WORLD DIABETES DAY ; विश्व प्रमेह दिवस ; विश्व डायबिटीज दिवस


डायबिटीज जिसे आयुर्वेद मे प्रमेह के नाम से जानते है या मधुमेह कहते है / आयुर्वेद मे इस बीमारी का बहुत सटीक इलाज है / कारण का निवारण करने से यह बीमारी रोग्मुक्त की जा सकती है या इसका प्रभाव बहुत कम किया जा सकता है /

Diabetes, which is called PRAMEH or MADHUMEH in Ayurveda. Ayurveda have perfect treatment of this disease condition. Removal of the cause and causative factors , this disease can be cured or the severity of the DIebetic syndromes can be minimized at a comfortable level.

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके अन्य supplementary  परीक्षण तथा आयुर्वेद के रक्त तथा मूत्र परीक्षण करने के बाद जब मधुमेह के रोगियो का इलाज किया जाता है तो यह बीमारी अवश्य ठीक होती है /

ETG Ayurveda and its supplementary tests and examinations including Ayurveda Blood examinations and Ayurveda Urine examinations and tests results after finding bases conclusion , when Diebetic patient is treated then the problem is surely recoverd.

लगभग पान्च साल पहले इसी ब्लाग मे डायबिटीज से समबन्धित एक पोस्ट मे हमारे सन्स्थान द्वारा किये गये रिसर्च के परिणामो को प्रकाशित किया गया था जिसमे यह बताया गया था कि निम्न शरीर के अन्गो की कार्य क्षमता pathophysiology  या  Pathology के कारण यह बीमारी पैदा होती है /

Before Five years back, One post in this blog regarding the Research result’s conclusion  in relation to Diebetes disorders  by  our institution, in which it is mentioned that cumulative pathophysiology of the body organs cause and generate disebetes disorders.

इस शोध कार्य मे बताया गया था कि

It is mentioned in the research  conclusion that ;

१- अकेले पैन्क्रियाज मधुमेह के लिये जिम्मेदार नही होता है जैसी कि अभी तक धारणा बनी हुयी है /

1- Only and solely Pancreas is not responsible for causing Diebetes disorders

२- मधुमेह मे [१] लीवर सह गाल-ब्लैडर  और [२]  छोटी आन्त और [३] बड़ी आन्त और [४] स्प्लीन और [५] गुर्दे यह अन्ग भी डायबिटीज को पैदा करते है या डायबिटीज पदा करने मे सहयोग पैदा करते है /

3- Dibetes is a cumulative disorders of the involmenet of the [1] Liver [2] Small Intestines [3] Large Intestines [4] Spleen and [5] Kidney are also co-responsible to cause and generate the problem.

यह रिसर्च पेपर प्रकाशित होने के बाद चिकित्सक समुदाय के  लोगो ने मेरे द्वारा किये गये रिसर्च कार्य की खूब खिल्ली उड़ाई और मेरे द्वारा की गयी findings  का बड़ा  मजाक बनाया गया /

The medical fraternity all along considered these findings of the report-conclusion as a joke and in fun.

हमारे  इस रिसर्च कार्य के प्रकाशन के लगभग डेढ साल बाद जापान के वैग्यानिको ने रिसर्च करके   यह सिध्ध किया कि डायबिटीज के लिये अकेले पैन्क्रियाज जिम्मेदार नही है बल्कि शायबिटीज पैदा करने मे  इसके साथ लीवर भी शामिल होता है /

After publication of the findings done by our efforts, Japanese Scientist declared after one and half years later  that in Diebetic problems LIVER can cause and in treatment Liver should be considered in producing disorders.

जापान देश द्वारा की गयी इस रिसर्च से मेरा कहना सही साबित हुआ है /

Our findings came in reality and true after findings of Japanese Scientis.

इसके लग्भग एक साल बाद ब्रिटेन के डाक्टरो और शोध करताओ ने  डायबिटीज पर  शोध करके बताया कि ्छोटी आन्त के कारण भी  डायबिटीज पैदा होती है इसलिये डायबिटीज के लिये छोटी आन्त भी जिम्मेदार है / इसी कारण जब डायबिटीज कन्ट्रोल नही होती है  तब छोटी आन्त को काटकर उस हिस्से को निकाल दिया जाता है जहा से यह समझा जाता है कि छोटी आन्त ग्लूकोज को सबसे ज्यादा चूसकर खून मे मिलाती है /

After one years of this Japanese findings British Scientists declared that Small Intestine is also responsible for creating diabetes.

ब्रिटेन के शोध करने वालो के परिणामो से हमारे शोध कार्य की पुष्टि हुयी है /

Our findings got an extra merit by the declaration of British Scientists.

इन दो शोधो के बाद आस्ट्रेलिया के शोध करने वालो ने बताया कि डायबिटीज के लिये बड़ी आन्त भी जिम्मेदार होती है /

After these two research Australian Scientists declared that Large Intestine is also responsible to produce diabetes.

डायबिटीज के रोग का जब इस तरह के शोध परिणाम प्राप्त हुये  तो इन सभी परिणामो से हमारे द्वारा किये गये ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित डाटा और findings  पर मान्यता की मुहर लग गयी है /

When these findings came in existence by the route of scientists, this stamped and recognised our findings, which was at one time a fun for the doctors.

आयुर्वेद के हिसाब से डायबिटीज रोग “कफ दोष” के कारण से होता है / इसीलिये कफ दोष के निवारण और शान्ति के लिये “कड़वा और कसैला और चरपरा” पदार्थ खाने के लिये recommend  किये जाते है ताकि कफ दोष हो तो वह शान्त हो जाये

According to AYURVEDA  Diabetes is generated by KAPHA DOSHA. Therefore KAPH dosha should be treated accordingly. The Anti-Kapha herbs are recommented for intake to treat the Kapha dosha.

कड़्वा और कसैला और चरपरा द्रव्य यथा करेला का सेवन, नीम का सेवन , काली मिर्च का सेवन ,  छोटी पीपल का सेवन, सोन्ठ का सेवन, आवला का सेवन , बहेड़ा का सेवन, हरड़ का सेवन , अकरकरा का सेवन , कुटकी का सेवन , शिलाजीत का सेवन, भरन्गराज का सेवन आदि आदि आयुर्वेवेद मे बताये गये बहुत से ऐसे  सभी द्र्व्य जो स्वाद मे कड़्वा और कसैला और चरपरा हो वे सभी डाय्बिटीज को ठीक करते है /

AYURVEDA recommends for treatment of KAPHA dosha those substances which are KADUVA & KASHAILA & CHARPARA [BITTER and PUNGENT Foods and herbs] in taste. Karela and Neem and Kali mircha and Chhoti Pipal and Sonth and Avala and Baheda and Harad and Akarakara and Kutaki and Shilajit and Bhrangaraj andothers like herbs are having curing properties for Diabeties.

आयुर्वेद की आधुनिक विकसित की गयी  हाई-टेक तकनीक  ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके अन्य चार मशीनी परीक्षण तथा आयुर्वेद के रक्त और मूत्र परीछण  के निष्कर्ष पर आधारित आयुर्वेद / होम्योपैथी / यूनानी और योग=प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा औषधोपचार और आयुर्वेदीय जीवन शैली के धारण करने से डायबिटीज चाहे जैसी हो अवश्य ठीक होती है और रोग मे स्थायी आराम मिलता है /

AYURVEDA NEWLY developed Hi-tek E.T.G. AyurvedaSCan and its supplementary tests and examinations bases findings after Ayurveda -Ayush treatment certainly cures Dibeties and its related all syndromes , whatever they may be ?

आयुर्वेद के स्वस्थ्य-वृत्त और औशधोपार डायबिटीज के रोगियो को अप्नाना लाभ दायक सिध्ध होता है /

Ayurveda recommended LIFE STYLE adoption followed by  Ayurveda Treatment is certainly curative impressions.

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6 टिप्पणियाँ

  1. डाॅ साहब,नमस्कार- इसी प्रकार ईटीजी का विकास विश्व के कल्याण के लिये होता रहे/अब आवश्यकता और विवशता है कि नये-2 ईटीजी केन्द्र शीघ्र बनाये जाये/वरना यह प्रोजेक्ट बीरबल की खिचडी साबित हो जायेगा/अब काफी देर हो चुकी है

    ………..उत्तर………..नमस्कार आर्या जी / आप कभी कभी ऐसा प्रश्न पूछते है कि मुझे भी कई बार सोचना पड़्ता है कि आप्की बात का क्या उत्तर दू / मै स्वयम बहुत पशोपेश मे पड़ जाता हू कि क्या लिखूं ?

    आपके कमेन्ट का उत्तर न देना ही मेरे अन्दर अपराध बोध पैदा करता है इसलिये मे इस समबन्ध मे यही कहना चाहता हू कि ;

    कुछ बाते अपने बस मे नही होती है / मैने बहुत प्रयास किया है और अभी भी कर रहा हू कि ई०टी०जी० की मशीन जल्द से जल्द बनकर बाज़ार मे बिकने के लिये आ जाये / इस बारे मे हमारे इन्जीनियर साहब बहुत प्रयास कर रहे है लेकिन उन्हे भी असफलता मिल रही है / आई०आई०टी० कानपुर से कोलैबोरेशन के होने के नाते मुझे महीने मे कई बार जाना पड़्ता है / मशीन का डेमो कई बार देखा है जिसमे बहुत तरह की कमियां निकल आई है / यह कमियां दूर करने के बाद जब डेमो मशीन का test करता हू तो कोई नयी तकनीकी गड़्बड़ी निकल आती है / कभी इन्जीनियर साहब छुट्टी पर होते है कभी उनके मातहत /

    इस तरह की आपाधापी मे जितना काम हो रहा है उससे मै सनतुष्ट भी हू और असन्तुष्ट भी / लेकिन मै कर भी कुछ नही सकता क्योन्कि यह इन्जीनियरिन्ग का मामला है जो मेरे हाथ मे नही है /

    इसीलिये इसे अगर आप बीरबल की खिचड़ी की सन्ग्या दे रहे है तो इसमे कोई अतिश्योक्ति नही है, यह सच है लेकिन इसका कोई रास्ता नही है / ऐसा हमेशा नयी मशीन के develop करने मे होता ही है /

    एक बात और कहना चाहून्गा कि पहले मै दूसरे शहरो मे जाकर ई०टी०जी० का परीक्षण कर भी देता था लेकिन अब यह भी समभव नही है / इतना अधिक ताम झाम अब इस सिस्टम के साथ जुड़ गया है जिसे लेकर साथ चलना अब अपने आप मे एक बवाल है / पहले एक मशीन थी जो मैनुअल थी और लैप्टाप और प्रिन्टर मे डाटा फीड करने के बाद कही पर भी ले जाकर १० पेज की रिपोर्ट तैयार की जा सकती थी / लेकिन यह सब अब OUT OF DATE हो गया है और यह सब पिछले कई सालो से सब बन्द है / MANUAL MACHINE का उपयोग अभी भी Trace recording के लिये किया जाता है और सभी मरीजो का अब भी करता हू , यह इस लिये किया जाता है क्योन्कि कम्प्यूटराइज़्ड मशीन की अपनी सीमाये है और मनुआल मशीन मे कोई सीमा नही होती है / इसलिये रोग निदान और सिध्धान्त निदान मे इस्का उपयोग अभी भी किया जाता है

    अब इसके साथ साथ ज्यादा तकनीक के दृष्टिकोण से अधिक उन्नत मशीने install होने से जहा आयुर्वेद की इस तकनीक से बहुत उन्नत किस्म की रिपोर्ट प्राप्त होने लगी है वही चिकित्सा कार्य मे सटीकता और निपुणता और सूछ्मता जैसी बाते निखर कर सामने आती है जिससे मरीज के हित मे और उसके इलाज मे सम्पूर्ण्ता पैदा हो गयी है /

    लेकिन इसमे इतने ताम झाम विकसित किये गये है कि अब इन म्शीनो का कही और दूसरी जगह ले जाकर परीक्षण करना बहुत दुरूह और कष्ट दायक कार्य है / इन्हे लाना ले जाना कठीन है / ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके supplementary tests की रिपोर्ट भी अब २४० पेज से लेकर ४०० पेज तक की बनने लगी है / बड़ी सन्ख्या मे रिपोर्ट छापने के लिये समय और स्थान दोनो की जरूरत पड़ती है / जितना ज्यादा मरीज के शरीर के परीक्षण का डाटा आता है , आयुर्वेदिक इलाज उतना ही सतीक और अचूक होता है और इलाज मे गलती होने की समभावना कतई नही होती है और treatment मे perfection होता है / इसलिये मेरे सामने यही विकल्प है कि अगर कही दूसरी जगह इसका सेन्टर बनाना है तो यही सब infrastructure बनाना होगा जिसके लिये मुझे लाखो रुपये की जरूरत होगी / इस समय मेरी हैसियत नही है कि मै इतना खर्चा कर सकू /

    दूसरी बात यह है किय अह एक आयुर्वेद का रिसर्च केन्द्र है यहा वयवसायिक्ता का कोई प्रश्न नही है / हमारा पहला काम रिसर्च से जुड़ा है यहा कोई भी बात कामर्शियल नही है और सारा ध्यान academic गतिविधियो की तरफ रहता है / जहा academic aptitude होता है वहा commercialisation की किसी भी तरह की घुस पैठ समभव नही है /

    इसका विकास लगातार किया जता रहा है औइर आगे इसी तरह से जारी रहेगा /

    यह प्रसन्न्ता की बात है कि देश और विदेश से लोग आयुर्वेद के परीक्षण के लिये आते है और लाभ उठाते है /

    आशा है आप मेरी मज्बूरियो को सम्झेन्गे और मेरे इस उत्तर से सन्तुष्ट होन्गे /

    आप इसी तरह से हमारी कमियो की तरफ अपना ध्यान आकृष्ट करते रहे यही मै आप्से अपेक्षा करता हू /

  2. आ0डॅा जी,नमस्कार इतने महत्त्वपूर्ण विषय पर
    अति विस्तार से मन की व्यथाकथा प्रकाशित करने के लिये धन्यवाद/नव सृजन की पीड़ा प्रसव समान होती है/पर शेषजनो की स्थिति बालवत् होती है/आगे प्रभु इच्छा/वैसे प्राथमिक स्तर पर ईटीजी केन्द्र यदि बन जाते और अग्रिम स्तर पर कुछ केन्द्र रहते तो शायद स्थिति और ही होती

    ………..डा० देश बन्धु बाजपेयी का उत्तर …………मैने प्रयास किया है कि दूसरे स्थानो पर और दूर रहने वालो के लिये सरल और किफायती तरीके से आयुर्वेद की वैग्यानिक विधियो का उपयोग करके और उनके शरीर मे व्याप्त वातादिक दोषो का अनकलन करके आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यव्स्था दी जाये इसके लिये मरीज के रक्त और मूत्र की परीक्षण विधि का उपयोग किया जा सकता है /

    इसके लिये हमारे रिसर्च केन्द्र मे विकसित किये गये proto-type meter model परीक्षण और उपयोग मे लाये जा रहे है / इस समबन्ध मे एक कार्य योजना बनाने का प्रयास किया जा रहा है /

    आयुर्वेद के रक्त परीक्षण और आयुर्वेद के मूत्र परीक्षण के जरिये आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्तो का आन्कलन करके आयुर्वेद का सही इलाज और सटीक इला ज्करने मे आयुर्वेद के चिकित्सको और प्रेमियो को तथा आयुर्वेद का इलाज कराने वालो को अवश्य सुविधा होगी , ऐसा हमारा प्रयास होगा /

  3. दूसरे,पूर्णता एक आदर्श स्थिति है/ज्ञान विज्ञान ऐश्वर्य की चेतना के अंश है/अतः पूर्णत्व का प्रयास हो सकता है पर पराकाष्ठा की सिद्धि नही/ज्ञान के क्षेत्र मे असहयोग और विषमताओ से भारतीय इतिहास ने खोया अधिक और संजोया कम/तीसरे,व्यवसायिकता कोई बुरी बात नही है/इसके पीछे मानसिकता का महत्त्व है/जिसमे सामाजिकता होना जरूरी है/

    ………..डा० देश बन्धु बाजपेयी का उत्तर ………..यह सही है कि बिना व्यवसायिकता के कुछ नही किया जा सकता है / ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसक्रे अन्य परीक्षण को विकसित करने मे उर्जा और धन दोनो का ही बहुत बहुत खर्चा हुआ है / यह जान्च करने की तरकीबे बिना धन का invest किये और बिना शारीरिक और मानसिक उर्जा का खर्चा किये हुये ऐसे ही नही पैदा हो गयी है /

    यह मै जानता हू कि किस तरह की तकलीफो और कठिनाइयो को झेलते हुये मैने इसको जिन्दा रखा और इस स्तर तक विकसित करके ले आये / ऐसी स्तिथियो को लोग समझ नही सकते और न कभी समझ पायेन्गे, क्योन्कि लोग अपना स्वार्थ पूरा करना चाहते है / अब वह जमाना गया जब लोग धर्मार्थ कार्य करते थे /

    आर्या जी अब जमाना बदल गया है लोग धन के पीछे भाग रहे है और अब तो इस धन की प्राप्ती के लिये अन्धी दौड़ मे सभी शामिल हो रहे है / मै इससे फिलहाल दूर हू / आगे क्या होगा यह मै नही बता सकता हू /

    हमारा समाज ही ऐसा बन चुका है इसमे किसी को भी दोष देना उचित नही होगा / सड़्क पर अगर कोई कार टकरा जाय तो लोग दौड़ेन्गे जरूर, मगर अस्पताल ले जाने की जहमत कोई नही उठाता है लेकिन लूटने वाले लोग कार के अन्दर घायल लोगों और मर चुके लोगो का सामान लेकर चम्पत होने की जुगाड़ मे दौड़ पड़्ते है कि शायद कुछ मिल जाये और इसी बहाने कुछ अर्जित कर ले /

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