CERVICAL SPONDYLITIS ; AYURVEDA CURES AND ROOT OUTS DISEASE CONDITION ; सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस ; आयुर्वेद चिकित्सा से सम्पूर्ण रोग मुक्ति


सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस CERVICAL SPONDYLITIS  यह रोग या बीमारी गरदन की रीढ की सात गुरियो या सात अलग अलग रीढ की हड्डियो के हिस्से और इन हद्दियों के  जोड़ो के बीच पैदा होने वाली कार्य विकृति या विकृति के कारण पैदा वात-दोष अथवा inflammation के कारण “मान्स्पेशियो और इसके सहारे जाने वाली नसो और नाडियों और लीगामेन्ट्स और टेन्डन्न्स ” मे सूजन आने के कारण relaxion and contraction की कार्य क्षमता मे कमी आने यानी इन हिस्सो का कड़ा होना और ्सामान्य मुलायम होने की अवस्था का कठोर होने की अवस्था की ओर जाने और इस बदलाव के होने के कारण से पैदा दबाव की एवज से यह बीमारी पैदा होती है /

नीचे माडल के द्वारा दर्शाया गया है कि रीढ की हड्डी के सर्वाइकल भाग  की सात गुरिया किस तरह से एक दूसरे से जुड़ी होती है और गर्दन को घुमाने मे मदद करती हैं /

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पहले कहा जाता था कि यह रोग ४० साल और इससे अधिक की उम्र के लोगो को होता है लेकिन अब हाल यह है कि आधुनिक समय की जीवन शैली के जीने के आदी हो चुके सभी उम्र के लोग इस बीमारी से प्रभावित होने लगे है / चाहे बच्चे हो या अधिक उम्र के किशोर  अथवा जवान या बूढे लोग, सभी के सभी इस बीमारी की चपेट मे आने लगे है / महिलाये और पुरुष दोनो ही ब्रराबर बराबर इस बीमारी की चपेट मे आ चुके है /

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सर्वाइकल स्प्पान्डिलाइसिस रोग मे बहुत तरह के लक्षण मिलते है / यह बहुत विचित्र तरह की बीमारी है जिसके कारण चिकित्सको को वास्तविक रोग निदान करने मे बहुत तरह का भ्रम अथवा गलत diagnosis  होने का खतरा बना रहता है / गलत निदान होने से यह समझना बहुत मुश्किल होता है कि डाक्टर बजाय सर्वाइकल स्पान्शिलाइटिस की तकलीफ के किसी दूसरी बीमारी का इलाज करना   शुरू कर देते है / 

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लिहाजा मरीज की हालत अच्छी होने के बजाय और अधिक खराब होने लगती है / यह तो एक बात हुयी द्सरा सबसे खराब असर यह होता है कि दवाओ का कुप्रभाव भी शरीर मे पड़्ने लगता है और इसके कारण सर्वाइकल की तकलीफ होना तो दूर इससे भी बड़ी बीमारिया मरीज के लिये पैदा हो जाती है /

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जिनका इलाज इसी बीमारी के साथ साथ चलने लगता है / फिर तीसरी बीमारी पैदा हो जाती है और इसका भी इलाज चलने लगता है और यह सिल्सिला कहां तक चलता है यह कोई नही जान्ता /

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नीचे के माडल मे सर्वाइकल हिस्से को देखिये कि किस प्रकार से रीढ की हड्डी का यह हिस्सा लीगामेन्ट्स , टेन्डन्स, मान्स्पेशियों से जुड़ता है और किस तरह से गरदन को सीधा टिकाये रखता है / अगर यह सब articulation  न हों तो किस तरह गरदन टिक सकती है यह सोचने का विषय है /

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नीचे के चित्र मे कौन कौन सी गरदन की मान्श्पेशिया कितनी लम्बाई की होकर और सिर से सीने और पेट तक फैलती जाती है , यह दर्शाया गया है / वास्तव मे तब सर्वाइकल की तकलीफ होती है तो शरीर की बहुत सी मान्श्पेशियां affected  हो जाती है /

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इस तकलीफ के बहुत विचित्र प्रकार के लक्षण देखने मे आते है जिन्हे निदान ग्यान के लिये समझना बहुत आवश्यक होता है / नीचे यही सब बताने का प्रयास किया गया है कि किस प्रकार सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस के कारण क्या क्या दिक्कते सामने आती है /

1- बहुत से लोग सिर दर्द की समस्या से जूझा करते है / कितनी ही दवा और इलाज  कराते रहते है लेकिन सिर का दर्द जाने का नाम नही लेता है / निदान करने वाले चिकित्सक इसका नाम  MIGRAIN  / CLUSTER HEADACHE / NEURALGIC HEADACHE / NEURALGIA  आदि आदि नाम बोधन से रोग बताते है /

2-  बहुत से रोगी सिर घूमने और चक्कर आने की शिकायत किया करते है / ऐसे चक्कर लेटने पर अथवा लेटकर ऊठने पर अथवा चारपायी या बिस्तर पर करवट बदलने या सिर मोडने पर अथवा गरदन घुमाने अथवा नीचे झुककर काम करने पर अचानक आ जाते है , जिसकी कोई सम्भवना नही होती है / अचानक इस तरह से चक्कर आ जाने से बहुत से रोगी घबरा जाते है कि उनको यह क्या हो गया है ?

३= बहुत से रोगियों को हाथ की उन्गलियों मे झन्झनाहट होने लगती है जैसे कोई कीड़ा रेन्ग रहा हो या बहुत सी चीटीयां चल रही हों / यह सुन्नपन या झन्झनाहट दोनो हाथो मे बहुत से मरीजो को होने लगती है जिससे वह कोई काम नही कर पाते है /

४- बहुत से रोगी कन्धे की मान्श्पेशियो और कन्धे का दर्द बताया करते है / कोई कोई पीठ का दर्द बताते है / निदान्ग्य इसे peri arthritis / shoulder pain / muscu;lar pain बताते है /

५- बहुत से लोगो को सीने के ऊपरी हिस्से मे दर्द होने लगता है जिसे वह हृदय रोग समझने लगते है / हृदय रोग और सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस के दर्द मे फर्क होता है / सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस का दर्द गर्दन के पीछे की मान्श्पेशियो से होकर सीने के ऊपरी हिस्से की ओर आता है / यह दर्द गर्दन घुमाने या कन्धा घुमाने और सीने की मान्श्पेशियो को कस कर दबाने से शान्त हो जाता है / लेकिन हृदय के दर्द मे ऐसा नही होता है / बल्कि दिल का दर्द बीच सीने से उठता है और मान्श्पेशियो को दबाने से नही कम होता है और हिलने दुलने से बढता है / इसलिये diagnosis  मे बहुत अहतियात बरतने की जरूरत होती है ताकि किसी किस्म का कोई सन्शय न रहे / ऐसे रोगियो का ECG और TMTECG सामान्य निकलते है और कोई विकृति नही पायी जाती है /  ECG CONTINUOUS MONITORING सिस्टम द्वारा लम्बे समय यानी चार या पान्च घन्टे बाद तक लगातार चेक करने पर किसी प्रकार की HEART  / CARDIAC विकृति नही मिली  है /

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५-बहुत से रोगियो को गरदन के चारो ओर बहुत दर्द होता है जो गरदन को दाये अथवा बाये घुमाने या ऊपर नीचे करने से बहुत तेजी से बढता है और स्थिर अवस्था मे रखने पर दर्द ठीक रहता है / पन्खे की हवा मे अथवा तेज हवा के झोन्के से यह दर्द और बढता है / सिर ढक लेने पर ऐसा दर्द कम हो जाता है /

६- बहुत से रोगियो को दर्द नही होता यानी उनकी तकलीफ PAINLESS  होती है लेकिन ऐसे मरीजो को  दर्द की बजाय NUMBNESS यानी सन्ग्या शून्यता या सन्ग्या हीनता का अनुभव हो्ता है / यानी उनको पता ही नही चलता कि उनके गर्दन है भी या नही / मरीज को चुटकी काटने का पता भी नही चलता और न ही किसी नुकीली चीज को चुभोने पर भी पता नही चलता कि उनको कोई नुकीली चीज चुभाई जा रही है /

७- बहुत से रोगियो को ऐसा अहसास होता है कि उनके सिर पर कोई बर्फ से भरी हुयी टॊपी रख दी गयी है और उनको इतनी ठन्डक लगती है कि उनको गरम बनाये रखने के लिये सिर पर साफा या मोटा कपड़ा ढकने की जरूरत पड़ जाती है /

८- यह भी देखने मे आया है कि जिन मरीजो को CERVICALSPONDYLITIS की तकलीफ होती है उनको ठन्डक बहुत लगती है / ऐसे मरीजो को ठन्डा पानी छूने से भी गरदन मे दर्द होने लगता है / अगर स्नान करने का पानी ठन्डा है तो जैसे ही स्नान ऐसे पानी से करते है तो उनकी गर्दन अचानक अकड़ जाती है और दर्द होने लगता है /

९- कुछ ऐसे भी मरीज दिखाई दिये है जिनको दर्द के साथ ऐसा महसूस होता है कि उनको सान्स लेने मे दम घुट रहा है यानी उनको लगता है कि उनको शायद Oxygen  कम मिल रही है लेकिन वास्तविकता मे ऐसा होता नही है /  PULS OXYMETER  से लम्बे समय तक जान्च करने के बाद ऐसे लोगो का आक्सीजन परसेन्ट ९९% और उनकी नाडी की चाल सामान्य पायी गयी /  ऐसे रोगियो के फेफड़ो की जान्च मशीनो द्वारा करने के बाद  फेफडे की कार्य क्षमता सामान्य और मजबूत पायी गयी है /

१०- बहुत से मरीजो को पैदल चलने पर कन्धे और सीने की मान्श पेशियो मे दर्द होने लगता है /

११- बहुत से मरीजो को गर्दन इधर उधर घुमाने से  कट कट की अवाज आती है , कोई कोई चरचराहट की आवाज जैसी बताता है, कोई कोई बताता है जैसे मिट्टी के दो बरतन आपस मे रगड़्ते है वैसी हीआवाज गरदन इधर उधर घुमाने मे होती है /

१२- बहुत से रोगियो को चेहरे की मान्श पेशियो मे दर्द अथवा लकवा हो जाने जैसे लक्षण होते है / उनको लगता है जैसे चूहे के पन्जे उनके FACE   मे चुभ रहे हैं / 

कहने का मतलब यह कि CERVICAL SPONDYLITIS  की तकलीफ मे बहुत तरह के sensations  मरीज को महसूस होते है और इस तरह के sensations  होने से diagnosis  मे भी भ्रम पैदा होने की समभावना हमेशा बनी रहती है /

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X-RAY  द्वारा इस बीमारी की सटीक पहचान हो जाती है लेकिन MRI या CT SCAN द्वारा भी इसको ज्यादा अच्छी तरह से निदान करते है

ETG AYURVEDASCAN  आयुर्वेद के परीक्षण द्वारा भी सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस की स्तिथि का निदान किया जाता है /

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आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा विग्यान मे इस बीमारी का बहुत सटीक और अचूक इलाज है जो कठिन से कठिन स्तिथि को आरोग्य देने मे सक्षम है / आयुर्वेद मे इसे वात रोगो की श्रेणी मे रखते है और इसका सन्सकृत नाम “मन्या स्तम्भ” है /

आयुर्वेद की चिकित्सा करने मे cervical spondylitis  बहुत सुगम और आसान तरीके से आरोग्य होती है और एक बार ठीक होने पर यह बार बार कम होती है / आयुर्वेद चिकित्सा करने से धीरे धीरे दर्द और चक्कर आने की शिकायत का permanent  इलाज होता है /

आयुर्वेद चिकित्सा मे हजारो की सन्ख्या मे बहुत उच्च कोटि के औषधियो की सन्ख्या मौजूद है जो cervical spondylitis  जैसी बीमारियो का इलाज करने मे मुफीद साबित हुयी है / इनमे गूगल घटित औषधिया और रस रसायन औषधिया चमत्कारिक प्रभाव डालती है / क्वाथ और अन्य अनुपान का औषधियो के साथ उपयोग करने से तो मूल औषधियो की ताकत और ज्यादा होने से बहुत शीघ्रता से लाभ होता है / 

सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस रोग अगर ज्यादा पुराना नही है तो आयुर्वेद चिकित्सा द्वारा १५ से २० दिन मे ठीक हो जाता है / अधिक पुराना और बहुत क्रानिक हो तो ४० दिन औषधि प्रयोग से ठीक हो जाता है /

यह बीमारी मॊटर वाहन और साइकिल चलाने वालो को बहुत होती है / यह उन लोगो को भी होती है जो  ज्यादा देर तक् कम्प्य़ूटर पर बैठकर काम करते है / ऐसे लोगो को इस रोग से बचने के लिये गर्दन के चारो ओर लम्बी तौलिया या सूती अन्गौछा या सूती धोती लपेट लेना चाहिये और तब काम करना चाहिये /

ठ्न्डे पानी से नहाने से यह बीमारी बहुत जोर पकड़ती है इसलिये ऐसे पानी से स्नान करे जो न अधिक गरम हो और न अधिक ठन्डा / जिन्हे AIR CONDITIONER  मे सोने कीआदत है वे गर्दन मे और सिर मे सूती कपड़ा लपॆत ले और तब सोयें / यह बीमारी हर तरह की ठन्डक से बढती है इसलिये ठन्दक से जितना भी बचने का उपाय करेन्गे उतना ही ठीक होगा / 

इस बीमारी का HOMOEOPATHIC MEDICAL SYSTEM   मे बहुत सटीक इलाज है / सर्वाइकल स्पान्डिलाइसिस के इलाज मे अगर होम्योपैथिक चिकित्सा के साथ साथ आयुर्वेद की भी दवाओ का सेवन करे तो यह बीमारी बहुत तेजी से ठीक होती है और आरोग्य की speed  देखकर बहुत ताज्जुब होता है /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन  और इसके सप्लीमेन्टरी परीक्षण कराने के बाद CERVICAL SPONDYLITIS  का इलाज करने से यह बीमारी शत प्रतिशत ठीक होती है चाहे उसका कैसा भी स्वरूप हो और कैसी भी तकलीफ हो / 

इस बीमारी मे पन्चकर्म भी करते है लेकिन यह मरीज की अवस्था और बीमारी की गहरायी पर निर्भर करता है कि मरीज को पन्चकर्म की जरूरत है भी या नही /

योग के कुछ आसन इस बीमारी के लिये बहुत मुफीद है जिन्हे करने से बहुत आराम मिलती है /

बहुत से लोग इस बीमारी मे गर्दन मे लपॆटने वाला कपडे का hard अथवा soft पट्टा बान्धते है / इसके बारे मे जिन लोगो ने पट्टा बान्धा है और इस्तेमाल किया है उनका कहना है कि इससे गरदन कम्जोर होती है और सीने की पसलियो मे दर्द होने लगता है / पट्टा लगाने से कुछ लिगो का कहना है कि यह सान्स लेने मे दिक्कत करता है / वही कुछ लोग इसे सही मानते है कि पट्टा उस समय लगाना चाहिये जब वह सवारी या यात्रा बस अथवा ट्रेन से कर रहे हो या कम्प्यूटर पर काम कर रहे हो या उस समय जब गर्दन झुकाने का काम ज्यादा समय तक करना हो / बाकी समय पट्टा नही लगाना चाहिये जब जरूरत हो तब इस्तेमाल करे / वास्तव मे पट्टा लगाने का उद्देश्य यह है कि गरदन के movement  को  inhibit  किया जाये / बहुत से लोग सूती कपड़े का दो अथवा ढाई मीटर लम्बा और एक मीटर चौड़ा कपड़ा गर्दन मे ढीला ढीला लपेट लेते है और अप्ना काम किया करते है / इस तरह से कपड़े का फेटा लगाने से स्पान्डिलाइटिस के रोगी बताते है कि गरदन मे एक तरह की गरमाहट होकर गरदन की सिकाई होती है और सम्बन्धित मान्स पेशियो मे मुलायमता आती है जिससे मान्स पेशियां relax  होकर दर्द कम होता है और  अकड़न ठीक होती है /

मेरे सम्पर्क मे कुछ ऐसे लोग भी आये जिन्होने इस बीमारी मे आपरेशन भी कराया है लेकिन जितने लोगो ने आपरेशन कराया वे सब के सब विकलान्ग हो चुके है और बिस्तरे पर लेट कर अपना जीवन गुजार रहे है अथवा किसी काम करने के काबिल भी नही है /  ये आपरेशन कराकर विकलान्ग हो चुके लोग मेरे पास इलाज के लिये आये थे / जिन्हे मैने इलाज करने से इन्कार कर दिया क्योन्कि surgicl interventions  के बाद कुदरती गरदन की बनावट समाप्त हो जाती है और ऐसे मे healing  बहुत मुश्किल हो जाती है /

कुल मिलाकर यही कहून्गा कि अगर आयुर्वेद और होम्योपैथी तथा पचकर्म और योग के आसन सम्मिलित करके CERVICAL SPONDYLITIS  की चिकित्सा करते है तो यह बीमारी अवश्य ठीक होती है और रोगी सामान्य जीवन ठीक उसी तरह से जी सकता है जैसा वह बीमार होने से पहले जी रहा था / 

3 टिप्पणियाँ

  1. vaata dosha can not be translated as inflammation.cardinal signs of inflammation are calor,dolor,rubor and tumor.vaata dosh has only dolor.

    ………..reply………..in this context, Vata dosha is not defined , vata-karya-vikrati is mentioned. when vata function is becoming abnormal from normal status, this is primary pathophysiological condition and known as inflammatory beginnign condition.

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