मानसिक रोगो के साथ मिर्गी के अटैक के रोगी का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित अध्ध्य्यन और आयुर्वेदिक उपचार ; MENTAL DISORDERS with EPILEPSY / SIEZERS ATTACK AYURVEDIC TREATED ON THE FINDINGS AND CONCLUSION OF E.T.G. AYURVEDASCAN AND ITS SUPPLEMENTARY EXAMINATIONS


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क्या भूत प्रेत का अस्तित्व आप मानते है ? क्या इस अखिल विश्व मे भूतो को किसी ने देखा है ? क्या बास्तव मे भूत होते है ?और क्या वास्तव मे हकीकत  मे भूत किसी को परेशान करते है ?

आप सभी पाठको को शायद मेरी बातो का यकीन न हो / आप मे से कुछ यकीन भी कर सकते है और आप मे से कुछ नही भी करते होन्गे /

बहरहाल अभी कुछ दिन पहले एक लड़्की जिसकी उम्र २६ साल की थी आसाम राज्य से इलाज के लिये कानपुर अपने शरीर की जान्च के लिये आयी /   लड़्की के  अभिभावको ने बताया कि इसे एक साल से मिर्गी का दौडा पद रहा है और इसको भूत भी चढ जाते है /

तमाम एलोपैथी की दवा कराने के बाद और अच्छे से अछ्छॆ डाक्टरो का इलाज कराया पर इसकी बीमारी नही ठीक हुयी है / आप्के बारे मे पता चलने कि आप मिर्गी और भूत प्रेत  वालो की बीमारी का इलाज करते है यह जानकरके आपके पास इलाज के लिये आये है /

मैने उनको बताया कि आप अगर विश्वास करते है कि इस दुनिया मे भूत होते है तो जरूर होते होन्गे और अगर आप यह समझते है कि भूत नही होते है ति फिर भूत नही होते होन्गे / यह तो मन के विश्वास की बात है /

हलान्कि दुनिया का कोई भी चिकित्सा विग्यान यह नही मानता है कि भूतो के द्वारा किसी तरह की बीमारी पैदा हो सकती है , लेकिन आयुर्वेद यह जरूर मानता है कि ग्रह बाधा और परालौकिक शक्तियो के कारण शारीरिक बीमारिया हो सकती है /

प्राचीन काल से यह विश्वास करीब करीब हर देश मे प्रचिलित है कि कुछ शक्तियो के दवारा बीमारिया पैदा की जाती है जिनसे एक विपदा का रूप लेकर देश के देश और उनके नागरिको का बीमारी के कारण सफ़ाया हो जाता है जैसे प्लेग, कालरा और इसी तरह की अन्य बीमारिया /

किसी जमाने मे इस तरह की बीमारियो को ईश्वर का परकोप माना जाता थाअ लेकिन MICROSCOPE    के आविष्कार के बाद यह पता चला कि यह जीवाणुओ के द्वारा फैलायी जाने वाली बीमारी है /  इस्का पता चलने के बाद लोगो के दिमाग से यह बात साफ हो गयी कि यह बीमारी किसी भूत या प्रेत या चुडैल द्वारा नही फैलायी जाती है बल्कि प्रकृति के द्वारा ही यह सब परिस्तिथियो वश पैदा हो जाने वाली बीमारी है /

लौट के आते है फिर उस लडकी की बीमारी के बारे मे / लडकी के पिता ने बताया कि उन्होने लदकी का बहुत झाद़्फून्क कराया . जिसने जहा बताया वहा जादू टोना करने वालो के दरवाजे गया और मजरो मे मन्दिरो मे जाकर गन्डा ताबीज लाकर पहनाया गया लेकिन लड़्की की तबियत नही ठीक हुयी  और दिन पर दिन उसकी हलात खराब होती चली / मै बहुत परेशान हो गया और घर के सन्ही लोग इस लड़की की बीमारी के कारण टेन्शन मे आ गये  कुछ सूझ नही रहा था कि करे क्या > किससे इलाज कराये और क्या करे ?

इसी उहापोह के बीच मे मेरे किसी मरीज से समपर्क हुआ जो मेरे यहा से मिर्गी रोग का इलाज करा चुका था और सामान्य जीवन बिता रहा था / उसने सलह दी कि वह मेरे यहा आकर इलाज कराये /

मैने उनको समन्जाया कि भूत प्रेत होते होन्गे जैसा कि सभी विश्वास करते है , लेकिन भूत हमारे आपके सबके पूर्वज है  / भू्त हमारे आपके सबके बाबा और लकड़ बाबा और आदि पूर्वज है / हम सभी भूतो की पीढिया है / हमे यह मान्ना चाहिये कि हमारे बाबा पर्बाब और लकड़ बाबा हमारा क्यो नुकसान करेन्गे / बाबा को अपने पोते और पड़्पोते  और लकड़ पोते  बहुत बहुत प्यार करते है / बह क्यो हमारा नुकसान करेन्गे उलटे वह हमारी रक्षा करेन्गे /

यझ बात सुनकर मरीज और मरीज के सभी साथ मे आये परिवार के लोग  सन्युष्ट हुये / मैने उनको बताया कि सारे शरीर की जब जान्च होगी तब पता चलेगा कि  शरीर के किन अन्गो की गड़बडी से यह बीमरी पैदा हो रही है ?

ऎ०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके अन्य परीक्षण करने से पहले मेरे दिमाग का स्तर जीरो लेवल का होता है  क्योन्कि मै कोई prejudice  होकर कोई मरीज की बीमारी के बारे मे opinion  नही बनाता हू /

मैने मरीज का परीक्षण करना शुरू किया / जैसे जैसे एक परीक्शण से दूसरे परीक्षण और दूसरे से तीसरे परीक्षण के बाद चौथे और पान्चवे परीक्षण के नतीजे आये  मरीज की बीमारी के बारे मे पता चलना शुरु हो गया कि इसे क्यो तकलीफ मिर्गी की और भूत प्रेतो की हो रही है / यह सब परीक्षण करने मे एक दिन पूरा बीत गया / अभी चार परीक्षण और करने थे /

मैने मरीज से कहा कि वह दूसरे दिन सबेरे  परीक्षण के बाकी बचे जान्च के लिये सुबह आये दिन की जान्च मे मरीज के दिमाग के कुछ हिस्सो के साथ कार्डियक रितम मे अनियमितता तथा आटोनामिक नरवस सिस्टम की पैथोफीजियोलाजी आब्जर्व की गयी / इससे यह पता चल गया कि श्रीर की केमिकल केमिस्ट्री मे अनियमितताये है / इसके साथ उसके यूटेरस और रिप्रोडक्टिव सिस्टम मे कार्य विकृति का नकल्न सामने आया /

इन आनकडो के आने से यह सुनिश्चित हो गया कि इसे आटोनामिक सिस्टम की विकृति है और इसके अलावा कुछ भी नही है / दूसरे दिन सुबह मरीजा आ गयी  / मेरा आउट्डोर अस्पयाल है / मैने मरीज से कहा कि वह बेड पर लेटकर थोडा सा विष्राम कर ले /

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[ Above Photo in actual not belonging to the LADY patientwhich was examined , this for the introduction of the newlt inventedprocedure of ETG AyurvedaScan ;  show another patient ; the process is beneficial for examining patient according to the rules and timings of  Ayurveda Vata and Pitta and Kapha

The system is very beneficial while applied any AYURVEDIC / HOMOEOPATHIC / UNANI / YOGA POSTURES remedy / medicinal effects / treatment progress in case of emergency OR DURING GENERAL EXAMINATIONS. WE HAVE DEVELOPED HIGH AND SUPER LEVEL TECHNIQUE FOR EXAMINING PATIENT ACCORDING TO AYURVEDA / HOMOEOPATHY / UNANI AND YOGA RESPECTIVELY]

 

BIO-MATRIX EVALUATION WITH E.T.G. AYURVEDASCAN SYSTEM  की  जान्च से सारे शरीर का कई तरह का बहुत और अतिआवश्यक डाटा fraction of seconds  का मिलता हुआ चला जाता है / यह हमारे सन्स्थान द्वारा डेवलप की गयी आयुर्वेद की उच्च कोटि की तकनीक है /

मरीजा को कम से कम दो घन्टे के लिये  इसका परीक्षण कराना था / मैने उअसको बेड पर आराम करने को कहा / फिर बाद मे उसके श्रीर मे सभी तरह के आवश्यक सेन्सर लगा दिये गये  /

तुरन्त ही मरीज के   शरीर के सभी  डाटा मिलना शुरू हो गये /

तभी कुछ चौकाने वाले तथ्य सामने आये / पीछले दिन जब परीक्षण किये गये थे तो इस लड्च्की  का हार्ट रेट ७३ बीट पर मिनट सामान्य था / लेकिन सुबद उसका हार्ट रेट १०३ प्रति मिनट मिला / पहले मै समझा कि शायद पैदल चल कर आयी है इसलिये ऐसा होगा / लेकिन जब अन्य पैरा मीटर्स देखे गये तो बात समझ मे आयी /

लड़्की के रिस्पाइरेशन रेट और पल्स रेट और शरीर का तापमान बढा हुआ था / ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन ट्रेसेज मे असामान्यता देखी गयी /

मै करीब आधे घन्टे तक बायो मैट्रिक्स मानीटर को देखता रहा / देख्ते देखते लड़्की की पलस रेट और अन्य पैरा मीटर्स अधिक की तरफ बढने लगे / ब्ल्ड प्रेशर भी असामन्य होने लगा और बुखार आधे घन्टे बाद १०३ के पास हो गया /

SUPPRESSIVE DISORDERS

[  FLOW CHART OF PATIENT PROBLEM AS PERCIEVED SEQUENTIALLY]

ठीक उसी समय लड़्की के ऊपर भूत आ गये / वह बड़बड़ाने लगी / साथ आये मरीजा के माता पिता बताने लगे  कि इसके ऊपर भूत का परकोप हो गया है और भूत चढ गया है /

यह तो अच्छा हुआ कि मेरे सामने ही इस लड़्की की समस्या सामने आ गयी / मैने लड़्की से पूछा कि क्या है  ? तो वह भी मुझसे पूछने लगी कि कया है ? मैने अपनी आन्खे चढाकर उससे पूछा की क्या है ? तो उसने भी अपनी आन्खे चढाकर पूचा कि क्या है ? मैने कहा कि क्या भूत  प्रेत परेशान कर रहे है ? उसने वही सवाल दोहराया कि क्या भूत प्रेत परेशान कर रहे हैं ?

मैने कहा नही ? वह भी बोली नही ?

मैने कहा भूत प्रेत और शैतान कुछ भी नही होते है ?लड़्की ने भी यही दोहर दिया कि भूत प्रेत नही होते है /

मेरी निगाह बराबर मानीटर पर लगी हुयी थी और इस वार्तालाप का शरीर पर क्या असर हो रहा है यह सब बराबर आटो रिकार्ड हो रहा था / यह करीब कुछ मिनट का दौरा था / इसके बाद मरीजा चुप हो गयी और पीने के लिये पानी मान्गा /

मरीजा के पिता ने बताया कि आपके यहां तो इसका दौरा बहुत कम  इन्टेन्सिटी का  और  बहुत कम समय का आया है / इससे पहले उसको लगन्हग घन्टे से अधिक तक का दौर और मिर्गी का दौरा पड़ जाता था /

मनीटर ने बताया कि इसका बुखार १०३ से  कुछ घटकर १०२.५ तक आ गया है /  इसके बाद मरीजा शान्त हो गयी और फिर सामन्य वयवहार करने लगी /

मेरे पास तमाम जान्चो की रिपोर्ट   बन कर आ  चुकी थी /

 चार आयामी डायग्नोसिस से पता चला कि तीसरे और चौथे स्तर की तकलीफ  के लिये मरीजा इलाज के लिये आयी है /

अभी पहला और दूसरा शरीर के अन्दर छिपा हुआ वह शरीर का हिस्सा ट्रेस करना  बाकी था जिसके कारण रोगी को मिर्गी के दौरे आ रहे थे और साथ मे भूत प्रेत आ गये थे /

मैने मरीजा के परिजनो से पूछा कि इसे जब यह तकलीफ हुयी थी तो उससे पहले क्या हुआ था /

मरीजा के पिता ने बताया कि इसको जब से यह तकलीफ हुयी है उससे पहले लगभग १५ दिन पहले बुखार आया था / इलाज के बारे मे बताया कि  पास मे ही अन्ग्रेजी डाक्टर से दवा दिलायी गयी थी और तीन चार दिन के इलाज से यह ठीक हो गयी थी और उसके एक सप्ताह बाद ही इसको मिर्गी का दौरा पड़ गया और भूत भी चड़ गये /

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आपके यहा आने से पहले इसका एक साल से अधिक हो गये है इलाज करा रहे है लेकिन यह ठीक नही हुयी / बुरी तरह से प्रेशान हो गये तब आपके पास आये .

मुझे समझते देर नही लगी और फौरन ही समझ मे आगया कि इसे SUPPRESSIVE DISORDERS  के कारण यह बीमारी पैदा हो गयी है /

SUPPRESSIVE DISORDERS वास्तव मे है क्या ?  इसे समझने की जरूरत है / जब समझेन्गे तो फायदा होगा /

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[BEFORE 250 YRS AND OVER , DR HAHANEMANN OBSERVED THAT USING CRUDE CHEMICAL BASED ELEMENTS AS A REMEDIES FOR TREEATMENT PURPOSES, WERE SULPHUR, MERCURY,ARSENIC,POISONOUS SUBSTANCES CREATS BAD EFFECTS ON HUMAN BODY AND LIBERATES PATHOPHYSIOLOGICAL CONDITION AS A SIDE EFFECTS OF THE USED REMEDIES.

NOW A DAYS THE CONDITION IS NOT CHENGED, VICEVERSA  MORE AND MOST POISONOUS SUBSTANCES ARE BEING USED IN TREATMENT AND IS CONTINUE TILL DATE]

होम्योपैथी के  जनक डाक्टर सैमुअल हाहनेमान ने अपनी पुस्तक ORGANON OF MEDICINE  मे बताया है कि SUPPESSIVE AILMENTS  कैसे  शरीर मे पैदा होये है और किन कारणो से ऐसे शरीर के विकार बहुत बड़ी किस्म की बीमारी पैदा कर देते है / और इस बीमारियो के कारण कैन्सर और दूसरे वाइटल आर्गेन्स प्रभावि होकर मृत्यु तुल्य कष्ट वाली बीमातियां पैदा कर देते है /

मै समझ गया कि इसे सप्रेसिव डिसार्डर्स पैदा हो गये है / मैने मरीजा का लगभग चार घन्टे तक BIO-MATRIX  parameter एकत्र किये और उसके बाद जब स्ब रिपोर्ट आ गयी तब पता चला कि इसे क्यो और कैसे बीमारिया डेवलप होकर भूत प्रेत तक आ पहुन्ची /

मरीजा को दवाये  पा प्रेस्क्रोप्शन लिखकर दी गयी जो उसके शरीर की बीमाती के हिसाब से प्राप्त डाटा के ऊपर आधारित थी /

दवाये खाने से और पथ्य परहेज करने से मरीजा के भूत उसे छोड़्कर चले गये है और उसके मिर्गी के दौरे भी ठीक हो गये है / मैने पहले भी कहा है कि ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके अन्य समबन्धित परीक्षणो से शरीर के अन्दर व्याप्त कोई भी बीआरी हो ऐसी सभी   बीमारिया अवश्य ठीक होती है

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