EPILEPSY CURED CASE TREATED SUCCESSFULLY BY AYURVEDA-AYUSH REMEDIES ; मिर्गी के एक रोगी का बयान जो ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित आयुर्वेद का इलाज करा कर ठीक हो चुका है


छत्तीस गढ राज्य  के रहने वाले एक  मिर्गी रोग से पूरी तरह से ठीक हो जाने और पूर्ण आरोग्बय प्राप्त कर लेने वाले मरीज के आरोग्य सन्देश को दूसरे लोगो तक पहुचाने के लिये जब मैने इसका interview वीडियो कैमरे के सामने लेने का प्रयास किया तो यह मरीज किसी तरह से इसके लिये तैयार ही नही हुआ बल्कि वह नराज और अपना रोष प्रकट करने लगा / बहुत समझाने के बाद कि “आपका सन्देश दूसरो तक पहुचने से मिर्गी को लाइलाज समझने वाले भी लाभान्वित होन्गे, यह रोगी बड़ी मुश्किल के साथ वीडियो कैमरे के सामने इस बात पर राजी हुआ कि उससे ज्यादा सवाल न पूछे जांय और आधा मिनट का वह समय देगा ”

रोगी की इस इच्छा पर मैने केवल तीन सवाल उससे किये और यह आपके सामने वीदीयो के द्वारा प्रस्तुत है /

यह एक बहुत बड़ी विडम्बना है कि कठीन और असाध्य और सारे जीवन न ठीक होने वाले रोगो से परेशान मरीजो के आयुर्वेद और आयुष इलाजे से ठीक हो जाने के बाद वे रोगी किसी दूसरे को भी यह नही बताते कि उनको किस डाक्टर और किस सन्सथान के इलाज करने से आराम मिला है या वे कहा का इलाज करा कर ठीक हुये है /

खास करके वे मरीज जो हमारे यहा का इलाज करके ठीक हो चुके है जिनमे सफेद दाग, LEUCODERMA, VITILIGO, मिर्गी, EPILEPSY, मानसिक रोगी, H.I.V., A.I.D.S. आदि आदि असाध्य बीमारियो से ठीक हो चुके है जिनके बारे मे बताया गया था कि ऐसी बीमारियो का कही पर भी कोई इलाज नही है और रोगी कोसारी जिन्दगी रोग से ऐसे ही भोगना पडेगा / ऐसे रोगियो को आराम मिलने या पूरी तरह से ठीक हो जाने के बाद भी ये  रोगी किसी दूसरे को भी नही बताते कि उनकी बीमारी कहां और किस डाक्टर द्वारा ठीक की जा चुकी है /

इस बारे मे मैने बहुत से मरीजो से बात की , अधिकान्श का कहना है कि वे अपनी तरह की बीमारी के मरीज को देखकर उसको बताने से परहेज करते है कि उनकी तकलीफ कहा से ठीक होगी इसके पीछे कई कारण गिनाये जाते है जिनमे एक सबसे बड़ा कारण समझ मे आया कि जिस बीमारी का इलाज कराकर मरीज ठीक होता है वह अपनी बीमारी की बात छिपाकर रखना चहता है और किसी दूसरे के साथ share  नही करना चाहता है और इसे गुप्त रखने मे अपनी भालाई समझता है इसीलिये वह अपनी तकलीफ कहा से ठीक हुयी है इसको disclose  नही करना चाहता है / दूसरा कारण यह है कि अगर उसको रोगी द्वारा भोगी जा चुकी तकलीफ की तरह ही ऐसी ही बीमारी से त्रस्त कोई मरीज दिखाई देता है तो वह उसको चाहता है कि वह वता दे कि उसे कहा इलाज कराना चाहिये लेकिन वह इसलिये नही बताता कि मरीज उससे पूछेगा कि क्या आपने वहा या अपके किसी रिश्तेदार ने वहां इलाज कराया है ?? तीसरा कारण यह है कि रोगो से ठीक हो चुका रोगी इस शन्का के कारण दूसरे को नहॊ बताता  है कि कही यह उसी डाक्टर के पास अगर इलाज के लिये गया तो कही मेरी बीमारी के बारे मे बात न खुल जाय /

इसीलिये मरीज अपनी identity  छुपाते है और किसी दूसरे को नही बताते कि उनकी बीमारी किस जगह से और कहा से ठीक हुयी है /

मिर्गि००१

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