A CASE OF ”MENTAL DISORDER’ ; EXAMINED BY E.T.G. AYURVEDASCAN TECHNIQUE ; SURPRISING ULTIMATE CONCLUSION ; एक मानसिक रोगी का परीक्षण ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन द्वारा किया गया और ्बीमारी की जड़ का अन्तिम निष्कर्ष क्या निकला ?


दिनान्क १ मई २०१७ को छ्त्तीस गढ राज्य से आये एक २३ साल के नवयुवक जिसको पिछले कई सालों से मानसिक बीमारी है , इलाज के लिये हमारे केन्द्र कानपुए शहर उत्तर प्रदेश मे आया /

यह नव युवक अपने साथ अपनी बीमारी से समबन्धित तकलीफो को एक कागज मे लिखकर लाया था / लेकिन उसने मुझे नही बताया कि उसे क्या और किस तरह की बीमारी है /

मेरे असिस्टेन्ट डाक्टर ने इस मरीज का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण किया / इस मरीज के कुछ विशेष परीक्षण और अधिक किये गये , यह इस बात को ध्यान मे रकहकर किये गये ताकि बीमारी की जड़ या बीमारी की जेनेसिस का पता लगाया जा सके /

अधिकतर चिकित्सक बीमारी के सिम्पटम या लक्षणो को सुनकर या देखकर लाक्षणिक उपचार करते है, उससे लाक्षणिक फायदा तो हो जाता है लेकिन बीमारी का स्थायी इलाज नही हो पाता है / ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन चून्कि पूरे शरीर का परीक्षण करता है और इसी कारण शरीर के सिस्टम्स मे व्याप्त व्याधियो का डाटा उपलब्ध कराता है जिससे पता चलता है कि शरीर की क्या और कैसी स्तिथि है / हमारे रिसर्च सेन्टर मे ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन का परीक्षण कई हालातो मे और परिस्तिथियो मे शरीर कैसा काम करता है और  शरीर के अन्ग और सिस्टम्स  किस तरह से रिस्पान्स करते है ौर उनमे किस तरह के परिवर्तन होते है इन सबका अध्ध्य्यन करते है और उसको को-रिलेट करते है और इस बात का निष्कर्ष निकालते है कि बीमारी की मुख्य वजह क्या है ? यानी बीमारी की जेनेसिस क्या है /

आयुर्वेद मे बताया गया है कि वात और पित्त और कफ इन तीन अवस्थाओं मे शरीर की क्या स्तिथि होती है / हमारे केन्द्र मे सभी मरीजो का परीक्षण इसी बात को ध्यान मे रखकर करते है / RESTING POSITION और LONG RESTING POSITION  और ंMOTION POSITION और REST AND SLEEP POSITION के अलावा मरीज के व्यक्ल्तिगत परेशानियो के हिसाब से परीक्षण किये जाते है / यह सब कवायद इस्लिये की जाती है ताकि मरीज की तकलीफ का सटीक और अचूक निदान किया जा सके /

सभी तरह के परीक्षण किये गये  जिसमे करीब साढे चार घन्टे लग गये / जब सभी रिपोर्टें तैयार हो गयी तब उसकी सब रिपोर्टो को देखने का मौका मुझे मिला /

रिपोर्ट देखने के बाद मुझे पता चला कि मरीज को मानसिक बीमारी है क्योन्कि उसके रिपोर्ट के शाटा [१] सर्कुलेटरी सिस्टम [२] आटोनामिक नर्वस सिस्टम [३] हारमोनाल सिस्टम [४] डायजेस्टिव सिस्टम के अलावा शरीर की केमिकल केमिस्ट्री मे इम्बलन्स के अलावा  अन्य बातो का पता चला /

मैने मरीज को उसकी सारी तकलीफ मरीज और उसके साथ आये लोगो से शेयर की और उनको विस्तार से बताया कि उसको यह तकलीफ क्यो और कैसे हुयी और इसके बीमारी के डेवलप होने का क्सि तरह रास्ता बना /

सब कुछ बता देने के बाद मरीज ने अपनी जेब से एक कागज निकाला और मेरे सामने रख दिया / मैने कागज मे लिखी सभी बाते पढकर सुनायी / इसमे वही सब था जो मै मरीज को सबसे पहले ही बता चुका था /

हमारे इन्वेस्टीगेशन मे निष्कर्ष के रूप मे कुछ बाते मिली ;

१- मरीज को कई साल पहले कई महीनो तक बुखार आतारहा जिसका इलाज अलोपैथी दवाओ के द्वारा हुआ / LONG REST POSITION ETG AyurvedaScan जान्च मे इसके बुखार के बारे मे पता चला कि इसे 99 डिग्री से लेकर 100.5 डिग्री तक का बुखार बना रहता है /

२- ई०टी०जी० रेस्ट पोजीशन की रिकार्डिम्ग मे पता चला कि इसका ब्लड सर्कुलेशन सिर की ओर अधिक है / ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के निदान के हिसाब से यह शरीर की अबनार्मल स्तिथि है / PSYCOLOGICAL AND PSYCHOSOMATIC   DISORDERS  के मरीजो मे ऐसी waves  मिलती है जिनसे डाय्ग्निसिस हो जाती है कि इसे किस तरह कि बीमारी है /

३- शरीर की CHEMICAL CHEMISTRY  मे बदलाव आने से या imbalance  होने से यह बीमारी और ज्यादा जोर पकड़्ती है और ठीक होने का नाम नही लेती है /

हमारे यहा जितने भी मानसिक रोगी आय्र है सभी ठीक हुये है क्योन्कि हमारा मानना कि सही निदान और मर्ज की पकड़ होने से आयुर्वेद और होम्योपैथी और यूनानी और एलोपैथी के साथ्साथ प्राकृतिक और योग का मैनेज्मेन्ट करने से और इस तरह काम्बीनेशन / इन्टीग्रेटेद इलाज करने से सभी तरह की बीमारियो मे अवश्य लाभ होता है /इस रोगी को भी आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक और एलोपैथिक और यूनानी दवाये लिखी गयी है / मरीज को १२० दिन बाद दुबारा आकर दिखने के लिये कहा गया है /

इन्टीग्रेटेद या काम्बीनेशन इलाज देने की वजह यह है कि बीमारी के समीकरण जिस तरह से बन जाते है उनमे एक बाधा यह आती है कि जिस सिस्टम से आप इलाज करते है हो सकता है कि उस सिस्टम मे इलाज के लिये मुहैया दवाये न हों या बेहतर और अच्छी दवा न हो और यह समभावना हो सकती है कि  दूसरे सिस्टम मे उस समीकरण की बेहतर और उच्च कोटि की दवाये और औषधियां हों / उदाहरण के लिये गुर्दे की पथरी के इलाज के  लिये  HOMOEPATHIC  दवाये बेहतर काम करती है और पथरी को धीरे धीरे मेल्ट करके दर्द तथा दूसरे लक्षणो को शान्त करते हुये पतह्री को गलाकर निकाल देती है / इसमे कुछ समय लग सकता है लेकिन इस बढते समय को अगर कम करना है तो इसके साथ मे आयुर्वेद की दवाओ का उपयोग अगर करते है तो बीमारी ठीक होने का समय काफि कम हो जाता है यानी अगर गुर्दे की पथरी का इलाज होम्योपैथी के साथ्साथ आयुर्वेद दवओ का भी उपयोग करते है तो गुर्दे की पथरी शीघ्रता से ठीक होती है और अगर इसके साथ्साथ प्राकृतिक चिकित्सा का खान पान अपनाते है तो बीमारी ठीक होने मे कुछ समय घट जाता है /

यही कारण है कि हमारे यहा आने वाले सभी मरीजो को आवश्यकता पड़ने पर काम्बीनेशन अथवा इन्टीग्रेटेद इलाज भी देने की ब्यवस्था है /

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