महीना: सितम्बर 2014

GHOST AND EVIL FORCES AND SHAITAN AND BITCH AFFECTED PERSON’S E.T.G. AYURVEDASCAN BASED AYURVEDA-AYUSH TREATMENT ;भूत और प्रेत और शैतान और चुडैल से प्रभावित रोगियो का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज


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A CASE OF ICHCHTHYOSIS ; A TYPICAL SKIN DISORDER ; E.T.G AYURVEDASCAN TEST EVALUATION ; “इक्थियासिस” जैसे लाइलाज चर्म रोग का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित आन्कलन


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चर्म रोग ICHCHTHYOSIS  या इख्तोयासिस एक तरह की ऐसी तकलीफ है जो त्वचा के टिश्यूज से जुड़ी हुयी बीमारी है / इस बीमारी मे त्वचा का रन्ग काला पड़ जाता है और त्वचा मोटी हो जाती है / इसके अलावा त्वचा का रन्ग काला और वर्ण cracks यानी फटी हुयी और आकार मछली की खाल जैसा हो जाता है /

जिस मरीज का नीचे दिया गया चित्र  है उसे लगभग चार साल से यह तकलीफ रही है / अन्ग्रेजी और देशी और होम्योपैथी का इलाज कराने के बाद इसे आराम नही मिला / हमारे यहा से इलाज करा चुके एक मरीज द्वारा हमारे सन्स्थान मे इलाज कराने के लिये प्रोत्साहित किये जाने के बाद यह मरीज इलाज के लिये हमारे यहां आया है /

मरीज के दोनो पैरो और शरीर के लगभग सभी हिस्सो मे इसी तरह के scabs  मौजूद है /.OLYMPUS DIGITAL CAMERA

नीचे दिये गये चित्र मे यह चर्म रोग अधिक स्पष्टता के साथ चित्रित है इसे अवलोकन करें /

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नीचे की दी गयी रिपोर्ट कम्प्य़ूटर दवारा परीक्षण करने के बाद तैयार की गयी है जिसका विवरण और निदान का अवलोकन करें /

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नीचे दी गयी रिपोट TREAD MACHINE द्वारा exercise  कराकर और उसके बाद तैयार की गयी है /

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ऊपर की दोनो रिपोत का वलोकन करे और देखिये कि दोनो मे किस तरह का पेरिवर्तन मिला है / यही परिवरतन PIN POINT Diagnosis  और Ayurvedic medicine selection  मे और  Ayurvedic management  मे बहुत काम आता है /

इसी तरह नीचे के डाटा शीट मे देखिये कि Visceras  और शरीर के दूसरे अन्गो मे किस तरह के शाटा मिले है /………………

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ऊपर की दोनो रिपोर्ट मे अन्तर देखिये कि किस तरह से HORIZONTAL POSITION  मे रिकार्ड किये गये ETG AYURVEDASCAN  TRACES  का  result और TREAD MACHINE ETG AYURVEDASCAN   का traces record  और इसकी analysis  के बाद किस तरह की picture  मरीज की तकलीफ की बनी है /

निष्कर्ष स्वरूप यह उभर कर सामने आया कि इस मरीज को पैन्क्रियाज और छोटी आन्त की वजह से सारे शरीर की परेशानी पैदा हो रही है /

आयुर्वेद के हिसाब से निदान करने  मे यद्यपि आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्त और अन्य बातो का ध्यान रखना होता है जो प्राप्त डाटा के ऊपर आधारित होता है/

यहां केवल तुलनात्मक परिवर्तन बताने के लिये उक्त डाटा का प्रस्तुति की गयी है /

LOHASAV ; EXCELLENT HAEMATINIC AYURVEDA REMEDY ; CURES ALL NATURE OF “ANEAMIA” AND ANEAMIA RELATED DISORDERS ; खून की कमी और रक्ताल्पता के अलावा शरीरिक कम्जोरी को दूर करने के लिये आयुर्वेद की औषधि “लोहासव”


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आयुर्वेद मे खून बढाने वाली दवाओ अथवा खून की कमी को दूर करने वाली औषधियो अथवा रक्त के विकार से समबन्धित लगभग सभी बीमारियो के लिये लाभकारी दवाओ का बृहत सन्कलन है /

प्राचीन काल मे आयुर्वेद के चिकित्सा अभ्यासी महर्षियो ने यह ग्यान प्राप्त कर लिया था कि लोहा यानी IRON के अन्दर रक्त बढाने की और रक्ताल्पता को दूर करने की अदभुत क्षमता है, इसके अलावा यह रक्त के अन्दर के composition  को सही कुदरती अनुपात मे बनाये रखने की कुदरती ताकत रखता है, वे चाहे कोई भी हो और कैसे भी हो यानी POLYMORPHS & LYMPHOCYTES & BASOPHILS & MONOCYTES & EOSINIPHILS  की कुदरती बनावट और अनुपात को बनाये रखने की क्षमता रखता है और इसके अलावा BLOOD SERUM   के अन्दर पाये जाने वाले PLATELETS  और दूसरे अन्य कम्पोजीशन को भी कुदरती एतर पर बनाये रखने की क्षमता रखता है /

लोहासव बनाने मे जिन HERBS  और MINERALS और METALS का उपयोग करते है वे multidimentional effects  देने वाले होते है / इसे बनाने मे जिस तरह की प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है वह अति वैग्यानिक स्तर  की है /

औषधियो के बनाने की प्रक्रिया मे उत्तरोत्तर सुधार होने और विधियो के विकास होने के साथ साथ लोहासव एक बहुत महत्व्पूर्ण औषधि बन जाती है /

लोहा यानी IRON  इसका मुख्य  द्रव्य है / लोहासव बनाने के लिये लोहा को दो विधियो के द्वारा औषधीय आत्मसात कराने के लिये उपयोग किया जाता है

पहली विधि मे लोहे के बुराद्वे को हरड़ के काढे के साथ मिलाया जाता है और इसे कुछ दिन तक रकह दिया जाता है ताकि सारा लोहा गलकर काढे मे मिल जाये /  इस लोहा गलाकर मिलाये गये काढे मे बाद मे अन्साय जड़ी बूटी मिलाकर सन्थधान के लिये ४० से ६० दिन तक रकह्ते है ताकि fermentation बेहतर तरीके हो जाये और मिलायी गयी herbs का extract  अच्छी तरह मिल जाये /

दूसरी विधि मे लोहा भस्म मिलाते है और इसे अन्य herbs  के साथ मिलाकर  FERMENTATION के लिये निर्धारित समय तक जैसा कि शास्त्रो मे बताया गया है उसी अनुसार रख देते है /

ळोहासव बनाने के शास्त्रो मे कई फार्मूले दिये गये है और यह किसी भी विधि से बनाये जांय , यह औषधि निर्धारित रोगो मे अवश्य लाभ करती है /

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इसके फार्मूले मे निम्न प्रकार के घटक द्रव्य होते है ;

लोहे का बुरादा या लोहा भस्म या हरड़ के क्वाथ मे डालकर गलाया हुआ लोहा चूर्ण , सोन्ठ, कालीमिर्च, छोटी पीपल, आवला , हरड़, बहेड़ा, अजवायन, वाय विडन्ग, नागर मोथा, चित्रक मूल, प्र्त्येक  १६ तोला, धाय के फूल १ सेर, शहद, ३ छटान्क एक तोला, गुड़ ५ सेर और जल साढे २५ सेर ८ तोला लेना है /

उपरोक्त सभी  द्रव्यो को लेकर एक लकडी अथवा कान्च अथवा मिट्टी के पात्र मे भरकर और इस पात्र का मुख बन्दकर ऊपर से कई परत मोटे कपडे की ढककर  रख दे और ३० या ४० या ६० दिन तक सन्धान करे / FERMENTATION   की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र को खोलकर  प्राप्त द्रव्य को  छानकर औषधि उपयोगार्थ  शीशियो मे भरकर रख ले /

DOSES ; मात्रा ; १५ से ३० मिली लीटर लोहासव को बराबर मात्रा मे पानी मिलाकर भोजन करने के बाद दोनो समय भोजन करने के तुरन्त बाद पीना होता है /

INDICATIUONS / USES / DISORDERS / USEFUL IN ; लोहासव के गुण और उपयोग ;

लोहासव के अकेले उप्योग से बहुत सी बीमारियो मे लाभ मिलता है /

पान्डु यानी all kinds of Heaptitis and Liver and lever related problems and disorders

गुल्म यानी  fermentation and wind formation and wind pockets in abdomen and intestines

सूजन यानी all kinds of swelling and puffiness and dropsy and inflammatory conditions

अरुचि यानी perverted taste, changed taste, no desire for food, tasetlessness , aversion to food

सन्ग्रहणी यानी Inflammatory condition of bowels and irritable bowel syndromes and colitis and intestinal related problems and disorders

जीर्ण ज्वर यानी Chronic Fever and Hectic Fever and for those fever who are persisting since long time

अग्निमान्द्य यानी poor hunger, hunger weak, weak appetite. poor appetite, poor digestion, weak digestion

दमा यानी अस्थमा यानी asthma, Pulmonary disorders, spasmodic pulmonary problems, Chronic Obstructive Pulmonary disorders C.O.P.D.

कास यानी any kind of Cough and Croup

क्षय यानी Tuberculosis and Emaciation and loosing body weight and flesh

उदर रोग यानी alli kinds of abdominal problems

अर्श यानी Piles and Heamorrhoids of all nature

कुष्ठ यानी all kinds of Skin disorders

कन्डू यानी Itching, scabies, dermatitis, allergy of all kinds

तिल्ली यानी all disorders of SPLEEN and spleen related problems

ह्रद्रोग यानी Diseases of Heart and cardiac anomalies

यकृत-प्लीहा यानी hepato-spleeno disoders in combination

आयुर्वेद के आसव अरिष्ट का निर्माण करना उच्च्कोटि की वैग्यानिक तकनीक है / लोहासव मे लौह के अलावा अन्य द्रव्य मिल जाने से इसकी गुणवत्ता बहुत ही आला दर्जे की बन जाती है /

सभी जान्ते है और इस बात से सहमत है कि लोहा यानी  IRON  शरीर मे खून बढाने का काम करता है / लोहासव मे लोहा होने से यह उद्देश्य पूरा हो जाता है /

लोहासव मे गुड़ का उपयोग करते है / गुड़ एक पौष्टिक खाद्य पदार्थ स्वीकार किया जा चुका है / गुड मे कार्बोहाइड्रेट होने के साथ साथ जरूरी minerals  और  Vitamins पाये गये है जो श्रीर को जरूरत को पूरा करते है /

लोहासव fermentation  की प्रक्रिया से बनाये जाते है / यह सभी जानते है कि fermentation  की प्रक्रिया मे YEAST  का यानी खमीर का पैदा होना और कार्बोहाइड्रेट के साथ प्रक्रिया करके थोडी मात्रा मे ALCOHOL को उतपन्न करता है / इसके साथ इस प्रक्रिया मे विटामिन B Comlplex कुदरती तरीके से पैदा हो जाता है जो पाचन मे सहायता करता है /

Fermentation की प्रक्रिया मे CORBON DI OXIDE  पैदा हो जाती है  जो लोहासव मे समाहित होती है / कार्बन डाइ आक्साइड पेट के अन्दर  पैदा होने वाली गैस के molecules  को सोख लेती है इस तरह से पेट के अन्दर गैस से बनने वाली तकलीफे दूर होती है /

लोहासव का सेवन खाने के बाद करते है और इसमे बराबर पानी मिलाते है , इससे Hydrogen Ion और  Oxygen  के Ion  बढते है जो भोजन को पचाने के लिये पाचन तन्त्र को  पाचन करने और assimilation  करने मे सहयोग देते है /

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भारत सरकार को चाहिये कि आयुर्वेद की औषधि  “लोहासव”  को उन सभी ग्रामीण क्षेत्रो और इलाको मे सस्ती दर पर या मुफ्त  मे उपलब्ध कराना चाहिये जहा इस बात की शिकायते मिलती है कि अमुक क्षेत्र के लोगो के अन्दर खून की कमी पायी गयी है /  लोहासव खून की कमी को दूर करने मे एक सफल औषधि है /

EPILEPSY CURED CASE TREATED SUCCESSFULLY BY AYURVEDA-AYUSH REMEDIES ; मिर्गी के एक रोगी का बयान जो ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित आयुर्वेद का इलाज करा कर ठीक हो चुका है


छत्तीस गढ राज्य  के रहने वाले एक  मिर्गी रोग से पूरी तरह से ठीक हो जाने और पूर्ण आरोग्बय प्राप्त कर लेने वाले मरीज के आरोग्य सन्देश को दूसरे लोगो तक पहुचाने के लिये जब मैने इसका interview वीडियो कैमरे के सामने लेने का प्रयास किया तो यह मरीज किसी तरह से इसके लिये तैयार ही नही हुआ बल्कि वह नराज और अपना रोष प्रकट करने लगा / बहुत समझाने के बाद कि “आपका सन्देश दूसरो तक पहुचने से मिर्गी को लाइलाज समझने वाले भी लाभान्वित होन्गे, यह रोगी बड़ी मुश्किल के साथ वीडियो कैमरे के सामने इस बात पर राजी हुआ कि उससे ज्यादा सवाल न पूछे जांय और आधा मिनट का वह समय देगा ”

रोगी की इस इच्छा पर मैने केवल तीन सवाल उससे किये और यह आपके सामने वीदीयो के द्वारा प्रस्तुत है /

यह एक बहुत बड़ी विडम्बना है कि कठीन और असाध्य और सारे जीवन न ठीक होने वाले रोगो से परेशान मरीजो के आयुर्वेद और आयुष इलाजे से ठीक हो जाने के बाद वे रोगी किसी दूसरे को भी यह नही बताते कि उनको किस डाक्टर और किस सन्सथान के इलाज करने से आराम मिला है या वे कहा का इलाज करा कर ठीक हुये है /

खास करके वे मरीज जो हमारे यहा का इलाज करके ठीक हो चुके है जिनमे सफेद दाग, LEUCODERMA, VITILIGO, मिर्गी, EPILEPSY, मानसिक रोगी, H.I.V., A.I.D.S. आदि आदि असाध्य बीमारियो से ठीक हो चुके है जिनके बारे मे बताया गया था कि ऐसी बीमारियो का कही पर भी कोई इलाज नही है और रोगी कोसारी जिन्दगी रोग से ऐसे ही भोगना पडेगा / ऐसे रोगियो को आराम मिलने या पूरी तरह से ठीक हो जाने के बाद भी ये  रोगी किसी दूसरे को भी नही बताते कि उनकी बीमारी कहां और किस डाक्टर द्वारा ठीक की जा चुकी है /

इस बारे मे मैने बहुत से मरीजो से बात की , अधिकान्श का कहना है कि वे अपनी तरह की बीमारी के मरीज को देखकर उसको बताने से परहेज करते है कि उनकी तकलीफ कहा से ठीक होगी इसके पीछे कई कारण गिनाये जाते है जिनमे एक सबसे बड़ा कारण समझ मे आया कि जिस बीमारी का इलाज कराकर मरीज ठीक होता है वह अपनी बीमारी की बात छिपाकर रखना चहता है और किसी दूसरे के साथ share  नही करना चाहता है और इसे गुप्त रखने मे अपनी भालाई समझता है इसीलिये वह अपनी तकलीफ कहा से ठीक हुयी है इसको disclose  नही करना चाहता है / दूसरा कारण यह है कि अगर उसको रोगी द्वारा भोगी जा चुकी तकलीफ की तरह ही ऐसी ही बीमारी से त्रस्त कोई मरीज दिखाई देता है तो वह उसको चाहता है कि वह वता दे कि उसे कहा इलाज कराना चाहिये लेकिन वह इसलिये नही बताता कि मरीज उससे पूछेगा कि क्या आपने वहा या अपके किसी रिश्तेदार ने वहां इलाज कराया है ?? तीसरा कारण यह है कि रोगो से ठीक हो चुका रोगी इस शन्का के कारण दूसरे को नहॊ बताता  है कि कही यह उसी डाक्टर के पास अगर इलाज के लिये गया तो कही मेरी बीमारी के बारे मे बात न खुल जाय /

इसीलिये मरीज अपनी identity  छुपाते है और किसी दूसरे को नही बताते कि उनकी बीमारी किस जगह से और कहा से ठीक हुयी है /

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HOMOEOPATHIC LADY DOCTOR IN BARREILY IN UTTAR PRADESH ; EXPERT IN HOMOEOPATHIC TREATMENT OF FEMALES AND OF CHILDREN DISORDERS ; बरेली शहर , उत्तर प्रदेश मे होम्योपैथी की लेडी महिला डाक्टर ; महिलाओ के रोगो और बच्चो के रोग की होम्योपैथी विशेषग्य


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H.I.V. INFECTED 28 YRS OLD FEMALE WONDERFULLY CURED BY HOMOEOPATHIC REMEDIES


H.I.V. infection affected 28 yrs old female is cured by HOMOEOPATHIC remedies wonderfully..

Husband of this lady was infected by HIV and she is transmitted the infection through her partner..

After infection , she developed HIV syndromes. Her Husband did not told the  reality with of the H.I.V. Infection to her wife and with the intercourse she affected with the HIV infection.

Her Husband who was affected by HIV few years ago , was examined by an expert of HIV in  NEW DELHI. He was given the treatment of ALLOPATHY . but without any appreciable results.

Later on when her wife affected with the HIV , she was recommended to take ALLOPATHIC remedies to treat the HIV infection.

Her treating physician recommended for examination to see the level of HIV infection present in patient in 2013 in month of October. The report is given below. See and observe the level of HIV copies/ml present in the body of patient. 

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The Lady patient was prescribed ALLOPATHIC remedies to take in regular schedule and to come  again and again for consultation to the treating physician in regular interval.  The lady took only three days regular  the  prescribed  remedies and after that she refused to take the ALLOPATHIC REMEDIES.  Because she felt very uneasiness and troublesome symptoms in her body . Her husband tried every efforts to continue the remedies but she strictly refused to take the allopathic medicines.

In this  crucial situation ,  his friends and relatives suggested for Homoepathic / Ayurvedic / Unani remedies for the treatment. She was not in favour of Ayurvedic and Unani medicines , as she was sensitive to the smell of Ayurveda and Unani remedies. However she become ready for Homoeopathic treatment.

Her husband consulted me and after ETG AyurvedaScan and other supplementary Ayurveda  examinations, HOMOEOPATHIC remedies were prescribed.

After few months regular intake of the HOMOEOPATHIC REMEDIES once again her examination of HIV was done again.

Now her HIV copies / ml is below and in normal limit. See the result report of the patient.

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 This is a wonderful cure done by the HOMOEOPATHIC REMEDIES alone. Earlier to this case , I have used combination of AYURVEDA & HOMOEOPATHIC REMEDIES & UNANI REMEDIES  simultaneously and in combination in H.I.V. patient’s treatment. The combination treatment gave rapid and fast results in HIV patients and was used to this way to provide fast relief to patient.

But this is the first case I have ever treated by ONLY Homoeopathic remedies, which is an astonishing and factual example before me.

I have prescribed her a combination of HOMOEOPATHIC  MOTHER TINCTURES , which includes “Hydrastis” and others and was based according to  ETG AyurvedaScan and other  Ayurvedic supplementary examinations. 

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HYPOGLYCEAMIA ; LOW LEVEL BLOOD SUGAR ; रक्त मे सूगर का कम हो जाना ; हाइपोग्लाइसीमिया ; खून के अन्दर की शक्कर का कम होना


खून के अन्दर एक निश्चित सीमा तक शक्कर या Sugar  होती है / यह खून के  composition  का एक हिस्सा है / वैसे तो बहुत से केमिकल और प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट और फ़ैट के अलावा भी बहुत कुछ खून या रक्त के अन्दर होता है लेकिन सुगर का कम या ज्यादा होना अधिक महत्व्पूर्ण माना जाता है इसमे भी सुगर का एक निश्चित मात्रा मे कम होना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है /

रक्त मे सूगर की मात्रा जान्च करने के तौर तरीके और जान्च करने वाली मशीनो के parameters  के ऊपर आधारित होती है / जैसा कि पहले classical तौर तरीका सूगर की जान्च को लेकर एक तरह से fix  था वैसा अब नही है / CLASSICAL SUGAR EXAMINATION के parameters Sugar level के 80mg  से 120mg तक FASTING  का माना जाता था और 120mg  से 180mg  तक और कभी कभी 220 mg तक भोजन करने के बाद का सामान्य लेवल का मान लिया जाता था /

लेकिन GLUCOMETER मशीन के आने के बाद से यह parameters बदल चुके है / कोई मशीन 60 mg/dl से लेकर 100 mg/dl  तक FASTING  का सुगर लेवल नारमल बताती है कोई कुछ कम या कोई कुछ ज्यादा बताती है / इसलिये जब सूगर लेवल नापे तो यह मशीनो का parameter  देखकर तय करे कि SUGAR LEVEL  कितना है ?

यदि FASTING और खाना खाने के बाद सूगर का सामन्य लेवल कम आता  है तो इस्का मतलब है कि रक्त मे शक्कर की मात्रा कम है /  शक्कर कम होने का मतलब है कि खून के अन्दर जितनी शक्कर मौजूद होने की आवश्यकता है वह कम है और इसको सामान्य करने की आव्श्यकता है /

कम सूगर होना बहुत खतरनाक स्तिथि को बताता है इसलिये ऐसी स्तिथि मे सतर्क रहने की आव्श्यकता है /

आयुर्वेद का इलाज करने से  कम सूगर होने की समस्या का बहुत बेहतर तरीके से इस समस्या का समाधान होता है /आयुर्वेद मे ऐसी बहुत सी दवये है जिनके उपयोग से कम शक्कर की समस्या का समाधन होता है /

रक्त मे कन शक्कर होना का कारण कई होते है ;

[१] कार्बोहाइड्रेट का पाचन ठीक से न होना

[२] ग्लूकोज बनने की प्रक्रिया मे गड़्बड़ी

[३] लीवर का पर्याप्त मात्रा मे सूगर का सनचय न होना

[४] आन्तो द्वारा श्क्कर का चयापचय ठीक से न करना

[५] पैन्क्रियाज की सूजन होना

[५] इन्सुलीन का अधिक श्राव होना

[६] रक्त मे शक्कर रिलीज या मिलाने का physiological process  का बाधित होना

आदि आदि कारण होते है /

कम शक्कर होने से कई तरह के लक्षण पैदा हो जाते है

[१] चक्कर आना

[२] बेहोशी होना

[३] अचानक कम्जोरी आ जाना

[४] शरीर का लस्त पस्त पड़ जाना

[५] Blood pressure  का अचानक कम या ज्यादा हो जाना

[६] अचानक बिना किसी दर्द के silent heart attack  होना और इससे मृत्य होना

आदि आदि खतरनाक स्तिथिया पैदा हो जाती है /

इसलिये रक्त मे कम शक्कर होने की स्तिथि को controle  करना चाहिये और समय रहते इसका इलाज करना चाहिये /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण मे लीवर और पैन्क्रियाज और छोटी आन्त की pathophysiology  अधिकतर मरीजो मे प्राप्त होती है /

आयुर्वेद के मतानुसार जब रन्जक पित्त और पाचक पित्त तथा पित्त-कफ के सन्युक्त दोष होते है और रस और रक्त धातु की विकृति पाई जाती है तभी यह स्तिथि बनती है / इसीलिये पित्त और कफ दोष नाशक औषधियो का उपयोग करने से यह बीमारी अव्श्य ठीक होती है /

इसमे परहेज अवश्य करना चाहिये और शक्कर का उप्योग ऐसे समय मे अवश्य करे जब आपात स्तिथि हो जाये /

आयुर्वेद -आयुष चिकित्सा करने से रक्त मे कम सूगर होने की बीमारी जड़ मूल से अवश्य ठीक होती है /

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WIKIPEDIA’S AYURVEDA PAGE MISLEADS GLOBALLY ; “NO BODY SHOULD BELIEVE ON THE CONTENTS OF THE AYURVEDA ARTICLES” ; WIKIPEDIA AYURVEDA PAGE CREAT AND GENERATE HATE TO AYURVEDA ; विकीपीडिया द्वारा प्रस्तुत अन्ग्रेजी के आयुर्वेद पेज पर दी गयी सभी जानकारियां सही नही है और विश्व स्तर पर किसी भी नागरिक को इस पेज पर दी गयी जानकारी पर विश्वास नही करना चाहिये / ; विकीपीडिया आयुर्वेद पेज वास्तव मे आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान के लिये ” घृणा” और “भेद भाव” पैदा करता है


हमेशा तकरारो और अविश्वसनीय सामग्री के लिये मशहूर विकीपीडिया इन्साइक्लोपीडिया के आयुर्वेद पेज पर दी जाने वाली आयुर्वेद के समब्न्ध मे सामग्री बिल्कुल विश्वास के योग्य नही है /

विकीपीडिया का आयुर्वेद पेज इस पेज के  पढने वाले लोगो के मन मे और दिमाग मे आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान के प्रति “घृणा” और ” भेद भाव” पैदा करता है / 

आयुर्वेद के पेज के इन तथाकथित ग्यानी और बुध्धिमान  सम्पादको ने तो पुरा आयुर्वेद का इतिहास ही बदल कर रख दिया है ? मै आप सभी पाठको से एक सवाल पूछना चाहता हू / आप बताइये इस धरती पर पहले मनुष्य आया था या पहले पृथ्वी आयी थी / आप सभी इससे इन्कार करेन्गे   और यही कहेन्गे कि पहले    पृथ्वी आयी और उसके बाद मनुष्य इस धरती पर आया /  अगर आपका यह उत्तर सही  माने तो विकीपीडिया     के समपादको के हिसाब से तो पहले मनुष्य आया और उसके बाद धरती आयी ? कैसे ??

विकीपीडिया के अन्ग्रेजी आयुर्वेद के पेज पर सारी दुनिया को यह बताया जा रहा है कि पहले सुश्रुत सम्हिता पैदा हुयी और बाद मे चरक सन्हिता की पैदाइश हुयी / 4 November 2014 के पेज का मुलाहिजा फरमाइये /  कापी नीचे दी जा रही है /

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यह किस तरह का खिलवाड़ किया जा  रहा है किसी चिकित्सा विग्यान के इतिहास के सिल्सिले मे / मजाक बना रखा है आयुर्वेद के पेज को इस समपादको ने / लौन्ड्पने की हद होती है   /  इन समपादको   को किसने छूट दे रखी है इस तरह से किसी विग्यान के इतिहास के साथ खिलवाड़ करने का / कौन नही जानता कि आयुर्वेद का महान ग्रन्थ “चरक सम्हिता ” पहले इस दुनिया मे आयी और उसके बाद ही ’सुश्रुत सम्हिता” का निर्माण किया गया / इतना भी धेला भर primary knowledge  इन समपादको को नही है तो ये सारी दुनिया को बेवकूफी भरा मजाक देने के अलावा क्या दे स्कते है /

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मेरा मानना है कि इसे लिखने वाले आयुवेद चिकित्सा विग्यान के बारे मे किसी भी तरह की न तो ्सही और authentic जानकारी रखते है और न उनको आयुर्वेद के विकास और इतिहास का पूरा पूरा ही पता है /  इसमे लिखने वाले और इसे पूरा करने वाले मुझे बेवकूफ किस्म के लोग लगते है जिन्हे धेला भर भी आयुर्वेद का ग्यान नही है / इसे लिखने वाले केवल यही कहते नही थकते है कि यह चिकित्सा विग्यान किस तरह से  वैग्यानिक है ?  इसमे लिखने वाले हमेशा अपनी सारी उर्जा यही कोशिश करने मे लगाये  हुये देखे गये है कि आयुर्वेद  एक तरह का  अवैग्यानिक चिकित्सा विग्यान है और इसी माप दन्ड पर ऐसे लोगो द्वारा आयुर्वेद के पेज को contributor  के नाम पर  लिखकर “आयुर्वेद पेज ” की छीछालेदर की जा रही है /

इस पेज को लिखने  वाले WIKIPEDIA EDITORS  के नामो का भी मुलाहजा फरमाइये / इसमे contributors के नाम भी अपने आप मे बहुत अजीबो गरीब हैं / किसी का नाम petDog है यानी यह wikipedia के    editor कोई पालतू कुत्ते मालूम होते है ? ये किसके कुत्ते है इसका कोई अता पता नही है ?    पालतू कुत्ते है तो अपना कुत्ता पन की आदत भी नही छोडेन्गे, कैसे  छोड़ दे , कुत्ते जो ठहरे ?

इसी तरह से दूसरे नाम भी है जैसा मै WIKIPEDIA  के दूसरे और अन्य पन्नो के editors  के नाम देखता हू /  जैसे gutterPig  यानी ये सुअर है जो गटर मे यानी नाले की पैदाइश के सुअर है और उसी खनदान मे  पैदा हुये है / दूसरा नाम  भी देखिये , एक wikipedia  का editor  अपना  नाम    FucktheAnus लिखता है / इनको अपनी गान्ड मराने का कुछ ज्यादा ही शौक  और बेचैनी है / अब यह विकीपीडिया के सम्पादक खुद ही अपनी गान्ड  दुनिया भर के लौन्डे-बाजो से  मराने के लिये  बेताब होकर  तैयार बैठे है , तो यह दुनिया को क्या सीख देन्गे /

WIKIPEDIA  ENCYCLOPEDIA  हमेशा अपने जन्म से ही एक   CONTROVERSIAL WEBSITE  रही  है जिसके बारे मे कहा जाता है कि यह या इसके contents  या इसमे दी गयी information पर  भरोसा नही किया जा सकता है और न इसका कही पर reference  दिया जा सकता है या इसके  लिखे गये सन्दर्भ कही पर भी quote करने के लायक नही  है  /

मेरा पहला सवाल WIKIPEDIA  से है / इसके कर्णधारों और इसके अल्म्बर दारो को सबसे  पहले यह बताना चाहिये  कि वे इस दुनियां की किस किस चीज को वैग्यानिक मानते है और किस किस को अवैग्यानिक समझते है ? उदाहरण के लिये विकीपीडिया का आयुर्वेद पेज कहता है कि आयुर्वेद की दवाये LEAD और MERCURY  और ARSENIC से बनती है और आयुर्वेद की दवाओ मे इस तरह के जहरीले पदार्थ मिले है /

विकीपीडीया ने यह कभी नही बताया कि आयुर्वेद की किन किन शास्त्रोक्त दवाओ मे LEAD मिला होता है या LEAD  मिली दवाये होती है ? विकीपीडिया ने यह नही बताया कि ARSENIC   को मिलाकर कौन कौन सी  शास्त्रोक्त दवाये बनती है ? क्या विकीफीडीया के contributors  ने यह सब जानने की कोशिश की ? अगर इनके contributors  यह सब जानते है तो उनको main page  पर न सही talk page  पर बताना चाहिये कि ये ये और अमुक अमुक दवाये आयुर्वेद की है जिनमे LEAD  और ARSENIC  मिला है और जिन लोगो ने इसका सेवन किया है उनको किस तरह की तकलीफे पिदा हुयी है ? लेकिन wikipedia  के editors  द्वारा ऐसा  नही किया जाता है क्योन्कि इसके contributors  को  इसके बारे मे किसी तरह का ग्यान ही नही होता है /

वास्तविकता यह है कि WIKIPEDIA   के contributors  ऐसे  DOCTOR  की तरह है जो मरीज की PILES / HEAMORRHOIDS    का इलाज करने के बजाय उसके HEADACHE  का इलाज करते है / यानी contributors  खुद ही बहुत confused मालूम होते है और यह इस तरह के contributor  होते है जिनके पास सिवाय destructive सोच के अलाव और किसी प्रकार की सोच नही है क्योन्कि ये सब के सब prejudice  है और इनका काम ही OPPOSITION FOR OPPOSITION  जैसा है /

मै सभी विश्व के लोगो का ध्यान इस बात की तरफ खीचना चाहता हू कि WIKIPEDIA   मे दिये गये आयुर्वेद के बारे मे जितने भी contents  है उन पर भरोसा मत करे / इसमे से अधिकान्श हिस्सा वास्तविक आयुर्वेद की theory  और  practice से बिल्कुल अलग है / जितने भी contents  है वे बहुत पुराने दिये गये है /

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आधुनिक भारत मे आयुर्वेद का स्वरूप बदल गया है जिसके बारे मे इस लेख मे कुछ भी नही जिक्रा किया गया है / इसमे यह भी नही बताया गया है कि आयुर्वेद की दवाओ के उत्पादन के बारे मे भारत सरकार के वही नियम और कायदे लागू है जो allopathy  की दवाओ के बनाने के बारे मे लागूहोते है /

इस ARTICLE मे  किसी तरह की यह भी जानकारी नही है कि भारत सरकार ने आयुर्वेद की pharmacopeia का प्रकाशन किया है जिसमे आयुर्वेदिक फार्मूलो के साथ इसके बनाने की विधिया दी गयी है /

इसमे यह भी नही बताया गया कि कितने HOSPITALS आयुर्वेद के रिसर्च कार्य मे लगे हुये है और विश्व स्तर के रिसर्च कार्य हो रहे है ?

इसमे यह भी नही बताया गया कि आयुर्वेद की आधुनिक निदान ग्यान की तकनीको यथा [१] ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके तीन उच्च कोटि की विकास की गयी तकनीकी विधियां और [२] आयुर्वेद का रक्त परीक्षण और [३] आयुर्वेद का मूत्र परीक्षण और [४] आयुर्वेद का थेरमल परीक्षण के अलावा अन्य विकसित की गयी आधुनिक परीक्षण का किस तरह से लाभ देश और विदेश के लोग उठा रहे है  ?

WIKIPEDIA   का यह आयुर्वेद का पेज और इसका article तथा इसके contributors सबके सब prejudiced  है / यह क्यो है यह तो वही बता सकते है ? लेकिन यह contributor  किसी भी तरह से तथस्त या  neutral  सोच वाले नही कहे जा सकते है /

इन सभी contributors  के लिये मै यही कहना चाहून्गा कि ये सभी या इनके अलावा जो भी आयुर्वेद के पेज मे अपना योगदान देना चाहते है वे पहले CENTRAL RESEARCH INSTITUTE OF AYURVEDA , 66 PUNJABI BAGH , NEW DELHI मे जाये और वहा की library  मे बैठकर पहले वे सभी journals and magazines पढे जिनमे आयुर्वेद के उच्च्कोटि के शोध प्रकाशित हुये है और जिन पर बहुत बड़ी सनख्या मे वैग्यानिको ने काम किया है / ऐसे सभी editors  यहा इस सन्स्थान मे जाकर जान्कारी ले कि आयुर्वेद मे किस तरह की रिसर्च की जा चुकी है जिसके लिये  उनका ग्यान आधा अधूरा है / 

मै WEKIPEDIA  के आयुर्वेद पेज के contributors  को कहना चाहून्गा कि वे लिखने से पहले आयुर्वेद के बारे मे पहले अपना स्वयम का ग्यान बढाये  और उसके बाद सारी दुनियां को बतायें / ये तथाकथित editors   निम्न सन्स्थानो से सम्पर्क करे /

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दूसरा सन्स्थान ;

[२]

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तीसरा सन्सथान ;

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WIKIPEDIA  के EDITORS   भारत मे बहुत से विश्व विद्यालयो मे  जहा आयुर्वेद की facultiy  है , वहां  जाकर पहले expert  और specialists से मिले , ये तथा कथित विकीपीडिया के अति-विद्वान समपादक  जिस विषय पर लिखना और कहना चाहते है , इनसे पहले  discussion करे और फिर लिखे तो ज्यादा अच्छा होगा /

अन्त मे मै विश्व की जन्ता से यही कहून्गा और सन्देश देना चाहून्गा कि WIKIPEDIA   मे दी गयी आयुर्वेद के बारे मे जानकारी बहुत सतहे स्तर की है  sub-standard  information है जो इसके पाठको को गुमराह करने वाली है और जो भी पाठ्य सामग्री दी गयी है वह सही नही है / इसके बहुत से descriptions  भी गलत है /

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WORLD HEALTH ORGANISATION   ने आयुर्वेद के बारे मे बहुत सी पुस्तके प्रकाशित की है जो authentic  है और इसे बहुत ही अतिविशिष्टता से सन्ग्रह करके प्रकाशित किया गया है /

मै WIKIPEDIA  कॆ EDITORS   से यह जरूर request  करून्गा कि वे बेवकूफी भरी GARBAGE  जैसी जानकारी लिखने के बजाय पहले आयुर्वेद को पढे और फिर इसके बारे मे जानकारी दे तो ज्यादा अच्चा होता /

अगर ऐसा नही होगा तो WIKIPEDIA AYURVEDA PAGE कूड़ा कबाड़ और GARBAGE  वाला पेज ही सबको समझना चाहिये /

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भूत और प्रेत और चुड़ैल और भटकती हुयी आत्माओ से ग्रस्त और त्रस्त रोगियो के आयुर्वेदिक -आयुष इलाज से रोग मुक्त हो चुके रोगियो से प्राप्त अनुभव का विश्लेषण


क्या भटकती हुयी आत्माये किसी के शरीर मे अन्दर घुसकर उसको बीमार बना सकती है ????

क्या प्रेत किसी के शरीर मे अन्दर घुसकर उसको परेशान करता है ?????

क्या चुड़ैल किसी के शरीर मे अन्दर प्रवेश करके रोगी को मानसिक रोगी बना सकता है ?????

क्या भूत किसी के सिर पर चढ सकता है ??????

मेरे पास बहुत बड़ी सन्ख्या मे ऐसे रोगी आये है जो ऊपर बतायी गयी समस्याओ से ग्रसित रहे / इन सभी मरीजो की परेशानियो का बहुत गहरायी से अध्ध्य्यन करने और इनकी जान्च करने के बाद प्राप्त आन्कड़ो का अध्ध्य्यन करने के बाद जिस तरह का निष्कर्ष निकाला गया  उससे इस तरह की बीमारियो की मूल वजह जानने और समझने का रास्ता मिला है /

आयुर्वेद के अलावा सभी चिकित्सा शास्त्र  यह मानते है कि आत्माये और भूत और चुड़ैल और शैतान इत्यादि बातो का कोई अस्तित्व नही है / लेकिन भारतीय चिकित्सा विग्यान मानता है कि इन सब अथवा इस जैसी अथवा इस तरह की चीजो का अस्तित्व है / आयुर्वेद मे इसे भूत-बाधा कहा गया है और इस तरह की सभी प्रकार की बाधाओ का बाकायदा इलाज भी बताया गया है /

आठ अन्गो वाले आयुर्वेद की विधा को समोने वाले शास्त्र मे एक अन्ग भूत बाधा का भी है /

लेकिन इसके लिये आयुर्वेद मे जिस तरह का इलाज  और मैनेज्मेन्ट का तौर तरीका है वह आधुनिक  CLINICAL PSYCHIATRY  की ही तरह का है /

मेरे अध्ध्य्यन मे इस तरह के रोगियो का इलाज करने और इस तरह से प्राप्त रोगियो के आरोग्य होने के अनुभवो से यही पता चला है कि यह एक तरह की शारीरिक बीमारी है और इसके अलावा कुछ भी नही है /

महिलाओ और पुरुषो मे यह रोग कई तरह के अलग अलग कारणो से पैदा होते है / लेकिन एक बात दोनो मे common  दिखाई पड़ी है कि AUTONOMIC NERVOUS SYSTEM तथा BRAIN SECTORS ANOMALIES  महिलाओ और पुरुषो दोनो मे विकृत अवस्था मे मिली है /

महिलाओ मे मूत और प्रेत और चुड़ैल और शैतान का चढ जाना  वास्तव मे एक तरह का immagination  होता है और यह कल्पना रोगी के मष्तिष्क की उपज होती है / वास्तव मे ऐसा कुछ भी नही होता और न appearence  मे ही कुछ दिखता है / इसके पीछे शरीर का HORMONAL SYSTEM  भी बहुत कुछ जिम्मेदार होता है / लगभग शत – प्रतिशत महिलाये जिनको प्रेत चड़ने की और भूत और चुड़ैल द्वारा परेशान किये जाने की शिकायत करती है उनमे उनके मासिक धर्म की विकृति पायी गयी है  / होता क्या है , जब मासिक धर्म होना शुरू होता है तो इस प्रक्रिया को तीन हिस्सो मे बान्टते है / एक वह स्तिथि [१] जो मासिक होने के पहले सात दिन की है [२] एक वह स्तिथि जब मासिक शुरू होते है और पान्च दिन तक होते रहते है और [३] एक वह स्तिथि , जब मासिक धर्म बन्द होते है और इसका असर शरीर मे अमूमन सात दिन बाद तक बना रह्ता है  / यह औसतन १८ या १९ दिन का चक्र तब तक चलता रहता है जब तक महिलाओ का मासिक होता रहता है /

यह सारी physiological  प्रक्रिया महिलाओ मे अमूमन जितने दिन भी रहती है उतने दिन तक उनके शरीर का हार्मोनल सिस्टम सक्रिय अवस्था मे बना रहता है / हार्मोनाल सिस्टम अकेले काम नही कर सकता है जब तक कि आटोनामिक नरवस सिस्टम इसको सहारा न दे / वास्तविकता यह है कि मासिक श्राव होने या न होने अथवा कम ज्यादा होने अथवा बहुत होने के पीछे इन दो सिस्टम्स का बहुत  हाथ होता है / यह एक तरह की BODY CLOCK  होती है जो अपने कार्य गुणो के कारण मासिक श्राव का एक निश्चित समय निर्धारित सीमा के अन्दर प्रतिपादन करता है /

हार्मोनाल सिस्टम शरीर मे दो भागो मे बटा हुआ होता है /

[१] वह HORMONAL GLANDS  जो एक ही काम सम्पूर्ण्तया करती है और उनकी बनावट एक ही सम्पूर्ण होती है

[२] वह हार्मोनाल ग्लैन्ड्स जिनके पास कई काम करने की क्षम्ता होती है / यह एक काम नही करती है बल्कि कई काम करती है / इसे मोटा मोटी समझना चाहिये /

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जिन बातो का जिक्र ऊपर किया गया है , उसे इस उपरोक्त चित्र मे देखकर समझ सकते है /

बायी तरफ के भाग मे जिन HORMONAL GLANDS को बताया गया है वे सम्पूर्ण बनावट मे endocrine glands  मुख्य रूप से समझी जाती है  लेकिन कुछ दाहिनी तरफ बतायी गयी endocrine glands    मे हार्मोन तत्व पैदा करने के भी गुण पाये जाते है , इसीलिये इन्को भी मोटा मोटी HORMONAL GLANDS  मानते है /

महिलाओ के शरीर मे अगर यही हार्मोन्स सही काम नही करते है तो यह विकार पैदा करते है और फिर आटोनामिक नरवस सिस्टम अपना कुदरती कार्य ठीक से नही कर पाता है क्योन्कि उसके पास जिस तरह के सामन्य electrical diffusion signals  नही मिलते उससे वह यह समझता है कि जो signal  मिल रहे है वही सही है / नतीजा यह होता है कि reproductive system  जब ठीक काम नही कर पाता तोशरीर के स्वाभाविक और कुदरती काम करने मे बाधा पैदा होती है जिसका असर digestive system  पर पड़ता है / ऐसा इसलिये कि महिलाओ के गरभाशय पेड़ू मे स्तिथि होते है जिनके आस्पास छोटी और बड़ी आन्त होती है /

NERVOUS SYSTEM के जरिये महिलाओ की reproductive system  के अन्दर हो रही inflammatory condition  की metastasis  आन्तो मे भी फैल जाती है और फिर इसके reaction  से पैदा toxins रक्त नलिकाओ के जरिये सारे शरीर मे फैल जाती है / जिसके परिणाम स्वरूप महिलाओ को LOW GRADE FEVER  पैदा हो जाता है और इससे खून की कमी और भूख का न  लगना और पेट से सम्बन्धित बीमारिया होने लगती है / इसके अलावा कोई भी शारीरिक विकृति पैदा हो सकती है /

जब यही ढर्रा बहुत समय तक लगातार चलता रहता है तो दिमाग मे एक तरह की stress condition  पैदा होती है / यह तनाव की स्तिथि अधिकतर FRONTAL BRAIN और TEMPORAL BRAIN  के हिस्से मे देखीजाती है / दिमाग के दोनो हिस्से की सूचनाये अलट पलट कर प्रतिसेकन्ड खरबो की तादाद मे transfer  होती है / शरीर की ऐसी स्तिथि होने पर यह सूचनाये दिमाग के दोनो हिस्सो मे transfer  होने की प्रक्रिया बाधित होती है / ऐसी बाधा की स्तिथि मे रोगी यह समझ नही पाता है कि उसको क्या हो रहा है / क्योन्कि सिग्नल जिस तेजी से दिमाग के एक हिस्से से दूसरे हिस्से मे  taransfer होना चाहिये वह नही हो पाता और late signaling  होने से सब hotch-potch  होता है / इसमे दिमाग की कुछ faculties  pathophysiological condition मे हो जाती है और BRAIN  की अनल्य्सिस करने की क्षमता slow  होती है जिससे एक छवि के बाद दूसरी छवि और तीसरी छवि जिन्हे एक के बाद एक तुरन्त हट जाना चाहिये वह नही हो पाता है और दिमाग मे एक picture  कुछ समय तक बनी रहती है /

यह इसलिये होता है क्योन्कि रक्त के अन्दर अगर SODIUM level या Pottassium level  या chloride  का लेवेल अगर imbalance स्तिथि मे होगा तो concentration  faculty  का काम बधित होता है और मश्तिष्क यह समझ नही पाता कि क्या अच्छा है और क्या खराब ? यह HOLLUCINATION  पैदा करता है और NERVOUS SYSTEM  इसे control  मे नही रख पाता इसीलिये मरीज को महसूस होता है कि कोई उससे बात कर रहा है या कोई आत्मा उसके शरीर मे घुस गयी है /

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लगभग सभी मरीजो मे पाया गया है कि उनका

[१] रक्त का प्रवाह सिर की ओर होता है जबकि कुदरती तौर पर यह पैरो की ओर होना चाहिये

[२] रोगी के रक्त मे OXYGEN  की मात्रा कम पायी गयी है / रोगी को लगता है कि उसका दम घुट रहा है या उसको पुरी सान्स नही मिल रही है / यह अधिकतर ९२% से लेकर ९७% प्रतिशत तक देखा गया है /

[३] रोगी का electrical diffussion  बायी तरफ से दाहिनी तरफ की ओर होता है यानी anti-clock wise  है /

महिलाओ मे और भी बहुत सी anomalies  पायी गयी है जो ETG AyurvedaScan और इसके अन्य तत्सम्बन्धित परीकशणो के करने के बाद पता चलता है जैसे रक्त के परीक्षण मे UREA  का कम या अधिक होना और रीढ की हड्डी से सम्बन्धित spinal articulation anomalies  का मौजूद होने से भी मानसिक विकार होते है / इसके अलावा during pregnancy मे भी इसी तरह के जब शारीरिक बदलाव होते है तब किसी किसी महिला को भूत प्रेत चढ जाने की शिकायत होती है /

कुल मिलाकर महिलाओ मे इस तरह की बीमारियो का इलाज आयुर्वेद मे है और कुछ माह तक इलाज करने से यह बीमारी दूर हो जाती है / हमारे रिसर्च केन्द्र मे मान्सिक रोगो के इलाज के लिये ETG AyurvedaScan  तथा अन्य समबन्धित परीक्षण करने के प्स्चात निश्झ्कर्ष स्वरूप प्राप्त डाटा के आधार पर की गयी FOUR DIMENTIONAL DIAGNOSIS यानी चार आयामी निदान यथा [१] finding of location / locations / main causing factor [2] pathways of problems / carriers of the problems [3] expression of the symptom / symptoms / symdromes [4] allied complaints / symptoms / syndromes जब किया जाता है तो आयुर्वेदिक – आयुष इलाज से सभी रोगो का उपचार होकर मरीज अवश्य ठीक होते है /

क्मोवेशी पुरुषो मे भी इसी तरह की विकृतियां होती है जो उनके circulation system  और  reproductive syustem  और  autonomic nervous system  और hormonal system के अलावा  अन्य दूसरे कारण भी होते है जैसे किसी खतरनाक दवा का अत्य्यधिक सेवन  या कोई नशीला पदार्थ खाने की आदत या सिगरेट या तम्बाकू या अन्य कोई ऐसे ही उत्तेजक पदार्थ खाने की आदत हो तो इससे भी इसी तरह की बीमारिया पैदा हो जाती है /

वास्तव मे भूत और प्रेत और चुड़ैल इत्यादि कुछ भी नही है , यह एक तरह की कल्पना है जो कमजोर मश्तिष्क के लोगो को कालपनिक स्वरूप से परेशान करती है / भय पैदा होने से और डर जाने से यह सब होता है और भय तथा डर मन से और मष्तिष्क से बाहर निकल जाने से ऐसी भी तकलीफे ठीक हो जाती है / इसके लिये आयुर्वेद मे ऐसी दवाये मौजूद है जिनसे nervous system  तथा अन्य सिस्टम ठिक होते है और बॊमारी जड़्मूल से ठीक होती है /

लोग इस तरह की तकलीफो मे झाड़ और फून्क और अन्य अनुष्ठान कराते है . यह वास्तव मे मरीज के मन को तसल्ली देने के लिये होता है कि उसकी बीमारी के उपचार के लिये कुछ किया जा रहा है /

मेरा मानना है कि अगर इस तरह का झाड़ फून्क का उपचार किया जाता है तो इसमे  कुछ भी बुरा नही है क्योकि आयुर्वेद इस तरह के उपचार करने की इसकी इजाजत देता है और इसे भूत बाधा निदान करके आयुर्वेद के ग्रन्थो मे चिकित्सा करने का विधान दिया गया है /

लेकिन इसके साथ औषधियो का भी उपचार करना चाहिये और आयुर्वेद की आधुनिक तकनीक  ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित और इसके तत्सम्बन्धित तकनीको के द्वारा निदान की गयी बीमरियो या विकृतियो का इलाज करते है तो मान्सिक रोग चाहे जैसे भी हो सभी ठीक होते है /

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लाइलाज बीमारी कहकर क्या आप अपने मरीज को मार डालेन्गे ? जरा सोचिये और विचार करिये : आयुर्वेद की आधुनिक सुपर स्पेशियलिटी जान्चो पर आधारित सभी तरह की ला-इलाज कही जाने वाली बीमारियो का इलाज मौजूद है : आयुर्वेद अपनाइये और लाइलाज बीमारियो का इलाज करिये


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