महीना: फ़रवरी 2017

महान गायिका लता मन्गेशकर की आवाज़ हम सबको क्यों मधुर और मन और आत्मा को रन्जन करने वाली लगती है


लता मन्गेशकर, हिन्दुस्तान की आवाज , इनको तो सभी जानते है / बच्चे बच्चे तक / इनकी अवाज ही पहचान है / अब तो भारत रत्न है /

रेडियो और टेलेविजन और अन्य सन्चार माध्यमो मे हमेशा लता दीदी छाई हुयी है / मै तो पैदा भी नहि हुआ हून्गा और जब से होश सम्हाला है और समझने लगा तब से लेकर अब तक लता दीदी की आवाज सुनता चला आ रहा हू / ऐसा नही है कि मुझे दूसरे महिला गायको की गायकी नही पसन्द है , मुझे लता दीदी के अलावा नूरजहा और अमीर बाई कर्नाटकी और शमशाद बेगम और सुरैय्या और उमा देवी और आशा भोसले और सुमन कल्याणपुरे और सम कालीन महिला गायको के गायकी बहुत पसन्द है / लेकिन जब मै इन सब आवाजो को ध्यान से सुनता हू और लता की आवाज से  एक दूसरे का कमपरीजन करता हू तो मुझे लगता है कि लता दीदी की आवाज वास्तव मे यूनिक है और एकदम सबसे अलहदा है जो  सुनने के समय ही मन और आत्मा को छू लेती है और एक ऐसे रूहानी संसार मे पहुचा देती है जहां कुछ समय के लिये मन वास्तविक सन्सार से दूर हो जाता है /

ऐसा क्यो होता है ? यह बड़ा पेचीदा सवाल है / हलाकि यह मेडिकल साइन्स के फीजियोलाजी से जुड़ा हुआ सबजेक्ट है और विग्यान उतना ही समझ और समझा सकता है जितना कि वह सब्जेक्ट आन्खो के सामने होता है /

मेर समबन्ध चूकि मेडिकल साइन्स के निदान ग्यान से जुड़ा हुआ है जिसमे कई सबजेक्ट्स एक साथ शामिल हो जाते है / लिहाजा मै इस गुथ्थी को समझने का प्रयास मात्र कर रहा हू , इस विषय को लेकर कि “”लता दीदी की आवाज इतनी मन मोहक क्यो है ?”” 

मै इसकी ज्यादा विषद विवेचना न करके सन्क्षिप्त मे अनालाइसिस  करता हू  और समझाने का प्रयास करून्गा

चिकित्सा विग्यान के हिसाब से जब हम बोलते है और शब्दो का उच्चारण करते है तो इस प्रक्रिया मे शरीर के निम्न अन्ग और सिस्टम इन्वोल्व हो जाते है /

१- मष्तिष्क और नर्वस सिस्टम ; इसमे ब्रेन और ब्रेन के हिस्से और इससे सम्बन्धित नसे और नाडियां

२- श्वसन सन्स्थान ; इसमे फेफड़े और ट्रैकिया और ळरिन्ग्स और फैरिन्ग्स और स्वर यन्त्र यानी वोकल कार्ड

३; मान्शपेशी सन्स्थान ; इसमे गले और चेस्ट और शरीर की दूसरी सपोट करने वाली मान्श्पेशियो का समूह

४- गला और जीभ और मुख और ओठ और नाक और नैज़ल पैसेस और ऊपरी डाय्जेस्टिव सिस्टम के कुछ हिस्से

जब इन सब अन्गो और इनसे जुड़े सन्स्थानो का बेहतर ताल्मेल बैठता है तब जाकर कही सुरीला सन्गीत सुनने को मिलता है /

यह सभी सन्स्थान स्वर यन्त्र  यानी वोकल कार्ड जिसकी झन्कार या वाइब्रेशन से आवाज निकलती है या आवाज पैदा होती है , यह पैदा हुयी आवाज जब लैरिग्स और फैरिन्ग्स जैसी पाइपनुमा बनावट से मुख तथा नैज़ल पैसेस और जीभ से टकराते हुये अथवा टच करते हुये मुख से बाहर निकलती है तो सुनने वाले को इन शब्दो की वाइब्रेशन की फ्रीक्वेन्सी से पता चलता है कि आवाज मधुर है या नही /

 

 

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SPINAL DISEASES / SPINAL PROBLEMS / SPINAL ANOMALIES ; PAINFUL CONDITION WELL TREATED BY AYURVEDA-AYUSH COMBINED INTEGRATED TREATMENT AND MANAGEMENT


SPINAL PROBLEMS can be well treated by AYURVEDA-AYUSH COMBINED AND INTEGRATED treatment and management.

Scientist warns not to take much painkillers in these spinal problems, as these painkillers are harmful for the health.

Below published report in DAILY JAGARAN, a Hindi language newspaper published from KANPUR CITY , UP state, India reports like below, which is alarming to those peopel who are using painkillers in spinal treatment.

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रीढ की हड्डियों के इलाज मे अन्ग्रेजी अथवा एलोपैथी की दवाओं का उपयोग मरीज के लिये हानिकारक हो सकता है , ऐसा बैग्यानिको का मानना है / उपर दी गयी रिपोर्ट के अनुसार पीठ के दर्द मे होने वाली दर्द की तकलीफ मे दर्द दूर करने वाली दवा शरीर को हानिकार्क साबित हो सकती है /

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रीढ की हड्डियो से पास होने वाली आर्टेरीज से शरीर के अन्गो का कार्य करने की क्षम्ता भी जुड़ी हुयी होती है /

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रीढ की हड्डियो की रचना एक joint जैसी होती है, जो छोटे आकार मे होती है , इसे ऐसे समझना चाहिये / यह एक तरह के जोड़ो का कालम  कह सकते है /

 

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स्पाइनल कार्ड की बहुत सी बीमारिया होती है इनमे सबसे जयादा कामन बीमारियां नीचे लिखी गयी हैं /

१- स्पान्डिलाइटिस ; यह बहुत कामन बीमारी है और अब तो यह लगता है कि शत प्रतिशत लोगो को यह बीमारी अगले कुछ सालो मे अपने गिरफ्त मे ले लेगी , ऐसा मेरा अनुमान है / स्पान्डिलाइटिस दो तरह की होती है एक- सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस और दूसरी लम्बर स्पान्डिलाइटिस

२- एन्कोलाइजिन्ग स्पान्डिलाइटिस ; इसमे पूरी रीढ की हड्डी inflammatory  condition  मे आ जाती है और इसके कारण प[ऊरी की पूरी पीठ और उसकी मान्शपेशिया सूजन की स्तिथि मे आ जाती है / इसकी वजह से रोगी का movement रुक जाता है / नीचे दिये गये चित्र मे इसी स्पान्डिलाइटिस के रोगी को दिखया गया है /

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आयुर्वेद  और आयुष चिकित्सा पध्ध्यतियो मे   रीढ की बीमारी का इलाज पूरी तरह से सम्भव है , चाहे वह कोई भी हो और उनका कोई भी नाम दिया गया हो अथवा बताया गया हो /  आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक और यूनानी अथवा योग और प्राकृतिक चिकित्सा के समन्वित और कम्बाइन्ड इलाज से इस बीमारी को बढने से रोका जा सकता है और मरीज की हालत को स्थिर अवस्था मे रखा जा सकता है, अगर बीमारी की अवस्था लापरवाही के कारण या गलत इलाज के कारण अनियन्त्रित होकर ऐसी अवस्था मे हो गयी हो , जब या लाइलाज हो जाय, ऐसी अव्स्था मे combined and integrated treatment and management  की सहायता लेकर SPINAL DISEASE CONDITIONS AND DISORDERS   को इलाज करके दूर किया जा सकता है /

अगर SPINAL DISORDERS   का इलाज आयुर्वेद की आधुनिक निदान ग्यान की तकनीक E.T.G. AYURVEDA SCAN परीक्षण कराकर इलाज करते है तो रीढ के सभी तरह के रोगो पर नियन्त्रण और क्योर किया जा  सकता है /

रीढ की बीमारी का असर सारे शरीर मे पड़्ता है / रोगी के शरीर मे तरह तरह के syndromes  पैदा हो जाते है जिससे रोग निदान मे बहुत गलतफहमियां पैदा हो जाती है और इलाज भी गलत तरीके से किये जाने लगते है , इसलिये इस तरह की बीमारियो मे रोग निदान का सही होना अति आवश्यक है / गलत इलाज करने से एक बीमारी तो ठीक नही होती है उलटे कई तरह की नई बीमारिया और पैदा हो जाती है /

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