महीना: मई 2016

LEUCODERMA ; VITILIGO ; WHITE SPOTS ; सफेद दाग ; ल्य़ुकोडर्मा ; श्वेत कुष्ठ ; त्वचा विवेचना


सफेद दाग यानी ल्य़ूकोडर्मा यानी श्वेत कुष्ठ को लोग और आम जन लाइलाज बीमारी समझते है  लेकिन यह वास्तव मे और हकीकत मे लाइलाज बीमारी नही है और इसे मै बहुत बार इस ब्लाग पर लिख कर सबको बता चुका हू / यह शत प्रतिशत जड़ मूल से ठीक होने वाली बीमारी है /

लेकिन इसके साथ एक शर्त यह है कि रोगी का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित फाइन्डिन्ग्स द्वारा आयुर्वेद और आयुष थेरेपीज  की दवाओ द्वारा इलाज किया जाय तभी यह शत प्रतिशत ठीक होता है / ऐसा मेरा अनुभव है /

मैने सैकड़ो हजारो सफेद दाग के रोगियो का इलाज किया है  और सभी मरीजो का आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा पध्ध्यतियो के काम्बीनेशन द्वारा इलाज करने का ९९.९९ प्रतिशत क्योर परिणाम हासिल हुआ /

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 मानव शरीर की त्वचा किस तरह से निर्मित है इसके बारे मे नीचे दिये गये माडल से जानकारी मिल जायेगी / जैसा कि नीचे दिये गये माडल मे देखेन्गे तो पता चलेगा कि बालो के रन्ग और त्वचा के रन्ग को रन्गने वाला तत्व किस प्रकार से बालो को रन्गता है और दूसरी तरफ त्वचा को किस तरह से मेलेनाइन की परत दर परत को रन्गता है / ध्यान  देने योग्य बात यह है कि  त्वचा को पूरी तरह से रन्गने के लिये मेलेनाइन नाम के पिग्मेन्ट को कई स्तरो तक पार करके त्वचा के अन्तिम स्तर तक पहुन्चना होता है /

 

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मेरा मानना है और जैसा कि मैने प्रक्टिकल महसूस किया है कि

[१] त्वचा की लगभग ११ पर्ते मेलेनाइन पिग्मेन्ट को फैलाने मे अपनी सक्रियता कार्य निभाती है /

[२] त्वचा के सेल और टिस्सू तथा अन्य समबन्धित अन्ग पिग्मेन्त को फैलाने की सक्रियता मे सहयोग करते है

[३] मेलेनाइन फैलने की सक्रियता “आस्मोसिस” OSMOSIS  की क्रिया जैसा होता है ऐसा मेरा मानना है /

[४] मेलेनाइन की पर्त दर पर्त विटामिन “ए” और “डी”  से  प्रभावित होती है / मेरा अनुभव है कि इन दोनो विटामिनो की कमी से मेलेनाइन पिग्मेन्ट की आस्मोसिस क्रिया सरीखे जैसे कार्य मे बाधा पहुन्चती है /

 

इन सब बातो के अलावा और भी बहुत से फीजियोलाजिकल बाते होती है जिनके कारण सफेद दाग होते है / इलाज करने के समय इन सभी बातो को खोज निकालना बहुत जरूरी होता है /

 

नीचे दिये गये उदाहरण चित्र मे  लगभग आठ माह के इलाज के बाद का यह चित्र मेलेनाइन के धब्बे को दर्शाता है / इससे पहले का चित्र मरीज को दे दिया गया था इसलिये यह उपलब्ध नही है / आयुर्वेदिक इलाज के आठ माह के बाद का यह चित्र है  /

 

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ऊपर बताये गये मरीज के चित्र को देखिये और इसका मिलान लगभग ११ महीने के आयुर्वेदिक इलाज के बाद का करिये /

आप इन दोनो चित्रो मे मेलेनाइन के धब्बो का फैलाव का स्तर देखे /

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मै उन सभी चिकित्सको  के इलाज के बारे मे कुच कह नही सकता कि वे क्या देखकर और अनुमान करके सफेद दाग की चिकित्सा करते है / लेकिन मेरा मानना है  कि  सफेद दाग शरीर के अन्दर पैदा हो रही अन्य दूसरी होने वाली बीमारियो का रिफलेक्शन मात्र है, जैसा कि ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण द्वारा पता  निष्केष स्वरूप मिलता है और इन्ही निष्कर्षो पर आधारित होकर जब आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक और यूनानी और अन्य औषधियो तथा मैनेज्मेन्ट और जीवन शैली और पथ्य परहेज का अनुशरण कराया जाता है तो शत प्रतिशत  क्योर रिजल्ट मिलते है /

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SIX MONTHS CHILD SUFFERED FROM SEIZER / EPILEPTIC FITS ; EXAMINATION AND TESTS HAVE BEEN DONE AT OUR CLINIC ; छह माहीने की उम्र के बच्चे को मिर्गी की बीमारी के इलाज के लिये किये जारहे परीक्षण


मिर्गी का रोग सभी उम्र के लोगो मे पाया गया है / चाहे वह छोटा बच्चा हो अथवा उम्र दराज मानव ्की मिर्गी हो , आयुर्वेद की आधुनिक हाई टेक्नोलाजॊ ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज करने से मिर्गी के सभी रोगी ठीक होते है /

नीचे दिये गये चित्र मे एक छह माह के बच्चे को मिर्गी की बीमारी है जिसके लिये उसके परीक्षण हमारे रिसर्च सेन्टर मे किये गये है / यह परीक्षण इस्लिये किये जाते है ताकि यह पता लगाया जा सके कि मिर्गी का बार बार पड़ने वाला दौरा किस कारण से और किस कमी के कारण हो रहा है /

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बच्चे के परीक्षण इसी मूल बात की भावना को ध्यान मे रखते हुये किये जाते है /

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इस बच्चे को  जन्म से ही मिर्गी के दौरे पड़्ते थे जिसका इलाज एलोपैथी की दवाओ द्वारा किया जा रहा था लेकिन दौरे थीक नहि हो रहे थे / यह मरीज बिहार से आया था / इस मरीज के एक रिश्तेदार मेरे पास आठ महीना पहले अपने ८ साल के लड़्के की मिर्गी का इलाज कराने मेरे पास आये थे / आठ महीने के इलाज से वह लड़्का अब बिल्कुल ठीक है / इसी लड़्के के पिता ने मेरे पास इस छोटे बच्चे को इलाज के लिये रिकमेन्ड किया था / ये सभी लोग १८ घन्टे की रेल यात्रा करके इलाज के लिये आये थे /

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“बाजी करण” ; अष्टान्ग आयुर्वेद का एक महत्व पूर्ण हिस्सा


आयुर्वेद मूल रूप से आठ हिस्सो मे बान्टा गया है और इसी बान्टने के आधार पर ही आयुर्वेद को अष्टान्ग आयुर्वेद कहा जाता है /

इन आठो अन्गो मे सम्पूर्ण शरीर की मानसिक चिकित्सा और शारीरिक बीमारियो के इलाज से लेकर बीमारियो से बचाव का रास्ता बताया गया है /

सबसे पहले आयुर्वेद की यही शिक्षा है कि जीवन शैली और रहन सहन देश की परिस्थियो और मौसम बदलने के साथ साथ किस तरह से स्वास्थय को सही बनाये रखने के लिये अपनायी जाये जिससे शरीर बीमार न पडे / आयुर्वेद व्यक्ति की सौ साल की आयु का निर्धारण करता है  और इस लक्षय को पाने के लिये क्या करना चाहिये उसके बारे मे बताता है /

यह आयुर्वेद की पहली शिक्षा है /

आयुर्वेद की दूसरी शिक्षा यह है कि अगर शरीर मे कोई विकार हो जाये अथवा शारीरिक या मानसिक बीमारी हो जाये तो उसका इलाज आयुर्वेदिक औषधियो से किस प्रकार किया जा सकेगा इसका बहुत विस्तार से चिकित्सा के हिस्से मे बताया गया है /

यही चिकित्सा का हिस्सा आठ विभागो मे बान्टा गया है जिसमे पुरुष और महिला और बच्चो के बीमारियो के बारे मे बताया गया है /

बाजीकरण का अध्याय आयुर्वेद मे मानव जीवन के शारीरिक विकास और मनुष्य के परम लक्षय आयु यानी जीवन के अधिक से अधिक शतायु होने के बारे मे चिकित्सकीय निर्देश देता है /

“बाजी” शब्द सन्स्कृत का शब्द है जिसका मतलब  “अश्व” या “घोड़ा” होता है / करण का मतलब  “करने की विधि ” होती है / यानी बाजी करण का मतलब है कि मानव शरीर घोडे जैसा स्वस्थ्य और बलवान तथा कार्य शील हो और जैसे गुण घोडे मे पाये जाते है ऐसा होना चाहिये /

आयुर्वेद के मनीशियो का मानना है कि धर्म और कर्म और काम और मोक्ष की प्राप्ती के लिये मानव या व्यक्ति के शरीर का स्वस्थय रहना परम आवश्यक है / मानव का जन्म प्रक्रति ने इसलिये किया है क्योन्कि इस धरती मे मानव का वास हमेशा के लिये बना रहे और यह सिल्सिला कभी न खत्म हो / जेनेरेशन टु जेनेरेशन यह प्रक्रिया चलती रहे / इसलिये मानव की जब बात करते है तो उसमे पुरुष और स्त्री दोनो ही आते है /

 

भव्प्रकश

अगर सेक्स सम्बन्धी विकार होन्गे और स्वास्थय समबन्धी विकार होन्गे तो यह उद्देश्य कभी भी नही पूरा होगा इसलिये आवश्यकता के अनुसार आयुर्वेद के ग्यानियो ने बाजीकरण का अविष्कार किया ताकि ऐसा उद्देश्य प्राप्त किया जा सके /

आयुर्वेद मे भाव प्रकाश और अन्य ग्रन्थो मे बाजी करण का अध्याय इसीलिये जोडा गया है और चिकित्सकीय परामर्श दिये गये है /

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कनक पालीथेरेपी क्लीनिक एवम रिसर्च सेन्टर कानपुर,उत्तर प्रदेश, भारत का आयुर्वेद और आयुष काम्बीनेशन थेरेपी की सुविधा प्रदान करने वाला विश्व के सबसे पहले अस्पताल का निर्माण कार्य का शुक्ला गन्ज, राजधानी राजमार्ग, उन्नाव, उत्तर प्रदेश, भारत मे निर्माण कार्य शुरु / आयुर्वेद और आयुष की निदान ग्यान की हाई टेक्नोलाजी ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और रिसर्च सेन्टर द्वारा अन्वेषित की गयी अन्य आयुर्वेद -आयुष मशीनो द्वारा रोग निदान और रोगो के उपचार की विधियो का काम्बीनेशन उपचार कराने की व्यवस्था सम्भव होगी


करीब करीब मुझे चिकित्सा का काम करते करते यानी डाक्टरी का कार्य करते करते ५० साल पूरे हो चुके है /

इन पचास सालो मे मैने सभी चिकित्सा पध्ध्यतियो का उत्थान और बदलाव बहुत नजदीक से देखा है / मैने दूसरे नामी गिरामी डाक्टरो के केसेस और अपने  डाक्टर  मित्रो के केसेस और उन साधारण डाक्टरो के केसेस और विशेश्ग्य डाक्टरो के केसेस और फिर  अपन केसेस को लेकर बहुत कुछ समझा है और बहुत कुछ जाना है और सीखने को मिला /

मेरे पिता जी डा० सीतला सहाय बाजपेयी वैद्य  [स्वर्गीय] आयुर्वेद और होम्योपैथी दोनो ही चिकित्सा विधियो के प्रैक्टीशनर थे / बचपन से मै उनको मरीजो को समझाते हुये सुनता था जब वह यह बताते थे कि उस मरीज का इलाज होम्योपैथी से करना अच्छा होगा या आयुर्वेद से अथवा दोनो के मिले जुले इलाज से /

उस जमाने मे ्मैने निखिल भारतवर्षीय  आयुर्वेद महासम्मेलन , दिल्ली से वैद्याचार्य [आयुर्वेदाचार्य] की परीक्षा और  होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड, लखनऊ, उत्तर प्रदेश से BACHELOR OF MEDICINE AND SURGERY  की  डिग्री प्राप्त करके  मैने प्रक्टीस शुरु की /

१९७३ मे मै म्यूनिख, जरमनी चला गया जहा मैने KRANKENHAUS  FUER NATURHEILWEISSEN, sanatorium plaz 2, HARLACHING, 8 MUNCHEN, DEUTCHLAND  मे होम्यो पैथी और अन्य दूसरी चिकिसा पध्ध्यतियो का विस्तार से अध्ध्य्यन किया /

 

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डा० देश बन्धु बाजपेयी अपनी पत्नी श्री मती मनोरमा बाजपेयी के साथ भूमि पूजम की तैयारिया करते हुये / पीछे डा० बाजपेयी की पोती सुदीक्षा बाजपेयी कुछ निहारती हुयी  OLYMPUS DIGITAL CAMERA

 

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भूमि पूजन करते हुये डा० डी०बी० बाजपेयी OLYMPUS DIGITAL CAMERA

एक मेडिकल आब्जर्वर की तरह मै सब तरह के केसेस देखत रहता था और उनकी चिकित्सा के बारे मे सन्ग्यान लेता रहता था / धीरे धीरे मेरी आदत बन गयी और मुझे यह पता चलने लगा कि किस बीमारी का इलाज किस चिकित्सा पध्ध्यति मे बेहतर है और किसमे नही है /

जरमनी मे जिस अस्पताल मे मै होम्योपैथी का अध्ध्यन कर रहा था वह जरमनी का सर्व्श्रेष्ठ अस्पताल था / वहा का माहौल देखकर मै अश्चर्य से भर गया क्योन्कि उस तरह की चिकित्सा सुविधा अपने देश मे देखने को कही भी नही मिली थी / उअस समय का यही हाल था /

इस अस्पताल मे होम्योपैथी के अलावा , प्राकृतिक चिकित्सा और  यूरोप मे पायी जाने वाली कुछ हरबल  का उपयोग के अलावा एलोपैथी की दवाओ का भी उपयोग करते थे / इस तरह के काम्बीनेशन इलाज को देखने और समझने का मुझे बहुत नज्दीक से मौका मिला / बाद मे वहा साथ मे काम करने और पढने वाले डाक्टरो के साथ काम करने के दर्मियान बातचीत करने  मे पता चला कि इसके पीछे का दर्शन क्या है /

Krankenhause fuer Naturheilweissen, sanatirium plaz 2, 8000 MUENCHEN, Germany  मे ऐसी काम्बीनेशन चिकित्सा को देखकर और इसके गुणकारी प्रभाव को देखकर मेरा मन बहुत प्रभावित हुआ और मेरे मन मे यह कल्पना जागी कि अगर इसके साथ आयुर्वेद और यूनानी का भी समिष्रण कर दिया जाय तो सोने मे सुहागे का काम हो जायेगा / क्योन्कि उन देशो मे आयुर्वेद और यूनानी की चिकित्सा नही है  और इन चिकित्सा विधियो को जोड़्कर अच्छे रिजल्ट्स प्राप्त किये जा सकते है / ऐसी क्लपना मेरे मन मे थी /

SANATORIUM PLAZ  [ Sanotorium Place सैनेटोरियम प्लेस] नाम की यह जगह म्यूनिख शहर से १५ किलोमीटर के लगभग होगी / यहा AUTO BAHN यानी मेट्रो रेलवे चलती है और यह स्टेशन का नाम भी है जहा मेट्रो रुकती है / यह जगह ISSAR  RIVER  के किनारे बनाय गया है जहा कई अस्पतालो की बिल्डिन्ग है जैसे बच्चो का अस्पताल, प्रसूति का अस्पताल, जनरल अस्पताल, विशेषग्यो का अस्पताल, सर्जरी का अस्पताल और अन्य बीमारियो के इलाज के लिये अस्पताल का समूह बना हुआ है / इन अस्पतालो के बीच मे एक हैलीपैड बना हुआ है जहा दूर दराज के मरीजो को एयर लिफ्ट करके अस्पतालो मे चिकित्सा के लिये लाते है / इस हैलीपैड को देखकर मुझे बहुत ताज्जुब हुआ /

अब मुझे मौका मिला है और मै काम्बीनेशन थेरापी को बढावा दे रहा हू और इसक फायदा रोगियो को देना चाहता हू और वह भी बहु वैग्यानिक दृष्टिकोण के साथ और पूरी लाजिक के साथ जिसमे आधुनिक चिकित्सा बिग्यान और अर्वाचीन चिकित्सा विग्यान दोनो का सम्मिश्रण हो / मै पिछले ५० साल से काम्बीनेशन चिकित्सा करता चला आ रहा हू और इसके रिजल्ट बहुत प्रभाव कारी साबित हुये है /

डी०बी० पैलेस के बगल मे , बाजपेयी हाता- भाग-ब, शुक्लागन्ज, कानपुर-लखनऊ राजधानी राजमार्ग, जनपद उन्नाव ्मे इसी भावना और उद्देश्य के साथ कनक पालीथेरापी क्लीनिक और रिसर्च सेन्टर अस्पताल का निर्माण कराया जा रहा है जहा सभी बीमारियो के काम्बीनेशन इलाज कराने आने के लिये रोगियो के ठहरने की व्यवस्था और उनके लिये वे सभी सुविधाये उपलब्ध करायी जायेन्गी जिन्को रोग और रोग के उपचार के लिये आवश्यक है जैसे सभी चिकित्सा विग्यान की दवाओ, रोग की चिकित्सा और निदान ग्यान के लिये उपलब्ध उपकरण , पन्चकर्म, फीजियोथेरपी, मैगनेट थेरापी, इलेक्ट्रोथेरापी, योग और प्राकऋतिक चिकित्सा आदि आदि सभी सुविधाओ की उपलब्ध्ता मरीजो को प्राप्त होगि, ऐसा हमारा सन्कल्प और उद्देश्य है /

चिकित्सालय परिसर मे भगवान धनवन्तरि देव और माता महालक्षमी की मूर्ति की स्थापना एक नये मन्दिर मे तथा पुराने शिव मन्दिर का जीर्णोध्धार कराने का सन्कल्प भी है जिससे मानसिक रोगियो की चिकित्सा मे आयुर्वेद मे वर्णित विधियो का उपयोग मानसिक विकारो के उपचार के लिये किया जा सके /

अभी निर्माण कार्य चल रहा है / जैसे ही अस्पताल का काम शुरू होगा आप सभी लोगो को इसकी सूचना दी जायेगी /