क २८ सितम्बर २०१२ को यह महिला गोरखपुर से अपने को दिखाने के लिये हमारी क्लीनिक मे आयी / इसका ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्शन के अलावा अन्य परीक्शनो को किया किया गया /

मरीज की हालत ऐसी नही थी कि वह जरा सा भी चल सके / इसको चार पान्च लोग हाथो से टान्ग कर मेरे दवाखाने मे लाये थे / मरीज एक कदम भी नही चल पा रहा था / उसके घुटने इतने सूजे हुये थे कि जरा सा भी movement नही हो पा रहा था / मरीज ठीक से कह्डा भी नही हो पा रहा था / उसकी हालत बहुत खराब थी /

 

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MUSCULO-SKELETAL SYSTEM  की अवस्था देखकर और SPINE  से समबन्धित डाटा से पता चला कि इसको क्या problems  है /

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महिला की रिपोर्ट , जिसमे उसके सारे शरीर के परीक्षण मे जिस तरह की anomalies प्राप्त हुयी उसे बताया गया है /

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उक्त डाटा से पता चलता है कि शरीर के कुछ अन्गो मे किस तरह की pathophysiology और pathology विद्यमान है /

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आयुर्वेद विग्यान के मौलिक सिध्धन्तो क क्या मरीज के शरीर मे उपस्तिथि निली है उसकी कितनी intensity  है यह बताया गया है / यह बहुत महत्व पूर्ण है क्योन्कि इसी पर अधाइर्त होकर मरीज का इलाज किया जाता है , मरीज को किस तरह की दवाओ की जरूरत है , उसके क्या दोष है जिन्हे ठीक करने पर मरीज को रोग से छूटकारा मिलेगा और इसी डाटा पर आधारित होता है कि उसे किस तरह की जीवन शैली और क्या खान पान adopt  करना चाहिये  /

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मरीज के ETG AyurvedScan  की रिकार्ड की गयी प्रति ट्रेसेस /

मरीज के अन्य परीक्षण किये गये और यह पता करने का प्रयास किया गया कि मरीज की किस तरफ की मान्श्पेशियो कमजोर है या उनमे किस तरह की कार्य विकृति पैदा हो रही है / ताकि उस तरफ की मान्शपेशियो की कार्य विकृति को दूर करने का प्रयास विशेष तौर पर किया जा सके /

इसके अलावा मरीज का आयुर्वेदिक रक्त परीक्षण किया गया ताकि पता चले कि उसके  रक्त मे क्या विकृतिया पैदा हो रही हैं /

मरीज को निम्न दवाये दी गयीं , यह मरीज का पहला prescription  है जो नीचे दिया गया है / कुछ prescribed औषधियो को सावधानी और दुरुपयोग को रोकने के लिये कुछ दवाओं को काट दिया गया है ताकि अनावश्यक रूप से सार्वजनिक तौर पर दवाये mass level  पर आयुर्वेदिक दवाओ क दुरुप्योग रोका जा सके/ यह इसलिये आवश्यक है क्योकि आयुर्वेद की औषधियो का prescription  और दवाओं का चयन तथा पथ्य परहेज सभी कुछ आयुर्वेद के सिध्धान्तो पर आधारित है / जैसा कि सभी को ग्यात होना चाहिये कि हर व्यक्ति की प्र्कृति और दोष की  intensity  अलग अलग level  की होती है और इसमे ’GENERALISATION’   का कोई महत्व नही होता जैसा कि आधुनिक चिकित्सा विग्यान मे है उदाहरण के लिये दर्द चाहे जैसा हो pain killers  खाने से अवश्य कम होगा / लेकिन आयुर्वेद मे ऐसा कम ही है / यहां root cause  पर ही ज्यादा ध्यान दिया जाता है / ROOT PROBLEM  का इलाज करने से दर्द की समस्या फौरी तौर पर ठीक होती है / आयुर्वेद मे अधिकान्श दर्द “दशमूल काढा” का सेवन करने से ठीक होते है / यह आयुर्वेद के महर्षियो ने ऐसा दध औषधियो का मिष्रण तैयार किया है जो शरीर के अधिकान्श MUSCULAR, MUSKULO-SKELETAL , NEURO-MUSCULAR , NEUROLOGICAL और इसी तरह के सभी दर्द की स्तिथियो को आरोग्य करता है / यह अनुपान के रूप मे भी उपयोगी है / यानी वात विकार या पित्त विकार या कफ विकार नाशक औषधियो के साथ अगर इस्का प्रयोग करते है तो यह इन औशढधियो के गुणो को और अधिक आरोग्य कारी बना देता है /

दिनान्क 29 SEPETEMBER 2012 को इस मरीज को दवा खाने के लिये बताया गया / इसके लिये निम्न पर्चा दिया गया /

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मरीज ५ अथवा ६ माह के अन्तराल से follow-up  के लिये आता रहा / उसकी हालत मे सुधार आता चला गया /

आज दिनान्क २० जुलायी २०१४ को मरीज ने बताया कि अब वह अपने पैरो के बल पर बिना क्सि सहायता के लम्बी दूरी तक पैदक चलता फिरता है और वह अब ९५ प्रतिशत तक ठीक है /वह अपना सभी काम कर रही है / मरीज बहुत प्रसन्न है कि मेरे इलाज से उस्को अपना  घुटना रिप्लेस नही कराना पड़ा  है /

मैने उसको सलाह दी कि वह अभी ६ माह तक नीचे लिखी द्वा और सेवन करे इसके बाद चाहे तो वह दवा धीरेधीरे बन्द कर  सकती है /

इस मरीजा को नीचे लिखी दवा prescribe  की गयी /

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दवाओ का दुरुप्योग रोकने के लिये prescription मे लिखी गयी दवाओ को काट दिया गया है /

मैने हमेशा बताया  है कि ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक पर आधारित इलाज करने से सभी तरह की बीमारिया अवश्य ठीक होती है चाहे वे कैसी भी हो और उनका कोई भी नाम क्यो न देद इया गया और चाहे उनका नाम कितना भी बड़ा हो और बीमारी का नाम सुनने मे चाहे कितनी भी भयानक लगती हो , अगर आयुर्वेद की नवीन तकनीक पर आधारित इलाज करते है तो अवश्य आराम मिलती है रोग ठीक होते है और आरोग्य प्राप्त होता है /

आयुर्वेद के हिसाब से यह रोग वात कफ अथवा वात पित्त अथवा कफ पित्त दो दोष अथवा वत पित्त कफ तीनो दोषो के साम्मिलित के प्रभाव से होता है / इस महिला को जन्म समय की प्रकृति का डाटा मे “कफ” दोष कम निकला है / इस महिला का जान्च के समय भी कफ दोष कम निकला है / अत: प्रधानता “कफ दोष” की मौजूदगी रही है  जो इसके जन्म समय से लेकर व्याधि के समय तक एक जैसी ही  intensity level  की आयी है /  जब जान्च की गयी तो इसका पित्त normal निकला है जबकि इसके जन्म के समय मे  पित्त सामान्य नही था / इस प्रकार से दोषो का imbalance  बना जिससे पित्त और कफ मिलक्रर विकृति पैदा करते रहे /

सप्त धातुओ का आन्कलन करने पर पता चला कि इसे अस्थि धातु आधिक नप करआयी है / पित्त का चरित्र गत लक्षण और कफ का चरित्र गत लक्षन तथा आस्थि  धातु की विकृति ने स्पष्ट कर दिया कि मरीजा को किस तरह का आयुर्वेदिक उपचार देना चाहिये/ इसके साथ शरीर के सभी सिस्टम्स का आन्कलन करने के बाद पता चला कि इस मरीजा को शरीरिक रूप से क्या कया व्याधिया हो गयी है /

आयुर्वेद चिकित्सा की यही खूबसूरती है कि जब सब तरफ से मरीज की समस्या का अन्कलन करके इलाज करते है तो अव्श्य और sure  आरोग्य मिलता है /

चिकित्सा विग्यान की सभी पधध्यतियो मे LIMITATIONS  अवश्य होते है / आयुर्वेद मे भी लिमीटेशन्स है /

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