EBOLA VIRUS ; “INDIANS SHOULD NOT HAVE PANIC WITH THIS DISEASE CONDITION’S CONSEQUENCES” ; “ईबोला वायरस से किसी भी भारतीय को घबराने की जरूरत नही है ” हमारे देश मे इस बीमारी के बचाव और इलाज के लिये भारतीय चिकित्सा विग्यान मे बहुत से साधन है


ईबोला वायरस से किसी भी भारतीय को डरने की जरूरत नही है / इतना ज्यादा प्रोपागन्डा इस बीमारी के बारे मे मीडीया मे फैलाया गया है जिससे देखकर और सुनकर देश वासियो मे डर का महौल बनना शुरू हो गया है /  जागरुकता होना बीमारी के बारे मे, यह एक जरूरी बात है ताकि लोग यह समझ सके और सतर्क रहे यह मकसद होना चाहिये /  लेकिन इसकी आड़ मे दहश्त का माहौल पैदा करना ठीक नही है /

मेरा मानना है जो मेरे  वायरस का इलाज  करने के बाद प्राप्त  चिकित्सकीय अनुभव पर आधारित है कि कोई भी  वायरस  या बैकटीरिया   उन्ही लोगो को अधिक प्रभावित करता है जिनके खून का pH  अम्लीय स्तर का  यानी ACIDIC REACTION  का  होता है / जिनके खून का pH का स्तर ALKALINE REACTION  का होता है , उनको कोई भी वायरस हो या बैक्टीरिया हो वह प्रभावित नही करता है /

अधिकतर दवाये chemicals  से बनी हुयी होती है / कोई भी केमिकल होगा उसके सेवन करने से Blood ACIDITY  बढती है , यह pH  कहा जाता है / मानव रक्त का pH  का स्तर 7.3 के आसपास होता है / इससे नीचे होने पर रक्त अलकालाइन कहा जाता है और इससे अधिक होने पर अम्लीय यानी एसीडिक समझा जाता है /

वायरस और बैक्टीरिया alkaline stage  होने पर    रक्त  मे  अधिक    नही पनपते है / शरीर मे  VIRAL   और    Bacterial invasion  होने पर  शरीर के अन्दर कई तरह के chemical changes  होने शुरु हो जाते है जिनसे खून खराब होता है और इस स्तिथि को TOXEAMIA  कहते है / जब टाक्सीमिया की स्तिथि बनती है तब रक्त  pH   ACIDIC होने लगता है / केमिकल युक्त दवाये चून्कि रक्त की pH  बढा देती है /  इसलिये वायरस या बैक्टीरिया इस बढे हुये  pH  के स्तर को सहन नही कर पाते और इसी कारण से उनकी growth  के लिये जिस स्तर का blood environment  चाहिये वह नही मिल पाता है /

वायरस को जब  ग्रोथ के लिये   स्तरीय growth promoting factors  नही मिल पाते है तब उनका every seconds multiplication का काम  बढना रुक्ने लगता   है / इस रोक के साथ ही वायरस के दवारा पैदा हुयी शारीरिक तकलीफे ठीक होना शुरू हो जाती है /

लेकिन जब वायरस या बैक्टीरिया  अपना स्वरूप बदल कर किसी नये रूप मे आकर शरीर पर आक्रमण करते है तो वे उस अम्लीय स्तर के अभ्यस्त हो जाते है यानी वे अधिक अम्लीय स्तर को बर्दाश्त कर जाते है और इसी कारण उनको मारने के लिये जितनी अन्टी बायोटिक की मात्रा की जरूरत होती है  उससे अधिक देने की जरूरत पड़ जाती है / इसे ही anti-biotic resistence  कहा जाता है /

दूसरी  तरफ जैसा कि मेरा अनुभव है और वायरस के रोगियो का इलाज करने के बाद प्राप्त अनुभव हुआ है उससे वायरस के मरीजो को जब alkaline food and drinks  खाने के लिये बताया गया तो आयुर्वेदिक और होम्योपैथी की द्वाओ का बहुत अच्छा असर हुआ और मरीज बहुत जल्द ठीक हुये / antibiotic and antipyeretic  दवाओ का बहुत कम उपयोग यानी न के बराबर करना पड़ा और वह भी कुछ खुराको मे ही /

आयुर्वेद की लगभग सभी दवाये herbal  होने के कारण यह ALKALINE NATURE  की होती है और इनके खाने से रक्त कभी भी acidic  नही होता बल्कि रक्त की pH सामन्य अवस्था मे ही बनी रहती है / आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान मे हर तरह के वायरल इन्फेक्शन और अन्य सभी इन्फ़ेक्शन की बहुत अच्छी दवये मौजूद है इसलिये किसी भी भारतीय को इस बीमारी के अटैक से घबराना नही चाहिये / हमारे यहा होम्योपैथी और यूनानी के अलावा अन्य चिकित्सा विग्यान मौजूद है जिनके अन्दर किसी भी प्रकार की प्राथमिक स्तर की बीमारी को ठीक करने के लिये इलाज मौजूद है /

रक्त की pH को ठीक रखने  के लिये ALKALINE FOOD और  Drinks  लेना चाहिये /

जिन देशो मे EBOLA  फैला हुआ है वहा के नागरिको के Blood  के pH  का स्तर ACIDIC  है क्योन्कि वे मान्स और मदिरा का सेवन करते है और शाकाहारी नही है / मान्स मदिरा खाने से रक्त का pH बहुत बढता है और इसी कारण से वायरस को शरीर मे फैलने का environment  मिल जाता है /

खान पान और जीवन शैली को अपनाने से EBOLA  VIRUS  से बचाव होगा / जब भी तकलीफ हो फौरन आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक या यूनानी दवाओ का सेवन करना शुरू कर देना चाहिये/

इसी ब्लाग मे कई ऐसे फार्मूले आयुर्वेद और होम्योपैथी के दिये गये है जो सभी तरह के वायरस के अवतार के इलाज के लिये कारगर है , इन फार्मूलो का उपयोग करने से हर तरह के वायरस से बचे रहेन्गे /

hivaids

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