“EPILEPSY” AND “SEIZURES” ; FACTS ABOUT THE DISEASE AND AYURVEDA CURE ; “मिर्गी” बीमारी क्या है और इसका सटीक आरोग्य दायक आयुर्वेदिक इलाज


मिर्गी के बारे मे बहुत तरह की भ्रान्तिया फैल रही है या ऐसा कहिये कि भ्रान्तियां  फैला दी गयी हैं / ये भ्रान्तिया ऐसी है जिनका कोई वैग्यानिक  आधार नही है ऐसा वासतविकता मे चिकित्सको के लिये बहुत चकरा देने वाला कार्य होता है क्योन्कि जो कुछ भी कहा जाता है वह डाक्टरो के द्वारा ही कहा जाता है /

मुसीबत आखिर मे रोगी को ही इन अवैग्यानिक भ्रान्तियो के कारण उठानी पड़्ती है / रोगी ही परेशान होता है और अन्त मे यह रोगी के लिये इतना खतरनाक हो जाता है कि ्जिस तरह के इलाज किये जाते है उसके इतने खराब असर पैदा होते है कि रोगी एक तरह से crippled  होकर सारे परिवार के लिये बोझ बन जाते है /

मेरे आयुर्वेदिक रिसर्च केन्द्र मे हर साल बहुत बड़ी संख्या मे EPILEPSY – SEIZERs  के रोगी देश और विदेश से इलाज कराने के लिये आते है / इन रोगियो के द्वारा बहुत कुछ ऐसा बताया गया जिसको सुनकर और देखकर बहुत आश्चर्य होता है कि किस तरह की भ्रान्तिया रोगियो के साथ मे डाक्टर्स पैदा कर रहे है  / इन भ्रान्तियो को फैळाकर डाक्टर क्या सन्देश देना चाहते है यह तो वही बता  सकते है लेकिन रोगियो की बहुत अपूरणीय क्षति होती है /

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मिर्गी की बीमारी के बारे मे G H   की Physiology मे बहुत विस्तार से बताया गया है /

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मिर्गी का रोग मुख्यतया तीन या चार भागो मे बांट दिया गया है / यह मिर्गी के लक्षणो के चरित्रगत लक्षणो को देखकर अलग अलग किस्म के बताये गये है /

मिर्गी एक तरह की neurological  समस्या है जिसमे दिमाग की कार्य प्रणाली के बाधित होने के परिणाम स्वरूप उतपन्न immediate shock को रोकने के लिये पैदा की गयी counter reaction  होता है जो शरीर को कुछ समय तक के लिये बेहोशी से लेकर अकड़न तक के लक्षण पैदा कर देती है /

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मष्तिष्क के nueronस जब एक सन्देश को लाने और ले आने का काम करते है और उसी समय किसी तरह का अनावश्यक stimulus  अचानक पैदा हो जाता है तब यह सन्देश बाधित होता है और मष्तिष्क यह समझ नही पाता कि क्या करना चाहिये ? मश्तिष्क   को क्षति से बचाने के लिये मष्तिष्क  Counter action  पैदा करता है जिससे यह स्तिथि पैदा हो जाती है /

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यह बाधा पैदा होने का कारण शरीर के VISCERA  भी होते है जिनके कार्यो का सन्देश  AUTONOMIC NERVOUS SYSTEM के द्वारा दिमाग तक जाता है / अगर इन अन्गो मे कोई विकृति होती है तो यह सन्देश अधिक उग्र या कम्जोर होते है जो दिमाग के उस control  करने वाले section  को अधिक या कम प्रभावित करते है / दिमाग के दोनो हिस्सो मे सूचनाये एक हिस्से से दूसरे हिस्से मे जाने आने मे fraction of seconds  का समय लगता है /

जैसा कि पता है कि दिमाग का बायां हिस्सा शरीर के दाये हिस्से को control करता है और दिमाग का दांयां हिस्सा शरीर के बाये हिस्से को control करता है / दिमाग के अन्दर हो रही गतिविधियो को यही दोनो हिस्से साझा करते है और इसके लिये सूचनाये एक हिस्से से दूसरे हिस्से मे बराबर अनवरत अदलती बदलती रहती है ताकि एक रूपता शरीर की बनी रहे /

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जब यह एक रूपता किसी कारण से बाधित होती है तो दिमाग इसे सुधारने की कोशिश करता है  और अपनी समाहित  faculties  को बचाने के लिये मिर्गी जैसे लक्षण पैदा करता है ताकि उसे सुधार सके / इसके लिये कभी उसे जल्दी या कभी उसे देर तक बचाव करने के लिये समय लगाना पड़्ता है / जितने समय तक उसे सुधार करना पड़्ता है उतने समय तक मिर्गी बनी रहती है और जैसे ही दिमाग की faculties  अपने को  सुधार लेती है , रोगी की चेतना भी वापस आ जाती है /

आधुनिक चिकित्सा विग्यान मे मिर्गी रोग की चिकित्सा के लिये anti-deppressive और anti-convulsive  और हhypnotic  दवाओ का उपयोग क्ररते है / इन दवाओ से मूल कारण की चिकित्सा नही हो पाती है / मूल कारण से तात्पर्य यह है कि किस patho-physiology  के कारण यह तकलीफ पैदा हो रही है और root-problem  कहा पर है /  ये दवाये मश्तिष्क की उत्तेजना को कम कर देती है और मष्तिष्क की सक्रियता को sedate  कर देती है जिससे मश्तिष्क के कार्यो पर जैसा कि ऊपर बताया गया है प्रभाव डाल कर कम कर देती है / इसी वजह से मिर्गी के झटके आना बन्द हो जाते है / लेकिन जब दवा का असर मरीज सहन कर लेता है तो इस दवा की डोज बढानी पड़ती है और यह सिल्सिला बढता चला जाता है / बहुत से मरीज ज्यादा समय तक दवा खाने से दिमाग की कार्य क्षमता कम होने लगती है और वे मान्सिक बीमारियो के शिकार होने लगते है / बहुतो को विकलान्गता जैसे लक्षन पैदा हो जाते है / बहुतो को याद्दाश्त क्म होने की बीमारी हो जाती है / बड़ी सन्ख्या मे मिर्गी के मरीजो का इलाज करने के लिये आये ऐसे मिर्गी रोगियो मे लक्षण पैदा हुये है जिन्हे यहां बताया जा रहा है /

इसके विपरीत आयुर्वेदिक और आयुष चिकित्सा मे मूल रोग को पहचान करके इलाज करते है जिससे हमेशा के लिये मिर्गी रोग मे स्थायी लाभ मिल जाता है / आयुर्वेद मे मष्तिष्क के रोगो के इलाज के लिये बड़ी सन्ख्या मे औषधियां है / इसके अलावा आयुर्वेद रोगो के मूल को पहचान कर सारे शरीर मे व्याप्त विकारो को दूर करता है तो मिर्गी रोग अवश्य जड़ मूल से ठीक होते है /

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ऊपर एक मिर्गी EPILEPSY / SEIZURES के  रोगी का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के तीन तरह के परीक्षणों की रिकार्डिन्ग दी गयी है / ये तीन अलग अलग  रिकार्डिन्ग तीन तरह की विकसित की गयी ई०टी०जी० मशीन के द्वारा    मरीज के शरीर से रिकार्ड की गयी है /  पहला रिकार्ड कम्प्य़ूटराइज्ड ई०टी०जी० मशीन से किया गया है जो HORIZONTAL POSITION  मे रिकार्ड किया गया है / दूसरा रिकार्ड TREAD MACHINE E.T.G. AYURVEDASCAN  का है , इसमे दौडा कर और शारीरिक मेहनत करके VERTICAL POSITION  मे रिकार्ड करते  है /    तीसरा रिकार्ड लम्बे समय तक RESTING POSITION मे CONTINUOUS E.T.G. AYURVEDASCAN TRACES RECORDER  द्वारा करते है और यह किसी एक चुने हुये सेक्टर का ही करते है / इस रोगी के सिर मे  9 Channel द्वारा दिमाग के चुने हुये   Sector की रिकार्डिन्ग दो घन्टे के लिये की गयी है / इन सभी रोकार्डिन्ग को ZOOM  करके परीक्षण करते है जिससे यह पता चलता है कि किस तरह की  anomalies  उपस्तिथि है /

ऊपर  बताये गये रोगी को  जब दौड़ा कर  ट्रेसेस की   रिकार्डिन्ग  VERTICAL POSITION मे   की गयी तो दिमाग के छुपे हुये हिस्सो की सक्रियता उभर कर सामने आ गयी / दिमाग के मुख्य हिस्सा FRONTAL LOBE की माप COMPUTERISED E.T.G. AYURVEDASCAN   मे सामान्य से अधिक लेवेल की प्राप्त हुयी / लेकिन जब दौड़ा कर FRONTAL LOBE की माप की गयी तो यह सामान्य से अभुत कम आ गयी / अधिक समय तक और लिटाकर लम्बे समय तक जब रिकार्डीन्ग की गयी तो इसमे waves level  बहुत dull LEVEL  का मिला है /

यह एक छोटी सी बानगी डाटा को लेकर यहा उदाहरण के लिये बताया गया है / इसका INTERPRETATION इस प्रकार का है कि जब मरीज आराम की अवस्था मे होता है  तो उसके दिमाग मे कई तरह की उत्तेजना अपने आप होती है जो AUTONOMIC NERVOUS SYSTEM  के कारण होता है जिससे मन के  विचार तेजी से बदलते रहते है / जब कि दौड़ा कर और मेहनत करके मिला हुआ डाटा यह बताता है कि शारीरिक मेहनत करने के बाद FRONTAL BRAIN   की सक्रियता काफी कम हो जाती है / यह AUTONOMIC NERVOUS SYSTEM  के शारीरिक मेहनत की एवज मे बने pressure  के कारण होता है/ लम्बे समय तक CONTINUOUS E.T.G. AYURVEDASCAN TRACES RECORDING का आराम करने के बाद जितने भी परिवरतन समय के बीतने के साथ रिकार्ड करके  observe  किये गये है  उनसे यही पता चलता है कि मष्तिष्क का electrical behaviour dull  किस्म का है /

इस तरह की analysis  से यह पता चल जाता है कि शरीर मे किस तरह की गड़्बड़ी पैदा हो गयी है / आयुर्वेद के सिध्धन्तो का जब पता चल जाता है कि किस तरह का दोष शरीर मे है और किस तरह से दोष-श्रोतो-दुष्टि हो गयी है इस तथा अन्य आधार को conclude  करके आयुर्वेद का इलाज विग्यान सम्मत हो जाता है /

आधुनिक आयुर्वेद की निदान ग्यान की तकनीक  ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन  द्वारा सारे शरीर और  मश्तिष्क की जान्च करने और इसके अलावा पूरे शरीर के अन्गो की जान्च करने मे तरह तरह की anomalies  का  combination  बनता है जिसके उपचार करने से मिर्गी का रोगी १००% शत प्रतिशत ठीक होते है / हमारे रिसर्च केन्द्र मे जितने भी मिर्गी के रोगी इलाज क्रा चुके है वे सभी सामान्य जीवन बिता रहे है /

आयुर्वेद की तकनीक पर आधारित मिर्गी रोगियो का इलाज जब किया जाता है तो अवश्य सफलता मिलती है / इसीलिये आयुर्वेद आधारित इलाज से मिर्गी जरूर ठीक होती है /

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