भूत और प्रेत और चुड़ैल और भटकती हुयी आत्माओ से ग्रस्त और त्रस्त रोगियो के आयुर्वेदिक -आयुष इलाज से रोग मुक्त हो चुके रोगियो से प्राप्त अनुभव का विश्लेषण


क्या भटकती हुयी आत्माये किसी के शरीर मे अन्दर घुसकर उसको बीमार बना सकती है ????

क्या प्रेत किसी के शरीर मे अन्दर घुसकर उसको परेशान करता है ?????

क्या चुड़ैल किसी के शरीर मे अन्दर प्रवेश करके रोगी को मानसिक रोगी बना सकता है ?????

क्या भूत किसी के सिर पर चढ सकता है ??????

मेरे पास बहुत बड़ी सन्ख्या मे ऐसे रोगी आये है जो ऊपर बतायी गयी समस्याओ से ग्रसित रहे / इन सभी मरीजो की परेशानियो का बहुत गहरायी से अध्ध्य्यन करने और इनकी जान्च करने के बाद प्राप्त आन्कड़ो का अध्ध्य्यन करने के बाद जिस तरह का निष्कर्ष निकाला गया  उससे इस तरह की बीमारियो की मूल वजह जानने और समझने का रास्ता मिला है /

आयुर्वेद के अलावा सभी चिकित्सा शास्त्र  यह मानते है कि आत्माये और भूत और चुड़ैल और शैतान इत्यादि बातो का कोई अस्तित्व नही है / लेकिन भारतीय चिकित्सा विग्यान मानता है कि इन सब अथवा इस जैसी अथवा इस तरह की चीजो का अस्तित्व है / आयुर्वेद मे इसे भूत-बाधा कहा गया है और इस तरह की सभी प्रकार की बाधाओ का बाकायदा इलाज भी बताया गया है /

आठ अन्गो वाले आयुर्वेद की विधा को समोने वाले शास्त्र मे एक अन्ग भूत बाधा का भी है /

लेकिन इसके लिये आयुर्वेद मे जिस तरह का इलाज  और मैनेज्मेन्ट का तौर तरीका है वह आधुनिक  CLINICAL PSYCHIATRY  की ही तरह का है /

मेरे अध्ध्य्यन मे इस तरह के रोगियो का इलाज करने और इस तरह से प्राप्त रोगियो के आरोग्य होने के अनुभवो से यही पता चला है कि यह एक तरह की शारीरिक बीमारी है और इसके अलावा कुछ भी नही है /

महिलाओ और पुरुषो मे यह रोग कई तरह के अलग अलग कारणो से पैदा होते है / लेकिन एक बात दोनो मे common  दिखाई पड़ी है कि AUTONOMIC NERVOUS SYSTEM तथा BRAIN SECTORS ANOMALIES  महिलाओ और पुरुषो दोनो मे विकृत अवस्था मे मिली है /

महिलाओ मे मूत और प्रेत और चुड़ैल और शैतान का चढ जाना  वास्तव मे एक तरह का immagination  होता है और यह कल्पना रोगी के मष्तिष्क की उपज होती है / वास्तव मे ऐसा कुछ भी नही होता और न appearence  मे ही कुछ दिखता है / इसके पीछे शरीर का HORMONAL SYSTEM  भी बहुत कुछ जिम्मेदार होता है / लगभग शत – प्रतिशत महिलाये जिनको प्रेत चड़ने की और भूत और चुड़ैल द्वारा परेशान किये जाने की शिकायत करती है उनमे उनके मासिक धर्म की विकृति पायी गयी है  / होता क्या है , जब मासिक धर्म होना शुरू होता है तो इस प्रक्रिया को तीन हिस्सो मे बान्टते है / एक वह स्तिथि [१] जो मासिक होने के पहले सात दिन की है [२] एक वह स्तिथि जब मासिक शुरू होते है और पान्च दिन तक होते रहते है और [३] एक वह स्तिथि , जब मासिक धर्म बन्द होते है और इसका असर शरीर मे अमूमन सात दिन बाद तक बना रह्ता है  / यह औसतन १८ या १९ दिन का चक्र तब तक चलता रहता है जब तक महिलाओ का मासिक होता रहता है /

यह सारी physiological  प्रक्रिया महिलाओ मे अमूमन जितने दिन भी रहती है उतने दिन तक उनके शरीर का हार्मोनल सिस्टम सक्रिय अवस्था मे बना रहता है / हार्मोनाल सिस्टम अकेले काम नही कर सकता है जब तक कि आटोनामिक नरवस सिस्टम इसको सहारा न दे / वास्तविकता यह है कि मासिक श्राव होने या न होने अथवा कम ज्यादा होने अथवा बहुत होने के पीछे इन दो सिस्टम्स का बहुत  हाथ होता है / यह एक तरह की BODY CLOCK  होती है जो अपने कार्य गुणो के कारण मासिक श्राव का एक निश्चित समय निर्धारित सीमा के अन्दर प्रतिपादन करता है /

हार्मोनाल सिस्टम शरीर मे दो भागो मे बटा हुआ होता है /

[१] वह HORMONAL GLANDS  जो एक ही काम सम्पूर्ण्तया करती है और उनकी बनावट एक ही सम्पूर्ण होती है

[२] वह हार्मोनाल ग्लैन्ड्स जिनके पास कई काम करने की क्षम्ता होती है / यह एक काम नही करती है बल्कि कई काम करती है / इसे मोटा मोटी समझना चाहिये /

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जिन बातो का जिक्र ऊपर किया गया है , उसे इस उपरोक्त चित्र मे देखकर समझ सकते है /

बायी तरफ के भाग मे जिन HORMONAL GLANDS को बताया गया है वे सम्पूर्ण बनावट मे endocrine glands  मुख्य रूप से समझी जाती है  लेकिन कुछ दाहिनी तरफ बतायी गयी endocrine glands    मे हार्मोन तत्व पैदा करने के भी गुण पाये जाते है , इसीलिये इन्को भी मोटा मोटी HORMONAL GLANDS  मानते है /

महिलाओ के शरीर मे अगर यही हार्मोन्स सही काम नही करते है तो यह विकार पैदा करते है और फिर आटोनामिक नरवस सिस्टम अपना कुदरती कार्य ठीक से नही कर पाता है क्योन्कि उसके पास जिस तरह के सामन्य electrical diffusion signals  नही मिलते उससे वह यह समझता है कि जो signal  मिल रहे है वही सही है / नतीजा यह होता है कि reproductive system  जब ठीक काम नही कर पाता तोशरीर के स्वाभाविक और कुदरती काम करने मे बाधा पैदा होती है जिसका असर digestive system  पर पड़ता है / ऐसा इसलिये कि महिलाओ के गरभाशय पेड़ू मे स्तिथि होते है जिनके आस्पास छोटी और बड़ी आन्त होती है /

NERVOUS SYSTEM के जरिये महिलाओ की reproductive system  के अन्दर हो रही inflammatory condition  की metastasis  आन्तो मे भी फैल जाती है और फिर इसके reaction  से पैदा toxins रक्त नलिकाओ के जरिये सारे शरीर मे फैल जाती है / जिसके परिणाम स्वरूप महिलाओ को LOW GRADE FEVER  पैदा हो जाता है और इससे खून की कमी और भूख का न  लगना और पेट से सम्बन्धित बीमारिया होने लगती है / इसके अलावा कोई भी शारीरिक विकृति पैदा हो सकती है /

जब यही ढर्रा बहुत समय तक लगातार चलता रहता है तो दिमाग मे एक तरह की stress condition  पैदा होती है / यह तनाव की स्तिथि अधिकतर FRONTAL BRAIN और TEMPORAL BRAIN  के हिस्से मे देखीजाती है / दिमाग के दोनो हिस्से की सूचनाये अलट पलट कर प्रतिसेकन्ड खरबो की तादाद मे transfer  होती है / शरीर की ऐसी स्तिथि होने पर यह सूचनाये दिमाग के दोनो हिस्सो मे transfer  होने की प्रक्रिया बाधित होती है / ऐसी बाधा की स्तिथि मे रोगी यह समझ नही पाता है कि उसको क्या हो रहा है / क्योन्कि सिग्नल जिस तेजी से दिमाग के एक हिस्से से दूसरे हिस्से मे  taransfer होना चाहिये वह नही हो पाता और late signaling  होने से सब hotch-potch  होता है / इसमे दिमाग की कुछ faculties  pathophysiological condition मे हो जाती है और BRAIN  की अनल्य्सिस करने की क्षमता slow  होती है जिससे एक छवि के बाद दूसरी छवि और तीसरी छवि जिन्हे एक के बाद एक तुरन्त हट जाना चाहिये वह नही हो पाता है और दिमाग मे एक picture  कुछ समय तक बनी रहती है /

यह इसलिये होता है क्योन्कि रक्त के अन्दर अगर SODIUM level या Pottassium level  या chloride  का लेवेल अगर imbalance स्तिथि मे होगा तो concentration  faculty  का काम बधित होता है और मश्तिष्क यह समझ नही पाता कि क्या अच्छा है और क्या खराब ? यह HOLLUCINATION  पैदा करता है और NERVOUS SYSTEM  इसे control  मे नही रख पाता इसीलिये मरीज को महसूस होता है कि कोई उससे बात कर रहा है या कोई आत्मा उसके शरीर मे घुस गयी है /

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लगभग सभी मरीजो मे पाया गया है कि उनका

[१] रक्त का प्रवाह सिर की ओर होता है जबकि कुदरती तौर पर यह पैरो की ओर होना चाहिये

[२] रोगी के रक्त मे OXYGEN  की मात्रा कम पायी गयी है / रोगी को लगता है कि उसका दम घुट रहा है या उसको पुरी सान्स नही मिल रही है / यह अधिकतर ९२% से लेकर ९७% प्रतिशत तक देखा गया है /

[३] रोगी का electrical diffussion  बायी तरफ से दाहिनी तरफ की ओर होता है यानी anti-clock wise  है /

महिलाओ मे और भी बहुत सी anomalies  पायी गयी है जो ETG AyurvedaScan और इसके अन्य तत्सम्बन्धित परीकशणो के करने के बाद पता चलता है जैसे रक्त के परीक्षण मे UREA  का कम या अधिक होना और रीढ की हड्डी से सम्बन्धित spinal articulation anomalies  का मौजूद होने से भी मानसिक विकार होते है / इसके अलावा during pregnancy मे भी इसी तरह के जब शारीरिक बदलाव होते है तब किसी किसी महिला को भूत प्रेत चढ जाने की शिकायत होती है /

कुल मिलाकर महिलाओ मे इस तरह की बीमारियो का इलाज आयुर्वेद मे है और कुछ माह तक इलाज करने से यह बीमारी दूर हो जाती है / हमारे रिसर्च केन्द्र मे मान्सिक रोगो के इलाज के लिये ETG AyurvedaScan  तथा अन्य समबन्धित परीक्षण करने के प्स्चात निश्झ्कर्ष स्वरूप प्राप्त डाटा के आधार पर की गयी FOUR DIMENTIONAL DIAGNOSIS यानी चार आयामी निदान यथा [१] finding of location / locations / main causing factor [2] pathways of problems / carriers of the problems [3] expression of the symptom / symptoms / symdromes [4] allied complaints / symptoms / syndromes जब किया जाता है तो आयुर्वेदिक – आयुष इलाज से सभी रोगो का उपचार होकर मरीज अवश्य ठीक होते है /

क्मोवेशी पुरुषो मे भी इसी तरह की विकृतियां होती है जो उनके circulation system  और  reproductive syustem  और  autonomic nervous system  और hormonal system के अलावा  अन्य दूसरे कारण भी होते है जैसे किसी खतरनाक दवा का अत्य्यधिक सेवन  या कोई नशीला पदार्थ खाने की आदत या सिगरेट या तम्बाकू या अन्य कोई ऐसे ही उत्तेजक पदार्थ खाने की आदत हो तो इससे भी इसी तरह की बीमारिया पैदा हो जाती है /

वास्तव मे भूत और प्रेत और चुड़ैल इत्यादि कुछ भी नही है , यह एक तरह की कल्पना है जो कमजोर मश्तिष्क के लोगो को कालपनिक स्वरूप से परेशान करती है / भय पैदा होने से और डर जाने से यह सब होता है और भय तथा डर मन से और मष्तिष्क से बाहर निकल जाने से ऐसी भी तकलीफे ठीक हो जाती है / इसके लिये आयुर्वेद मे ऐसी दवाये मौजूद है जिनसे nervous system  तथा अन्य सिस्टम ठिक होते है और बॊमारी जड़्मूल से ठीक होती है /

लोग इस तरह की तकलीफो मे झाड़ और फून्क और अन्य अनुष्ठान कराते है . यह वास्तव मे मरीज के मन को तसल्ली देने के लिये होता है कि उसकी बीमारी के उपचार के लिये कुछ किया जा रहा है /

मेरा मानना है कि अगर इस तरह का झाड़ फून्क का उपचार किया जाता है तो इसमे  कुछ भी बुरा नही है क्योकि आयुर्वेद इस तरह के उपचार करने की इसकी इजाजत देता है और इसे भूत बाधा निदान करके आयुर्वेद के ग्रन्थो मे चिकित्सा करने का विधान दिया गया है /

लेकिन इसके साथ औषधियो का भी उपचार करना चाहिये और आयुर्वेद की आधुनिक तकनीक  ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित और इसके तत्सम्बन्धित तकनीको के द्वारा निदान की गयी बीमरियो या विकृतियो का इलाज करते है तो मान्सिक रोग चाहे जैसे भी हो सभी ठीक होते है /

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