योग और योग दिवस पर ; २१ जून २०१५


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सन १९७३ मे मै होम्योपैथी के अध्ध्य्यन के लिये जरमनी देश के म्यूनिख शहर मे मी के महीने मे पहुन्चा था / मै अपने साथ होम्योपैथी की मटेरिया मेडिका और अन्य जरूरी किताबे लेकर गया था /
मेरे पास पैसा नही था लेकिन विदेशो मे जाकर शिक्षा प्राप्त करने का हौसला जरूर था / सन १९७२ मे बेचलर आफ मेडिसिन अन्ड सर्जरी का  कोर्स पूरा करने के बाद मेरे मित्र ने कहा कि जरमनी जाकर होम्योपैथी पढना चाहिये और / कुछ छात्रो का सन्गम बना और एद्मीशन लेने के लिये मेरे ऊपर जिम्मेदारी डाल दी गयी /

मैने कई देशो से समपर्क किया / इन्ग्लन्ड ने एद्मीशन देने से मना कर दिया और कहा कि हमारे यहा केवक एम०डि० या इसके समक्छ डिग्री वाले ही प्रवेश पा सकये है /

कुछ देशो मे भाषा की समस्या थी /

अन्त मे जरमनी के म्यूनिख शहर मे होम्योपैय्ही जहा पढाई जाती है वहा एड्मीशन मिल गया /  जरमन भाश्गा मे पढाई के लिये बताया ग्या / इसलिये कानपुर मे जर्मन भाषा पढना शुरू किया / मैक्स मूलर भवन दिल्ली से एक वर्ष मे छह माह के दो कोर्स किये /  अब मै जरमन भाषा बहुत फर्राटे से बोलने लगा /

मेरे पास धन नही था लेकिन हौसला बहुत था / इसलिये फैसला किया कि दिल्ली से अम्रत्सर होते हुय्ये काबुल चला जाय और फिर वहा से  अफगानिस्यान  और ईरान और टर्की को पार करते हुये यूरोप इस्ताम्बूल होते हुये पहुन्चा जाय /

मैने अपनी जाने की योजना अपने साथ जाने वाले दोस्भातो और साथियो को बतायी / लेकिन एक एक करके सभी दोस्त जो पहले साथ जाकर पढाई करने का वादा कर रहे थे एक एक करके सब पीछे हट गये . अब मै अकेला रह गया /

मैन्र पास्पोर्ट का आवेदन किया / मुझे कुछ महीनो मे पास्पोर्ट मिल गया . मैने फैसला किया कि कोई जाये या न जाये मै अवश्य जाउन्गा / पिआ जी ने ब-मुश्किल मुझे तीन हजार रुपये दिते और कहा कि इसी से ज्यादा नही दे सकता .

मेरी किसी ने भी मदद नही की यह बदे अफ्सोस की बात थी / अपने ही दोस्त और रिश्ते दार पीछे हट गये  / किसी तरह से एक पुराना स्लीपिन्ग बैग और एक रैक सैक का इन्ताम किया /  और कुच लोगो ने  मुझे यह सलाह दी कि योग का जर्मनी मे नडा क्रेज है इसलिये अगर आप योग सीखकर जाते है और योग जानते है यो यह आपके लिये नहुत लाभकारी होगा /

मै बचपन से अखाडे जाता था पहलवानी करता था और इसके साथ योगाभ्यास भी करता थ जो मैने आपने एक रिश्तेदार से सीखा था /

मै अकेला ही जरमनी जाने के लिये कमर कसे बैठा था / तभी मुझे एक सज्जन मिल गये जो मेरे छोटे भाई के परिचित थे / उन्होने यूरोप घूमने का कई साल पहले प्लान बनाया था लेकिन किसी कारण से नही जा पाये थे / अचानक मेरी मुलाकत उनसे हुयी मैने अपनी सारी व्यथा उनको बतायी / वह सज्जन भी घूमने जाना चाहते थे मै पढने के लिये जाना चाहता था / म्यूनिख यक साथ साथ जाने का कार्यक्रम तय हो गया /  एक से भले दो हो गये /

उन्होने अपना पास्पोर्ट अप्लायी किया . कुछ दिनो की दौड धूप के बाद उनको पास्पोर्ट मिल गया /

हम दोनो ने  म्यूनिख तक जाने का प्लान बनाया कि किस तरह से जयेन्गे /

उनके पास पैसा थ मेरे पास पैसा नही था / अन्त मे मैने उनसे कहा कि अच्छा यही होगा कि इसी कसम्कस मे एशिया के देशो को पार करके यूरोप तक पहुन्च्र्न्गे और फिर यूरोप के देशो को लान्घते हुये जरमनी पहुन्चेन्गे फिर वहा देखा जायेहा /

अच्छि बात यह हुयी कि इन सज्जन के कई जानने वाले जरमनी और यूरोप के देशो मे पहले से ही मौजूद थे / इसलिये हमारी एक चिन्ता यह दूर हुयी कि  हमारी जान पहचान नही है .

दिल्ली से वीसा की सभी औपचारिकताये पूरी करने के बाद हम लोग दिल्ली से अमृत्सर गये  और वहा से राजा सान्सी एयर्पोत्य़ से काबुल के लिये रवाना हुये /

एरियाना अफगान अयर्लाइन की इस फ्लाईट से जब लाहोरे हवाई अड्डे पहुचे तो हमे वहा बाहर उतरने की इजाजत नही दी गयी / हमरा प्लेन लाहोरे एयर्पोर्ट की बिल्डिन्म्ग के सामने खड़ा था ताकि पाकिस्तान के यात्रियो को वहा से जहाज पर क्प्बोर्ड किया जा सके / अवानक मेरी निगाह एहत्पोर्ट की बिल्डिन्ग के बगल के हिस्से मे पड़ी जहा भारतीय झन्डा के निशान वाला एक फोकर फ्रेन्डशिप जहाज खडा था . पहले तो मै चौन्का कि यह जहाज कैसे यहा आ गया ?

फिर तुरन्त मेरी समझ मे आया कि यह वही हई जैक करके लाया गया जहाज है तिसे आतन्कवादी लाहोरे ले आये थे और जिसमे एक महिला भारतीय अयर हिस्टेस मारी गयी थी /

यहा से  काबुल आ गये /  लेकिन जगह जगह टैन्क और लम्बे लम्बे सलवार कुर्ताधारी अफगान सैनिको को देखकर मै तो घबरा गया / जगह जगह टैन्क लगे हुते थे  और मिलिय़री मार्च कर रही थी /

दरासल कु हफ्ते कहले वहा सरकार बदली थी / अच्छायी यह रही कि भारत ने सबसे पहले इस सरकार को मन्यता दी थी इसलिये प्रधान मन्त्री इन्दिरा गन्धी  को वहा समान से  देखा गया था . इसीकारण हम भारतीयो के  लो उदारता दे समझ रहे थे / ःओटल अटलान्टिक  मे हम ठरे थे  जो अफघान न्यूज सर्विस के कार्यालय के सामने थी / पास मे ही काबुल नदी बहती थी और वही पर पोस्ट आफिस था /  पोस्ट आफिस जाकर वहा से मैने घरो को मस्सगे किये /

काबुल्से  से कन्धार और हैरात होते हुये इस्लाम किला बार्डर पार करके ईरान के बार्डर को पार करके मशद  होते हुये तेअहरान की तरफ बढ चले / मशद वह शहर है जहा से नादिर शाह भारत की तरफ  लूटने के इरादे से आया था /  तेहरान से  तुर्की की तरफ चक्ले  और तुर्की के इर्ज रुम  बार्डर को पार करके अन्कारा होते हुये हैदर पाशा  रेलवे स्टेशन की तरफ बढे यहा से काला सागर जहाज से पार करके इस्ताम्बूल आ गये जहा तुर्की का यह हिस्साअ यूरोप मे आता है / बुल्गारिया और यूगोस्लोवियाहगरी पार करके जर्मनी  पहुब्चे और फिर यहा से म्यूनिख शह्र / म्यूनिख मे एक परिचित थे उनको पहले सूचना देदी थी / सुबह भोर का समय था हम पूछते हुये फाली स्ट्रासे पहुचे  जहा हमारे परिचित मिल गये /

कानपुर से म्यूनिख का सफर ५० दिन मे पूरा हुआ / मै हवाइ जहाज और ऊन्ट गाड़ी और घोडा गाड़ी और गधा गाड़ी और साइकिल और तानगा और टैक्सी और गस और रेल  यानी जितने भी साधन आने जाने के हो सकते है सबका उपयोग करके यहा तक पहुन्चा था /

अब जो कुछ हुआ सो हुआ / योग की बात कर रहे थे तो अब योग के बारे मे बताता  हू /

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एक दिन मेरे एक जानकार मुझे म्यूनिख के किसी उपनगर मे जहां योग सिखाने के लिये सापताहिक कछाये लगती थी वहां ले गये / यह रविवार का दिन था / / कोई जरमन जो भारत आकर योग सीख गया था वही वहां योग की कछाये चलाता था / मेरे जानकार कई सालो से जरमनी मे रह रहे थे  उहोने मुझे सुबह योग करते हुये देखा  था / एक दिन उन्होने मुझसे उस योग केन्फ़्र मे आने के लिये निमन्त्रित किया / मै उनके साथ गया था /

जरमनी मे योग को YOGA PRAXIS  योगा प्राक्सिस  के नाम से ज्यादा जानते है /

सुबह ९ या १० के आस पास का समय था . जरमन लड़्के और लड़्किया योग क्र रहे थे / उनका इन्स्ट्रक्टर उनको समझा रहा था /

जरमन लोगो के ह्सारीरिक बनावट के मुकाबले मै बहुत दुबला पतला था / तुलनात्मक्ता मे मै दुगला ही कहा जाऊन्गा /

वे सभी शुरुआत के ही साधारण वाले आसन कर रहे थे /

मुझसे निवेदन किया गया कि मै उनको कुछ आसन बताऊ और उनको कुछ टिप्स दूं /

मैने कठीन आसन जैसे मयूरासन और मत्सयेन्द्रासन और सर्वान्गासन  और  कन्द पीडासन  और दूसरे आसन दिखाये /

मयूरासन  देखकर सब लोगो ने तालिया बजायी / बाद  मे कई लोगो ने मयूरासन करने की कोशिश की लेकिन सफल नही हुये /

मैने उनको जिस तरह की टिप्स दी थी वह इस प्रकार थी /

१- योग के आसन जो भी किये जाये वे शरीर की बनावट के हिस्सो की कसरत के साथ जुडे होने चाहिये / २- कोशिश करके योग के आसनो का चुनाव इस तरह होना जिससे  रीढ से जुडे  मान्स पेशियो और नसि तथा नाडियो और इस सबसे जुड़ने वाले लीगामेन्ट्स और टेन्डन्स की भी कसरत हो /

३- आसन अगर एक बार सामने झुकने वाले किजाते है तो इसके उलट पीछे झुक कर करने वाले  आसन करने चाहिये , यह इसलिये जरूरी है कि शरीर की माश्पेशियो का बैलेन्स बराबर बना रहे अन्यथ मान्श्पेशियो और जोदओ मे दर्द होने की सम्भावना होती है / वहां उपस्तिथि कुछ लोगो ने इसकी शिकायत की थी कि आसन करने के बाद उनको पीठ या कमर मे दर्द होने लगता है /

४-अधिकतर आसन रीढ की हड्डी के आगे और पीछे यानी सामने और पीछे की तरफ करने वाले होते है /श्रीर मे पूर्णता बनाये रखने के लिये रीढ के हड्डी के दाये और बाये और दाहिने या बाये शरीर को मोड़ने वाले आसन करने चाहिये  / इससे शरीर मे मान्श्पेशियो का बैलेन्स और रक्त सन्चार मे एक तूपता बही होती है /

५- जब आसन करते है तब शरीर की स्तिथि अधिकतर  लम्बवत अथवा वर्टिकल स्तिथि मे होती है / शरीर जब वर्टिकल स्तिथि मे होता है ब  शरीर के विसेराज सुकड़ते है और ग्रेवीटेशन के कारण लम्बे होते है / इनके आकार मे  परिवर्तन होता है /  इसलिये जब सभी आसन समाप्त हो जाये तब “शवासन” अवश्य करे / शवासन करने से शरीर के लम्बवत स्तिथि के होने से  जो असर शरीर के बिसेराअ मे पड़ता है वह शवासन करने से ठीक होता है और उनके  अन्दर की रक्त सन्चार प्रणाली अधिक सक्रिय होती है /  शवासन करने से शरीर का आकार “लम्बवत” यानी हारीजेन्टल पोजीशन मे हो जाता है और ग्रेवीटेशन के कारण शरी के विसेरा लम्बवत फैलते है / इस यरह से वरटिकल और हारीजेन्टल पोजीशन का स्मन्वय शरीर के लिये लाभ कारी सिध्ध होता है /

मै प्रतिदिन और आज भी योग करता हू  और इस वात का ध्यान रखता हू कि शरीर के सभी अन्गो का व्यायाम हो जाते /

६- प्राणायाम अथवा गहरी गहरी सान्से लेना बहुत लाभकारी है / जिन्हे सान्स की तकलीफ हो या फेफड़ो से समब्नधित रोग हो वे केवल खुली हवा मे बैठे और जितनी गहरी ताकत के अनुसार सान्स ले सकते हो करे /

७= आसन की शुरुआत तडासन से करे फिर पश्चिमोत्तानासन करे फिर चन्द्रासन करे  फिर ताडासन करे और बाद मे शवासन करे / इतने सरल आसन करने से शरीर की अधिकान्श मान्स पेशियो और रीध का व्याम तथा शरीर के विसेर का व्यायाम हो जाता है /  इसमे कुल १० मिनट लगये है /

सासन अपने शरीर की क्षमया के अनुसार करना चाहिये /

मेरी इस तरह की टिप्स से जरमन लोग प्रभावित हुये /  जब उनको पता चला कि मै एक डाक्टर हू और उनको बता रहा हू तो वे सभी बहुत प्रभावित हुये /

मैने उनको आयुर्वेद के बारे मे बताया / मै अपने साथ कुछ चूर्ण यथा लवण भासकर और हिग्वास्टक चूर्ण का स्वाद चखाया / महायोग्राज गूगल  और दूसरी आयुर्वेदिक दवओ के बारे मे बताया / उनमे से किसी को भी नही पता था कि आयुर्वेद क्या है और इसकी द्वाये देखने मे कैसी होती है और उनका स्वाद कैसा है ?

जहां मै होम्योपैथ्य़ी  पढता था यह जगह harlaching  मे  ISSAR RIVER  के किनारे बना अस्पताल KRANKENHAUSE FUER NATURHEILWEISSEN [ [HOSPITAL FOR NATURE CURE METHODS] था /

मुझे डा० अब्बी  इन्स्ट्रक्ट करते थे / इस अस्पताल मे होम्योपैथी के साथ साथ वे सभी चिकित्सा विधिया इलाज मे काम लायी जाती थी  तो बिना केमिकल द्वाओ की होती थी / निदान और रोगो की जान्च के लिये  उस समय प्राप्त सभी  निदान की विधियो को अप्नाया गया था / जैसे उस समय एक्स रे जिसे जरमन मे रोयेम्न्ट्जेन कहते है , ई०सी०जी० और रक्त की जान्चे आदि आदि जो भी समभव था /

डा० अब्बी मुझे बताते रहते थे कि  जिन मरीजो को मैने उनके साथ जाकर चेक किया है वे किस तरह की बीमारी से सफर कर रहे है और उनके क्या निदान निकले / वे यह सब एक्स रे ईसीजी और खून की जान्च करके देखते थे /

मुझे ई०सी०जी० का ग्यान और उसका इन्टर प्रिटेशन डा० अब्बी एम०डी० ने बताया था / मुझसे वही के डा० क्लाउस क्रिस्टॊफ शीम्मेल एम०डी० जो उस समय acting CHEFARZT  थे क्योन्कि  शेफार्त्स  डा० वाल्टर त्सीमर्मान एम०डी० उन दिनो छुट्टी पर थे / डा० षीमेल ने मुझसे कहा कि खूब मेहनत करके पढिये ताकि लोगो को यह न लगे कि हमने आप् की अच्छी पढायी और दीक्षा नही मुहैया करायी है .ऐसा सन्देश नही जाना चाहिये /

३२ साल पहले मैने ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की कल्पना करके आज इसी सिस्टम को एक पूरा आयुर्वेद का निदान्ग्यान करने का साधन बना दिया है /  जब मै २००९ मे डा० प्रत्यून्स्टेक डायरेक्टर , सेन्ट जान अस्पताल, बोषुम युनीवर्सिटी, बोशुम, जरमनी से दिल्ली मे स्वास्थय मन्त्रालय मे मिला तो मैने यह सब उनको बताया था और मैने यह भी कहा कि यह सब तो आप्के परशिक्षण की देन है जिसका यह रिजलय़ मिला /

निसन्देह मै जरमन सरकार का हमेशा आभारी रहून्गा जिन्होने मुझे मुफ्त शिक्षा दी / मेरा वहा होम्योपैथी पढने मे एक भी पैसा नही खर्चा हुआ उलटे मुझे वहा से १० मार्क प्रतिदिन के हिसाब से मेनह्न्ताना मिलता था /

आज जब मै इतने वर्षो के बाद उन दिनो को याद करया हू तो मै सोचता हू कि अगर मै जरमनी जाकर शिक्षा न ग्रहण करता तो शायद ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन जैसी तकनी का जन्म भी होना नामुमकिन था /

मै जरमन सरकार और जरमन लोगो का आभार प्रकट करता हू /

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