दिन: सितम्बर 13, 2014

HYPOGLYCEAMIA ; LOW LEVEL BLOOD SUGAR ; रक्त मे सूगर का कम हो जाना ; हाइपोग्लाइसीमिया ; खून के अन्दर की शक्कर का कम होना


खून के अन्दर एक निश्चित सीमा तक शक्कर या Sugar  होती है / यह खून के  composition  का एक हिस्सा है / वैसे तो बहुत से केमिकल और प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट और फ़ैट के अलावा भी बहुत कुछ खून या रक्त के अन्दर होता है लेकिन सुगर का कम या ज्यादा होना अधिक महत्व्पूर्ण माना जाता है इसमे भी सुगर का एक निश्चित मात्रा मे कम होना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है /

रक्त मे सूगर की मात्रा जान्च करने के तौर तरीके और जान्च करने वाली मशीनो के parameters  के ऊपर आधारित होती है / जैसा कि पहले classical तौर तरीका सूगर की जान्च को लेकर एक तरह से fix  था वैसा अब नही है / CLASSICAL SUGAR EXAMINATION के parameters Sugar level के 80mg  से 120mg तक FASTING  का माना जाता था और 120mg  से 180mg  तक और कभी कभी 220 mg तक भोजन करने के बाद का सामान्य लेवल का मान लिया जाता था /

लेकिन GLUCOMETER मशीन के आने के बाद से यह parameters बदल चुके है / कोई मशीन 60 mg/dl से लेकर 100 mg/dl  तक FASTING  का सुगर लेवल नारमल बताती है कोई कुछ कम या कोई कुछ ज्यादा बताती है / इसलिये जब सूगर लेवल नापे तो यह मशीनो का parameter  देखकर तय करे कि SUGAR LEVEL  कितना है ?

यदि FASTING और खाना खाने के बाद सूगर का सामन्य लेवल कम आता  है तो इस्का मतलब है कि रक्त मे शक्कर की मात्रा कम है /  शक्कर कम होने का मतलब है कि खून के अन्दर जितनी शक्कर मौजूद होने की आवश्यकता है वह कम है और इसको सामान्य करने की आव्श्यकता है /

कम सूगर होना बहुत खतरनाक स्तिथि को बताता है इसलिये ऐसी स्तिथि मे सतर्क रहने की आव्श्यकता है /

आयुर्वेद का इलाज करने से  कम सूगर होने की समस्या का बहुत बेहतर तरीके से इस समस्या का समाधान होता है /आयुर्वेद मे ऐसी बहुत सी दवये है जिनके उपयोग से कम शक्कर की समस्या का समाधन होता है /

रक्त मे कन शक्कर होना का कारण कई होते है ;

[१] कार्बोहाइड्रेट का पाचन ठीक से न होना

[२] ग्लूकोज बनने की प्रक्रिया मे गड़्बड़ी

[३] लीवर का पर्याप्त मात्रा मे सूगर का सनचय न होना

[४] आन्तो द्वारा श्क्कर का चयापचय ठीक से न करना

[५] पैन्क्रियाज की सूजन होना

[५] इन्सुलीन का अधिक श्राव होना

[६] रक्त मे शक्कर रिलीज या मिलाने का physiological process  का बाधित होना

आदि आदि कारण होते है /

कम शक्कर होने से कई तरह के लक्षण पैदा हो जाते है

[१] चक्कर आना

[२] बेहोशी होना

[३] अचानक कम्जोरी आ जाना

[४] शरीर का लस्त पस्त पड़ जाना

[५] Blood pressure  का अचानक कम या ज्यादा हो जाना

[६] अचानक बिना किसी दर्द के silent heart attack  होना और इससे मृत्य होना

आदि आदि खतरनाक स्तिथिया पैदा हो जाती है /

इसलिये रक्त मे कम शक्कर होने की स्तिथि को controle  करना चाहिये और समय रहते इसका इलाज करना चाहिये /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण मे लीवर और पैन्क्रियाज और छोटी आन्त की pathophysiology  अधिकतर मरीजो मे प्राप्त होती है /

आयुर्वेद के मतानुसार जब रन्जक पित्त और पाचक पित्त तथा पित्त-कफ के सन्युक्त दोष होते है और रस और रक्त धातु की विकृति पाई जाती है तभी यह स्तिथि बनती है / इसीलिये पित्त और कफ दोष नाशक औषधियो का उपयोग करने से यह बीमारी अव्श्य ठीक होती है /

इसमे परहेज अवश्य करना चाहिये और शक्कर का उप्योग ऐसे समय मे अवश्य करे जब आपात स्तिथि हो जाये /

आयुर्वेद -आयुष चिकित्सा करने से रक्त मे कम सूगर होने की बीमारी जड़ मूल से अवश्य ठीक होती है /

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