GARLIC ; AYURVEDA OBSERVATION SINCE CENTURIES PROVED CORRECT BY MODERN OBSERVERS STUDIES ; लहसुन ; रासोन ; आयुर्वेद की शताब्दियो पहले किये गये अध्ध्य्यन का आधुनिक अध्ध्य्यनो द्वारा सहमति


लहसुन अधिकतर भारतीय पाक विग्यान मे खाद्य पदार्थो के पकाने और स्वाद बनाने के लिये मसाले के तौर पर उपयोग करते है / घरेलू चिकित्सा के लिये भी लहसुन का उपयोग यदा कदा जानकार लोग करते है / चिकित्सा कार्य  मे  रोगी को सहायता देने के लिये इसका उपयोग करते है / अधिकतर इसका उपयोग दर्द या वायु के दर्द को   आराम करने के लिये  करते है / इसकी लुगदी बनाकर और सरसो या तिल के तेल मे मिलाकर आग मे पकाते है जब तक लहसुन को जला नही देते है / ऐसे तेल को आखरी मे छान कर दर्द के स्थान पर चुपड़्ते है और हल्की मालिश करते है / इस तरह से प्राप्त तेल को अच्छी तरह फिल्टर करके और गुन्गुना गरम करके एक या दो बून्द कान मे डालते है ताकि कान के दर्द मे आराम मिले /

आयुर्वेद मे लहसुन का औषधीय उपयोग किया जाता है / बहुत से ऐसे आयुर्वेद के फार्मूले है जिनमे लहसुन का उपयोग मुख्य द्रव्य के स्वरूप मे होता है / लेकिन लहसुन का उपयोग औषधि मे जब किया जाता है तो सबसे पहले लहसुन का शोधन किया जाता है यानी लहसुन क purification  करते है /

औषधीय उपयोग के लिये लहसुन का प्रयोग अशुध्ध अवस्था मे नही करने का आयुर्वेद मे विधान है / दवाये बनाने के लिये शुध्ध लहसुन का उपयोग करते है / आयुर्वेद कहता है कि अशुध्ध लहसुन का प्रयोग आयुर्वेद औषधियो को बनाने मे न किया जाये / शुध्ध किये गये लहशुन का उपयोग औषधि के निर्माण मे क्रना चाहिये /

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ऊपर के चित्र मे लहसुन की एक गुच्छेदार पोथी और छिलका निकाला हुआ लहसुन और लहसुन को दो हिस्सो या भागो मे बान्टकर या काटकर इसके बीच के कडे हिस्से को अलग करके दिखया और बताया गया है /

आयुर्वेद मे लहसुन के बारे मे निघन्टु यानी AYURVEDIC  MATERIA MEDICA    मे हरित्क्यादि वर्ग मे वरणन किया गया है /

लहसुन के गुणो के बारे मे आयुर्वेद कहता है कि लहसुन पुष्टिकारक  और वीर्य वर्धक और हड्डियो के टूटने के स्थान को जोड़ने बाल और वात तथा कफ को नष्ट करता है / मेधा के लिये हितकार, नेत्रो के लिये हितकर , समपूर्ण शरीर को पुष्ट करने वाला, हृदय रोग, श्वास, जीर्ण ज्वर, पसली का दर्द, , गुल्म ,अरुचि, खान्सी , सूजन, बवासीर, कुष्ज्ठ, मन्दाग्नि, आन्तो के कीद़्ए , स्वास को दूर क्रता है /

लहसुन के बारे मे जो अवगुण है उसके बारे मे आयुर्वेद बताता है कि यह गरम प्रभाव वाला है , भारी है यानी पचने मे ह्लका नही है , पित्त-रुधिर को बढानेवाला यानी खून की गरमी को बढाता है / गर्भ वती स्त्री को इसका सेवन नही करना चाहिये /

भोजन के तौर पर  लहसुन को  प्रयोग करने के लिये हमेशा तेल मे भूनकर और पकाकर ही खाने के लिये विधान है / इसे कच्चा खाने के लिये निषेध किया गया है / यानी लहसुन को कच्चा खाने के लिये मना किया गया है /

आयुर्वेदिक दवाओ के बनाने के लिये लहसुन  के   उपयोग के लिये  लहसुन के शोधन का विधान है /  शोधन विधान इसलिये किये जाते है ताकि लहसुन के खराब प्रभाव को नष्ट किया जा सके या कहराब प्रभाव को अधिक से अधिक तम  स्तर तक   निष्क्रिय किया जा सके  /    औषधियो को बनाने हेतु  लहसुन का शोधन करने के लिये  या शुध्ध करने के लिये निम्न प्रक्रियाये अपनायी जाती है /

  • लहसुन को बीच से चीर्कर या फाड़्कर दो भागो मे बानटते है औउर इसके बीच की कड़ी जड़ को या बीच के कडे लम्बाई  नुमा जड़ जैसे   हिस्से को बाहर निकाल देते है / आयुर्वेद के मनीषियो का कहना है और मानना है कि लहसुन का यह हिस्सा औषधि के उपयोग के लिये नही है /
  • लहसुन के उपरोक्त तरीके से बीच के हिस्से को हटाकर एकत्र किये गये अन्गो को खट्टे मठ्ठे मे २४ घटे या एक दिन-रात भिगोकर रख देते है और बाद मे यही द्रव्य साफ पानी से धोकर और छाया मे पानी के सूखने तक हलकी नमी रहते हुये दवाओ मे प्रयोग करते है /

इस तरह से लहसुन को शुध्ध करके  बनायी जाने वाली आयुर्वेदिक दवाये हर तरह से शुध्ध और शरीर के इलाज के लिये सुरक्षित होती है /

आधुनिक फारमाकोलाजी के वैग्यानिको द्वारा लहसुन पर किये गये अध्ध्यन मे यही सब बाते और तथ्य  प्रायोगिक तौर पर साक्ष्य आधारित स्थालित की गयी है /

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उप्रोक्त पुस्तको मे दिये गये विवरण को समझने के बाद यह स्पष्ट है कि लहसुन के बारे मे आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान के अध्ध्य्यन मे वही सब EVIDENCE BASE  करके बताया गया है जो आयुर्वेद के निघ्न्टुओ मे हजारो साल पहले बता दिया गया था /

इस तरह से किये गये अध्ध्य्यन मे जिन  GARLIC anomalies  के बारे मे बताया गया है वे अशुध्ध अवस्था   मे लहसुन के उपयोग को करके प्राप्त आन्कडे़ है / अगर लहसुन को शुध्ध करके और तब उसके बाद अध्ध्य्यन किया जाता तो वैग्यानिको को वही आनकड़े प्राप्त होते  जो आयुर्वेद के निघन्टुओ मे मिलते है /

आयुर्वेद कहता है कि लहसुन का उपयोग निम्न तरह से श्ध्ध करके किया जाना चाअहिये /

  1. लहसुन को तेल मे भून्कर खाना चाहिये
  2. लहसुन को मठ्ठे मे शोधन करके सभी औषधीय कारयो मे  प्तयोग करना चाहिये

लहसुन के दो टुकड़े कर ले और इस्के बीच की जड़ या कड़े हिस्से को निकाल दे और इसे .तेल के साथ खाना चाहिये

ऊपर बताये गये तरीके से लहसुन खाने से लहसुन कभी नुकसान नही करता बल्कि अमृत की तरह फायदा करता है /

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एक टिप्पणी

  1. sir,
    मैं cervaical और lumber मे slipp disk से पीड़ित हूँ। कृपया मेरा मार्गदर्शन
    करिए।
    cervical मेc 6 व c 7 के बीच मे और lumber मे L 4 और L 5 के बीच मे ।
    मेरे लिए क्या ज़रूरी है कृपया बताए।

    On Wed, Dec 24, 2014 at 7:33 PM, “आयुर्वेद : आयुष ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन
    : AYURVEDA : E.T.G. AyurvedaScan ; आयुष आविष्कार ; ई० एच० जी०
    होम्योपैथीस्कैन : E.H.G. HomoeopathyScan”
    wrote:

    > prakruti posted: “”

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