आयुर्वेद के महान ग्रन्थ “चरक सम्हिता” मे महर्षि चरक द्वारा सूत्र स्थान मे “सप्त दशो अध्ध्य्याय” मे वर्णित “”शिरसीय अध्ध्याय”” व्याख्या और इसका ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक द्वारा साक्ष्य आधारित प्रस्तुति ; AN EVIDENCE BASED PRESENTATION OF “AYURVEDIC FUNDAMENTALS” MENTIONED IN “”CHARAK SAMAHITA”” BY MAHARSHI CHARAK


आयुर्वेद के महान ग्रन्थ “चरक सम्हिता” मे महर्षि चरक ने सूत्र स्थान मे “सप्त दशो अध्ध्य्याय” मे शिरसीय अध्ध्याय व्याख्या की है /

सूत्र / श्लोक ४० और ४१ मे सन्निपात दोष के कितने combinations बन सकते है इसका वर्णन किया गया है /

आयुर्वेद की आधुनिक तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के द्वारा महर्षि चरक द्वारा बताये गये इन combinations का STATUS QUANTIFY करने का प्रयास किया गया है /

यह एक मरीज का रिकार्ड है जिसे PACE MAKER लगा हुआ है और इसका कई बार रीढ की हड्डी का SPINAL CORD operation किया जा चुका है / जिस रीध की हड्डी की तकलीफ को आराम दिलाने के लिये आपरेशन किये गये , मरीज की वह तकलीफ तो ठीक नही हुयी उलटे कमर से नीचे का हिस्सा सुन्न हो गया / मरीज दो मिनट से अधिक चल नही सकता / मरीज सरकारी कर्मचारी है / अपने काम के लिये उसे रिक्शे से आना जाना पड़्ता है / इसने बहुत इलाज कराया है और पन्चकर्म का भी इलाज कराया लेकिन इसे कोई आराम नही मिला /

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इस मरीज का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और अन्य परीक्षणो से इसकी बीमारी का सटीक निदान किया गया और इसे बाज़ार से उपयोग करने के लिये आयुर्वेदिक दवाओ का prescription दिया गया /

आप सभी सुधी पाठक गण हमारे रिसर्च सेन्टर द्वारा आयुर्वेद आधार भूत सिध्धान्त AYURVEDIC BASIC FUNDAMENTALS के status quantify किये गये है / हमार रिसर्च सन्स्थान  द्वारा किये गये आयुर्वेद के इस कार्य का अवलोकन करे /

हमारे विचार से आयुर्वेद की इस सुपर हाई तकनीक द्वारा प्राप्त डाटा से रोगी की प्रभाव कारी चिकित्सा के लिये रोग निदान करके औषधियो का चयन बहुत सटीक साबित होता है , क्योन्कि कई तरह के intensity level presence का आन्कड़ा मिल जाने से चिकित्सा के कार्य मे बहुत सरलता होती है और रोगी के management set-up  करने का फायदा होता है जिससे यह निर्धारित कर सकते है कि मरीज को किस तरह की औषधियां और management की जरूरत है /

आयुर्वेद की इस आधुनिक तकनीक द्वारा हम बहुत गर्व के साथ कह सकते है कि हमारे आयुर्वेद के ग्रन्थों मे हमारे देश के महर्षियो ने जो कुछ भी लिखा है वह सर्वथा सत्य है और  इस सत्य और तथ्य  को विग्यान की कसौटी पर रखक्रर सिध्ध भी कर सकते है /

हमारा सन्स्थान आयुर्वेद के उन और गूढ बातो को साक्ष्य आधारित अमली जामा पहनाने के लिये प्रतिबध्द्ध है जो हमारे आयुर्वेद के ग्रन्थो मे दिये गये है /

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एक टिप्पणी

  1. in dosha description,classical references should be told with ur views.allopathic interpretation can be included to open way for more research.

    ………..ddbbreply………..Arun arya ji, you have raised an intelligent question to me for which I appreciate you.

    First of all I must mention here that we are discussing and analyzing a disease condition in view of solely base on AYURVEDA AND AYURVEDA FUNDAMENTALS, comparatively LEUCODERMA / VITILIGO which is mentioned in MODERN WESTERN MEDICINE to be an INCURABLE DISEASE CONDITION, as it is narrated in details in the Text books of medicine. In fact if you go through the disease description in the finest books of the medicine, you will find a very little description, while in AYURVEDA there is much more in detail about this condition.

    My role is here to analyse the case in view of the [first] to consider the disease condition in toto with the evidence base obtained by the ETG AyurvedaScan technology data in a wide sense and [second] to evaluate the data as much as it is analysed by the data sheet and [third] to come at the conclusion with the four dimentional diagnosis of the disease condition and [fourth] to set and match the appropriate remedies for treating purposes.

    The whole exercise is done with the details as possible as I can. But it is very difficult to percieve the disease condition and to concieve the picture of treatment in wide sense.

    I think I have given you a very simple reply. I will suggest you to go for the analysis of the case in your way and tell me about your experiences.

    I again thank you for your interest in this regard.

    I will request you, please write your comments as you always do. I appreciate your comments.

    Thank you and I remain.

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