“OPERATION” AND “SURGICAL INTERVENTION” HOBBY ; MOST PEOPLE’S SEEKS ALWAYS FOR “OPERATION” METHODS IN ALL DISEASE CONDITIONS ; “आपरेशन” कराने का शौक ; बहुत से ऐसे लोग है जो हर बीमारी के इलाज के लिये “आपरेशन” कराना सबसे बेहतर समझते है


टाइटिल पढकर चौकिये नही ? और चौकने की जरूरत भी नही है ? इस दुनिया मे ऐसे लोगो की कमी नही है जिन्हे शरीर की सभी और  हर होने वाली  बीमारी का इलाज आपरेशन यानी  SURGICAL INTERVENTIONS  द्वारा ही कराने  का शौक होता है / आप्रेशन कराने का शौक भी  दूसरे शौक की तरह से ही है /

दुनिया मे तरह तरह के लोग है जिनको किसी न किसी बात का शौक होता है , किसी को पतम्ग ऊड़ाने का शौक, किसी को सिगरेट पीने का शौक, किसी को मन्दिर जाने का शौक, किसी को ज्वेलरी का शौक, किसी को पेन्टिन्ग का शौक , किसी को पढने का शौक, किसी को बहस करने का शौक और किसी को कुछ और किसी को कुछ दूसरा शौक होता है / कोई बिरियानी का शौक रखता है कोई चाय पीने का शौक रखता है / इसी तरह से मुझे बहुत ऐसे मरीज मिले जिनको आप्रेशन कराने का शौक होता है /

इन मरीजो को ऐसे ही आपरेशन करने वाले डाक्टर भी मिल जाते है / कहावत है जहां चाह है वही राह है / आप्रेशन कराने  के लिये बेताब मरीज  मौजूद है तो उनके लिये आपरेशन करने वाले डाक्टर और सर्जन भी मौजूद है / क्यो न हो ? आपरेशन कराने के लिये सर्जन चाहिये वह मौजूद है , आप्रेशन थियेटर चाहिये वह भी मौजूद है , आप्रेशन के लिये infrastructure चाहिये वह भी मौजूद है , आप्रेशन कराने वाला मरीज चाहिये उनकी भी कमी नही है /

बीमारी के इलाज के लिये सर्जरी की जरूरत हो या न हो लेकिन मुझे कई सैकड़े ऐसे मरीज मिले है जिनको आपरेशन क्राने का शौक है और शौक था / आप्रेशन कराने का शौक था , से मतलब यह है कि ऐसे लोग अब इस दुनिया मे नही है और अपना कीमती जीवन गवांकर परलोक सिधार गये / जिन्हे आपरेशन कराने का शौक है उनमे से अभि बहुत से जिन्दा है लेकिन उनमे से कोई भी सही नही देखने मे आया सब्के सब या तो बिस्तरा पकडे  हुये लेटे लेटे हुये अपनी जिन्दगी गुजार रहे है  या फिर किसी की सहायता के मोहताज बनकर रह गये है /

नीचे कुछ उदाहरण ऐसे मरीजो के है जो मेरे प्रैक्टिस जीवन मे आये और उनको मैने मना किया था कि वे आपरेशन मत कराये लेकिन वे और उनके तीमार दार  माने नही और क्या हुआ ऐसे लोगो के साथ यह अनुभव मै आप लोगो के साथ शेयर कर रहा हूं /

१- मुझे एक महिला का केस याद आता है जिसकी उम्र २७ साल के आसपास की थी / उसके पेट मे right hypochondria  रीजन मे एक छोटी सी फुन्सी हुयी जो बाद मे बढकर लगभग १५ मिलीमीटर के गोलायी लिये हो गयी  थी /  यह फुन्सी दर्द कर रही थी जैसा कि फोड़ो मे होता है / महिला गां व की रहने वाली थी /  उन्ही के पड़ोस के एक सज्जन जो  कानपुर नगर महापालिका मे मुलाजिम थे और मेरे  मरीज थे , उन्होने इस महिला को इलाज के लिये बताया कि मेरे पास आ जाये / महिला इसी अवस्था मे मेरे पास आयी थी जब उसके दर्द होना शुरू हुआ था /  मैने उसका check up  किया और खून की जान्च तथा X-ray के लिये उसके तीमार दारो को कराने के लिये  कहा /

रिपोर्ट मे एक्स रे और रक्त की जान्च सामान्य निकली /

महिला को दो दिन की दवा दी गयी और दो दिन बाद दिखाने के लिये बताया गया / दो दिन बाद महिला आयी उसको आराम था दर्द थोड़ा कम हुआ था और सूजन भी नही बढी थी / उसको दो दिन की और दवा दी गयी और कहा गया कि तीसरे दिन आकर दिखा जाय /

तीसरे दिन उस महिला रोगी के  साथ  सात लोग और आ गये जो उसकी ससुराल तथा मायके पक्ष के लोग थे / बैठने के बाद उनमे से एक एक कर सवाल पूछने लगे / उनके इस तरह से सवाल पूछने और सवालो का मकसद और मिजाज सुनकर मुझे लगा कि मरीजा को छोड़्कर सभी लोग यह चाहते है कि मेरी दवा बन्द करके इसकी फुडिया का आपरेशन करा दिया जाये /  मरीजा आप्रेशन कराना नही चाहती थी लेकिन उसके रिश्तेदार उसको आपरेशन कराने के लिये जोर डाल रहे थे /  उसका एक रिश्तेदार गाली गलौज की भाषा इस्तेमाल करने लगा और मुझको गालिया सुनाने लगा /

अन्त मे मैने उनकी सारी बाते सुनकर और  उन सबका विचार जान कर दो बाते कही कि [१] अब यह सब आप पर निर्भर है कि आप क्या कराना चाहते है क्योन्कि मरीज आपका है / लेकिन मै यहां यही कहून्गा कि मै अब आप्के मरीज का इलाज नही करून्गा चाहे आप मुझे अब कितनी ही फीस क्यो न दें ? लेकिन इसके साथ यह भी कहून्गा कि इसका इलाज दवाओ से करियेगा और किसी भी दूसरे डाकटर को सलाह लेकर और दिखाकर करे, लेकिन करे दवाओ का इलाज [२] इसका आपरेशन मत कराइयेगा क्योन्कि यह आपके रोगी के हित मे नही होगा ? आपरेशन खतरनाक भी हो सकता है /

बात आयी गयी हो गयी / लगभग दो महीने बाद उसके पड़ोसी जिसने उस महिला को मेरे पास इलाज के लिये भेजा था अप्ने इलाज के सिल्सिले मे मेरे पास आये /  बातो  ही बातो मे उन्होने मुझे याद दिलाते हुये बताया कि जिस महिला को मेरे पास इलाज के लिये उन्होने भेजा था  उसकी मौत हो गयी है /  हुआ यह कि मेरे दवाखाने से बाहर निकलते ही उस महिला के तीमार दार उसे सीधे लेकर अस्पताल चले गये और उसी रात उसका आप्रेशन कर दिया गया / आप्रेशन करने के आठ घटे बाद ही उस महिला की मौत हो गयी /

यह सुनकर मुझे अफ्सोस बहुत हुआ और मन मे यह विचार भी हुआ कि “मैने बहुत ईमानदारी के साथ महिला के तीमार दारो को इलाज कराने की सलाह दी थी , क्या ईमान्दारी से सलाह देना भी एक बड़ा गुनाह है ?”

२- दूसरा केस एक पुरुष का है जिसे गरदन मे बहुत तेज दर्द होता था जिसकी वजह से वह बहुत परेशान था / मै और मेरे सहयोगी उसका इलाज कर रहे थे / दर्द कैसे श्रू हुआ और इसका मूल कारण क्या है, इसको जानने के लिये इसके रोग का पूरा इतिहास जानान जरूरी था / लिहाजा इस रोगी का रोग विवरण जानने के लिये सभी जरूरी बाते लिपि बध्ध की गयी /

सरा मामला समझ मे आया कि इसको रोग की शुरुआत कहां से हुयी ? हुआ यह कि इसके पडोस के एक परम घनिष्ठ मित्र के यहा शादी थी / इसलिये शादी के लिये इस शख्स ने बहुत दौड़ धूप की, कई किलो  सामान लादा , कई किलो सामान उठाया और लोडिन्ग और अप-लोडिन्ग की / दिन भर रात भर शादी की दौड धूप मे व्यस्त रहा जिसके कारण उसे आराम नही मिला /  इसी दरमियान उसे गरदन मे दर्द होने लगा / काम मे व्यस्त रहने के कारण वह नजदीक के  एलोपैथी के  डाकटर से दवा लेकर खाता रहा और शादी मे जितना भी काम हो रहा था उसको निउपटाता रहा /

शादी का कार्य क्रम पूरा हो जाने के बाद भी उसका दर्द नही ठीक हुआ और लगातार बना रहा / यह दर्द cervical region से पैदा होता था और पूरी गर्दन के पीछे के हिस्से से चल कर पूरे सिर और आन्ख तक पहुचता था / यह दर्द इतना तेज होता था और अचानक इतना तेज होता था कि मरीज दर्द के कारण बहुत जोर से चीख उठता था /

इसका एक भाई  होम्योपैथिक  मेडिकल कालेज कानपुर मे द्वितीय वर्ष का क्षात्र था / उसने अपने भाई को कानपुर बुला लिया / यहां आकर उसने कालेज के अस्पताल मे हम लोगो से समपर्क किया / इसे इन्डोर अस्पताल मे भरती कर लिया गया / अस्पताल प्रबन्धन ने इस केस को handle  करने के लिये मुझे लगाया /

मैने इस मरीज का रोग इतिहास पढकर कुछ बाते मरीज से पूछी और बाद मे अपने senior  Doctors से discussion  करके एक लाइन आफ ट्रीट्मेन्ट    निर्धारित   की /  इसे आराम करने की सलाह दी गयी    क्योन्कि यह विचार किया गया कि इसे over exertion  के कारण से मान्श्पेशियो का खिंचाव और इसके साथ पैदा हुयी neuro-musculo-skeletal anomalies  पैदा हुयी है जिनके कारण inflammatory  condition  और swelling  पैदा ह्यी और इसके reflection-diffusion  के कारण यह समस्या पैदा हुयी /

इसे nutritious  भोजन देने की सलाह दी गयी कि इसे क्या क्या खाना चाहिये जिससे इसे अधिक से अधिक बेहतर किस्म का कुदरती  न्यूट्रीशन   मिले / साथ साथ complete bed rest without any movement  की सलाह दी गयी /

इस मरीज को उसकी तकलीफ के हिसाब से  जो भी selected remedies   चुनी गयी , वे सभी दवाये internal use  के लिये दी गयी  /

लगभ्ग १० दिन के इलाज से मरीज पूरी तरह से ठीक हो गया / यह मेरे लिये बहुत  interesting case  था मैने इस केस मे बहुत मेहनत की / अस्पताल मे होने के कारण सभी तरह की सुविधाये थी जो मरीज को मुहैय्या करायी गयी / मरीज को हिदायत दी गयी कि वह इसी तरह से कुछ महीने तक अपनी जीवन चर्या और दवाये चलाता रहे और बीच बीच मे आकर consultation  करता रहे /

कई महीने बाद एक दिन यही मरीज फिर वापस आया और बताया कि उसे फिर से दर्द होना शुरू हुआ है, लेकिन यह उतना तेज नही है जितना पहले था /  इसका फिर दुबारा अस्पताल मे भर्ती करके इलाज किया गया / मरीज दुबारा स्वस्थ्य होकर वापस चला गया /

पान्च माह के लगभ्ग बीत जाने के बाद एक दिन मुझे इसके भाई ने कहा कि उसके भाई को फिर दर्द हुआ है / जहा यह रोगी रहता था वही के    किसी डाक्टर ने सलाह दी है कि इलाहाबाद शहर [कानपुर शहर  से २५० किलोमीटर दूर है ] मे  अस्पताल के अमुक डाक्टर ने कहा है कि गरदन का  आपरेशन कराने के बाद इसका दर्द  हमेशा के लिये  ठीक हो जायेगा /

क्षात्र ने पूछा कि आपकी क्या राय है ? मैने कहा कि इस तरह का आप्रेशन कराना खतरे से खाली नही है / इसे मत कराये यही अच्छा है , यह जान लेवा भी साबित हो सकता है     गयी

[अभि मैटर लोड करना बाकी है]

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