महीना: अक्टूबर 2014

COMPARATIVE EVALUATION OF “” COMPUTERISED E.T.G. AYURVEDASCAN ” AND ”’EXERCISING TREAD MACHINE E.T.G. AYURVEDASCAN ” FINDINGS FOR ACCURATE DIAGNOSIS IN VIEW OF AYURVEDA ; तुलनात्मक तौर पर ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और व्यायाम और शारीरिक मेहनत कराकर ट्रीड मशीन ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन द्वारा प्राप्त आन्कड़ो पर आधारित आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तो का सटीक आनकलन


manasik rogआयुर्वेद की सुपर स्पेशियलिटी वाली दोष-रोग निदान की उच्च स्तरीय तकनीक “”कम्प्य़ूटराइज्ड  ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन”” COMPUTERISED E.T.G. AYURVEDASCAN TECHNOLOGY और आयुर्वेदा स्कैन की नवीन विकसित की गयी तकनीक ” ऎक्सरसाइजिन्ग ट्रीड मशीन ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन” EXERCISING TREAD MACHINE E.T.G. AYURVEDASCAN TECHNOLOGY तकनीक के उपयोग से रोगी व्यक्ति का आयुर्वेद के हिसाब से आयुर्वेद के दोष-निदान और शरीरिक-रोग-निदान को सटीक और अचूक  पहचानने और समजह्ने का तरीका बन गया है /

दोनो आयुर्वेद की निदान विधियो के तुलनात्मक आनकडो और डाटा और ट्रेस रिकार्ड का अध्ध्य्यन करने के बाद रोगी वयक्ति की बहुत सी anomalies  पहचान मे आ जाती है /

नीचे दिये गये रिकार्ड ट्रेसेज को देखिये /

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उपर दिये गये ट्रेस रिकार्ड मे कम्प्यूटराइज्ड ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन मशीन की रिकार्डिन्ग दी गयी है और तुलना करने के उद्देश्य से एक्सर्साइजिन्ग  ट्रीड मशीन ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन मशीन द्वारा रिकार्ड किये गये ट्रेस दिये गये है /

ऊपर दी गयी ट्रेसेस मे शरीर के दो स्थानो की ट्रेस रिकार्डिन्ग मे परिवरतन देखने मे आये है/

सबसे महत्वपूर्ण परिवरतन EPIGASTRIUM  स्थान से रिकार्ड किये गये ट्रेस मे मिला है /

दूसरा परिवरतन नीचे से दूसरा ट्रेस रिकार्ड मे मिला है / लेकिन यह परिवरतन कम INTENSITY LEVEL  का है /

तीसरा परिवर्तन ऊपर से पहली वाली TRACE  का है जिसमे NEGATIVE VERTICAL waves अपना  नेचर  बदल कर POSITIVE VERTICAL WAVES  हो गयी है /

यह इस बात की ओर इशारा करता है कि शरीर का electrical behaviour  और electrical diffusion अगर किसी तरह के शरीर के अन्गो मे anomalies  उपस्तिथि है तो यह अति उत्तेजित अवस्था मे बदल जाता है /

महत्वपूर्ण बात यह है कि इन anomalies  का  आयुर्वेदिक या होम्योपैथिउक या यूनानी का   इलाज करने के बाद यह electrical behaviour  और  electrical diffusion  सामन्य और पुन: उसी अवस्था मे आ जाता है जैसा कि शान्त अवस्था मे किये गये परीक्षण मे प्राप्त होता है /

EPIGASTRIUM REGION से रिकार्ड किये गये ट्रेस मे POSITVE TRACES  कम्प्यूटराइज्ड ई०टी०जी० आयुर्वेदस्कैन मे रिकार्ड की गयी है जबकि यही और इसी स्थान से रिकार्ड की गयी EXERCISING TREAD MACHINE E.T.G.AYURVEDASCAN  की traces  मे NEGATIVE TRACES मिली है /

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ऊपर की रिपोर्ट मे Epigastrium  के इसी हिस्से का एक short Evaluation  दिया गया है जिसमे देखने पर यह मिलता है कि इस रोगी का PANCREAS  का Intensity Level  सामान्य से कम है /

आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तो के मद्दे-नज़र यह पता चलता है कि इस रोगी को “पाचक – पित्त दोष-भेद ” और “रन्जक पित्त-दोष-भेद ” मौजूद है /

रोगी की विस्तार से नय सभी  जान्चे करने के बाद  यह establish  हुआ कि इसे पित्त दोष है और पित्त दोष-भेद के निदान के बाद इसे रोग निर्मूलन हेतु पित्त तथा वायु नाशक आयुर्वेदिक इलाज के लिये दवाये  PRESCRIBE   की गयीं /

अब आयुर्वेद की आधुनिक तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के पान्च परीक्षण – शाखाये हो गयी है /

1- MANUAL E.T.G. AYURVEDASCAN

2- COMPUTERISED E.T.G.AYURVEDASCAN

3. EXERCISING TREAD MACHINE E.T.G. AYURVEDASCAN

4- CONTINUOUS SELECTED BODY REGIONS E.T.G.AYURVEDASCAN

5- CONTINUOUS E.T.G.AYURVEDASCAN

इसके आलावा अयुर्वेद के रक्त परीक्शण तथा आयुर्वेद के मूत्र परीक्षण भी किये जाते है / आयुर्वेद के रक्त परीक्षण और मूत्र परीक्षण मे  त्रिदोष,और त्रिदोष-भेद और रक्त  तथा मूत्र  के  अन्दर पाये जाने वाले  केमिकल का पता लगता है /

सभी प्राप्त आन्कड़ो का विश्लेषण करने के बाद पता चल जाता है कि रोगी को किस तरह की तकलीफ है / यह सारा विवेचन और खोज बीन  आयुर्वेद के शास्त्रो मे महर्षियो द्वारा व्यक्त किये गये मौलिक सिध्धान्तो पर  आधारित होता है /

निष्कर्ष निकलने के बाद आयुर्वेद के विधि विधानानुसार आयुर्वेद औषधियो का चुनाव करके मरीज को बता दिया जाता है कि उसे [१] क्या जीवन चर्या अपनाना  है ? [२[ क्या पथ्य और परहेज करना है ? [३] विषेष रूप से क्या भोजन अप्नाना चाहिये [४] क्या दवा लेना चाहिये ? आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक या यूनानी आदि आदि [५] मरीज की specific needs  के हिसाब से जो भी उसके हित मे होता है यह भी बताया जाता है ?

आयुर्वेद की इस आधुनिक निदान ग्यान की तकनीक से प्राप्त आन्कड़ो का विष्लेषण आधारित आयुर्वेदिक / होम्योपैथिक / यूनानी इलाज करने से रोग चाहे जैसा हो और जो भी हो  सभी ठीक होते है /

अगर रोग साध्य अव्स्था के हो , सुख साध्य हो या कष्ट साध्य हो , यह सभी बहुत शीघ्रता से ठीक होते है /

WISHING YOU ALL HAPPY DEEPAWALI ; आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभ कामनायें


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COUGH ; HECTIC COUGH ; ALL KINDS OF COUGH ; सभी तरह की कफ और खान्सी ; आयुर्वेदिक आयुष इलाज द्वारा पूर्ण आरोग्य सम्भव


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PRAVAL PANCHAMRAT ; A GREAT AYURVEDIC COMBINATION OF “CALCIUM” ; REMEDY AS WELL AS NUTRITION ; प्रवाल पन्चामृत ; आयुर्वेद की एक महान औषधि और खाद्य-पूरक “कैलसियम” का सर्वश्रेष्ठ विकल्प


प्रवाल पन्चा मृत आयुर्वेद की एक ऐसी औषधि है जिसका combination  कई ऐसे कैल्सियम आधारित तत्वो से मिलकर बना है जो कुदरती और प्रकृति मे पाये जाते है / इसमे प्रयोग किये जाने वाले सभी ingredients  समुद्र मे मिलते है और उन्ही का उपयोग औषधि  को बनाने के लिये  उपयोग क्ररते हैं /

जिन समुद्री उत्पाद को इस औषधि को बनाने के लिये उपयोग करते है ये निम्न है ;

१- मोती या मुक्ता या PEARLS

2- प्रवाल या मून्गा या CORAL

3- मुक्ता शुक्ति या PEARL’S SHELL

4-  कौडी या COWERY

5- शन्ख या SACRED CHANK

इन पान्चो द्र्व्यो की  आयुर्वेद के नियमानुसार अलग अलग भस्म बनायी जाती है / इसके बाद इन सभी द्रव्यो की भस्मो   को बराबर बराबर मात्रा मे लेकर इन सबको   गाय के दूध के साथ बराबर मात्रा लेकर खरल मे डालकर   घोटते   है और जब यह सब द्रव्य घोटते घोटते सूख जाते है तब इसे गजपुट मे रखकर फूकते है /  यह कई बार किया जाता है /  ऐसी प्रक्रिया कई बार करने के बाद इसे बीमारियो मे उपचार के लिये प्रयोग करते है /

समुद्री उत्पाद इस दवा मे शामिल होने के कारण इस औषधि मे कैल्सियम के साथ साथ अन्य बहुत तरह के मिनरल्स भी मिल जाते है /

1- मोती मे कैल्सियम कार्बोनेट 90  से  92 %प्रतिशत,  कारबनिक पदार्थ 4  से 6 % प्रतिशत तथा जल 2  से  4 % प्रतिशत तक उपस्तिथि होता है /

2- मुक्ता शुक्ति के अन्दर पाये जाने वाले contents / chemical composition  मोती की ही तरह के होते है लेकिन इसमे कुछ अन्य द्रव्य अधिक पाये जाते है /

3- प्रवाल मे कैल्सियम कार्बोनेट 86.9 %  प्रतिशत और मैगनेशियम कार्बोनेट 6.8 % प्रतिशत और कैल्सियम सल्फेट 1.27 % प्रतिशत और फेरस आक्साइड 1.72 % प्रतिशत और कार्बनिक पदार्थ 1. 35 % प्रतिशत और पानी 0.55 %  प्रतिशत और फास्पोरिक अम्ल और सिलिका  आदि 1.33 % प्रतिशत मौजूद होते हैं /

4- शन्ख के अन्दर केलसियम और फास्फोरस और लौह तत्व उपस्तिथि होते है /

५- कौड़ी यानी कपर्दिका के अन्दर कैल्सोयम फास्फेट और कल्सियम कार्बोनेट और फ्लोराइड और मैग्नीशियम फास्फेट और मैन्गनीज और सोडियम क्लोराइड जैसे तत्व पाये जाते है /

उपरोक्त सभी तत्वो का  बार बार और कई कई बार  भस्मीकरण हो जाने के बाद  इसके सभी तत्व आपस मे मिलकर सूच्छ्म से सूच्छ्म अति-महीन होकर NANO-PARTICLES  मे बदल जाते है / इस तरह से इन वस्तुओ का ATOMIC STRUCTURE  का बदलाव    NANO PARTICLES  मे बदलकर अति शक्तिशाली हो जाता है / इस तरह से यह एक अति महत्व्र पूर्ण औषधि बन जाती है /

EBOLA VIRUS ; “INDIANS SHOULD NOT HAVE PANIC WITH THIS DISEASE CONDITION’S CONSEQUENCES” ; “ईबोला वायरस से किसी भी भारतीय को घबराने की जरूरत नही है ” हमारे देश मे इस बीमारी के बचाव और इलाज के लिये भारतीय चिकित्सा विग्यान मे बहुत से साधन है


ईबोला वायरस से किसी भी भारतीय को डरने की जरूरत नही है / इतना ज्यादा प्रोपागन्डा इस बीमारी के बारे मे मीडीया मे फैलाया गया है जिससे देखकर और सुनकर देश वासियो मे डर का महौल बनना शुरू हो गया है /  जागरुकता होना बीमारी के बारे मे, यह एक जरूरी बात है ताकि लोग यह समझ सके और सतर्क रहे यह मकसद होना चाहिये /  लेकिन इसकी आड़ मे दहश्त का माहौल पैदा करना ठीक नही है /

मेरा मानना है जो मेरे  वायरस का इलाज  करने के बाद प्राप्त  चिकित्सकीय अनुभव पर आधारित है कि कोई भी  वायरस  या बैकटीरिया   उन्ही लोगो को अधिक प्रभावित करता है जिनके खून का pH  अम्लीय स्तर का  यानी ACIDIC REACTION  का  होता है / जिनके खून का pH का स्तर ALKALINE REACTION  का होता है , उनको कोई भी वायरस हो या बैक्टीरिया हो वह प्रभावित नही करता है /

अधिकतर दवाये chemicals  से बनी हुयी होती है / कोई भी केमिकल होगा उसके सेवन करने से Blood ACIDITY  बढती है , यह pH  कहा जाता है / मानव रक्त का pH  का स्तर 7.3 के आसपास होता है / इससे नीचे होने पर रक्त अलकालाइन कहा जाता है और इससे अधिक होने पर अम्लीय यानी एसीडिक समझा जाता है /

वायरस और बैक्टीरिया alkaline stage  होने पर    रक्त  मे  अधिक    नही पनपते है / शरीर मे  VIRAL   और    Bacterial invasion  होने पर  शरीर के अन्दर कई तरह के chemical changes  होने शुरु हो जाते है जिनसे खून खराब होता है और इस स्तिथि को TOXEAMIA  कहते है / जब टाक्सीमिया की स्तिथि बनती है तब रक्त  pH   ACIDIC होने लगता है / केमिकल युक्त दवाये चून्कि रक्त की pH  बढा देती है /  इसलिये वायरस या बैक्टीरिया इस बढे हुये  pH  के स्तर को सहन नही कर पाते और इसी कारण से उनकी growth  के लिये जिस स्तर का blood environment  चाहिये वह नही मिल पाता है /

वायरस को जब  ग्रोथ के लिये   स्तरीय growth promoting factors  नही मिल पाते है तब उनका every seconds multiplication का काम  बढना रुक्ने लगता   है / इस रोक के साथ ही वायरस के दवारा पैदा हुयी शारीरिक तकलीफे ठीक होना शुरू हो जाती है /

लेकिन जब वायरस या बैक्टीरिया  अपना स्वरूप बदल कर किसी नये रूप मे आकर शरीर पर आक्रमण करते है तो वे उस अम्लीय स्तर के अभ्यस्त हो जाते है यानी वे अधिक अम्लीय स्तर को बर्दाश्त कर जाते है और इसी कारण उनको मारने के लिये जितनी अन्टी बायोटिक की मात्रा की जरूरत होती है  उससे अधिक देने की जरूरत पड़ जाती है / इसे ही anti-biotic resistence  कहा जाता है /

दूसरी  तरफ जैसा कि मेरा अनुभव है और वायरस के रोगियो का इलाज करने के बाद प्राप्त अनुभव हुआ है उससे वायरस के मरीजो को जब alkaline food and drinks  खाने के लिये बताया गया तो आयुर्वेदिक और होम्योपैथी की द्वाओ का बहुत अच्छा असर हुआ और मरीज बहुत जल्द ठीक हुये / antibiotic and antipyeretic  दवाओ का बहुत कम उपयोग यानी न के बराबर करना पड़ा और वह भी कुछ खुराको मे ही /

आयुर्वेद की लगभग सभी दवाये herbal  होने के कारण यह ALKALINE NATURE  की होती है और इनके खाने से रक्त कभी भी acidic  नही होता बल्कि रक्त की pH सामन्य अवस्था मे ही बनी रहती है / आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान मे हर तरह के वायरल इन्फेक्शन और अन्य सभी इन्फ़ेक्शन की बहुत अच्छी दवये मौजूद है इसलिये किसी भी भारतीय को इस बीमारी के अटैक से घबराना नही चाहिये / हमारे यहा होम्योपैथी और यूनानी के अलावा अन्य चिकित्सा विग्यान मौजूद है जिनके अन्दर किसी भी प्रकार की प्राथमिक स्तर की बीमारी को ठीक करने के लिये इलाज मौजूद है /

रक्त की pH को ठीक रखने  के लिये ALKALINE FOOD और  Drinks  लेना चाहिये /

जिन देशो मे EBOLA  फैला हुआ है वहा के नागरिको के Blood  के pH  का स्तर ACIDIC  है क्योन्कि वे मान्स और मदिरा का सेवन करते है और शाकाहारी नही है / मान्स मदिरा खाने से रक्त का pH बहुत बढता है और इसी कारण से वायरस को शरीर मे फैलने का environment  मिल जाता है /

खान पान और जीवन शैली को अपनाने से EBOLA  VIRUS  से बचाव होगा / जब भी तकलीफ हो फौरन आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक या यूनानी दवाओ का सेवन करना शुरू कर देना चाहिये/

इसी ब्लाग मे कई ऐसे फार्मूले आयुर्वेद और होम्योपैथी के दिये गये है जो सभी तरह के वायरस के अवतार के इलाज के लिये कारगर है , इन फार्मूलो का उपयोग करने से हर तरह के वायरस से बचे रहेन्गे /

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“OPERATION” AND “SURGICAL INTERVENTION” HOBBY ; MOST PEOPLE’S SEEKS ALWAYS FOR “OPERATION” METHODS IN ALL DISEASE CONDITIONS ; “आपरेशन” कराने का शौक ; बहुत से ऐसे लोग है जो हर बीमारी के इलाज के लिये “आपरेशन” कराना सबसे बेहतर समझते है


टाइटिल पढकर चौकिये नही ? और चौकने की जरूरत भी नही है ? इस दुनिया मे ऐसे लोगो की कमी नही है जिन्हे शरीर की सभी और  हर होने वाली  बीमारी का इलाज आपरेशन यानी  SURGICAL INTERVENTIONS  द्वारा ही कराने  का शौक होता है / आप्रेशन कराने का शौक भी  दूसरे शौक की तरह से ही है /

दुनिया मे तरह तरह के लोग है जिनको किसी न किसी बात का शौक होता है , किसी को पतम्ग ऊड़ाने का शौक, किसी को सिगरेट पीने का शौक, किसी को मन्दिर जाने का शौक, किसी को ज्वेलरी का शौक, किसी को पेन्टिन्ग का शौक , किसी को पढने का शौक, किसी को बहस करने का शौक और किसी को कुछ और किसी को कुछ दूसरा शौक होता है / कोई बिरियानी का शौक रखता है कोई चाय पीने का शौक रखता है / इसी तरह से मुझे बहुत ऐसे मरीज मिले जिनको आप्रेशन कराने का शौक होता है /

इन मरीजो को ऐसे ही आपरेशन करने वाले डाक्टर भी मिल जाते है / कहावत है जहां चाह है वही राह है / आप्रेशन कराने  के लिये बेताब मरीज  मौजूद है तो उनके लिये आपरेशन करने वाले डाक्टर और सर्जन भी मौजूद है / क्यो न हो ? आपरेशन कराने के लिये सर्जन चाहिये वह मौजूद है , आप्रेशन थियेटर चाहिये वह भी मौजूद है , आप्रेशन के लिये infrastructure चाहिये वह भी मौजूद है , आप्रेशन कराने वाला मरीज चाहिये उनकी भी कमी नही है /

बीमारी के इलाज के लिये सर्जरी की जरूरत हो या न हो लेकिन मुझे कई सैकड़े ऐसे मरीज मिले है जिनको आपरेशन क्राने का शौक है और शौक था / आप्रेशन कराने का शौक था , से मतलब यह है कि ऐसे लोग अब इस दुनिया मे नही है और अपना कीमती जीवन गवांकर परलोक सिधार गये / जिन्हे आपरेशन कराने का शौक है उनमे से अभि बहुत से जिन्दा है लेकिन उनमे से कोई भी सही नही देखने मे आया सब्के सब या तो बिस्तरा पकडे  हुये लेटे लेटे हुये अपनी जिन्दगी गुजार रहे है  या फिर किसी की सहायता के मोहताज बनकर रह गये है /

नीचे कुछ उदाहरण ऐसे मरीजो के है जो मेरे प्रैक्टिस जीवन मे आये और उनको मैने मना किया था कि वे आपरेशन मत कराये लेकिन वे और उनके तीमार दार  माने नही और क्या हुआ ऐसे लोगो के साथ यह अनुभव मै आप लोगो के साथ शेयर कर रहा हूं /

१- मुझे एक महिला का केस याद आता है जिसकी उम्र २७ साल के आसपास की थी / उसके पेट मे right hypochondria  रीजन मे एक छोटी सी फुन्सी हुयी जो बाद मे बढकर लगभग १५ मिलीमीटर के गोलायी लिये हो गयी  थी /  यह फुन्सी दर्द कर रही थी जैसा कि फोड़ो मे होता है / महिला गां व की रहने वाली थी /  उन्ही के पड़ोस के एक सज्जन जो  कानपुर नगर महापालिका मे मुलाजिम थे और मेरे  मरीज थे , उन्होने इस महिला को इलाज के लिये बताया कि मेरे पास आ जाये / महिला इसी अवस्था मे मेरे पास आयी थी जब उसके दर्द होना शुरू हुआ था /  मैने उसका check up  किया और खून की जान्च तथा X-ray के लिये उसके तीमार दारो को कराने के लिये  कहा /

रिपोर्ट मे एक्स रे और रक्त की जान्च सामान्य निकली /

महिला को दो दिन की दवा दी गयी और दो दिन बाद दिखाने के लिये बताया गया / दो दिन बाद महिला आयी उसको आराम था दर्द थोड़ा कम हुआ था और सूजन भी नही बढी थी / उसको दो दिन की और दवा दी गयी और कहा गया कि तीसरे दिन आकर दिखा जाय /

तीसरे दिन उस महिला रोगी के  साथ  सात लोग और आ गये जो उसकी ससुराल तथा मायके पक्ष के लोग थे / बैठने के बाद उनमे से एक एक कर सवाल पूछने लगे / उनके इस तरह से सवाल पूछने और सवालो का मकसद और मिजाज सुनकर मुझे लगा कि मरीजा को छोड़्कर सभी लोग यह चाहते है कि मेरी दवा बन्द करके इसकी फुडिया का आपरेशन करा दिया जाये /  मरीजा आप्रेशन कराना नही चाहती थी लेकिन उसके रिश्तेदार उसको आपरेशन कराने के लिये जोर डाल रहे थे /  उसका एक रिश्तेदार गाली गलौज की भाषा इस्तेमाल करने लगा और मुझको गालिया सुनाने लगा /

अन्त मे मैने उनकी सारी बाते सुनकर और  उन सबका विचार जान कर दो बाते कही कि [१] अब यह सब आप पर निर्भर है कि आप क्या कराना चाहते है क्योन्कि मरीज आपका है / लेकिन मै यहां यही कहून्गा कि मै अब आप्के मरीज का इलाज नही करून्गा चाहे आप मुझे अब कितनी ही फीस क्यो न दें ? लेकिन इसके साथ यह भी कहून्गा कि इसका इलाज दवाओ से करियेगा और किसी भी दूसरे डाकटर को सलाह लेकर और दिखाकर करे, लेकिन करे दवाओ का इलाज [२] इसका आपरेशन मत कराइयेगा क्योन्कि यह आपके रोगी के हित मे नही होगा ? आपरेशन खतरनाक भी हो सकता है /

बात आयी गयी हो गयी / लगभग दो महीने बाद उसके पड़ोसी जिसने उस महिला को मेरे पास इलाज के लिये भेजा था अप्ने इलाज के सिल्सिले मे मेरे पास आये /  बातो  ही बातो मे उन्होने मुझे याद दिलाते हुये बताया कि जिस महिला को मेरे पास इलाज के लिये उन्होने भेजा था  उसकी मौत हो गयी है /  हुआ यह कि मेरे दवाखाने से बाहर निकलते ही उस महिला के तीमार दार उसे सीधे लेकर अस्पताल चले गये और उसी रात उसका आप्रेशन कर दिया गया / आप्रेशन करने के आठ घटे बाद ही उस महिला की मौत हो गयी /

यह सुनकर मुझे अफ्सोस बहुत हुआ और मन मे यह विचार भी हुआ कि “मैने बहुत ईमानदारी के साथ महिला के तीमार दारो को इलाज कराने की सलाह दी थी , क्या ईमान्दारी से सलाह देना भी एक बड़ा गुनाह है ?”

२- दूसरा केस एक पुरुष का है जिसे गरदन मे बहुत तेज दर्द होता था जिसकी वजह से वह बहुत परेशान था / मै और मेरे सहयोगी उसका इलाज कर रहे थे / दर्द कैसे श्रू हुआ और इसका मूल कारण क्या है, इसको जानने के लिये इसके रोग का पूरा इतिहास जानान जरूरी था / लिहाजा इस रोगी का रोग विवरण जानने के लिये सभी जरूरी बाते लिपि बध्ध की गयी /

सरा मामला समझ मे आया कि इसको रोग की शुरुआत कहां से हुयी ? हुआ यह कि इसके पडोस के एक परम घनिष्ठ मित्र के यहा शादी थी / इसलिये शादी के लिये इस शख्स ने बहुत दौड़ धूप की, कई किलो  सामान लादा , कई किलो सामान उठाया और लोडिन्ग और अप-लोडिन्ग की / दिन भर रात भर शादी की दौड धूप मे व्यस्त रहा जिसके कारण उसे आराम नही मिला /  इसी दरमियान उसे गरदन मे दर्द होने लगा / काम मे व्यस्त रहने के कारण वह नजदीक के  एलोपैथी के  डाकटर से दवा लेकर खाता रहा और शादी मे जितना भी काम हो रहा था उसको निउपटाता रहा /

शादी का कार्य क्रम पूरा हो जाने के बाद भी उसका दर्द नही ठीक हुआ और लगातार बना रहा / यह दर्द cervical region से पैदा होता था और पूरी गर्दन के पीछे के हिस्से से चल कर पूरे सिर और आन्ख तक पहुचता था / यह दर्द इतना तेज होता था और अचानक इतना तेज होता था कि मरीज दर्द के कारण बहुत जोर से चीख उठता था /

इसका एक भाई  होम्योपैथिक  मेडिकल कालेज कानपुर मे द्वितीय वर्ष का क्षात्र था / उसने अपने भाई को कानपुर बुला लिया / यहां आकर उसने कालेज के अस्पताल मे हम लोगो से समपर्क किया / इसे इन्डोर अस्पताल मे भरती कर लिया गया / अस्पताल प्रबन्धन ने इस केस को handle  करने के लिये मुझे लगाया /

मैने इस मरीज का रोग इतिहास पढकर कुछ बाते मरीज से पूछी और बाद मे अपने senior  Doctors से discussion  करके एक लाइन आफ ट्रीट्मेन्ट    निर्धारित   की /  इसे आराम करने की सलाह दी गयी    क्योन्कि यह विचार किया गया कि इसे over exertion  के कारण से मान्श्पेशियो का खिंचाव और इसके साथ पैदा हुयी neuro-musculo-skeletal anomalies  पैदा हुयी है जिनके कारण inflammatory  condition  और swelling  पैदा ह्यी और इसके reflection-diffusion  के कारण यह समस्या पैदा हुयी /

इसे nutritious  भोजन देने की सलाह दी गयी कि इसे क्या क्या खाना चाहिये जिससे इसे अधिक से अधिक बेहतर किस्म का कुदरती  न्यूट्रीशन   मिले / साथ साथ complete bed rest without any movement  की सलाह दी गयी /

इस मरीज को उसकी तकलीफ के हिसाब से  जो भी selected remedies   चुनी गयी , वे सभी दवाये internal use  के लिये दी गयी  /

लगभ्ग १० दिन के इलाज से मरीज पूरी तरह से ठीक हो गया / यह मेरे लिये बहुत  interesting case  था मैने इस केस मे बहुत मेहनत की / अस्पताल मे होने के कारण सभी तरह की सुविधाये थी जो मरीज को मुहैय्या करायी गयी / मरीज को हिदायत दी गयी कि वह इसी तरह से कुछ महीने तक अपनी जीवन चर्या और दवाये चलाता रहे और बीच बीच मे आकर consultation  करता रहे /

कई महीने बाद एक दिन यही मरीज फिर वापस आया और बताया कि उसे फिर से दर्द होना शुरू हुआ है, लेकिन यह उतना तेज नही है जितना पहले था /  इसका फिर दुबारा अस्पताल मे भर्ती करके इलाज किया गया / मरीज दुबारा स्वस्थ्य होकर वापस चला गया /

पान्च माह के लगभ्ग बीत जाने के बाद एक दिन मुझे इसके भाई ने कहा कि उसके भाई को फिर दर्द हुआ है / जहा यह रोगी रहता था वही के    किसी डाक्टर ने सलाह दी है कि इलाहाबाद शहर [कानपुर शहर  से २५० किलोमीटर दूर है ] मे  अस्पताल के अमुक डाक्टर ने कहा है कि गरदन का  आपरेशन कराने के बाद इसका दर्द  हमेशा के लिये  ठीक हो जायेगा /

क्षात्र ने पूछा कि आपकी क्या राय है ? मैने कहा कि इस तरह का आप्रेशन कराना खतरे से खाली नही है / इसे मत कराये यही अच्छा है , यह जान लेवा भी साबित हो सकता है     गयी

[अभि मैटर लोड करना बाकी है]

ALLERGY ; REFLECTION SYNDROMES OF INTERNAL VISCERAL DISORDERS ; TOTAL CURABLE BY AYURVEDA – AYUSH TREATMENT ; एलर्जी ; शरीर के अन्दरूनी अन्गो के कार्य-विकृति या विकृति के कारण से होने वाली बीमारी ; आयुर्वेद -आयुष के इलाज से पूर्ण आरोग्य सम्भव


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एलर्जी यानी एक तरह की Sensitivity शरीर के अन्दर पैदा  हो जाती है जिससे कई तरह की शारीरिक बीमारिया जिनमे  त्वचा और  फेफड़ो और ENT  के   अलावा  mucous membranes  से सम्बन्धित कुछ निदानात्मक और UNDIAGNOSED SYNDROMES  पैदा हो जाते है / यह  किसी भी कारण से हो सकती है और कब किस तरह की तकलीफ हो जाये ,  इसका कोई भरोसा नही होता है / इस बीमारी के कारण के बारे मे कुछ भी विश्वास के साथ नही कहा जा सकता है कि यह बीमारी होने का असली कारण क्या हो सकता है ?

फिर भी कुछ मरीजो के उपचार करने के बाद जिस तरह से मरीज ठीक हुये उनके उदाहरण नीचे दिये जा रहे हैं /

१- एलर्जी से पीडि़त इस मरीज का उदाहरण शायद अब तक इस बीमारी का इलाज करने वाले सभी मरीजो मे बहुत अजूबा किस्म का है / यह बहुत interesting  है और इसीलिये मै इसे आप सबके साथ शेयर कर रहा हूं / यह अलेर्जी का रोगी विवरण एक महिला  का है जिसके पति भारतीय सेना मे अधिकारी थे/ लगभग ३० साल पहले का यह केस है , उस समय मै होम्योपैथिक मेडिकल कालेज कानपुर मे लेक्चरर था  और होम्योपैथिक छात्रो को कालेज और अस्पताल मे पढाता था / इस दौरान मै होम्योपैथिक फैकल्टी  आगरा विश्व विद्यालय आगरा और कानपुर विश्वविद्यालय , कानपुर का EXAMINER  भी रहा था / इस समय ETG AyurvedaScan  तकनीक बहुत शैशव अवस्था मे थी और इसका बहुत अच्छा  development  नही हुआ था /

भारतीय सेना के इस अधिकारी की  पत्नी को बहुत भयन्कर किस्म की एलर्जी हो गयी थी जिसका इलाज देश के उस समय के सर्वोत्तम चिकित्सा सन्सथानो मे किया जा चुका था / मरीजा का इस बीमारी का इलाज लगभग १० महीनो से चल रहा था / लेकिन इलाज करने के बाद भी रोगी को किसी किस्म की आराम नही मिल रही थी बल्कि तकलीफ बढती चली जा रही थी जिससे परिवार के लोग बहुत परेशान से थे / इस अधिकारी के एक जूनियर अफसर ने सलाह दी कि जब एलोपैथी के इलाज से नही फायदा मिल रहा है तो क्यो न होम्योपैथी या आयुर्वेद का इलाज किया जाना चाहिये ?  यह अधिकारी अपने बच्चो का इलाज मेरे से ही कराता था / उसने सलाह दी कि डाक्टर बाजपेयी GERMAN RETURN  है और वही से homoeopathy  पढकर आये है तो क्यो न उनसे सलाह लेकर इलाज किया जाये ?

मरता क्या न करता वाली हालत थी, अपने जूनियर अफसर की सलह मान कर रोगी को इलाज के लिये मेरे दवाखाने मे लाया गया / मरीज को देखकर मै थोड़ा परेशान हुआ कि यह कैसे जिन्दा है ? रोगी  के इतनी  भयन्कर खुजली सारे शरीर मे हो रही थी कि दो आदमी उसको खुजली से राहत देने के लिये खुजली वाली जगह को सहलाते रहते थे / रोगी कि तव्चा एक दम लाल और छोटे छॊटे  दानो से भरी हुयी थी / उसका सारा शरीर सूजा हुआ था /

मैने इससे पहले एलर्जी का इतना भयन्कर मरीज कभी नही देखा था / हलान्कि अब तो इससे भी ज्यादा intensity level  के मरीज देख चुका हू और उनका इलाज कर चुका हूं/ बहरहाल मैने उनसे कहा कि एक हफ्ते मे यह ठीक हो जायेन्गी , जैसा कि मेरा उस समय का अनुभव था /

एक ह्फ्ता के बाद भी इस रोगी किस्तिथि जस की तस रही और इसे एक प्रतिशत भी  आराम नही मिला / मैने कहा कि कभी कभी ऐसा होता है कि आराम नही मिलती थोड़ा अधिक समय भी लगता है ,  maltreated cases  मे ऐसा होता है / इस तरह करते करते एक माह बीत गया और इसे एक प्रतिशत भी आरम नही मिली /

अब मै परेशान हुआ कि आखिर बात क्या है ? इतनी अच्ची से अच्छी दवाये देने और उपचार करने के बाद भी आराम न मिलना क्या बताता है ? यह किस ओर इन्गित करता है ? क्या बीमारी का निदान गलत है ? या बीमारी मे दी जाने वाली दवाये सही नही है और उनका चुनाव गलत है ? या खान पान और जीवन शैली मे कोई गड़बड़ी है ? सवाल बहुत सारे थे /

मुझे याद है यह रविवार का दिन था , होम्योपैथी के छात्र और छात्राये अपनी Case files  को जन्चवाने के लिये मेरे दवाखाने मे आये थे / उसी समय यह रोगी भी आ गयी /  मैने सभी उपस्तिथि होम्योपैथी के छात्रो  को इस रोगी के बारे मे details  के साथ बताया और कहा कि इस केस को explore  करे /

लगभग चार घटे तक माथा पच्ची करने के बाद भी कुछ नही पता चला कि बीमारी की क्या वजह हो सकती है / Practice of medicine की किताबो तथा दूसरी अन्य किताबो का खूब खुलकर reference  लिया गया लेकिन कोई नतीजा नही निकला / मै हैरान और परेशान हुआ कि अब क्या किया जाये / मै भी किताबे पलट रहा था /

किसी चिकित्सक ने एक पुस्तक मे यह लिखा था कि ” एलर्जी उस वजह से भी होती है जिसने BIRTH CONTROL  के लिये  PESSARY का उपयोग किया हो / ” मैने बहुत हताशा के साथ रोगी के पति से कहा कि फैमिली प्लान्निन्ग के लिये अगर पेसरी का इस्तेमाल करते है तो इससे भी एलर्जी होती है “/

यह सुनते ही वह बोला कि पेसरी तो मैने नही लगवायी है अलबत्ता LOOP जरूर लगवा रखा है / मैने कहा कि इसे जितनी जल्दी हो सके हटवा दे यह ठीक हो जायेन्गी /

दूसरे दिन मरीज शाम को आया वह २४ घटे मे ही ९५ प्रतिशत ठीक हो चुकी थी / लूप हटवाने के लिये वह डाक्टरो के पास तुरन्गत गया और इसे हटते ही मरीज की खुजली तथा अन्याय परेशानिया जैसे जैसे समय बीतता चला जा रहा था वैसे ही वैसे वह ठीक होती चली जा रही थी / यहां इस केस मे यही समझ मे आया कि एलर्जी पैदा होने का कारण वह लूप था जिसके कारण reproductive organs मे anomalies  पैदा हुयी और उसके कारण यह तकलीफ हुयी/ allergens  किस तरह से पैदा हुये और कहा कहा किस तरह पहुचे इसके बारे मे कभी बाद मे चर्चा की जायेगी /

२- दूसरा केस एलर्जी का है जो एक male  रोगी का है /  इसको एक certain period  मे एलर्जी होती थी / इसने बताया कि इसको एलर्जी शाम को होती है / लेकिन कभी  कभी नही भी होती है /  समस्या यह थी कि इसे  detect  कैसे किया जाये कि किस कारण से allergy  हो रही है / बहरहाल इसे दवा दी गयी लेकिन इसे एलर्जी होती रही, कभी कभी नही होती थी इससे यह अन्दाजा लगा कि कुछ ठीक है लेकिन जब फिर दुबारा होने लगी तो  सोचना पड़ा कि मूल कारण क्या हो सकता है ?

इस रोगी को यह सुझाव दिया गया कि यह बहुत सतर्कता के साथ अब watch  करना शुरू करे कि उसके किस व्यवहार या काम करने के तरीके या खान पान के बाद तकलीफ होती है / मरीज ने इस सुझाव पर  ध्यान देना शुरू किया / वह अपनी    life style    और खान पान पर ध्यान देने लगा / उसने यह  observe  किया कि जब वह शाम को एक हलवाई के यहां बनने वाले स्पेशल समोसे खाता है तो उसके २० मिनट बाद उसको  एलर्जी होने लगती है /

इस सूचना से यह तो साबित हुआ कि उसको समोसे खाने के बाद allergy  होती है / लेकिन समोसे तो सभी खाते है और शायद ही किसी को ऐसी तकलीफ होती हो , इसलिये मरीज को सलाह दी गयी कि वह दो दिन किसी दूसरी दूकान से समोसे खाये और देखे कि उसको  allergy  हुयी या नही /

दूसरे हलवाई की दूकान से समोसे खाने के बाद उसको allergy  नही हुयी / उसने  फिर पहले वाले हलवाई के समोसे खाये , इससे उसको  फिर दुबारा allergy  पैदा हुयी   , इससे यह पता चला  कि जब वह पहले की दूकान से समोसे खाता रहा तो उसको allergy  हुयी और जब दूसरी दूकान से समोसा खाया तो नही हुयी / इससे यह अर्थ निकला कि पहले बाले दुकान का समोसा बनाने मे जिस मसाला या वस्तु का उपयोग किया जा रहा है तो उसी मे कोई ऐसी ingredient  है जो allergy  पैदा कर रही है /

इसी बीच मे उसको खान्सी की तकलीफ हुयी मैने उससे कहा कि एक चम्मच अदरख के रस मे एक चुटकी सेन्धा नमक  मिलाकर दिन मे दो बार सेवन करना है / इस अदरख और सेन्धा नमक  के मिलेजुले पदार्थ के  सेवन करने के बाद लगभग १० मिनट बाद इस रोगी को allergy  पैदा हो गयी / उसने  फोन पर यह जानकारी दी कि उसको मेरे बताये गये मिक्सचर से  एलेर्जी  पैदा हो गयी है / इससे यह बात सिमट कर आ गयी कि इसे या तो अदरख से एलेर्जी हो रही है या फिर सेन्धा नमक से /

मैने हिदायत दी कि वह एक दिन सेन्धा नमक अकेला अलग से लेकर तीन – चार ग्राम चाटे और दूसरे दिन लगभग ५ से १० ग्राम अदरख चबाकर खाये / मरीज ने दी गयी हिदायत को पालन किया और उसने बताया कि सेन्धा नमक चाटने के बाद उसे किसी प्रकार की तकलीफ नही हुयी / लेकिन अदरख खाने के बाद उसको allergy  पैदा हो गयी / इससे यह स्पष्ट हुआ कि अदरख के कारण इसको एलर्जी पैदा हो रही थी /

मरीज से कहा गया कि वह अदरख का सेवन न करे / बाद मे पता चला कि हलवाई जिसके यहा समोसा बनता था उसमे वह समोसे के  अन्दर भरने वाले   ्द्रव्य यथा आलू मटर और अन्य मसाले के साथ साथ समोसे का स्वाद बढाने के लिये “अदरख” का  खास तौर पर उपयोग करता था  / यह समोसा सैकड़ो ग्राहक रोजाना खाते थे लेकिन किसी को भी ऐसी तकलीफ नही हुयी ऐसा मरीज द्वारा पता करने के बाद मुझको बताया गया / अब इसी मरीज को क्यो allergy  हुयी इस  technical विषय के बारे मे फिर कभी  चर्चा विस्तार के साथ करून्गा /

३- तीसरा केस भी बड़ा अजीब सा है / एक मोटर मेकैनिक को एलर्जी हुयी और वह इलाज के लिये आया /

इसने बताया कि इसको allergy  रात मे होती है जब वह सोने जाने लगता है और उस समय जब वह अपने कपडे उतारता है और बाहर की हवा लगती है / एलेर्जी होने से जिस खुजली की तेजी का वह सामना करता है वह बहुत असहनीय होता है / तमाम इलाज करने के बाद भी उसकी एलर्जी नही ठीक हुयी /

मुझे शक हुआ कि कही इसको BLOOD SUGAR  तो नही हुई   है या फिर गुर्दा से सम्बन्धित कोई बीमारी पैदा हो रही हो या फिर लीवर से समबन्धित कोई तकलीफ हो / मैने मरीज को सलाह दी कि वह पहले अपने खून की जान्च कराये और दूसरे परीक्षण यथा अल्ट्रासाउन्ड और एक्स-रे आदि भी साथ मे करा डाले ताकि पता चले कि इसको किस तरह की तकलीफ अन्दर से डेवलप हो रही है / ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की जान्च इस समय developmental stage  पर थी /

मरीज ने सारे परीक्षन करा डाले लेकिन उसके सभी परीक्षण NORMAL  निकल आये / मरीज  इस बात से परेशान था कि उसको तो तकलीफ हो रही है और वह अपनी बीमारी से परेशान और हैरान है लेकिन उसके सभी TEST  यह बता रहे है कि उसको कोई बीमारी ही नही है ? मरीज बहुत गुस्से और चिन्तित अवस्था मे हो गया /

अब यह सोचने की बात मेरे लिये थी कि ऐसी स्तिथि मे क्या  किया जाये ? मैने विचार किया  कि इसका x-ray  और  ultra-sound  तथा खून आदि के परीक्षण NORMAL:  भले ही निकल आये हो लेकिन कुछ है तो जरूर जो इसको बीमार बना रहा है / ई०टी०जी० परीक्षण उन दिनो विकास की अवस्था मे था / मैने सोचा कि इसका E.T.G. test  करके देखा जाये शायद कुछ मिल जाये / इस मरीज का ETG test किया गया / E.T.G. परीक्षण को उस समय Electro Tridosha Graph/ Graphy Test  के नाम से जानते थे / इसे short मे E.T.G.  बाद मे कहा जाने लगा / E.T.G. के short name  से बहुत से Test और सन्स्थाये बनी हुयी है / INTERNET पर देखने से पता चला कि ETG  के नाम से सैकड़ो TEST  और सन्स्थाये अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बनी हुयी है इसमे एक Ethnic Terrorist Group भी है / ऐसा नाम देखकर मै खुद बहुत परेशान हुआ / यह देखकर मेरे होश फाख्ता हो गये / बाद मे मैने निश्चित किया कि इस्का नाम बहुत स्पष्टता के साथ होना चाहिये  इसलिये इस TEST  का पूरा नाम E.T.G. Ayurveda Scan  कर दिया गया /

ETG Test  के अध्ध्यन से पता चला कि इस रोगी को Epigastritis है  और छोटी तथा बड़ी आन्त मे inflammatory condition  उपस्तिथि है / पेट की जान्च  करने से सूजन तथा दर्द की शिकायत सामने आयी / मरीज को रात मे तकलीफ होती थी लिहाजा यह समझ मे आया कि इसके शाम के कार्य कलापो के बारे मे  ्समझा जाये / इसलिये मरीज के शाम की activities  के बारे मे उससे जानने की कोशिश की गयी /

उसने बताया कि दिन भर काम करने के बाद वह  रात की जैसे ही शुरुआत होती है वह दारू की बोतल लेकर बैठ जाता है / दारू पीने के बाद वह खाना खाता है / भोजन मे veg  के साथ non-veg  भी खाता  है , सलाद और अचार और कच्ची मूली और प्याज आदि भी खाता है /

मरीज को कहा गया कि वह एक दिन दारू के साथ वेज खाना खाये और दूसरे दिन दारू के साथ  नान वेज खाना खाये और एक दिन बिना दारू के वेज खाना खाये और दूसरे दिन  बिना  दारू के नान वेज खाना खाये /

यह सब करने के बाद मरीज ने बताया कि दारू के साथ और बिना दारू के उसने जब वेज खाना खाया तो उसको कोई एलर्जी नही हुयी / लेकिन नान वेज खाने से उसको दारु के साथ और बिना दारू के भी एलेर्जी हो गयी /

अब यह तो establish  हो गया कि मामला food  का है जो non-veg है / पूछने पर पता चला कि नान वेज खाने मे वह मछली और गोश्त पसन्द करता है /

मरीज से कहा गया कि वह एक दिन गोस्त खाये और दूसरे दिन मछली खाये /  उसने ऐसा ही किया /

अगली बार वह जब आया तो उसने बताया कि गोश्त खाने से उसे कोई तकलीफ नही हुयी लेकिन जिस दिन खाने मे  मछली खायी गयी तो उसको एलर्जी पैदा हो गयी /  इससे यह निष्कर्ष निकला कि इस मरीज को मछली खाने से एलर्जी हो रही है /

क्या वजह रही है जिससे मछली खाने से एलर्जी पैदा हुयी यह विवेचना बाद मे करेन्गे ?

4- यह तो रहा मरीजो का विवरण लेकिन इस तरह के सैकड़ो मरीजो का उपचार करने के बाद यह पता चला कि allergy  होने के अन्य बहुत से कारण होते है /

खाने मे अचार और सिरका और मूली और मिर्चा और लाल मिर्चा [काली या सफेद मिर्च नही] तथा कुछ मसालो के खाने से किसी किसी को एलर्जी होती है लेकिन सबको नही /

कई ऐसे मरीज मिले जिनके लीवर बढे हुये थे और उनको इसी कारण से एलर्जी हो रही थी

कुछ ऐसे मरीज मिले जिनको gall bladder  मे पथरी होने या Gall bladder  का inflammation  होने  या Gall Bladder  मे sludge  होने के कारण allergy  पैदा हो रही थी /

बहुत से ऐसे मरीज मिले जो अन्ग्रेजी दवा खा रहे थे उसके कारण उनको एलर्जी हो रही थी इसे दवा का साइड प्रभाव कह सकते है /

कुछ विशेष तरह के खाना खाने के बाद आन्तो मे हो रहे chemical changes के कारण यह तकलीफे पैदा होती है ऐसा भी देखने मे आया है /

यह तो सब “त्वचा”  के रोगो के लिये बताया गया है /

लेकिन कुछ खास तरह की एलर्जी होती है जो नाक और गले के MUCOUS SURFACE  LININGS  और फेफड़ो तथा गले से सम्बन्धित विकारो को जन्म देती है / इसमे तुरन्त पैदा होने वाले जुखाम और बहुत शीघ्रता से पैदा होने वाला ASTHMA  यानी दमा का दौरा और जुखाम शामिल है /

जैसा मैने बताया है यह सब भी ALLERGY   के कारण होते है और इनके पैदा होने के पीछे इसके कारण भी हैं /

यह एक तरह का लम्बा academic discussion  है जिसे आयुर्वेद के साथ या आयुष चिकित्केसा विग्यान के  सिध््धान्तो के साथ  correlate  करने का प्रयास किया जायेगा /

सभी तरह की एलर्जी जिनमे किसी तरह की VISCERAL प्रोब्लेम्स हो वे भी आयुर्वेदिक आयुष इलाज करने से ठीक हो जाती है /

आयुर्वेद की आधुनिक तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके  दूसरे supplementary  परीक्षण आधारित इलाज करने से सभी तरह की एलर्जी ठीक होती है , वे चाहे त्वचा की allergy  हो  या श्वसन सन्स्थान Respiratory Organs  की हो या ENT  से related disorders  हो /

मान००१ 016