दिन: अगस्त 31, 2014

OBSTRUCTIVE COMPULSIVE DISORDER O.C.D. CASE OF A 34 YEARS MALE EXAMINED BY E.T.G. AYURVEDA TREADMACHINE EXAMINATION AND OTHER TEST’s MENTAL AND PHYSICAL AND AYURVEDA DIAGNOSIS ; मानसिक रोग : आब्स्ट्रक्टिव कम्पल्सरी डिसार्डर रोगी का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन ट्रीड मशीन परीक्षण और दूसरे टेस्ट द्वारा मूल रोग निदान


MENTAL DISORDERS  मानसिक रोग हजारो तरह के होते है और इनकी ठीक ठीक गिनती करना बहुत मुश्किल काम है / फिर भी चिकित्सा कार्य के लिये आये हुये रोगियो का वर्गीकरण करना जरूरी होता है कि रोगी किस तरह की मानसिक बीमारी से ग्रसित है /

मानसिक बीमारियो को दो प्रकार की श्रेणी मे मूल रूप से बाटते है / 

[१] मन की विकृति से शरीरिक व्याधियो का होना , इसे PSYCHO-SOMATIC DISORDERS  कहते है

[२] तन की विकृति से मन की व्याधियो का पैदा होना , इसे SOMATO=PSYCHIC DISORDERS  कहते है

बहरहाल इस वर्गीकरण से केवल यह एक बात पता चलती है कि रोगी को “मानसिक व्याधि” है या “मानसिक रोग” है / यह अवश्य पता चल जाता है /

मानसिक रोग-निदान के लिये यह जरूरी होता है कि मरीज की तकलीफ का वर्गीकरण किया जाये / यह पहली आवश्यकता चिकित्सक के लिये होना बहुत जरूरी है /

इसके लिये एक लम्बी प्रक्रिया है जिसमे मरीज की तकलीफ का इतिहास जानना बहुत जरूरी होता है / उसे कब से मानसिक तकलीफ है और किस तरह से यह पैदा हुयी, इसका CHRONOLOGICAL SEQUENCE  जानना इसके अलावा पारिवारिक रोगो का इतिहास ग्यान करना इलाज करने वाले  चिकित्सक के लिये बहुत आवश्यक होता है /

आयुर्वेद मे मानसिक रोगो का निदान और उसकी पहचान क्रने का तरीका आदि काल से जैसा चला आ रहा है , लगभग उसी तरह का है और आज भी आयुर्वेद के चिकित्सक उसी लाइन पर मान्सिक रोगियो का इलाज कर  रहे है /

नवीन आविष्कार की गयी आयुर्वेद की हाई-लेवल टेक्नोलाजी की बदौलत सारे शरीर का परीक्षण करके अब यह पूर्ण रूप से जान्चा जा सकता है कि मरीज को किस तरह की तकलीफ  मानसिक और शारीरिक रूप मे पैदा हो रही है /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की एक अन्य निदान करने की विधि  TREAD MACHINE पर दौड़ाकर जब शरीर की गतिविधिया excited level  पर आती है तब यह पता चलता है कि शरीर के इस तरह की अवस्था मे MENTAL  और PHYSICAL   किस तरह के बदलाव आते है जो सामान्य अवस्था मे नही पाये जाते है /  आयुर्वेद की चिकित्सा मे इस तरह का बदलाव होना और ऐसे बदलाव का जानना बहुत जरूरी होता है , तभी चिकित्सा कार्य मे सफलता प्राप्त होती है /

नीचे  TREAD MACHINE  द्वारा जिस OBSTRUCTIVE COMPULSIVE DISORDER  के मरीज का टेस्ट किया गया है  उसका क्या रिजल्ट मिला है यह रिपोर्ट मे बताया गया है /

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नीचे की डाटा शीट मे  NERVOUS SYSTEM   का डाटा दिया गया है / इसमे दिमाग के पान्च हिस्सो का patho-physiological  स्तिथि का आन्कलन किया गया है /

मरीज का temporal lobe का हिस्सा सामान्य से अधिक है वही दूसरी तरफ  frontal brain हिस्से का आन्कलन कम की ओर है /

आटोनामिक सिस्टम का डाटा सामान्य से अधिक है और उत्तेजित अवस्था मे है / यही हाल pareital brain  के हिस्से का है /

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मरीज का रक्त का टेस्ट करने पर सन्निपातिक अवस्था यानी तीनो दोषो का सम्मिलित आन्कड़ा मिला है यानी इस मरीज को जिस तरह की व्याधि है वह त्रिदोषज है /

इस मरीज का “कफ दोष” सामान्य से बहुत बहुत ज्यादा है /

मरीज का “वात दोष” सामान्य से  थोड़ा अधिक है /

मरीज का “पित्त दोष” सामान्य से बहुत अधिक है /

इस तरह से दोषो का निदान करने से मरीज की चिकित्सा मे बहुत सटीक remedial approach बनती है और यह decide  करने का मौका मिलता है कि इसे किस intenstity  level  की दवाओ की जरूरत है /

आयुर्वेद विकृति के हिसाब से मरीज की धातुओ का आन्कलन किया गया है / अधिकतर धातुओ मे विषमता मिली है / मरीज को जब इन सभी विषमताओ के बारे मे बताया गया तो वह आश्चर्य चकित हो गया कि इस तरह से detail  मे किसी भी डाक्टर ने उसे बताया ही नही कि उसे ऐसी भी तकलीफे है /

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नीचे की डाटा शीट मे आयुर्वेद की रक्त-रसायनिक पदार्थ की जान्च का आन्कड़ा दिया गया है जो मरीज के रक्त की जान्च करके प्राप्त किया गया है / इस जान्च मे नार्मल अथवा सामान्य लेवल का स्तर सुविधा के हिसाब से conventional measurement  का न लेकर नयी आविष्कार की गयी आयुष-आयुर्वेद हीमोमीटर  आधारित तकनीक से प्राप्त आन्कड़ो के हिसाब से normal level adjust  किये गये है और रक्त मे पाये जाने वाले तत्वो का सामन्य मानक तय किया गया है  / अभी इसमे भविष्य मे बदलाव किये जाने की अपेक्षा है /

ये मानक और मरीजो के रक्त से प्राप्त की गयी values  को इस लिये इलाज मे महत्व्पूर्ण भूमिका होती है जिससे यह पता चलता है कि रक्त के नदर किस तरह की विकृति पनप रही है और इसे किस तरह से दूर करने की चेष्टा की जानी चाहिये /

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 उ्पर दर्शित रिपोर्ट शीट मे एक बात गौर करने वाली है कि इसमे सामान्य से अधिक बताये गये डाटा value मरीज के शरीर मे सामान्य से कम है और सामान्य से कम value  का मतलब है सामान्य से अधिक /  यानी NORMAL VALUE   से कम value  होने का मतलब है कि रक्त के अन्दर पाये गये रसायन अधिक और ज्यादा है और NORMAL VALUE  से   अधिक value  होने का मतलब है कि रक्त के अन्दर पाये जाने वाले रसायन कम स्तर के पाये गये है /

उदाहरण के लिये इस मरीज के रक्त मे सल्फॆट 95 mg/ahmv [ahmv का मतलब है  Ayurveda Heamo Meter Value] आयी है / सल्फेट की सामान्य वैल्यू  15  से 20 mg/ahmv निर्धारित की गयी है , जिसका अर्थ यह है कि 95  mg/ahmv रोगी का सल्फॆट का लेवल यह बताता है ्कि रोगी का सल्फेट का metabolism ठीक नही है और सामान्य से कम स्तर का है / 

इसी प्रकार Phosphate  का level  लेते है / फास्फेट का लेवल 60 से  80  mg/ahmv  निर्धारित किया गया है / मरीज का फास्फेट का लेवल  57 Gramm/ahmv   आया है यानी यह सामान्य से कम है / इसका interpretation  यह है कि फास्पेट का लेवल मरीज के रक्त मे बढा हुआ है / 

दिये गये उदाहरण से पाठक समझ गये होन्गे कि इस नये आविष्कार किये गये आयुर्वेद हीमोमीटर की values वर्तमान मे क्यो और किसलिये स्थापित अन्तर रास्ट्रीय माप दन्डो से क्यो differ करती है / दरअसल यह सुविधा के लिये किया गया है और इसके लिये हमारी तरफ से WARNING   भी जारी की जाती है कि यह डाटा केवक चिकित्सकीय सहायता के लिये है और इसे फाईनल नही समझना चाहिये /

जैसे इस मरीज का UREA level सामान्य से अधिक है तो इसका मतलब यह हुआ कि जो भी भोजन किया जा रहा है वह ठीक से पाचन नही हो रहा है और अपचन वाला खाद्य मल के साथ बाहर निकल रहा है और इसी पाचन की कमजोरी को यह लेवल दर्शाता है /

मेरा मानना है कि इस तरह से प्राप्त रिपोट से आयुर्वेद की दवाओ का चुनाव और रोग निदान मे बहुत सफलता मिलती है /

मानसिक रोग के साथ इस रोगी को अन्य कई तरह की बिमारिया भी है जिनका निदान ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके तत्सम्बन्धित परीक्षणो से करने के बाद आयुर्वेद की दवाये खाने के लिये prescribe  की गयी है /

मानसिक रोग MENTAL DISORDERS  चाहे जो भी हो और चाहे किस तरह के हो उनका कोई भी नाम दिया गया हो , उनकी कैसी भी स्तिथि हो आयुर्वेद की इस नयी खोज की गयी तकनीक से अवश्य ही लाभान्वित होते है और मानसिक रोग , चाहे कोई भी हो , अवश्य ठीक होते है /

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