दिन: अगस्त 26, 2015

पैन्क्रियाज की बीमारिया ; DISEASES OF PANCREAS ; PANCREAS DISORDERS


पैन्क्रियाज की बीमारिया इन दिनो काफी देखने मे आ रही है /

पैन्क्रियाज को semi-hormonal glands  कहते है क्योन्कि इसके एक हिस्से का सम्बन्ध हार्मोनल सिस्टम से भी जुड़ा हुआ है / बाकी यह पाचन सन्स्थान का एक महत्व पूर्ण हिस्सा है /

सबसे कामन पैन्क्रियाज की बीमारी इसका inflammation /inflammatory condition  का होना माना जाता है / digedtive system

पैन्क्रियाज का स्थान पेट की थैली के एक्दम नीचे की दीवाल से सटा हुआ जहा पेट के अन्तिम सिरे के तुरन्त बाद छोटी आन्त शुरु हो जाती है करीब करीब उसी स्थान  पर व्यवस्थित होता है / इसकी नली जिसे पैन्क्रियाटिक डक्ट कहते है लगभग  दो इन्च या तीन इन्च के दर्मियान लम्बाई मे छोटी आन्त के ऊपरी हिस्से से जुडा हुआ होता है / जिसके जरिये यह  इन्सुलीन और दूसरे पाचक रस आन्त के अन्दर  आवश्यकतानुसार  छोड़्ता रहता है /

आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान द्वारा प्रतिपादित और अनुमोदित शारीर संरचना और  क्रिया शारीर विग्यान AYURVEDA ANATOMY AND PHYSIOLOGY के अनुसार किये गये   दोष भेद   AYURVEDA AETIOLOGY के हिसाब से यह “पित्त ” श्रेणी मे आता है / आयुर्वेद के दोष भेद AYURVEDA PATHOPHYSIOLOGY  के अनुसार इसे “पाचक पित्त” की श्रेणी मे माना गया है और आयुर्वेद  का विकृत विग्यान  “सप्त धातु ” AYURVEDA PATHOLOGY   के अनुसार इसे  ” रस  धातु ” PRE and POST DIGESTIVE ANABOLIC TO METABOLIC PROCESS AND FURTHER BY  STEPS के अन्तर्गत माना जाता   है / 

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जैसा कि चिकित्सा विग्यानियो का मानना है कि पैन्क्रियाज दो तरह की कार्य भूमिका निभाता है / पहला यह कि यह मानव द्वारा खाये गये भोजन के पचाने और उसे विखन्डित करने मे अपनी सक्रिय भूमिका पाचन रस को आन्तो मे मिलाकर कराता है

दूसरी भूमिका इसके इन्सुलीन नामक रस कॊ आन्तो मे छोड़्कर शरीर मे सूगर अथवा शक्कर की मात्रा को नियन्त्रित करता है / हलान्कि यह पैन्क्रियाज का शक्कर कम करने का एक कार्य हिस्सा मत्र है / आधुनिक प्रीक्शणो ने सिध्ध किया है कि शक्कर को कम करने के लिये लीवर और छोटी आन्तो का भी रोल महत्व पूर्ण है /

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Acute Panceatitis अथवा  Inflammatory condition of Pancreas पैन्क्रियाज की बहुत सामान्य बीमारिया है / इसका प्रमुख कारण रक्त के किसी  Infection  की वजह हो सकती है लेकिन हमेशा ऐसा नही होता है / कभी कभी खान पान या पानी मे दोष होने से भी ऐसा हो जाता है / कुछ ऐसे भी केसे सामने आये है जिनमे पेट के कीडे आन्तो मे ऊपर की ओर  आते गये और पित्त की नली मे या पैन्क्रियाज की नली मे आकर फन्स गये /  कहने का तात्पर्य यह की रोग के निदान के लिये वह सभी प्रयास करना चाहिये जो अति आवश्यक हो और यह हर तरह से सम्भव करना चाहिये /

पैन्क्रियाज की सभी तरह की बीमारिया ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके अन्य परीक्शणो के आधार पर निकलने वाले निष्कर्ष रोग निदान और आयुर्वेद के रक्र और मूत्र परीक्शण के करने के उपरान्त प्राप्त रिजल्ट्स पर आयुर्वेद और आयुष का काम्बिनेशन इलाज करने से अवश्य शत प्रतिशत ठीक होते है ऐसा अनुभव हमारे सनस्थान का है /

सभी तरह की पैन्क्रियाज या इससे सम्बन्धित ्बीमारिया आयुर्वेद की नयी तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके अन्य परीक्षणो के आधार पर किये गये आयुर्वेदिक या आयुष इलाज से अवश्य ठीक होते है /

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पैन्क्रियाग उक्त बताये गये चित्र मे ठीक खाने की थैली के नीचे से जुडने बाली शुरू की छोटी आन्त के साथ ही मिला हुआ होता है जैसा कि लाल रन्ग से इसका “सिर यानी HEAD” दिखाई दे रहा है /

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उक्त चित्र मे पैन्क्रियाज का खाने की थैली यानी STOMACH  के पीछे के छिपे हुये हिस्से को दिखाया गया है / इस हिस्से मे तिल्ली यानी SPLEEN  को काले रन्ग से दिखाया गया है / SPLEEN  शरीर का एक महत्व पूर्ण अन्ग है इसे बाद मे आयुर्वेद के मन्तव्य  से बताने का प्रयास किया जयेगा /

पैन्क्रियाज की सभी तरह की बीमारिया अयुर्वेदिक चिकित्सा से अवश्य ठीक होती है /

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