WHAT SAY OTHERS ABOUT YOGA ? योग के बारे मे कुछ अन्य विचार


जब मै म्य़ूनिख शहर, जरमनी मे सन १९७३ मे होम्योपैथी पढने के लिये गया था, उन दिनो वहा पर एक स्थान मे कोई जर्मन नवयुवक था जो वहा के लोगो को योग की ट्रेनिन्ग दे रहा था / शायद ही कोई वहा योग के बारे मे उन दिनो जान्ता हो ऐसा मैने सुना नही था / यह अवश्य था कि कुछ जागरुक जरमन लोग भारत के बारे मे जाने को उत्सुक होते थे / मै अपने साथ आयुर्वेद की दवाये ले गया था क्योन्कि तकलीफ होने पर मै अधिकतर आयुर्वेदिक दवाये ही खाता हू / मेरे साथ पढने वाले जरमन डाक्टर जो सभी के सभी एम०डी० थे, वे जानना चाहते थे को आयुर्वेद है क्या ? मै उनको बताता था कि वास्तविक आयुर्वेद क्या है और उनको लेक्चर जरमन भाषा मे ही देता था / साथ मे पढने वाले डाक्टरो की उत्सुकता आयुर्वेद के प्रति कुछ अधिक तब हुयी जब मैने उनको बताया कि जिन बीमारियो के इलाज के लिये आप इतने परेशान है वे आयुर्वेदिक दवाओ द्वारा ठीक किये जा सकते है / इस पर वे सब मेरा मुह ताकने लगते थे / और आश्चर्य से पूछते थे कि “क्या सच बोल रहे है ?”

एक दिन मुझे योग के ट्रेनिन्ग देने वाले जरमन युवक ने अपने केन्द्र मे मुझे बुलाया / मै वहां गया, मैने उनको मयूरासन और धनुरासन करके दिखाया / मैने और भी दूसरे आसन उनको बताये / उपस्थित सभी लोग बहुत खुश हुये / उनमे से एक लड़्की ने मुझसे पूछा कि आप एक बार योग का आसन सामने की तरफ झुक कर करते है और दूसरी बार पीछे की तरफ झुक कर करते है / मैने कई बार ऐसा करते आप्को देखा है / इसका क्या मतलब हुआ /

मैने उसको उत्तर मे कहा कि इससे रीढ की हड्डी और मान्श्पेशियो का बैलेन्स बराबर बना रहेगा / और आप्के शरीर को कोई कष्ट नही होगा / अगर आप सामने झुकने वाले योग के आसन बार बार करेन्गे तो आप्को आन्तरिक अन्गो मे तकलीफ हो सकती है और दर्द जैसी परेशानी पैदा हो जायेगी इसलिये बैलेन्स बराबर करने के लिये अग्र योग करते है तो एक आसन सामने झुकने वाला करे और दूसरा पीछे झुक कर करने वाला कर्ना चाहिये /

मैने उनको यह भी बताया कि स्वस्थ्य अवस्था मे सभी तरह के योग आसन किये जा सकते है लेकिन अग्र कोई बीमारी है तो किसी योग और प्राकृतिक चिकित्सक से सलाह लेकर योग करे अन्यथा प्राणायाम करे /

प्राणायाम सभी कर सकते है चाहे वह रोगी हो अथवा नीरोगी / यह सभी को फायदा करता है लेकिन जिन्हे फेफ्ड़ो की तकलीफे हो उन्हे अपने चिकित्सक से सलाह लेकर इलाज करना चाहिये /

योग के बारे मे क्या गूढ बाते है यह निम्न पुश्तक मे छपे लेख मे देखिये और समझिये /

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