STATUS QUANTIFICATION OF AYURVEDA PRINCIPLES TESTED BY E.T.G. AYURVEDASCAN SYSTEM ; आयुर्वेदिक मौलिक सिध्धान्तो का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण द्वारा आन्कलन


आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तो का आन्कलन करना अब आयुर्वेद की आधुनिक परीक्षण तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन द्वारा सम्भव हो गया है /

अति आधुनिक विकसित की गयी तकनीक द्वारा अब तक निम्न आयुर्वेद के सिध्धान्त का status quantify किया जा चुका है /

एक रोगी का जिसे FACIAL NEURALGIA लगभग २५ साल से है और ALLOPATHY से अभी तक नही ठीक हुआ है इसका परीक्षण करके आयुर्वेद के निम्न मौलिक सिध्धन्तो का पता लगाया गया है /

यह मरीज स्वयम MEDICAL PROFFESSION   मे है और सरकरी सेवा मे है / एलोपैथी की दवाओ से इसका दर्द बिल्कुल नही ठीक हुआ बल्कि एलोपैथी की दवाओ की दवा खाते खाते दवाओ का असर कम होने लगा तो पचासो बार दवाओ की खूराक को और ज्यादा बढाना  की जरूरत  पड़ती  चली गयी है /

जिस  डाक्टर  के साथ यह सरकारी सेवा मे है उन्होने मेरे पास बहुत से मरीज जान्च के लिये  भेजे है और उन सब्को ठीक होता हुये देखकर इन्को भी सलाह दी कि बीमारी नही ठीक हो रही है और जैसे की तैसे है तो एक बार जान्च कराकर आयुर्वेद- आयुष का इलाज कराकर जरुर देखे /

मरीज के तीन ई०टी०जी० आयुर्वेदा स्कैन परीक्षण किये गये / साथ मे आयुर्वेद के रक्त परीक्षण तथा आयुर्वेद के मूत्र परीक्शन तथा अन्य सहयोगी परीक्शन किये गये /

१-  मैनुअल ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन

२- कम्प्य़ूटराइज्ड ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन

३- कन्टीनुअस ट्रेस रिकार्ड ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन

नीचे दिये गये आन्कडे कम्प्यूटराइज्ड ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के है /

AMS001AMS001 001AMS001 002AMS001 004AMS001 005AMS001 006

ऊपर के ६ शीटो मे  मिले  आनकड़ो मे निम्न बाते सामने आयी हैं /

१-सत्व और तमो गुणी है

२- जन्म के समय मे इसका प्रकृति का आन्कलन –वात अधिक तथा पित्त थोडा कम रहा है

३- रोगी की जान्च के समय त्रिदोष की स्तिथि वात सामान्य और पित्त अधिक और कफ सामान्य से कम निकला है /

४- इसे विषमाग्नि है /

५- वायु त्रिदोष भेद मे अपान और समान और व्यान वायु कम और उदान वायु सामान्य से अधिक निकली है /

६- पित्त त्रिदोष भेद मे रन्जक और पाचक  सामान्य से अधिक  और लोचक और भ्राजक सामान्य से कम निकले है /

७- कफ त्रिदोष भेद मे श्लेष्मन कफ आधिक और स्नेहन कफ कम निकला है /

८- सप्त धातुओ मे रक्त और मान्स और अस्थि अधिक और रस मेद कम निकला लेकिन पित्त दोष से प्रभावित सप्त धातुये अधिक विकृति निकली है /

९- श्रोतो दोष विकृति मे सबसे पहले बडी और छोटी आन्त और उसके बाद मान्स श्रोत फिर उसके बाद अन्य श्रोतो की विकृतिया अधिक से कम की ओर होती चली गयी है /

१०- SEQUENTIAL DATA   देखने पर एक साफ picture  बन जाती है कि मरीज को किस तरह की तकलीफ पनप रही है /

नीचे की data sheet  देखने पर और अधिक स्पष्ट होता है कि इसे किस दोष के द्वारा तकलीफ प्राप्त हो रही है /

महर्षि चरक और माधव निदान कार ने वातादिक दोषो का चरित्र गत लक्षण अपनी विशिष्ट पुष्तको मे किया है / यह सब नीचे शीट मे बताया गया है / DOSHA TOWER मे यह विशिष्ट तरीके से बताया गया है /

मरीज को पित्त दोश्ढ की तकलीफ है यह सुनिश्चित हुआ / इसके स्रोतो दोष और अन्य विक्रतियो से पता चला कि कफ कमजोर होने के कारण यह FACIAL NEURALGIA  25 साल से अधिक समय तक इसे परेशान करता रहा है /

हलान्कि इसके रोग निदान और सेक्टर  निदान से यह स्पष्ट हुआ कि इसे किस तरह की बीमारी है और यह कहां से  generate  हो रही है और इसका  extension  कहा कहा से होकर फाइनल साइट की तरफ  जा रहा है और फिर इसके साथ क्या क्या तकलीफे सहयोगी तकलीफो के तौर पर क्या क्या पैदा हुयी है ?

इसे पित्त दोष  “उर्ध्व जत्रु रोग” पुर्ण रूप से निदान किया गया /

इस रोगी को  पित्त शमन कारी   आयुर्वेद की दवाये लिखकर दे दी गयी है जो [१] बढे हुये पित्त दोष को कम  करके सामान्य अवस्था मे  करने के लिये और [२] उर्ध्व जत्रु रोग को आरोग्य करने के लिये आयुर्वेदिक योग है, वे prescribe  कर दिये गये है /

यह अनुभव मे आया है कि लगभग सभी तरह के    FACIAL  NEURALGIC PAIN  आयुर्वेदिक दवाओ से अवश्य ठीक होते है /

ऐसा तभी समभव है जब आयुर्वेद के निदान ग्यान सटीक हो और आयुर्वेदिक औषधियो का चुनाव डाटा आधारित हो / [

AMS001 007

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AMS001 008

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AMS001 009

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AMS001 010

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AMS001 011

इस रोगी का चेहरे का CONTINUOUS E.T.G. AYURVEDASCAN TRACE RECORD  किया गया जो लगभग ६० मिनट तक रिकार्ड किया गया / नीचे 10 seconds  per stripes की रिकार्डिन्ग दी गयी है /

उदाहरण के लिये कि किस तरह से सेक्टर रिकार्ड करके रोग की तफ्सील  और तस्खीस और तफ्तीस करके पहचाना जा सकता है  और तकलीफ का नेचर जाना जा सकता है /

नीचे की रिकार्डिन्ग मे आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्तो को verify किया जा सकता है /

neuraligia001

कुछ waves positive  और कुछ लहरे negative deflection को दिखा रही है / पित्त और कफ के मिले हुये दोष के कारण spasmodic प्रोब्लेम्स  हो रही हैं / वात दोष के कारण अचानक muscular spasm होने लगते है /

neuraligia001 001

ऊपर के दर्शाये गये चित्र के द्वारा यह बताने का प्रयास किया जा रहा है कि आयुर्वेद का रोग निदान “उर्ध्व जत्रु रोग” कैसे पैदा होता है और इसका क्या mechanism  होता है / मरीज की जब FOUR DIMENSIONAL DIAGNOSIS की गयी तो पता चला कि इसे [१]   मूल  तकलीफ कही दूसरी जगह  है और [२] इस मूल तकलीफ की pathophysiology  के कारण metastasis  द्वारा  path-ways  बनकर  कहीं  [३] तीसरी जगह आकर रोग के लक्षण पैदा कर रही है और [४]   इस metastatic extension की वजह से अन्य syndromes  पैदा हो रहे है /

हलान्कि इलाज करने के दृष्टिकोण से केवल पहला और तीसरा डायमेन्शन ही consider  करते है क्योन्कि मूल तकलीफ जब ठीक होती है तो बाकी सभी बीमारिया जो इसी एक बीमारी के कारण से जुड़ जाती है , ये सब्के सब ठीक हो जाते है /

वात दोष मुख्य तया  शरीर के अन्दर विद्यमान   चार systems से मिलकर बना हुआ समझा जाता है / ये  चार  system  है [१] नरवस सिस्टम [२] मसकुलर सिस्टम [३] स्केलेटल सिस्टम और [४] लिम्फैटिक सिस्टम / इन चार के अलावा जब दोष-भेद की वात की जाती है तो आभ्यान्तरिक अन्ग  INTERNAL VISCERA  शामिल हो जाते है / यह सूछ्मता स्वरूप मे ज्यादा दूर तक analysis  करने के लिये ज्ररूरी होता है ताकि मूल रोग की पहचान आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तो के अन्तर्गत किया जा सके /

रोगी के इलाज के लिये आयुर्वेद के सिध्धान्तो को मरीज की तकलीफ के साथ correlate  करना   और    इस कोरिलेट किये गये कान्सेप्ट को treatment  मे बदलना चिकित्सक की क्षम्ता पर निर्भर करता है  कि वह किस तरह से रोग के साथ दवओ का तालमेल और पथ्य परहेज की व्यवस्था कर पाता है /

इस तरह की निपुणता को प्राप्त करने के लिये ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन  हाई-टेक  तकनीक का प्रयोग   आयुर्वेद के  चिकित्सको  के    लिये सुफल्दायक होती है /

महर्षि  चरक  और माधव निदान के अनुसार  बताये गये दोष विकृति और दोष आन्कलन के दर्शाये गये ऊपर दोष-  टावर को देखने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि CONTINUOUS E.T.G. AYURVEDASCAN  TRACE RECORDING के द्वारा प्राप्त डाटा से रोगी की चिकित्सा के लिये आयुर्वेदिक औषधियो का चुनाव और इसी आधार पर बताये गये आयुर्वेदिक विधि विधान  की जीवन शैली के management  के द्वारा रोगी का उपचार अत्यधिक सटीक और अचूक हो जाता है जिससे रोगी शीघ्रता से रोग मुक्त होता है चाहे वह कोई भी बीमारी हो /

मान००१ 016

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