महीना: अगस्त 2016

स्कूल जाने वाले बच्चो मे कन्धे और पीठ और सीने यानी चेस्ट केज और कमर मे दर्द की शिकायत और रीड की हड्डियो मे पैदा हो रही बीमारियां


मुझे शहर और देहात दोनो क्षेत्रो मे मरीजो को देखने का अवसर रोजाना और अक्सर मिलता रहता है /

कई बार स्कूल जाने वाले बच्चे अपने मा बाप से शिकायत करते है कि उनको सिर मे दर्द रहता है या उनके कन्धे दर्द करते है या उनकी गर्दन और पीठ दर्द करती है या उनकी कमर दर्द करती है या उनके दोनो पैर दरद करते है /

पहले जब इस तरह की शिकायते बच्चो के माता पिता करते थे तो मै इन सब्को नजर अन्दाज करता था और इसे बहुत ही मामूली किसम की आये दिन की तकलीफो से जोड़ दिया करता था / मेरा अनुमान था कि बच्चे परिवार मे आये दिन अपने माता पिता को गठिया वात या पीठ का दर्द या कमर का दर्द या कन्धे का दर्द या हाथ का दर्द की शिकायते सुनते रहते है इसलिये बच्चो के नाजुक स्वभाव के कारण और मा बाप से सहानुभुति रखने के कारण ऐसा कहते होन्गे /

यह भी हो सकता है कि उनको गले की लैरिन्गो फैरिन्गियल ट्रकियल अथवा ई०एन०टी० की बीमारी हो इसलिये इन तकलीफो का किसी तरह का रिफ्लेक्शन हो और फिर इस तरह के सिन्ड्रोम्स आ गये हो /

लगभग एक साल पहले एक दिन मेरी पोती ने जो दस साल की है उसने मुझसे शिकायत की उसे सीने मे दर्द होता है / उस समय बरसात का सीजन चल रहा था मैने विचार किया कि यह दर्द बर्साती हवाओ से हो सकता है या फिर यह सब ए०सी० मे सोते है या ठन्डे पानी से स्नान करते है इस कारण से मस्कुलर स्पास्म जैसी शिकाय्त हो सकती है क्योन्कि पोती की जान्च करने के बाद मुझे कुछ भी एब्नार्मल नही मिला /

मै प्रत्येक इतवार सोनिया गान्धी के चुनाव क्षेत्र मे यानी जनपद राय बरेली मे कस्बा भोज पुर मे स्तिथि “भारत रत्न राजीव गान्धी स्मारक आयुर्वेद शोध सन्स्थान , भोज पुर, पूरे पान्डे रोड, रायबरेली , उ०प्र० ” मे मरीजो को देखने और उनकी जान्च और उनके आयुर्वेदिक और आयुष इलाज के लिये यहा आता जाता रहता हू /

ज्यादातर मै अपनी कार से ही वहा मेरा आना जाना होता है जिसमे मै अपनी कुछ गिनी चुनी मशीने और मानीटर लेकर जाता हू जो पोर्टेबुल है और बैटरी से चल जाती है क्योन्कि वहा पावर सप्लाई की बहुत समस्या है / वहा सब मशीने लेकर जाना सम्भव नही होता इसलिये जरूरी मशीनो को ले जाता हू / क्योन्कि कार मे लाद कर ले जाने मे मुझे कुछ भी असुविधा नही होती है /

लेकिन जब मै कार से नही जाता और मुझे बस से जाना होता है तो मै अपने बैक पैक मे १० से लेकर १५ किलो तक की मशीने पीठ मे लाद कर ले जाता हू /वहा पहुचने मे पैदल और बस और मोटर साइकिल का लम्बा सफर तय करना होता है जिसमे कई घन्टे लग जाते है / आने जाने मे पूरा दिन बर्बाद हो जाता है और लगभग १७५ किलोमीटर का सफर तय करना होता है / इलेक्ट्रानिक मशीने बहुत नाजुक होती है इसलिये मै बस मे या पैदल या मोटर साइकिल मे उनको अपनी गोद मे या कन्धे मे लटकाये रहता हू /

रात मे जब मै सोने लगता तो मेरे कन्धे और गर्दन और पीठ और सीने मे दर्द होना शुरू हो जाता और सारा हिस्सा अकड़ जाता / पहले मै यह समझा कि मुझे स्पान्डिलाइटिस की पुरानी तकलीफ है और मै ए०सी० मे सोता हू , कम्प्य़ूटर मे भी झुक कर काम करता हू इसलिये ऐसा होगा /

कुछ हफ्ते मुझे बार बार रायबरेली जाना पड़ा / इससे मेरी तकलीफ और बढ गयी / अब मै चिन्तन करने लगा कि मुझे ऐसी तकलीफ क्यो और कैसे बढी है और इसका कारण क्या है / मैने वाच करना शुरु किया और जल्द ही पता चल गया कि यह सब मेरा मशीने से भरे १० या १५ किलो बैक पैक के लादने के कारण है /

मैने बैक पैक लादना छोड़ दिया और एक करमचारी रख लिया जो सब सामान ले जाने लगा / मेरी तकलीफ धीरे धीरे ही सही , ठीक होने लगी /

मेरी पोती ने फिर शिकायत की कि उसे कन्धे और सीने मे दर्द होता है / मै समझ गया कि जितना इस्का वजन नही है उससे ज्यादा तो यह सामन उठाती है और लेकर आती जाती है / यह दर्द उसी के कारण है / मैने बहू और लड़्के से कहा कि इसका बस्ता हल्का करो तभी इस समस्या से निजात मिलेगी /

मेरा लड़्का बच्चो को कार से ले जाता है और ले आता है बच्चो के बैक पैक को अधिक देर तक कन्धे मे न लादने से उनकी यह समस्या दूर हुयी है /

मेरे पास इस तरह की शिकायत लेकर आने वाले बच्चे और उनके माता पिता को मै हिदायत करता हू कि यह सब बस्ते के वजन के कारण है जो बच्चो के नाजुक कन्धे सहन नही कर पाते है और इस तरह की आगे चलकर भविष्य मे गम्भीर बीमारियो को आमत्रण देते है /

बड़ी तेजी से बढ रही रीढ की हड्डियो की बीमारियो का यह एक बड़ा कारण हो सकता है / आज कल न्य़ूरोलाजिकल बीमारिया भी बहुत बढ रही है यह रीढ की हड्डी के कम्प्रेशन से भी हो जाती है / मैने बहुत से मरीजो को देखा है जिनकी बीमारी की वजह रीढ से समबन्धित थी / उनके केस को कई पोस्ट मे जिक्र किया है /

यह सोचने का काम समाज और सरकार का है कि इस तरह से बच्चो को किताब का बस्ता लादकर उनको बीमार बना देना कहां तक उचित होगा ?

A CASE OF H.I.V. PATIENT’S IMPROVEMENT BY AYURVEDA AND HOMOEOPATHIC AND UNANI COMBINATION TREATMENT


Among path of cure of H.I.V. AFFECTED PATIENT ,treated by our RESEARCH CENTER by Ayurvedic and Homoeopathic and Unani combination treatment and duly diagnosed by the latest invented AYURVEDA AYUSH hi-technology ETG AyurvedaScan and its advance versions.

Following presented report done by the Lady patient, affected by her Husband , to see the improvement in her condition. Report  shows her improved condition which was worse earlier and before comming to our treatment  than before.

Symptomatically and syndromatically she gained weight and her general physical condition is much  better now, after our treatment.

Her report is given below; We are hiding her identity due to obvious reasons.

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We have said earlier that HIV patient stage one and stage two can be well managed by AYUSH therapies treatment.

 

 

 

LEUCODERMA CASES ; WHO ARE TREATING BY OUR CONCERNS ; READERS CAN CONTACT DIRECTLY TO THESE NUMBERS AND CAN TALK TO PATIENT DIRECTLY


We thanks to our LEUCODERMA patients, who have undergone our treatment and cured and partially cured and improved by our treatment, now pleased to answer the queries asked by the Blog readers.

1- Mobile number 09717759899, Rajesh
One of his family member is being treated by us, who is suffering from LEUCODERMA, is now improving by our treatment, readers can ask directly to Mr. RAJESH mobile number 09717759899 about our activities and individual method of treatment.

2- Mobile number 09452528904 , ANIL
Mr Anil is himself suffering from LEUCODERMA from childhood, he is under my treatment at present.
Blog readers can ask and enquire about our method of individual treatment and other queries which they wish to ask.

3- MOBILE NUMBER 09415039517, contact Mr. Rakesh , with reference to me

His one of the family member was suffering from LEUCODERMA / VITILIGO and is fully cured now. Started treatment before 2 yrs and cured before one year, did not occured again sice one and half years.

4- LEUCODERMA ; CONTACT TO MR. MANJHI, MOBILE NUMBER 07275465838

Readers of this blog may contact to these mentioned persons, giving my reference.

ऊपर दिये गये  मरीजो के मोबाइल नम्बर  पर इस ब्लाग के पाठको से निवेदन है कि पूछने वाले  लोग दिये गये मरीजो से केवल पूछ ताछ करे और    अनावश्यक  बाते करके  मरीजो को परेशान मत करें /

Thanks to our both patients, who prepared himself for this queries job. Generally my experience is very bad about those that cured patients, who do not wish to share the cure experiences to others. Cured patient generally did not share the cure to others even to their relatives and want to hide all about. This is the reason, we can not share the cures of those isease conditions for which there is no treatment in Allopathy but they got cured by Ayurveda and Homoeopathy and Unani combination treatment.

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VIRAL / DENGUE / FEVER WHICH IS NOT UNDER CONTROL CAN BE TREATED AYURVEDICALLY AND AYUSH THERAPIES TREATMENT AND MANAGEMENT


DENGUEFEVER001आयुर्वेदिक अथवा होम्योपैथिक अथवा यूनानी दवाओ के काम्बीनेशन इलाज से सभी तरह के वायरल बुखार कुछ दिनो मे पूरी तरह से ठीक हो जाते है / 

बुखार जैसे ही आना शुरू हो या पता लगे कि वायरल बुखार हो गया है तुरन्त आयुष का इलाज शुरू कर देना चाहिये / 

फौरन इलाज करने से यह बुखार दो या तीन दिन मे पूरी तरह से ठीक हो जाता है / 

ज्यादा पुराना बुखार होने पर इलाज करे लेकिन किसी आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सक की सलाह लेकर / 

तुरन्त आये बुखार शत प्रतिशत ठीक होते है और किसी भी प्रकार की अनहोनी नही होती है / 

 

HEPATITIS C ; KNOW ABOUT THE DISEASE CONDITION ; AYURVEDA IS ANSWER OF THIS DISEASE CONDITION TREATMENT AND MANAGEMENT BOTH


HEPATITIS C is a disease condition which is dreaded by many by exaggeration about the myths of disease syndromes.

But in fact this is a treatable condition and Ayurveda of course have answer of the treatment and management of this condition.

Health plus magazine have published an article which have complete and sufficient information about Hepatitis C.

Readers are requested to read the complete article given below;

HEPATITIS C

HEPATITIS C 001

HEPATITIS C 002

HEPATITIS C 003

HEPATITIS C 004

HEPATITIS C 005

HEPATITIS C 006

GOING THROUGH THE ABOVE MENTIONED  syndromes and comments, since centuries Ayurveda have treated these disorders successfully. AYURVEDA and Homoeopathy and Unani  therapies have a number of hundreds and thousands remedies including Single and multiple combination of medicament. AYURVEDA life style and dietary management suggests what to do and what to not do, this helps for quick recovery of the ailments.

ETG AyurvedaScan and its supplementary related examination and test are evaluates the fundamentals including diagnosis of disorders  and internal problems. Selection of remedies are thus bases and a total cure  / relieve is promised.

autoimmunedisorders