दिन: जनवरी 1, 2015

“भभूत खिला दिया ” या “लौन्ग खिला दिया ” या ” अभिमत्रित करके जल पिला दिया ” या “पढके कोई चीज खिला दी ” या “पढे हुये खाने पीने की चीज खिला दी ” ; जिससे मानसिक बीमारी पैदा हो गयी – ऐसा लोग बताते है / नयी आयुर्वेद की निदान ग्यान की तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण विधियों द्वारा आधारित की गयी खोज से पता चल गया है कि ऐसा कुछ भी नही है और यह सब कहना बकवास है / ये सभी मानसिक बीमारिया है जो शरीर के अन्दर ही पैदा होती है और शरीर के कई सिस्टम की होम्योस्टेटिस विकृतियो से जुड़ी होती है / होम्योस्टेटिस ठीक होने से मानसिक स्तिथि सामान्य हो जाती है /


यह सब निराधार है और बिलकुल बकवास है और विश्वास करने योग्य नही है जैसा कि लोग बताते है कि उनको बीमारी इस वजह से हो रही है कि उनको “किसी ने कुछ खिला दिया है ” या “किसी ने वश मे करब्ने के लिये किई टॊटका कर दिया है ” या ” भभूत खिला दी है ” या ” अभिमन्त्रित करके कुछ खिला दिया है या पिला दिया है ” आदि आदि /

कोरॊ कलपना पर आधारित इस तरह की बीमारिया पैदा हो जाने की बात आम तौर पर लोगो के बीच फैली हुयी है / अच्छे भले और पढे लिखे लोग भी इस तरह की बातो के भ्रम जाल मे फन्स जाते है / मुझे ताज्जुब होता है जब मुझे एक मरीज ने बताया कि फला आदमी या व्यक्ति जब उसे आन्खो से घूर कर देख लेता है तो उसे भय लगने लगता है / ऐसा लगता है कि जैसे वह कोई जादू जानता है और वह मेरे ऊपर जादू कर रहा है /

यह सब बेकार की बाते है और ऐसा कुछ भी नही है /

हमारे रिसर्च केन्द्र मे इस तरह के मरीजो का बड़ी सन्ख्या मे इलाज किया जा चुका है और वे सभी मरीज सामान्य जीवन बिता रहे है/

आयुर्वेद की नई तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन द्भवारा  मरीजो का इलाज करने के बाद यह सत्य सामने आया है कि ऐसा कुछ भी नही है और यह सब कोरी कल्पना मात्र है और इस तरह से किये जारहे सारे और सब दावो मे किसी तरह की सच्चाई नही है  बल्कि सब का सब गलत है और किसी भी कीमत पर विश्वास करने योग्य नही है /

हमारे रिसर्च केन्द्र मे  ऐसे मरीजो का उपचार सफलता पूर्हीवक किया जा चुका है / इस तरह के मरीज के प्राप्त डाटा और किये गये निदान का अध्ध्य्यन करने के बाद पता चला कि महिलाओ और पुरुषो दोनो मे कुछ खास किस्म के सिस्टम विकृति होती है जिनके कारण ऐसी बाते पैदा होती है /

महिलाओ मे ऐसी सिस्टम विकृति कुछ दूसरी तरह की होती है और यह विकृति पुरुषो से कतई मेल नही खाती है /

यही बात पुरुषो की विकृति मे होती है जो महिलाओ की विकृति से मेल नही खाती और और यह महिलाओ से जुदा किस्म की बात होती है जिनसे मानसिक विकार होते है /

ये मान्सिक विकार रकत सनचरण और हारमोनाल सिस्टम और नरवस सिस्टम और पाचन सनस्थान और मूत्र सन्स्थान और रिप्रोडक्टिव सिस्टम तथा रक्त के अन्दर पाये जाने वाले तत्वो तथा अन्य शारीरिक क्रियायो की विकृति से पैदा होते है /

इन विकृतियो के परिणाम स्वरूप जिस तरह का दबाव और प्रभाव शरीर पर पड़्ता है उससे रोगी की मान्सिक क्षमता पर प्रभाव पड़्ता है और मस्तिष्क का काम काज बाधित होता है /

इस तरह के व्यवहार करने वाले व्यक्तियो और उनके तीमार दारो को यह समझना चाहिये कि यह एक तरह की बीमारी है और इसे बीमारी समझ कर ही इलाज करना चाहिये / इसके लिये किसी डाक्टर से सलाह लेकर इलाज करे और बेकार मे किसी तान्त्रिक या बाबा या झाड़ फून्क करने वालो से बचे /

झड़ फून्क या गन्दा ताबीज पहनने से कुछ भी नही होता और यह सब बेकार के उपाय होते है / ऐसे काम मत करे और इस तरह के उपाय करने से कुछ भी नही होता है /

आयुर्वेद या होम्योपैथी मे इस तरह की तकलीफो का बहुत अच्छा इलाज है इसलिये मै जरूर कहून्गा कि अपने शहर के नज्दीक के किसी डाक्टर से सलाह ले और उपचार करे /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके अन्य परीक्षणो पर आधारित इलाज करने से १००% रोगी ठीक होते है /

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