दिन: सितम्बर 4, 2015

AYURVEDA FUNDAMENTALS “PITTA DOSHA FIVE KINDS” EXPLORATION WITH SHORT VIEW OF MODERN SCIENTIFIC CONCEPT ; आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्तो मे से एक “पित्त दोष के पान्च प्रकारो का एक्स्प्लेनेशन” आधुनिक वैग्यानिक दृष्टि कोण के आधार पर विवेचना


आज हमारा ग्यान हर क्षेत्र मे बढ रहा है / इसका कारण है नित्य नई मशीनो के आव्श्यकता के अनुसार बनाने और उनका उपयोग करने तथा उनसे प्राप्त ग्यान के द्वारा विकसित किये गये उस सत्य को जान लेने और ग्यात कर लेने की लाल्सा ने और इस प्रकार मानव द्वारा अपनी आत्म ग्यान की  क्षमता का विकास कर लेने की वजह है /

प्राचीन काल मे जब यह सब नही था तब केवल मानव के पास ग्यान चक्षु थे / मानव का मष्तिष्क था और उसके अन्दर ग्यान प्राप्त करने की लालसा थी / ग्यान को ग्यात करने के लिये उसके पास जितने भी प्राकृतिक और भौतिक  साधन थे उसने वह सब उपयोग मानसिक आइडियाज को डेवलप करके   और तदनुसार साधन जुटाकर   किये जो उस समय उपलब्ध थे / जिस तरह का मटेरियल यथा मिट्टी और अग्नि और जल तथा हवा आदि साधन का जैसा भी और जिस तरह से तिकड़्म लगाकर और समझ कर उसने उपयोग किया और इस तरह से उसने अपने वैग्यानिक ग्यान को एक नया आयाम दिया / यह एक तरह से मानव सभ्यता के विकास का आधार बना है /

यह और कोई नही थे / ये सब हमारे और आपके पुरखे थे जो हमे इस तरह का ग्यान दे गये जिसे उन्होने यह समझकर अगली पीढी को सौपा होगा यह सोचकर कि ्हमारे द्वारा संचित किये गये ग्यान  को   उनके आगे पैदा होने वाली जेनेरेशन   और नस्ले इसका उपयोग अपने जीवन को सफल  और सुगम और प्रकृति के उस छिपे हुये रहस्य को समझने  और उसे एक्स्प्लोर करने और उस परम सत्य को जान लेने की ओर बढ रहे जिग्यासा और उत्कन्ठा को सरल  बनाने मे  करेन्गी /

आयुर्वेद के मनीशियो ने जब शव्च्छेदन  किया होगा यानी मानव शरीर का Dissection  जैसा कि आयुर्वेद के महान ग्रन्थ “सुष्रुत सन्हिता”  मे विधि विधान पूर्वक बताया गया है / यह ठीक उसी प्रकार का procedure    है  जैसा कि  आज भी करते है   लेकिन कुछ बदलाव के साथ / आज का procedure  थोड़ा modified  है  जैसा कि समय के साथ साथ बदलाव होते रहते है जो कई बातो पर आधारित होते है /

सुश्रुत सन्हिता मे शब का डिसेक्शन करने के लिये तरीका बताय़ा गया है / इस तरीके को अपनाकर हमारे आयुर्वेद के पूर्वजो ने मानव शरीर की संरचना का अध्ध्य्यन किया है और उन्होने इस्का विवरण बहुत विस्तार पूर्वक इस सम्हिता मे किया गया है /

हमे इस बात पर गर्व करना चाहिये कि हमारे पुरखो ने  हजारो साल पहले  इतनी महान उपलब्धि प्राप्त की जब सारी दुनिया इससे अन्जान थी और उनको यही नही पता था कि मानव शरीर के अन्दर किस तरह की रचना है और इसका structure  क्या और कैसा है ? 

[अभी और लिखना बाकी है ]

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