दिन: जनवरी 6, 2017

CHRONIC AND INCURABLE DISEASE CONDITIONS CAN BE WELL TREATED AND MANAGED BY AYURVEDA AND AYUSH THERAPIES TREATMENT ; आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा विधियों द्वारा लाइलाज बता दी गयी बीमारियों का इलाज करने से अवश्य ठीक होती है


लाइलाज बीमारियो के इलाज के बारे मे एक तरफ आधुनिक चिकित्सा विग्यान के जानकार डाक्टर उनके पास आये हुये रोगियों से यह कह देते है कि जिस बीमारी के इलाज के लिये वे उनके पास आये है , उन बीमारी का इलाज कहीं है ही नही / इस तरह की बात सुनकर मरीज भटकते है और ऐसी बीमारी लेकर जीने वाले मरीजो को यह नही सूझ पाता कि वे करे क्या और कहा इलाज के लिये जायें ?इस तरह के प्रश्न मुझसे फोन द्वारा या ई-मेल के द्वारा पूचे जाते है या व्यक्तिगत तौर पर मेरे आउट डोर अस्पताल मे आकर लोग पूछते है / 

यह सवाल मेरे यहां कनक पालीथेरापी क्लीनिक और रिसर्च सेन्टर कानपुर मे लाइलाज बीमारियो के इलाज के लिये आने वाले रोगी बताते है ? ऐसे रोगी पूछते है कि डाक्टर क्यो ऐसा कहकर घबरा देते है कि अगर मरीज न मर रहा हो तो भय खाकर मर जाये या मौत के मुह मे चला जाय ? हमारे यहा आने वाले रोगी यह सवाल पूछते है / ऐसे रोगी जानना चाहते है कि एलोपैथी के डाक्टर मरीजो को क्यो भयभीत कर देते है कि जिस बीमारी से वे ग्रस्त है वह लाइलाज है और उसका कोई इलाज इस दुनिया मे समभव नही है / 

अब मै सोचता हू कि  इस तरह के सब सवालो का उत्तर क्या दूं ? सवाल पूचने वालो से मै यही कहता हू कि आपको ऐसा बताने वालों और ऐसा समझने वालो दोनो को ही सूचना का अभाव है / यह एक तरफ का मसला नही है / यह दोनो तरफ का मसला है /

चिकित्सा व्यव्साय अब सेवा नही रह गयी है , यह एक बहुत बड़ा बिजनेस हो गया है और इसीलिये जब सेवा भावना समाप्त हो गयी है तो  शाक्टर भी व्यवसायी हो गये है / अब वह समय नही रहा जब चिकित्सक सेवा भवना से काम करते थे / वह समय बीत गया जब डाक्टर मिशन की भावना से काम करते थे और सर्विस टू ह्यूमिनिटी उनके दिमाग मे रहती थी / अब यह फिलॊसोफी गुजरे दिन की बात हो गयी है /

वर्तमान मे जब हर बात और हर सेवा व्यवसाय का सवरूप धारण कर चुकी है तो चिकित्सा क्षेत्र भी इस व्यवसायीकरण से नही बच सका है / जाहिर है व्यवसाय का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ पैसा कमाना है / आज हालात यह है कि डाक्टरो को अपना क्लीनिक चलाने के लिये काफी धन की जरूरत होती है / जब डाक्टर धन लगायेगा तो वह किसी तरह की चैरिटी करेगा, ऐसा सोचना बेव्कूफी होगी / डाक्टर जब पैसा लगाकर नर्सिन्ग होम खोलेगा और उसको चलाने के लिये सुविधाये उपलब्ध करायेगा तो यह सब विना पैसा खर्च किये होगा नही / जब डाक्टर पैसा खर्चा करेगा तो वह चाहेगा कि नर्सिन्ग होम या इन्डोर अस्पताल से उसकी इतनी इन्कम हो कि उसके अस्पताल चलाने के सभी खर्चे  मय कर्मचारियो के वेतन के  और उसके प्राफिट के सुगमता से निकल आवे /

डाक्टरो के सामने बहुत सी समस्याये होती है विशेष तौर पर एलोपैथी के चिकित्सको की / आम्तौर पर प्रायवेट नर्सिन्ग होमे चलाने वाले डाक्टर्स प्रायवेट मेडीकल कालेज के पढे हुये होते है / अनुमान यह है कि आज की तारीख मे अगर कोई लड़्का एम्बीबीएस की पढाई करता है तो साढे पान्च साल मे उसके लगभग डेढ करोड़ रुपये कोर्स को पूरा करने मे खर्च हो जाते है / अगर यही लड़्का पोस्ट ग्रेजुयट करता है तो लग्भग इतना ही पैसा उसका और खर्चा होगा लेकिन यदि वह किसी सर्जिकल कोर्स मे दाखिला लेता है तो उसका तीन करोड़ रुपया खर्चा होगा / यानी मोटे रूप मे यह समझिये कि लग्भग पान्च करोड़ रुपया एक उस लड़्के का खर्चा होगा जो जनरल सर्जरी का कोर्स करके पास करके बाहर आयेगा / इसके बाद अस्पताल बनाने और चलाने का खर्चा अलग होग / यह जो भी हो /

क्या आप ऐसे डाक्टर से उम्मीद करेन्गे कि यह सेवा भावना से काम करेन्गे ?

समस्या यह है कि एलोपैथी के डाक्टरो को बीमारियो के बारे मे उतनी ही जानकारी है जितना कि अमेरिकन डाक्टरो या ब्रिटिश डाक्टरो द्वारा लिखित प्रैक्टिस आफ मेडिसिन की किताबों में बताया गया है / एलोपैथी के डाक्टर उतना ही ग्यान रखते है जितना कि उप्रोक्त बतायी गयी किताबो मे लिखा गया है / एक बात और है कि हर साल यह किताबे या कई कई साल बाद इन किताबो मे बतायी गयी जानकारी के बारे मे बदलाव होते रहते है / इन पुस्तको के अलावा एलोपैथी के डाक्टरो को किसी दूसरे चिकित्सा विग्यान का ग्यान नही होता है और न ही उनको कोई दिचस्पी होती है कि वे किसी दूसरे चिकित्सा विग्यान को समझने का प्रयास करें / इसका कारण यह है कि अमेरिका और ब्रिटिश और दुनिया के अन्य सभी देशो मे आयुर्वेद अथवा होम्योपैथी अथवा यूनानी अथ्वा योग जैसी चिकित्सा सुविधा कही पर भी नही है सिवाय भारत देश मे /

भारत और नेपाल छोड़्कर अन्य देशो से आये रोगियो से मैने जानने की कोशिश की वहा अगर लाइलाज बीमारी किसी को हो जाती है तो वे क्या करते है ? सभी का जवाब था कि लाइफ स्टाइल बदलने के अलावा कुछ नही किया जाता और सिम्पटोमेटिक इलाज करते है / मैने उनको बताया कि भारत मे आयुर्वेद के अलावा होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा विग्यान और योग तथा प्राकृतिक चिकित्सा भी उपलब्ध है इसलिये भारत मे लाइलाज कही जाने वाली बहुत सी बीमारियो का इलाज सम्भव है /

अच्छी बात यह है कि आयुर्वेद अथवा होम्योपैथी अथवा यूनानी अथ्वा योग और प्राकृतिक चिकित्सा के मेडिकल कालेजों में इन्टीग्रेटेड कोर्स ्पढाये जाते है / यानी जो विषय एलोपैथी के मेडिकल कालेज मे पढाये जाते है वही सब विषय आयुर्वेद – होम्योपैथी – यूनानी और योग चिकित्सा के पाठ्य क्रमों मे भी पढाये जाते है और इनके साथ सम्बन्धित आयुर्वेद – होम्योपैथी- यूनानी के विषय भी पढाये जाते है / इससे होता यह है कि छात्र को दोनो चिकित्सा विग्यान का ग्यान हो जाता है और वह कम्पेरेटिवे स्टडी करके समझने लगता है कि बीमारियो का इलाज किस तरह से कर सकते है /

यही फर्क एलोपैथी के डाक्टरों और आयुर्वेद आयुष डाक्टरो का है / एलोपैथी के डाक्टरो ने केवल एलोपैथी पढी हुयी होती है इसलिये उनका नजरिया एकल दृष्टि का है जब्कि दूसरे चिकित्सा विग्यान के ग्याता डाक्टर का बहुल नजरिया होता है / यह डाक्टर की दृष्टि मे बीमारी लाइलाज की ष्रेणी मे आती है तो दूसरे डाक्टर के हिसाब से यह बीमारी का इलाज किया जा स्कता है और उसका इलाज मौजूद है /

मेरा सभी से निवेदन है कि अगर किसी डाक्टर ने किसी रोगी को यह बता दिया है कि उसकी बीमारी लाइलाज है तो उसे यह नही समझना चाहिये कि उसकी बीमारी का कोई इलाज नही है /

यहां मै उन रोगियो की बात नही शामिल कर रहा हू जिनके रोग अन्तिम अवस्था मे पहुन्च चुका है या वे आपरेशन करा चुके है और अपने अन्गों को कटवाकर शरीर से बाहर करा चुके है /

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