दिन: जून 29, 2016

तेजी से बढने वाले रोग ; DISEASES SEEN IN FASTER WAY


पिछले कई सालो से मे मुझे बहुत से ऐसे रोग देखने मे मिले है जिन्हे पहले यानी आज से ३० या चालीस साल पहले बहुत रेयर श्रेणी मे माना जाता था / मेडिकल कालेज मे पढायी जाने वाली प्रैक्टिस आफ मेडिसिन की पुस्तको मे प्राइस अथवा डेविडसन अथवा हैरिसन की किताबे सभी छात्र पढते थे / अभी का पता नही कि किस तरह की पुस्तके पढायी जाती है लेकिन १९७१ और १९७२ मे जब मै फाइनल साल मे था तब यही किताबे पढने के लिये हमारे कोर्स मे थी /

क्लासिकल तौर पर देखा जाय तो इन्ही पुसतको मे उन सभी बीमारियो का जिक्र किया गया है जो उन दिनो मे देखने मे आती थी / लेकिन आज का हाल यह है कि जैसा इन किताबो मे लिखा गया है उस तरह की true picture वाले रोगी देखने मे नही आते है /

क्लासिकल टायफायड,
क्लासिकल मलेरिया,
टिटनेस,
टिटेनी,
कालेरा,
हाइड्रोसील,
लिम्फ एडीनाइटिस,
ल्य़ूकोरिया,
स्त्रियो के गुप्त रोग,
पाली आर्थराइटिस,
कोल्ड और कोराइजा,

सिफिलिस,

गोनोरिया,

टी०बी० ट्यूबर कुलर इनफेक्शन

एक बहुत लम्बी लिस्ट है बीमारियो की जो उस समय देखने मे आती थी लेकिन अब बहुत कम देखने को मिलती है /

अब कुछ बीमारिया बहुत बड़ी सन्ख्या मे देखने मे आती है जो पहले बहुत कम थी / ये बीमारिया नीचे लिखी हुयी है /

कैन्सर,
ब्लड प्रेशर,
डायबिटीज,
मानसिक रोग,

एच०आई०वी०

 

ऐसे ऐसे नाम वाले रोग अब सामने आने लगे है जिनका कभी नाम नही सुना गया होगा / ऐसा अब लोग और आम जन कहने लगे है /

यह सही है और इसका कारण यह है कि पिछले ३० सालो मे मेडिकल साइन्स का बहुत बड़ा हिस्सा हाई टेक्नोलाजी की मेडिकल इन्जीनियरिन्ग से जुड गया है / रोगो के निदान मे हुयी टेक्नोलाजी की क्रान्ति से जहा अल्ट्रा साउन्ड, सी०टी० स्कैन, एम०आर०आई० स्कैन, ई०सी०जी०, पेट स्कैन, ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आदि आदि के अलावा रक्त और अन्य जान्चो के आधार पर नये किस्म की बीमारियो का फाइन्ड आउट करना और उनका पता चलने से एनाटामिकल और फीजियोलाजिकल और पैथोलाजिकल आधारित बीमारियो का नाम करण करने से ऐसा हुआ है / इसी कारण यह धारणा बनना स्वाभाविक है कि जैसा लोग कहते है कि रोजाना नी नई बीमारिया पैदा हो रही है उसका कारण मूल रूप से इन्ही निदान करने वाले यन्त्रो की रिपोर्ट पर आधारित होने लगा है और अब यह एक तरह का ट्रेन्ड बन गया है /

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