महीना: सितम्बर 2015

TWO CASES OF H.I.V. ; E.T.G. AYURVEDASCAN RECORD SHOWS SIMILARITY OF WAVES ; OBSERVE THE SIMILARITY IN BOTH CASES ; एच०आई०वी० सन्क्रमित एक पुरुष तथा एक महिला का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की रिकार्डिन्ग का नमूना ; दोनो रिकार्ड किये गये नमूनो मे कितनी समानता है यह देखिये


आयुर्वेद की आधुनिक हाई टेक्नोलाजी ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के द्वारा बहुत चम्त्कारिक तरीके से रोगियो की रोग मुक्ति की जा सकी है /

अब तक बता दी गयी कुछ लाइलाज  बीमारियो यथा मिर्गी और सफेद दाग और भगन्दर तथा गठिया वात और अन्य  बहुत सी बीमारियो को जिनको लाइलाज बताया जा रहा है , उनका इलाज आयुर्वेद की इस तकनीक द्वारा ढून्ढ लिया गया है /  हमारे यहा आकर इलाज कराने वाले रोगियो को ऊपर बताये गये रोगो से शत प्रतिशत रोग मुक्ति मिली है / इसलिये अब हम इस स्तिथि मे यह कहने के लिये विश्वस्त है कि आज के दिन यह सभी बीमारिया अब लाइलाज नही है औए इनका इलाज आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान मे मौजूद है /

एच० आई०वी० के रोगियो का इलाज हमारे सन्स्थान द्वारा किया गया है और हम आप सभी पाठको को बताना चाहते है कि हमारे द्वारा इलाज किये गये  HIV  के सभी रोगी ठीक हुये है और वे आज स्व्स्थय है और अपना सामन्य जीवन बिता रहे है /

हमारे सन्स्थान मे जितने भी रोगी आये है वे सभी ई०टी०जी० आयुर्ठीवेदास्ककैन आधारित आयुर्वेदिक इलाज से ठीक  हुये है /

ई०टी०जी० यानी इलेक्ट्रो त्रिडोषा ग्राफी आयुर्वेद का परीक्षण सिस्टम है जो इसकी मशीन द्वारा किया जाता है / अभी हमारे यहा सात प्रकार के ई०टी०झी०  परीक्षणो का विकास किया जा चुका है जो आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्तो का आन्कलन तो करता ही है सारे शरीर का परीक्षन करके बीमार अन्गो की  physiological या pathological consitions को बताता है / हमारी कोशिश होती है कि हर रोगी के शरीर का अधिक से अधिक उसके शरीर के अन्गो और कार्य प्रणाली का विस्तार से डाटा प्राप्त किया जाय /

अधिक्तम डाटा प्राप्त करने का उद्देश्य यह है कि चार आयामी बीमारी की डायग्नोसिस की जाय जो आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तो पर आधारित हो / आयुर्वेद मे दवाओ का चुनाव और पथय परहेज और लाइफ स्टाइल को मरीज को बताने मे इसकी अहम भूमिका है ताकि पूर्ण वैग्यानिक विधान से आयुर्वेद की चिकित्सा की जा सके और वह भी perfection  के साथ / इसीलिये परीक्षण की विधिया एक के बाद एक विकसित की गयी /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन पुण ऋप से वैग्यानिक है और इस सिस्टम को भार्त सरकार द्वारा जान्चा जा चुका है और इस तकनीक के बारे मे जिसे भी जानकारी चाहिये वह सूचना के अधिकार के अन्तर्गत जाकर Ministry of AYUSH , Government of India , New Delhi  से प्राप्त कर स्कता है ./

हमारे यहा  एच०आई०वी० के मरीजो का इलाज किया जाता है / इन मरीजो के अध्ध्य्यन मे कुछ बाते और रिकार्ड किये गये ट्रेसेस बहुत कामन देखे गये है / इन कामन ट्रेसेस मे किये गये अध्ध्य्यन से पता चलता है कि उनके किन अन्गो मे pathophysiology  और pathology  समायी हुयी है /

आयुर्वेद की द्वाये आयुर्वेद के मूल सिध्धन्तो पर आधारित है और उसी अनुसार उनका प्रयोग किया जाता है जिससे रोगी को अवश्य और शत प्रतिशत आराम मिलता है

नीचे दो H.I.V. POSITIVE  रोगियो के ट्रेस रिकार्ड दिये गये है / इन रिकार्दॊ मे समानता देखना चाहिये /

HIV001

…………………………………..

HIV001 001 HIV001 002

………………………………HIV001 003

……………………………

HIV  के रोगियो मे ऐसी समानता अधिकतर देखने मे आयी है / आयुर्वेद के अनुसार की गयी शरीर की mapping और division  के  शरीर के अन्दर व्याप्त त्रिदोष यथा वात और पित्त और कफ की तथा त्रिदोष भेद और सप्त धातु और ष्रोतो दुष्टि आदि आदि के आन्कलन के बाद दि गयी आयुर्वेद की दवाये शरीर को आरोग्य पहुचाती है /

आयुर्वेद मूल कारण और अन्गो की विकृति और इन अन्गो की कार्य क्षमता और इन्टेन्सिटी लेवल आदि आदि को मीजर्मेन्ट करके दवाओ का चुनाव रोग को दूर करने मे मदद करता है /

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DENGUE VIRAL FEVER ; डेन्गू वाइरल फ़ीवर ; डेन्गू बुखार ; काम्बीनेशन इलाज से २ से ५ दिन मे ठीक हो जाता है


DENGUE  डेन्गू बुखार से घबराने की जरूरत नही है , यह उपचार से ठीक होने वाली वायरल बीमारी है / देश के नागरिको को इस बीमारी से घबराने की जरूरत नही है / दवाओ के सेवन और  पथ्य परहेज करने से यह बहुत जल्दी दो से पान्च दिन मे ठीक हो जाती है /

आयुर्वेद की निम्न दवाओ के सेवन से और आयुर्वेद होम्योपैथी तहा एलोपैथी दवाओ के काम्बीनेशन इलाज करने से यह बुखार दो से लेकर पान्च दिन मे ठीक हो जाता है /

दवाये इस प्रकार है ;

१- आयुर्वेदिक दवाये;
महाज्वरान्कुश रस एक गोली
कफ केतु रस एक गोली
महासुदर्शन घन वटी एक गोली
गोदन्ती टेबलेट एक गोली

ऊपर बतायी गयी चारो गोलियो को एक साथ मिलाकर दवा की यह एक खुराक होती है /

२- HOMOEOPATHIC REMEDIES ;
TINOSPORA CARDIFOLIA Q
CHIRAYATA Q
KALMEGHA Q
AZADIRACHTA INDICA Q
CEASALPEANIA BONDUCELLA Q

MIX ALL FIVE MOTHER TINCTURE AND MAKE ONE

DOSES ; TWO TEASPOONFUL TO BE TAKEN WITH SMALL HALF CUP WATER

3- ALLOPATHIC REMEDIES ;

PARACETAMOL 500 MG TABLET

ऊपर बतायी गयी आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक और एलोपैथिक की दवाये एक वयस्क के लिये है / बच्चो को आधी दवा और बहुत छोटे बच्चो को चौथायी मात्रा देनी चाहिये /

उक्त सभी बतायी गयी दवाओ को एक एक करके यानी पहले आयुर्वेदिक दवाओ का काम्बीनेशन फिर उसके दो घन्टे बाद होम्योपैथिक दवाओ का कामबीनेशन फिर इसके बाद एलोपैथिक दवाओ को दो दो घन्टे के अन्तर से खाना चाहिये /

अगर अधिक एमरजेन्सी हो तो यही द्वाये एक एक घन्टे के अन्तर से देना चाहिये जब बुखार और अन्य दूसरे लक्षन कमजोर होने लगे तो समय बढा देना चाहिये /

भोजन मे हल्का खाना और जल्दी हजम होने वाला पदार्थ देना चाहिये जैसे चाह और दूध और पके आलू का भर्ता बनाकर आग मे सेकी हुयी टिकिया और दलिया और खिचडि देना चाहिये /

दो दिन से लेकर पान्च दिन तक ऊपर लिखी दवाये देने से डेन्गू बुखार ठीक हो जाता है /

इस काम्बीनेशन इलाज से बुखार बढता नही है और न शरीर मे किसी तरह के अन्य काम्प्लीकेशन होते है / दवा शुरू करते ही डेन्गू के लक्षण कमजोर होने लगते है /

रोगी को आराम करना चाहिये और शारीरिक परिश्रम बिल्कुल नही करना चाहिये /

साफ सफाई का ध्यान रखे / मरीज को पूरा आराम करने दे /

घबराये नही यह आसानी से ठीक होने वाली तकलीफ है / हमारे यहा जितने भी डेन्गू के मरीज आये है सब ठीक हुये है और उनको इलाज के दौरान किसी भी तरह के कोई भी काम्प्लीकेशन नही हुये है /

AYURVEDA FUNDAMENTALS “PITTA DOSHA FIVE KINDS” EXPLORATION WITH SHORT VIEW OF MODERN SCIENTIFIC CONCEPT ; आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्तो मे से एक “पित्त दोष के पान्च प्रकारो का एक्स्प्लेनेशन” आधुनिक वैग्यानिक दृष्टि कोण के आधार पर विवेचना


आज हमारा ग्यान हर क्षेत्र मे बढ रहा है / इसका कारण है नित्य नई मशीनो के आव्श्यकता के अनुसार बनाने और उनका उपयोग करने तथा उनसे प्राप्त ग्यान के द्वारा विकसित किये गये उस सत्य को जान लेने और ग्यात कर लेने की लाल्सा ने और इस प्रकार मानव द्वारा अपनी आत्म ग्यान की  क्षमता का विकास कर लेने की वजह है /

प्राचीन काल मे जब यह सब नही था तब केवल मानव के पास ग्यान चक्षु थे / मानव का मष्तिष्क था और उसके अन्दर ग्यान प्राप्त करने की लालसा थी / ग्यान को ग्यात करने के लिये उसके पास जितने भी प्राकृतिक और भौतिक  साधन थे उसने वह सब उपयोग मानसिक आइडियाज को डेवलप करके   और तदनुसार साधन जुटाकर   किये जो उस समय उपलब्ध थे / जिस तरह का मटेरियल यथा मिट्टी और अग्नि और जल तथा हवा आदि साधन का जैसा भी और जिस तरह से तिकड़्म लगाकर और समझ कर उसने उपयोग किया और इस तरह से उसने अपने वैग्यानिक ग्यान को एक नया आयाम दिया / यह एक तरह से मानव सभ्यता के विकास का आधार बना है /

यह और कोई नही थे / ये सब हमारे और आपके पुरखे थे जो हमे इस तरह का ग्यान दे गये जिसे उन्होने यह समझकर अगली पीढी को सौपा होगा यह सोचकर कि ्हमारे द्वारा संचित किये गये ग्यान  को   उनके आगे पैदा होने वाली जेनेरेशन   और नस्ले इसका उपयोग अपने जीवन को सफल  और सुगम और प्रकृति के उस छिपे हुये रहस्य को समझने  और उसे एक्स्प्लोर करने और उस परम सत्य को जान लेने की ओर बढ रहे जिग्यासा और उत्कन्ठा को सरल  बनाने मे  करेन्गी /

आयुर्वेद के मनीशियो ने जब शव्च्छेदन  किया होगा यानी मानव शरीर का Dissection  जैसा कि आयुर्वेद के महान ग्रन्थ “सुष्रुत सन्हिता”  मे विधि विधान पूर्वक बताया गया है / यह ठीक उसी प्रकार का procedure    है  जैसा कि  आज भी करते है   लेकिन कुछ बदलाव के साथ / आज का procedure  थोड़ा modified  है  जैसा कि समय के साथ साथ बदलाव होते रहते है जो कई बातो पर आधारित होते है /

सुश्रुत सन्हिता मे शब का डिसेक्शन करने के लिये तरीका बताय़ा गया है / इस तरीके को अपनाकर हमारे आयुर्वेद के पूर्वजो ने मानव शरीर की संरचना का अध्ध्य्यन किया है और उन्होने इस्का विवरण बहुत विस्तार पूर्वक इस सम्हिता मे किया गया है /

हमे इस बात पर गर्व करना चाहिये कि हमारे पुरखो ने  हजारो साल पहले  इतनी महान उपलब्धि प्राप्त की जब सारी दुनिया इससे अन्जान थी और उनको यही नही पता था कि मानव शरीर के अन्दर किस तरह की रचना है और इसका structure  क्या और कैसा है ? 

[अभी और लिखना बाकी है ]

EXCESSIVE AND EXTREME SEXUAL DESIRE OF MALE AND FEMALE IS A PHYSICAL AND MENTAL DISORDER RELATED PROBLEMS ; AYURVEDA AND AYUSH THERAPIES HAVE EXCELLENT TREATMENT TO CURE THIS DISORDERS ; अत्यधिक और हर समय सेक्स करने की इच्छा करने वाले महिला अथवा पुरुष एक तरह की मानसिक अथवा शारीरिक बीमारी के शिकार होते है ऐसी या इस तरह की बीमारियो का उपचार आयुर्वेद अथवा आयुष चिकित्सा द्वारा सटीक और अचूक् सम्भव है


मुझे बहुत से ई मेल और फोन मैस्सेज मिलते है ्जिनमे महिलाये और पुरुष दोनो ही होते है / यह इस बात से बहुत परेशान होते है कि उनको सेक्स करने की हमेशा इच्छा बनी रहती है /

ंऎऎ outdoor hospital  मे भी बहुत से रोगी इसी की शिकायत लेकर आते है कि उनको सेख करने की इछ्छा बहुत होती है और अगर वह सेक्स नही करते है तो वे दिन भर इसी बात को लेकर उत्तेजित रहते है और उनसे कभी कभी दूसरी महिलाओ के साथ या पुरूषो के साथ बेशर्मी भी करनी पड़ जाती है /

जिसे यह सब होता है चाहे वह महिला हो या पुरुष दोनो ही यह समझते है कि उनकी सेहत बहु अच्छी है इस कारण से होता होगा लेकिन कुछ ऐसे भी मरीज आये है जिनकी सेहत बहुत अच्छी नही थी लेकिन उनको भी इसी तरह की अति कामुकता की शिकायत थी /

अतिकामुकता यानी  excessive sexual desire  शारीरिक  और मानसिक दोनो ही कारणो से होती है /

कुछ रोगियो के विवरण नीचे दिये जा रहे है /

१- सन १९८४ का वक्या है / एक तोगी को अति कामुकता की शिकायत थी / वह मेरे दवाखाने मे आया / उसको देखने से मेरा ओब्शाजर्रीवेशन यथा कि वह रिक रूप से यह रोगी बहुत कमजोर था / गाल पिचके हुये और मरियल सा शरीर लिये हुये बिल्कुल जानी बाकर की तरह का दुबला पतला और कमर लचका कर चलने वाला जैसा  था / इसकी एक किराना का सामान बेचने वाली दूकान थी जिसका वह व्यापार करता था / उसने बताया कि उसको सेक्स करने की हर समय इछ्चा होती है और वह इसे नही रोक पाता है /  मैने उससे कुछ सवाल पूछे / मेरी समझ मे कुछ बाते आयी कि शाय्द testicular excited stage हो या   sex hormones  कुछ अधिक acivated  हो /  Provisional diagnosis  मे बहुत सी बाते आयी / यह तय किया कि इसको ल्क्षणानुसार इलाज दिया जाये  / ईस समय ETG AYURVEDASCAN TECHNOLOGY  बह्त विकसित नही थी / उसको आयुर्वेदिक द्वा के साथ साथ कुछ होम्योपैथिक की भी द्वाये दी और इस तरह काम्बिनेशन ट्रीट्मेन्ट दिया गया और इसकी व्यवस्था की गयी /  लगभग तीन हफ्ते के बाद का समय होगा उसके पेट से लम्बे लम्बे ASCARISES WORMS  बड़ी सन्ख्या मे पहले दिन निकले फिर कुछ कम सन्ख्या मे दूसरे दिन और तीसरे दिन एक मरा हुआ बहुर छोटा सा केचुये जैसा कीड़ा निकला /

WORMS  निकल जाने के कुछ दिन बाद उसका अति कामुकता का प्रभाव समाप्त हो गया और वह सामान्य जीवन की राह पर आ गया /

२- यह एक महिला का केस है / सन २००७ मे इस महिला ने जो दिखने मे सामान्य लगती थी मेरे दवाखाने  मे अपने पति के साथ आयी थी / उसे अति कामुकता की शिकायत थी / उसे आये हुये एक या दो मिनट बीते होन्गे वह अपने पति के ऊप्रर मेरे सामने दवाखाने  की मरीजो के बैठने के लिये रखी गयी  बेन्च पर पति से चिपट गयी और अपनी धोती उठाकर अपनी योनी अपने पति की टान्गो मे जोर जोर से   रगड़ने लग गयी / महिला बहुत  ताकतवर थी /  अचानक यह सब जैसे ही हुआ मै समझ नही पाया कि क्या यहा पर हो रहा है  , यह मै भी नही समझ पाया / गनीमत थी कि उस  समय दूसरा कोई ्मरीज नही था / मैने  तुरन्त उठक्रर  पति के ऊपर चढ गयी  उस महिला को अलग किया / वह महिला मेरे ऊपर बहुत तमतमाई लेकिन मैने उसको बहुत तेजी से फटकार लगायी और इस तरह की बेशर्मी के लिये लानत और मलामत की /

अगले क्षण महिला रोने लगी / मैने उसके पति से पूछा की क्या बात है ? पूरी बात मय सवाल जवाब के  करने के बाद अन्त मे यह पता चला कि महिला को अति कामुकता की बीमारी है /

महिला का ई०टी०जी०  आयुर्वेदास्कैन  परीक्षण किया गया  / इसके दूसरे अन्य परीक्षण किये गये /  परीक्षण करने के बाद इस महिला के कई anomalies  निकली जो उसके कई सिस्टम के  pathphysiological  phenomenon  के  बिगड़ने के कारण उतपन्न हुआ था /

महिला को Reproductive organs तथा Hormonal system और autonomic nervous system  और circulatory systems  की  homoestatic organic   शिकायत निकली /

इन सारी बीमारियो का एक साथ इलाज किया गया क्योन्कि आयुर्वेद अथवा होम्योपैथी अथवा यूनानी अथवा योग अवम प्राकृतिक चिकित्सा मे शरीर की सभी बीमारियो का एक साथ इलाज करने का प्रावधान है और यही concept  आयुष इलाज को खूब्सूरत और बेहतर बनाता है /

महिला १२० दिन के इलाज से ठीक हो गयी और उसके बच्चे नही थे / एक साल बाद उसको एक बच्ची का जन्म हुआ /

अब यह महिला बिल्कुल स्वस्थ्य है /

इस तरह के   रोगियो की तादाद बहुत है लेकिन यह सब लोक लाज के भय से सामने नही आ पाता है, इसलिये मेरा यही ऐसे लोगो को सन्देश देना है कि वे अगर अति कामुकता के रोगी है तो फिर वे इसका इलाज कराये /

“अति कामुकता ” का इलाज आयुर्वेद  चिकित्सा विग्यान  के  द्वारा कराने से अवश्य और शत प्रतिशत ठीक होता है /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और आयुर्वेद के अन्य परीक्षण के करने के बाद प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर अति कामुकता का इलाज करने से चाहे जैसी बीमारी हो सभी ठीक होती है /

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